दिल्ली दंगा 'बड़ी साजिश' मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Praveen Mishra

11 Feb 2026 6:37 PM IST

  • दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 फरवरी) को दिल्ली दंगों की कथित 'बड़ी साजिश' मामले के आरोपी तसलीम अहमद की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया। अहमद ने Delhi High Court के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। विशेष अनुमति याचिका (SLP) में 2 सितंबर 2025 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने ट्रायल कोर्ट द्वारा तीसरी नियमित जमानत अर्जी खारिज किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।

    मामला क्या है?

    अहमद को FIR संख्या 59/2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धाराएं 13/16/17/18, भारतीय दंड संहिता, 1860 की कई गंभीर धाराएं (जैसे 302, 307, 120B, 153A, 124A आदि), सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 तथा शस्त्र अधिनियम, 1959 की धाराएं 25/27 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

    अहमद ने पहली बार जून 2021 में ट्रायल कोर्ट में नियमित जमानत की अर्जी दायर की थी, यह कहते हुए कि सह-आरोपी देवांगना कालिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को 2021 में जमानत दी जा चुकी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उन आदेशों को नज़ीर (precedent) के रूप में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि वे UAPA की व्याख्या से संबंधित थे, जिस पर NIA ने आपत्ति जताई थी।

    ट्रायल कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद अहमद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसने 2 मई 2023 के आदेश में कहा था कि वे समानता (parity) का दावा कर सकते हैं, पर उन्हें अपना मामला स्थापित करना होगा।

    दूसरी जमानत अर्जी 22 अप्रैल 2024 को खारिज हुई। इसके बाद 28 अक्टूबर 2024 को उन्होंने फिर से अर्जी दाखिल की, यह कहते हुए कि वे चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। यह अर्जी भी खारिज होने पर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

    हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस से पूछा था कि 2020 के दंगों को पांच साल बीत जाने के बावजूद किसी आरोपी को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है।

    उल्लेखनीय है कि अहमद एक अन्य FIR संख्या 48/2020 में भी आरोपी हैं, जिसमें उन्हें नियमित जमानत मिल चुकी है।

    मामले की आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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