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IBC प्रक्रिया, डिक्री के निष्पादन या वसूली की कार्यवाही का विकल्प नहीं: सुप्रीम कोर्ट
IBC प्रक्रिया, डिक्री के निष्पादन या वसूली की कार्यवाही का विकल्प नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (23 अप्रैल) को फिर दोहराया कि कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) का इस्तेमाल, पैसे से जुड़ी किसी डिक्री को लागू करने के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब कंपनी आर्थिक रूप से सक्षम हो और काम कर रही हो।जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच कॉर्पोरेट देनदार द्वारा NCLAT के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देनदार के खिलाफ CIRP शुरू करने की अनुमति दी गई।विवाद का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या कोई डिक्री-धारक लेनदार...

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ 35 साल की देरी के आधार पर पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ मुक़दमा रद्द करने का दिया प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ 35 साल की देरी के आधार पर पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ मुक़दमा रद्द करने का दिया प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई, जब उसने मुक़दमे की कार्यवाही में 35 साल की देरी पर ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ़ देरी के आधार पर ही अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्यवाही रद्द करने के पक्ष में है, लेकिन कोई भी आदेश देने से पहले वह राज्य के अधिकारियों की बात सुनना चाहेगा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और पुलिस अधिकारी की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी...

सरकारी अनुदान वाली संपत्तियों पर किराया कानून लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ बेदखली आदेश रद्द किया
सरकारी अनुदान वाली संपत्तियों पर किराया कानून लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ बेदखली आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि Government Grants Act, 1895 के तहत दी गई संपत्तियों पर किराया नियंत्रण कानून लागू नहीं होते और ऐसे मामलों में पक्षकारों के अधिकार केवल लीज (अनुदान) की शर्तों से तय होंगे। इसी आधार पर अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारत सरकार को किराया न चुकाने के कारण बेदखल करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि लीज डीड में किराया न देने पर बेदखली का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो...

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से जानकारी स्वीकार नहीं की जा सकती: जस्टिस नागरत्ना
'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से जानकारी स्वीकार नहीं की जा सकती: जस्टिस नागरत्ना

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मामले की सुनवाई के आठवें दिन हल्के-फुल्के अंदाज में एक अहम टिप्पणी सामने आई। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि “व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी” से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी उस समय आई, जब सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने दलील दी कि ज्ञान और जानकारी किसी भी स्रोत से आए, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। वे शशि थरूर के एक लेख का हवाला दे रहे थे, जिसमें धार्मिक मामलों में न्यायिक संयम की बात कही गई थी।कोर्ट में क्या हुआ?चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी लेख...

अगर घायल चश्मदीद की गवाही बहुत मज़बूत हो तो स्वतंत्र गवाह की जांच न होना केस के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अगर घायल चश्मदीद की गवाही बहुत मज़बूत हो तो स्वतंत्र गवाह की जांच न होना केस के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हत्या के मामले में सज़ा को सही ठहराते हुए कहा कि अगर घायल चश्मदीद की अकेली गवाही भरोसेमंद, विश्वसनीय और एक जैसी हो तो किसी स्वतंत्र गवाह की जाँच न होना अभियोजन पक्ष के केस के लिए घातक साबित नहीं होगा।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने टिप्पणी की,"...सिर्फ़ एक चश्मदीद की गवाही के आधार पर भी सज़ा देना जायज़ है। आख़िरकार, रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर मापा जाना चाहिए, न कि उनकी संख्या के आधार पर।" बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए...

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर छत्तीसगढ़ सरकार फटकार, कोरबा एसपी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर छत्तीसगढ़ सरकार फटकार, कोरबा एसपी को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश का पालन न करने पर छत्तीसगढ़ सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “स्पष्ट और जानबूझकर किया गया उल्लंघन” करार दिया है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कोरबा के पुलिस अधीक्षक (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।मामला क्या है?यह मामला एक आपराधिक केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति...

शैक्षणिक संस्थानों में नशीली दवाओं की तस्करी करते स्टूडेंट्स: सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
'शैक्षणिक संस्थानों में नशीली दवाओं की तस्करी करते स्टूडेंट्स': सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

21 वर्षीय लॉ स्टूडेंट से जुड़े मादक पदार्थों के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में नशीली दवाओं की तस्करी और दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की।कोर्ट ने अफसोस जताया कि नशीली दवाओं के तस्कर अक्सर स्टूडेंट को उपभोक्ता और एजेंट दोनों के रूप में निशाना बनाते हैं, जिससे स्कूल और कॉलेज अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क के लिए लक्षित क्षेत्र बन जाते हैं।जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ आरोपी स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जब कोर्ट ने...

सुप्रीम कोर्ट का इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध- लंबे समय से लंबित सर्विस विवादों का प्राथमिकता के आधार पर करें निपटारा
सुप्रीम कोर्ट का इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध- लंबे समय से लंबित सर्विस विवादों का प्राथमिकता के आधार पर करें निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह लंबे समय से लंबित सेवा विवादों की पहचान करें और उनके शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कर्मचारी अक्सर दशकों तक सेवा मामलों को लेकर मुकदमा लड़ते रहते हैं। साथ ही कभी-कभी तो वे अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच जाते हैं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्देश तब जारी किया, जब वह एक सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर...

PM Modi के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 18 अप्रैल के भाषण के ज़रिए MCC के कथित उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग
PM Modi के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 18 अप्रैल के भाषण के ज़रिए MCC के कथित उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई कि वह 18 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीवी पर दिए गए भाषण के खिलाफ कार्रवाई करे। यह भाषण संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में खारिज होने के ठीक एक दिन बाद दिया गया।याचिका में कहा गया,"यह प्रसारण चुनावी फायदे के लिए सरकारी तंत्र और सरकारी मीडिया का दुरुपयोग है। इसमें विपक्षी राजनीतिक दलों को नाम लेकर निशाना बनाया गया और यह संविधान या किसी भी कानून के तहत बिना किसी...

Sabarimala Reference | रिट में किसी फ़ैसले को चुनौती कैसे दी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा प्रथा के ख़िलाफ़ याचिका पर उठाए सवाल
Sabarimala Reference | रिट में किसी फ़ैसले को चुनौती कैसे दी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा प्रथा के ख़िलाफ़ याचिका पर उठाए सवाल

सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में 'बहिष्कार' (Excommunication) की प्रथा को चुनौती देने के लिए दायर की गई।यह देखते हुए कि यह रिट याचिका असल में 1962 के फ़ैसले 'सरदार सैयदना ताहेर सैफ़ुद्दीन साहब बनाम बॉम्बे राज्य' को चुनौती दे रही है, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने पूछा कि किसी फ़ैसले को चुनौती देने के लिए रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है।1962 के उस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने समुदाय के प्रमुख द्वारा दायर एक...

बंगाल में असाधारण स्थिति: जजों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने ED से पूछा- आप CM के खिलाफ सामान्य कानूनी उपाय कैसे अपना सकती है?
'बंगाल में असाधारण स्थिति': जजों के घेराव पर सुप्रीम कोर्ट ने ED से पूछा- आप CM के खिलाफ सामान्य कानूनी उपाय कैसे अपना सकती है?

हाल की उस घटना का ज़िक्र करते हुए, जिसमें पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को उनकी आधिकारिक SIR ड्यूटी करते समय घेर लिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य के इस तर्क पर सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सीएम ममता बनर्जी द्वारा I-PAC दफ़्तर में उसकी तलाशी में कथित बाधा डालने के मामले में, सामान्य कानूनी उपायों का ही सहारा लेना चाहिए।जस्टिस मिश्रा ने कहा,“यह एक असाधारण स्थिति है। दूसरी बेंच के सामने SIR पर बहस चल रही है। हमने ऐसी स्थिति देखी है, जिसमें कई न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर...

S. 225 BNSS | मजिस्ट्रेट को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले जांच का आदेश देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
S. 225 BNSS | मजिस्ट्रेट को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले जांच का आदेश देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि मजिस्ट्रेट को अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 225 के तहत जांच करनी चाहिए या जांच का निर्देश देना चाहिए।दूसरे शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति पर किसी आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया और वह अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है तो अदालत ने कहा कि मैजिस्ट्रेट धारा 225 BNSS के आदेश का पालन किए बिना तुरंत समन जारी नहीं कर सकता।बेंच ने कहा,"...मजिस्ट्रेट के लिए यह...

2017 स्कूल हेडमिस्ट्रेस रेप-मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की बरी करने के खिलाफ अपील खारिज की
2017 स्कूल हेडमिस्ट्रेस रेप-मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की बरी करने के खिलाफ अपील खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में असम सरकार द्वारा गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज की, जिसमें 2017 के एक स्कूल हेडमिस्ट्रेस के रेप और मर्डर केस में आरोपी को बरी किया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, जिसमें आरोपी मोइनुल हक को मर्डर और रेप के आरोपों से बरी करने के फैसले को सही ठहराया गया। बेंच ने सबूत मिटाने के आरोप में हाई कोर्ट द्वारा आरोपी को दी गई सज़ा भी रद्द की।बरामदगी और पहचान में खामियांयह मामला असम में एक स्कूल...

Order 7 Rule 11 CPC | मूल्यांकन या कोर्ट फीस में कमी के आधार पर वाद-पत्र को बिना सुधार का मौका दिए खारिज नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Order 7 Rule 11 CPC | मूल्यांकन या कोर्ट फीस में कमी के आधार पर वाद-पत्र को बिना सुधार का मौका दिए खारिज नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया कि किसी वाद के मूल्यांकन में कमी या कोर्ट फीस के भुगतान में कमी के आधार पर किसी वादी को CPC के आदेश 7 नियम 11 के तहत अपने आप ही खारिज (Non-Suited) नहीं किया जा सकता। चूंकि ये दोनों कमियां सुधारी जा सकने वाली हैं, इसलिए वादी को सुधार का मौका दिया जाना चाहिए। साथ ही वाद को तभी खारिज किया जाना चाहिए, जब वह इस मौके का पालन न करे।कोर्ट ने कहा,"आदेश VII नियम 11(b) या (c) के तहत किसी वाद-पत्र खारिज करना, केवल कम मूल्यांकन या कोर्ट फीस में कमी पाए जाने पर अपने...

मुख्यमंत्री का ED जांच में हस्तक्षेप केंद्र बनाम राज्य विवाद नहीं: ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्यमंत्री का ED जांच में हस्तक्षेप 'केंद्र बनाम राज्य विवाद' नहीं: ममता बनर्जी मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में यदि मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करते हैं, तो उसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है।मामले का विवरणयह मामला आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय पर ईडी की छापेमारी...

सबरीमला सुनवाई: धार्मिक प्रथाओं में राज्य हस्तक्षेप पर सार्वभौमिक नियम बनाना मुश्किल—सुप्रीम कोर्ट
सबरीमला सुनवाई: धार्मिक प्रथाओं में राज्य हस्तक्षेप पर सार्वभौमिक नियम बनाना मुश्किल—सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मामले की सुनवाई के सातवें दिन कहा कि धार्मिक प्रथाओं में राज्य कब हस्तक्षेप कर सकता है, इस पर कोई सार्वभौमिक या भविष्य के लिए लागू होने वाले दिशा-निर्देश तय करना संभव नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निर्णय हर केस के तथ्यों पर निर्भर करेगा।चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9-जजों की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत राज्य की शक्तियों के दायरे पर विस्तृत सुनवाई की। इस पीठ में जस्टिस बी. वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुन्द्रेश, जस्टिस अहसानुद्दीन...

जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और तथ्य छुपाकर लिया गया प्रोबेट रद्द होगा: सुप्रीम कोर्ट
जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और तथ्य छुपाकर लिया गया प्रोबेट रद्द होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि किसी वसीयत (Will) का प्रोबेट जरूरी पक्षकारों को शामिल किए बिना और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर प्राप्त किया गया हो, तो उसे रद्द (revoked) किया जा सकता है।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का मृतक की संपत्ति में थोड़ा भी हित (interest) हो, उसे प्रोबेट कार्यवाही में सुना जाना जरूरी है।मामले का विवरणमामला कोयंबटूर की एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसे एक व्यक्ति ने 1976 में अपनी बेटी...