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स्टूडेंट को डांटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में शिक्षक को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक द्वारा डांटने के बाद स्टूडेंट द्वारा आत्महत्या कर लेने के बाद आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप का सामने कर रहे शिक्षक को बरी कर दिया।कोर्ट ने कहा कि आरोपी को कोई भी गलत मंशा नहीं दी जा सकती, क्योंकि “कोई भी सामान्य व्यक्ति यह कल्पना नहीं कर सकता कि स्टूडेंट की शिकायत के आधार पर डांटटने के कारण वह इतनी बड़ी त्रासदी हो सकती है, क्योंकि डांटने के कारण स्टूडेंट ने खुदकुशी कर ली।”जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट का वह...
तलाकशुदा पत्नी अविवाहित रहने पर भी भरण-पोषण की हकदार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में पत्नी को दिए जाने वाले स्थायी गुजारा भत्ते को बढ़ाकर ₹50,000 प्रति माह कर दिया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह विवाह के दौरान अपने जीवन स्तर के साथ रह सके और जो उसके भविष्य को उचित रूप से सुरक्षित करे। यह गुजारा भत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पहले दी गई राशि से लगभग दोगुना है।कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता-पत्नी अविवाहित रही और स्वतंत्र रूप से रह रही है। कोर्ट ने आगे कहा कि "इसलिए वह उस स्तर के भरण-पोषण की हकदार है, जो विवाह के दौरान उसके जीवन स्तर को दर्शाता है और...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (26 मई, 2025 से 30 मई, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर अभियोजन पक्ष के लिए मकसद साबित करने में विफलता घातक नहीं : सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (30 मई) को यह देखते हुए हत्या के आरोपी व्यक्ति की दोषसिद्धि बरकरार रखा कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, जहां उद्देश्य के सबूत को सख्ती से साबित...
फाज़िल और कामिल मदरसा छात्रों को डिग्री देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश राज्य से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय को मान्यता प्राप्त मदरसों के कामिल (ग्रेजुएट) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएट) छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने, परिणाम घोषित करने और डिग्री देने की अनुमति देने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस एएस चंदुकर की खंडपीठ ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया और हाजी दीवान साहेब जामा की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें...
किसी विशेष दस्तावेज की आपूर्ति न करने के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को तब तक चुनौती नहीं दी जा सकती जब तक कि गंभीर पूर्वाग्रह न दिखाया गया हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी विशेष दस्तावेज की आपूर्ति न किए जाने के कारण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के आधार पर अनुशासनात्मक कार्यवाही को तब तक चुनौती नहीं दी जा सकती, जब तक कि यह न दर्शाया जाए कि कर्मचारी को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है।इस मामले में, कर्मचारी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की आपूर्ति न किए जाने के आधार पर बर्खास्तगी को चुनौती दी। न्यायालय ने यह कहते हुए तर्क को खारिज कर दिया कि कोई गंभीर नुकसान पहुँचाया जाना नहीं दर्शाया गया है।जस्टिस ए.एस. ओक और जस्टिस...
हर संकट में राष्ट्र को एकजुट रखने का श्रेय संविधान को जाता है: सीजेआई बीआर गवई
प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट्स चैंबर ब्लॉक और मल्टीलेवल पार्किंग के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने कहा कि राष्ट्र हर संकट में एकजुट रहा है और इसका श्रेय भारत के संविधान को जाता है।सीजेआई ने इस संदर्भ में डॉ. बीआर अंबेडकर की उस आलोचना का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि संविधान या तो बहुत संघीय है या बहुत एकात्मक।सीजेआई ने अंबेडकर के शब्दों को याद किया:"संविधान न तो पूरी तरह संघीय है और न ही पूरी तरह एकात्मक। लेकिन एक बात मैं आपको आश्वस्त कर...
POSH Act : राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने LCC, जिला अधिकारी आदि के गठन के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रभावी अनुपालन के लिए 3 दिसंबर, 2024 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन की मांग करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की एक श्रृंखला के अनुसरण में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अनुपालन का अपना हलफनामा दाखिल कर दिया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ इस मामले में आदेश पारित कर रही है।जिला अधिकारियों की नियुक्तिएमिक्स क्यूरी और एडवोकेट पद्मप्रिया द्वारा दायर नवीनतम स्टेटस रिपोर्ट के...
बायजू का दिवालियापन: सुप्रीम कोर्ट ने CIRP वापसी के लिए COC की मंजूरी अनिवार्य करने के NCLAT के खिलाफ रिजू रविंद्रन की याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (व्यापारिक नाम बायजू) के कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) को वापस लेने के आवेदन को लेनदारों की समिति के 90 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी की आवश्यकता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने कहा कि अंतरिम राहत के लिए प्रार्थना पर सुनवाई की अगली तारीख 21 जुलाई 2025 को विचार किया जाएगा। यह अपील थिंक एंड लर्न...
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी गैंगस्टर एक्ट पर राज्य के दिशा-निर्देशों को किया स्वीकार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 (UP Gangster Act) के लागू होने के संबंध में यूपी राज्य द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों को अपनाया।गोरख नाथ मिश्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के बाद राज्य द्वारा ये दिशा-निर्देश तैयार किए गए।SHUATS यूनिवर्सिटी के निदेशक विनोद बिहारी लाल से संबंधित एक अन्य मामले पर विचार करते हुए न्यायालय ने इन दिशा-निर्देशों को लागू करने का निर्णय लिया।न्यायालय ने कहा,"पूर्वगामी के आलोक में हम...
परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर अभियोजन पक्ष के लिए मकसद साबित करने में विफलता घातक नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (30 मई) को यह देखते हुए हत्या के आरोपी व्यक्ति की दोषसिद्धि बरकरार रखा कि अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, जहां उद्देश्य के सबूत को सख्ती से साबित करने की आवश्यकता नहीं है। अभियोजन पक्ष के मामले को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि उद्देश्य स्थापित नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि जब मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित होता है तो अभियोजन पक्ष को सभी संदेहों से रहित तथ्य को साबित करने की आवश्यकता नहीं होती है; बल्कि कानून यह मानता है कि किसी...
विचार करेंगे: जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पद में आरक्षण की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार का जवाब
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट में जूनियर कॉस्ट असिस्टेंट के पद के लिए विभिन्न आरक्षित श्रेणियों में भर्ती से संबंधित याचिकाओं पर फैसला करेगा।यह दलील जस्टिस प्रतीक जालान के समक्ष दी गई, जो विभिन्न आरक्षित श्रेणियों, जैसे बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्ति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत पद पर नियुक्ति की मांग करने वाले विभिन्न उम्मीदवारों द्वारा दायर चार याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।भर्ती के लिए विज्ञापन...
25 लाख की बैंक धोखाधड़ी मामले में समझौते के बाद सुप्रीम कोर्ट FIR रद्द की, कहा- अब कोई सार्वजनिक हित नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एन.एस. ज्ञानेश्वरन व अन्य बनाम पुलिस निरीक्षक व अन्य मामले में 25.89 लाख की बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि मामला पूरी तरह सुलझ चुका है और अब ट्रायल जारी रखने का कोई लाभ नहीं होगा।यह मामला विनायक कॉरपोरेशन को स्वीकृत ऋण को धोखाधड़ी से डायवर्ट कर बैंक को 25.89 लाख का नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा था।बैंक की शिकायत पर CBI ने FIR दर्ज कर नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी जिनमें याचिकाकर्ता भी शामिल थे। आरोप आईपीसी की धारा...
सिर्फ 2 महीने में बिना टेंडर के 125 एकड़ जमीन दी गई : सुप्रीम कोर्ट ने UPSIDC को फटकार लगाई, यूपी में जमीन देने के तरीके में सुधार का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम- UPSIDC के उस फैसले को आज बरकरार रखा जिसमें भुगतान में चूक के चलते एक निजी कंपनी को भूमि आवंटन रद्द किया गया था। हालांकि, इसने अपनी आवंटन प्रक्रिया में "गंभीर प्रणालीगत त्रुटियों" के लिए यूपीएसआईडीसी की तीखी आलोचना की, यह देखते हुए कि सार्वजनिक लाभ के उचित मूल्यांकन के बिना केवल दो महीनों के भीतर 125 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने सार्वजनिक न्यास सिद्धांत का संज्ञान लेते हुए इस बात पर जोर...
सरकारी जमीन पर बने दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के खिलाफ अभिभावकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी भूमि पर गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को दिल्ली के शिक्षा निदेशक को नोटिस जारी किया।चीफ़ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ नया समाज पेरेंट्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के दो आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिसमें सरकारी भूमि पर स्थित निजी स्कूलों को शिक्षा निदेशक, दिल्ली सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना अपनी फीस बढ़ाने की अनुमति दी गई...
वैध लीगल नोटिस के आवश्यक तत्वों को सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने (30 मई) एक वैध लीगल नोटिस के आवश्यक तत्वों को रेखांकित किया, जिसमें कहा गया कि एक नोटिस को वैध माने जाने के लिए स्पष्ट रूप से "कानूनी" के रूप में लेबल किया जाना जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि प्राप्तकर्ता (नोटिस प्राप्तकर्ता) को भेजा गया संचार प्रभावी रूप से चूक, संभावित परिणामों और प्रेषक के इरादे का विवरण देता है, तो यह लीगल नोटिस के रूप में योग्य होगा।उदाहरण के लिए, लीगल नोटिस के आवश्यक तत्वों में शामिल होंगे: (1) इसमें तथ्यों का एक स्पष्ट और संक्षिप्त सेट होना चाहिए जो...
ओडिशा PCS की मूल्यांकन में चूक पर सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा के एक उम्मीदवार की उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में ढिलाई बरतने के लिए ओडिशा लोक सेवा आयोग को फटकार लगाई है।संक्षेप में कहें तो यह मामला ओडिशा न्यायिक सेवा परीक्षा-2022 से संबंधित था, जिसमें 12.5 अंकों वाले प्रश्न के उम्मीदवार के उत्तर का मूल्यांकन नहीं किया गया था। जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की और ओडिशा हाईकोर्ट द्वारा आयोग पर लगाए गए एक लाख रुपये के जुर्माने को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि,...
कर्मचारी को रिटायरमेंट की आयु चुनने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी कर्मचारी को अपने रिटायरमेंट की आयु निर्धारित करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है। यह अधिकार राज्य के पास है, जिसे अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत का पालन करते हुए उचित रूप से इसका प्रयोग करना चाहिए।कोर्ट ने कहा,"किसी कर्मचारी को इस बात का कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि वह किस आयु में रिटायर होगा।"जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपीलकर्ता लोकोमोटर-विकलांग इलेक्ट्रीशियन है। उसको 58 वर्ष की आयु में...
'विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश, यह लोकतंत्र पर हमला है': पश्चिम बंगाल चुनाव बाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा से संबंधित दंगा और बलात्कार के प्रयास के मामले में पांच आरोपियों को जमानत देने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया।प्रतिवादी शेख जमीर, शेख नूराई, शेख अशरफ @ एसके राहुल @ असरफ, जयंत डोम और शेख कबीरुल पर शिकायतकर्ता के घर में तोड़फोड़ करने, उसके साथ मारपीट करने और भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार करने वाले आरोपी के संबंध में उसकी पत्नी के साथ बलात्कार करने का प्रयास करने का आरोप है। यह मामला कथित तौर पर 2 मई 2021 को हुई...
बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार, कहा– असम पुलिस ने मां को बांग्लादेश भेजने के लिए हिरासत में लिया
सुप्रीम कोर्ट असम पुलिस द्वारा एक महिला को कथित तौर पर हिरासत में रखने को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट शोएब आलम ने चीफ़ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए जी मसीह की खंडपीठ के समक्ष तत्काल उल्लेख किया। आलम ने जोर देकर कहा कि वर्तमान बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका 26 वर्षीय बेटे यूनुच द्वारा उस महिला की ओर से दायर की गई है, जिसे असम के एक पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है (1) बंदी की रिहाई; (2) बंदी के "पुश...
NEET PG | 'दो शिफ्ट में परीक्षा कराने का कुछ लोग ही कर रहे विरोध': NBE के तर्क पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह जवाब
दो शिफ्ट में NEET PG आयोजित करने के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई वैध शिकायत उठाई जाती है तो यह प्रासंगिक नहीं है कि केवल कुछ ही लोग राहत मांग रहे हैं।जस्टिस संजय कुमार ने यह बयान राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मनिंदर आचार्य के जवाब में दिया, जिन्होंने तर्क दिया कि दो लाख से अधिक उम्मीदवारों में से केवल कुछ ने ही दो शिफ्ट में परीक्षा आयोजित करने के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने एक ही शिफ्ट में परीक्षा आयोजित करने की याचिका का...


















