बीमित वाहनों को दुर्घटनाओं में 'प्लांट' कर फर्जी MACT दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

Praveen Mishra

11 Feb 2026 5:14 PM IST

  • बीमित वाहनों को दुर्घटनाओं में प्लांट कर फर्जी MACT दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कथित फर्जी मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों के एक “व्यापक रैकेट” पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत के समक्ष आरोप है कि कई हितधारक मिलकर बीमित (इंश्योर्ड) वाहनों का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से दुर्घटनाएं दर्शाने और मुआवजा दावे गढ़ने के लिए कर रहे हैं।

    जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ Oriental Insurance Company Limited द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उड़ीसा हाईकोर्ट के मुआवजा आदेश को चुनौती दी गई थी। बीमा कंपनी का दावा था कि संबंधित वाहन पहले भी चार अन्य दुर्घटना मामलों में “आरोपी वाहन” के रूप में दिखाया जा चुका है और उसे जानबूझकर दावों में शामिल किया गया।

    बीमा कंपनी के अनुसार, जिस वाहन का बीमा वैध होता है, उसे बार-बार दुर्घटना मामलों में “प्लांट” किया जाता है, ताकि मुआवजा एक सक्षम बीमाकर्ता से वसूल किया जा सके।

    राज्य की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

    मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले राज्य प्राधिकारियों को व्यापक तथ्य-खोज जांच करने का निर्देश दिया था। अनुपालन रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित वाहन चार अन्य दुर्घटना दावों में भी शामिल रहा है, जिनकी जांच जारी है। हालांकि, मौजूदा मामले में अदालत ने पाया कि वाहन वास्तव में दुर्घटना में शामिल था, फिर भी घटनाओं का पैटर्न गंभीर संदेह पैदा करता है।

    ओडिशा के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जांच में “व्यापक रैकेट” के संकेत मिले हैं, जिसमें “सभी हितधारकों की संलिप्तता” की आशंका है। कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर जांच की आवश्यकता हो सकती है।

    देशव्यापी प्रभाव के संकेत

    अदालत ने राज्य को आगे की जांच और पूछताछ की अनुमति दी और कहा कि जांच से सामने आए तथ्य “बेहद चौंकाने वाले” हैं और स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

    खंडपीठ ने यह भी संकेत दिया कि यह पैटर्न केवल ओडिशा तक सीमित नहीं हो सकता। अदालत ने बीमा कंपनी के वकील से देश में वाहन बीमा, मेडिकल बीमा, जीवन बीमा, फसल बीमा, अग्नि बीमा, समुद्री बीमा आदि क्षेत्रों में कार्यरत सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों की सूची प्रस्तुत करने को कहा।

    मामले को 18 मार्च 2026 को “For Direction” शीर्षक के तहत सूचीबद्ध किया गया है। अदालत व्यापक दिशानिर्देश या प्रणालीगत आदेश जारी करने पर भी विचार कर सकती है।

    अदालत की सराहना

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की सराहना की, जिन्होंने अदालत को इस व्यापक मुद्दे पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, ओडिशा के महाधिवक्ता की भी प्रशंसा की गई, जिन्होंने अदालत के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने में व्यक्तिगत रुचि दिखाई।

    यह मामला अब संभावित रूप से देशभर में फर्जी बीमा दावों पर सख्त निगरानी और व्यापक जांच का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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