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सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी दंगों के UAPA मामले में 2 आरोपियों की डिफ़ॉल्ट ज़मानत रद्द की, जांच पर हाईकोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणियों को नामंज़ूर किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 2024 के हल्द्वानी दंगों से जुड़े मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दो आरोपियों को दी गई डिफ़ॉल्ट ज़मानत रद्द की।उत्तराखंड राज्य द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आरोपी जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को दी गई ज़मानत रद्द की और उन्हें दो हफ़्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने पाया कि आरोपी जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाने और ज़मानत अर्जी खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेशों को चुनौती देने में तत्पर नहीं थे।...
हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ 2 याचिकाएं दायर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल मस्जिद कमेटी के गुटों से विवाद सुलझाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संभल मस्जिद कमेटी के विरोधी गुटों से अपना अंदरूनी विवाद सुलझाने को कहा। कोर्ट ने पाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक ही फैसले के खिलाफ अलग-अलग वकीलों के ज़रिए दो स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की गईं।कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,"बोर्ड को प्रस्ताव पारित करने दीजिए। हम आपकी दरगाह के मामलों में दखल नहीं देना चाहते। यह आप लोगों के बीच का मामला है। हम इसमें शामिल नहीं होना चाहते। आप लोग बैठकर इसे आपस में सुलझा लीजिए। हमारे लिए इस मामले में पड़ना काफी शर्मनाक है।" जस्टिस...
AI से बने फर्जी फ़ैसलों का इस्तेमाल: सुप्रीम कोर्ट ने BCI से इस मुद्दे की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) से कहा कि वह एक एक्सपर्ट कमेटी बनाए, जिसमें इस क्षेत्र के विशेषज्ञ भी शामिल हों, ताकि कोर्ट की कार्यवाही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से पैदा होने वाले मुद्दों की जांच की जा सके। यह मामला तब सामने आया, जब ट्रायल कोर्ट ने एक मुक़दमेबाज़ द्वारा बताए गए ऐसे फ़ैसलों पर भरोसा कर लिया, जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं था।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। साथ ही यह भी साफ़ किया कि...
केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी
एक अहम घटनाक्रम में केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को छोड़कर) से बढ़ाकर 38 (CJI को छोड़कर) करने के लिए एक बिल पेश करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी।यह बिल 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन बिल, 2026', सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 में ये संशोधन करेगा। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 (CJI को छोड़कर) की गई थी।यह प्रस्तावित कदम लंबित मामलों को देखते हुए उठाया जा रहा है। इस साल चार से ज़्यादा जजों के...
सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं को समाज से बाहर करने पर उठाया सवाल
सबरीमाला मामले की सुनवाई के 11वें दिन सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पारसी लोगों द्वारा अपनाई जाने वाली यह प्रथा—जिसमें किसी पारसी महिला को अगर वह अपने धर्म के बाहर शादी करती है तो अग्नि मंदिर (अगीआरी) में प्रवेश करने से रोक दिया जाता है—प्रथम दृष्टया समाज से बाहर करना है, जो पूरी तरह से लिंग-आधारित और भेदभावपूर्ण है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने ये टिप्पणियां सीनियर वकील डेरियस जे. खंबाटा की दलीलों के दौरान कीं। खंबाटा उन याचिकाओं के समूह में याचिकाकर्ता गुलरुख गुप्ता का प्रतिनिधित्व...
NEET- PG : सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG कट-ऑफ से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए संस्थागत व्यवस्था की मांग की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को NEET-PG में क्वालिफ़ाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल कम करने से पैदा होने वाली बार-बार की समस्याओं को सुलझाने के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने की बात कही। कोर्ट ने कहा कि यह समस्या हर साल आती है और इसके लिए एक व्यवस्थित समाधान की ज़रूरत है।कोर्ट ने कहा,"यह हर साल हो रहा है कि एकेडमिक सेशन चलते रहते हैं, काउंसलिंग जारी रहती है और युवाओं को बहुत परेशानी होती है, जबकि बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं। शायद इस सिस्टम में कुछ बदलाव करने की ज़रूरत है। इस तरीके को संस्थागत रूप...
राजस्थान APO परीक्षा 2024: आवेदन के समय लॉ डिग्री न होने पर उम्मीदवार अयोग्य—सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्थान असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO) परीक्षा 2024 के उन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया, जिनके पास आवेदन जमा करने की तिथि पर आवश्यक विधि (लॉ) डिग्री नहीं थी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने Rajasthan Public Service Commission (राजस्थान लोक सेवा आयोग) की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।क्या था मामला?7 मार्च...
'गोली मारो' स्पीच, 'कोरोना जिहाद' पोस्ट, 'UPSC जिहाद' शो, धर्म संसद: सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद किए गए हेट स्पीच मामलों पर एक नज़र
एक लंबे समय से प्रतीक्षित फैसले को प्रस्तुत करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विभिन्न कथित घृणास्पद भाषण अपराधों के खिलाफ राहत की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह को बंद कर दिया।हालांकि इसने घृणास्पद भाषणों/अपराधों से संबंधित पहले के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक निरंतर परमादेश जारी करने से इनकार कर दिया, अदालत ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने के लिए मजिस्ट्रेट के लिए पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ और...
'दोनों पक्ष 4 साल तक खुशी-खुशी साथ रहे, बाद में रिश्ते में खटास आ गई': सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर रेप का मामला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शादी के झूठे वादे पर रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने पाया कि यह रिश्ता कई सालों तक आपसी सहमति से बना था और शादी के झूठे वादे के कारण शुरू नहीं हुआ, क्योंकि जब यह रिश्ता शुरू हुआ था, तब दोनों पक्ष पहले से ही किसी और से शादीशुदा थे।कोर्ट ने कहा,"तथ्यों को देखते हुए दोनों पक्षकारों को पता था कि वे पहले से ही किसी और से शादीशुदा हैं। यह भी माना हुआ तथ्य है कि तलाक मिलने से पहले ही, शिकायतकर्ता (महिला) ने शादी के लिए विज्ञापन दे...
'CrPC की धारा 156(3) और 200 के लिए मापदंड अलग-अलग': दूसरी बार धारा 156(3) के तहत याचिका की अनुमति देने वाला आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 156(3) और 200 को लागू करने वाले मापदंड अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें मजिस्ट्रेट के उस निर्देश को सही ठहराया गया था कि CrPC की धारा 156(3) के तहत दूसरी अर्जी पर FIR दर्ज की जाए।CrPC की धारा 156(3) के तहत यह दूसरी अर्जी शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई उस छूट (liberty) के आधार पर दायर की थी, जिसमें उसे पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ CrPC की धारा 200 के तहत...
हेट स्पीच मामलों में स्वतः FIR न दर्ज करना अवमानना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हेट स्पीच के मामलों में पुलिस द्वारा स्वतः (suo motu) FIR दर्ज न करना अपने-आप में अदालत की अवमानना नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता ने पहले पुलिस या संबंधित प्राधिकरण के पास शिकायत ही नहीं की, तो अवमानना कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी शिकायत या साक्ष्य के यह मान लेना कि पुलिस ने जानबूझकर आदेशों की अवहेलना की है, उचित नहीं है।पीठ ने कहा कि 21 अक्टूबर...
“आपकी PIL से क्या फायदा हुआ?” : सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की मांग करने वाली NGO से पूछा
Indian Young Lawyers' Association द्वारा दायर सबरीमाला याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की पीठ ने कड़ी टिप्पणियां कीं। यह मामला सबरीमाला मंदिर में 10–50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि एक संगठन पूजा के अधिकार का दावा कैसे कर सकता है और यह PIL क्यों दायर की गई। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि गैर-आस्थावानों द्वारा धार्मिक परंपराओं को चुनौती देना गंभीर मुद्दा है।कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल अखबारों की खबरों के...
सबरीमाला केस: 'नैतिकता' की व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट में बहस, संवैधानिक बनाम सामाजिक नैतिकता पर मतभेद
सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सबरीमाला संदर्भ मामले में यह अहम सवाल उठा कि अनुच्छेद 25 और 26 में 'नैतिकता' शब्द की व्याख्या कैसे की जाए, जो धार्मिक स्वतंत्रता पर एक सीमा के रूप में लागू होता है।केंद्र सरकार और पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि “संवैधानिक नैतिकता” का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि यह व्यक्तिपरक है, और “सार्वजनिक नैतिकता” ही मान्य होनी चाहिए, जो संसद के माध्यम से लोगों की इच्छा को दर्शाती है।वहीं, प्रतिवादियों की ओर से सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि...
'तटस्थ रहने वालों' को तीसरे पक्ष के अधिकार पक्के हो जाने के बाद वरिष्ठता विवाद उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मई) को कहा कि 'तटस्थ रहने वालों' (fence-sitters)—यानी ऐसे लोग जो किसी मुकदमे को बिना दखल दिए किनारे से देखते रहते हैं—को मामला खत्म हो जाने के बाद वरिष्ठता और उसके आधार पर मिलने वाले प्रमोशन से जुड़े विवाद उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,"यह एक स्थापित कानून है कि तटस्थ रहने वालों को मामला खत्म हो जाने के बाद वरिष्ठता और उसके आधार पर मिलने वाले प्रमोशन से जुड़ा कोई विवाद उठाने या किसी आदेश की वैधता को...
मृत वादी के कानूनी प्रतिनिधियों को 'मुकदमा करने के अधिकार' का हस्तांतरण: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किए सिद्धांत
हाल के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने किसी पक्ष की मृत्यु के बाद उसके कानूनी प्रतिनिधियों को मुकदमा करने का अधिकार जारी रहने से जुड़े सिद्धांतों को संक्षेप में बताया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक कहावत 'एक्टियो पर्सनैलिस मोरिटुर कम पर्सोना' (व्यक्तिगत कार्रवाई व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो जाती है) भारत में पूर्ण नहीं है। इसे 'घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855', 'कानूनी प्रतिनिधियों के मुकदमे का अधिनियम, 1855' और 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925' जैसे कानूनों द्वारा संशोधित किया गया।किसी...
पंचकूला ज़मीन आवंटन मामले में भूपिंदर हुड्डा को मिली क्लीन चिट के खिलाफ CBI की चुनौती पर नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL)—जो कांग्रेस का अख़बार 'नेशनल हेराल्ड' प्रकाशित करता है—को पंचकूला में AJL को कथित तौर पर ज़मीन आवंटन के मामले में क्लीन चिट दी गई।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू CBI की ओर से जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र...
आधार एनरोलमेंट सिर्फ़ 6 साल से कम उम्र के बच्चों तक सीमित करने की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से संपर्क करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) को निपटा दिया, जिसमें मांग की गई कि नागरिकों को आधार कार्ड सिर्फ़ 6 साल की उम्र तक ही जारी किए जाएं। इस तय सीमा के बाद उन्हें सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट/तहसीलदार के दफ़्तर से आधार बनवाने की अनुमति दी जाए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने राय दी कि उठाए गए मुद्दे विधायी दायरे में आते हैं। आदेश दिया कि इस रिट याचिका (जो PIL के तौर पर दायर की गई) को संबंधित अधिकारियों के सामने एक अभ्यावेदन (Representation) के तौर पर माना...
'थिंक एंड लर्न' के CIRP में मूल CoC बहाल: NCLT के आदेश के खिलाफ बायजू रवींद्रन की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल, चेन्नई (NCLAT) के आदेश में दखल देने से इनकार किया। इस आदेश में 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' (वह कंपनी जो एड-टेक कंपनी 'बायजू' चलाती थी) से जुड़ी दिवाला समाधान प्रक्रिया में मूल 'कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स' (CoC) को बहाल किया गया, जिसमें आदित्य बिड़ला और 'ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC' को वित्तीय लेनदार के तौर पर शामिल किया गया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने बायजू रवींद्रन द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि IRP (दिवाला समाधान...
एसिड हमले के पीड़ितों की परिभाषा का दायरा बढ़ाया: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए कहा कि जबरन एसिड पिलाए गए लोग और वे पीड़ित जिनके शरीर पर बाहरी विकृति नहीं दिखती लेकिन आंतरिक चोटें हैं, उन्हें भी 'एसिड अटैक पीड़ित' माना जाएगा।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह व्याख्या वर्ष 2016 से प्रभावी मानी जाएगी।कानून में कमी को किया दूरअदालत ने कहा कि Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016) में 'एसिड अटैक पीड़ित' की...
अगस्ता वेस्टलैंड केस: प्रत्यर्पण संधि के प्रावधान को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आज अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी गई है, जो प्रत्यर्पण के बाद संबंधित अपराधों में भी अभियोजन की अनुमति देता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता की दलीलमिशेल की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए गलती की कि...




















