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गुजरात पुलिस द्वारा नाबालिग से हिरासत में मारपीट और यौन शोषण के आरोप पर SIT/CBI जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है जिसमें गुजरात पुलिस पर 17 वर्षीय किशोर के साथ यौन शोषण और पुलिस हिरासत में यातना देने का आरोप लगाया गया है। याचिका में इस घटना की जांच के लिए एसआईटी या सीबीआई जांच की मांग की गई है।एडवोकेट रोहिन भट्ट ने चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ के सामने उल्लेख किया कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता के नाबालिग भाई के साथ पुलिस द्वारा की गई बर्बरता और यौन शोषण का आरोप है। उन्होंने कहा कि याचिका में एम्स के...
जमानत याचिकाएं 2 महीने में निपटाएं, सालों तक लंबित न रखें: सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्ट्स व ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की हाईकोर्ट्स और ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे जमानत और अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) से जुड़ी याचिकाओं को जल्द से जल्द निपटाएं, अधिमानतः 2 महीने के भीतर।जस्टिस आर. महादेवन ने फैसला सुनाते हुए कहा — “हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतें जमानत और अग्रिम जमानत की याचिकाओं का निपटारा कम समय में करें, अधिमानतः 2 महीने के भीतर। यही निर्देश हमने दिया है।” जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी याचिकाएँ सीधे तौर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता...
कोर्ट परिसर में 'रील' और सेल्फी को लेकर बार की चिंता के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लगाया प्रतिबंध लगाया
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के उद्देश्य से एक परिपत्र जारी किया है जिसमें आधिकारिक उद्देश्यों को छोड़कर अपने उच्च सुरक्षा क्षेत्र में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लगाया गया है।महासचिव द्वारा जारी इस सर्कुलर में तत्काल प्रभाव से सख्त दिशानिर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि वकीलों, वादियों, प्रशिक्षुओं, विधि लिपिकों और मीडिया कर्मियों को उच्च सुरक्षा क्षेत्र के अंदर रील बनाने, तस्वीरें लेने या वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कैमरा, मोबाइल फोन या ट्राइपॉड और...
फाइलें देर रात मिलीं: उमर खालिद और 3 अन्य की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 19 सितंबर तक टली
दिल्ली दंगों के साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद शरजील इमाम, मीरन हैदर और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज (12 सितंबर) 19 सितंबर तक के लिए टाल दी गई।यह मामला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था।जस्टिस अरविंद कुमार ने इन मामलों की सुनवाई करने में असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरक सूची (supplementary list) की फाइलें उन्हें देर रात 2.30 बजे ही मिली हैं, जिससे उन्हें मामलों का अध्ययन करने का समय नहीं मिला।याचिकाकर्ताओं की ओर से...
सुप्रीम कोर्ट में रील्स और वीडियोग्राफी पर लगेगा प्रतिबंध: SCBA ने दिया प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा वीडियोग्राफी, 'रील्स' बनाने और सेल्फी लेने जैसी गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया।SCBA ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की। संगठन ने कहा कि इस तरह की हरकतें न सिर्फ संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं बल्कि यह वकीलों के लिए निर्धारित पेशेवर नैतिकता का भी उल्लंघन है, क्योंकि इसे अप्रत्यक्ष विज्ञापन और प्रचार माना जा सकता है।SCBA ने सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी को लिखे अपने पत्र में...
किसानों पर आपत्तिजनक ट्वीट मामले में कंगना रनौत को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत रद्द करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कंगना रनौत द्वारा 2021 के किसान आंदोलन में शामिल महिला के बारे में उनके ट्वीट के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत को रद्द करने की याचिका पर विचार करने से इनकार किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई जस्टिस मेहता ने याचिकाकर्ता की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।जस्टिस मेहता ने कहा,"आपकी टिप्पणियों के बारे में क्या? यह कोई साधारण री-ट्वीट नहीं था। आपने अपनी टिप्पणियां...
सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले दिव्यांगजनों को सामान्य श्रेणी की सीटें न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अनारक्षित श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले दिव्यांगजनों को सामान्य श्रेणी की सीटें न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की।अदालत ने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के उद्देश्य को विफल कर देगा। न्यायालय ने केंद्र सरकार से यह बताने को कहा कि क्या यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए गए कि सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाले दिव्यांगजनों को सामान्य श्रेणी में समायोजित करके "उन्नति" दी जाए।अदालत ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016...
बार कोटे में जिला जजों की नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारियों की पात्रता पर 23 सितंबर से शुरू होगी सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू करेगी कि क्या बार में 7 साल पूरे करने वाले न्यायिक अधिकारी बार की रिक्ति पर जिला जज के रूप में नियुक्त होने का हकदार है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पांच सदस्यीय पीठ ने सुनवाई का कार्यक्रम तय किया। पीठ ने 25 सितंबर को सुनवाई पूरी करने का प्रस्ताव रखा और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए डेढ़ दिन का समय दिया।सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद...
क्षमा मांगने का अधिकार दोषी को शेष आजीवन कारावास की सजा सुनाने पर ही लागू होता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्षमा मांगने का अधिकार तब भी लागू होता है, जब किसी व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376DA या धारा 376DB जैसे प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जाता है, जो उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की अनिवार्य सजा का प्रावधान करते हैं।यह देखते हुए कि क्षमा मांगने का अधिकार संवैधानिक अधिकार और वैधानिक अधिकार दोनों है, अदालत ने IPC की धारा 376DA की वैधता पर निर्णय देने से इनकार कर दिया, जो 16 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए शेष जीवनकाल के...
बार वैकेंसी से जिला जज नियुक्ति में न्यायिक अधिकारी की पात्रता पर सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज इस अहम मुद्दे पर सुनवाई करेगी कि क्या कोई न्यायिक अधिकारी, जिसने बार में पहले ही 7 साल पूरे कर लिए हों, 'बार वैकेंसी' के तहत जिला जज पद पर नियुक्त होने का हकदार है या नहीं।चीफ़ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ (CJI बी.आर. गवई), जस्टिस एम.एम. सुन्दरश, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एस.सी. शर्मा और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की 5-जजों की खंडपीठ इस मामले पर विचार करेगी। यह खंडपीठ उस आदेश के बाद बनी है जिसमें सीजेआई गवई, जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की 3-जजों की...
सुप्रीम कोर्ट ने फ़ार्मेसी काउंसिल के फ़ार्मा कोर्स के अनुमोदन, एडमिशन और निरीक्षण की समय-सीमा में संशोधन के आवेदन को मंज़ूरी दी
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को भारतीय फ़ार्मेसी परिषद (PCI) द्वारा संस्थानों को अनुमोदन प्रदान करने और विभिन्न फ़ार्मेसी कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रस्तावित संशोधित समय-सीमा को मंज़ूरी दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदूकर की पीठ PCI द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।PCI ने पार्श्वनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट एवं अन्य बनाम अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एवं अन्य मामले में न्यायालय द्वारा 2012 में निर्धारित समय-सीमा में...
सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित संपत्ति की नीलामी के बाद कर्जदार के साथ समझौता करने पर PNB को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को कर्जदार की संपत्ति की नीलामी करने के बाद कर्जदार के साथ समझौता करने पर फटकार लगाई। कोर्ट ने बैंक से कहा कि वह जल्द से जल्द नीतिगत फैसला ले ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने PNB को नीलामी क्रेता को अंतिम बिक्री प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट नीलामी क्रेता द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रहा था, जो बिक्री प्रमाणपत्र जारी करने के बजाय उसके द्वारा जमा की गई बिक्री राशि वापस करने के...
उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिका पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट कल उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जो दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में दायर की गई हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजनिया की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। यह याचिकाएँ दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर के फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसमें उनकी जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी गई थीं। याचिकाकर्ता, जो 2019-2020 में एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शनों के आयोजकों में शामिल छात्र कार्यकर्ता थे, पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम...
सुप्रीम कोर्ट ने पिस्तौल से हमला करने वाले की हत्या के मामले में आरोपी को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तराखंड के एक डॉक्टर की सजा और उम्रकैद को रद्द कर दिया, जिसे एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने डॉक्टर की आत्मरक्षा की दलील को स्वीकार कर लिया।जस्टिस एम.एम. सुनेद्रेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर की खंडपीठ ने दरशन सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में तय किए गए 10 सिद्धांतों का हवाला दिया और कहा कि आत्मरक्षा के अधिकार को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और इसे “सोने की तराजू” में नहीं तौला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आरोपी के...
Sec.420 IPC| फर्जी दस्तावेज़ से कोई लाभ न मिला तो धोखाधड़ी का अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 सितम्बर) को एक शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया, जिन पर फर्जी फायर डिपार्टमेंट एनओसी का इस्तेमाल कर संबद्धता (affiliation) लेने का आरोप था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए फायर डिपार्टमेंट की नकली एनओसी जमा करना न तो धोखाधड़ी (cheating) है और न ही जालसाजी (forgery), क्योंकि यह दस्तावेज़ कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं था और न ही शिक्षा विभाग को संबद्धता देने के लिए इससे...
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु राज्यपाल मामले का फैसला गलत घोषित करने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट में बिलों पर हस्ताक्षर (असेंट) से जुड़े मुद्दों पर चल रही राष्ट्रपति संदर्भ (Presidential Reference) की सुनवाई के आखिरी दिन, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि दो-जजों वाली तमिलनाडु जजमेंट को सही कानून न माना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन की सुनवाई पूरी करने के बाद आज इस मामले पर अपना मत सुरक्षित रख लिया। इस संदर्भ में राष्ट्रपति द्वारा 14 प्रश्न उठाए गए थे, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या बिलों पर हस्ताक्षर के लिए कोई समयसीमा तय की जा सकती...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों की स्वीकृति की समय-सीमा पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (11 सितंबर) को भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत दिए गए संदर्भ पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 200/201 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों को स्वीकृति देने की समय-सीमा से संबंधित प्रश्न उठाए गए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने इस मामले की दस दिनों तक सुनवाई की।राष्ट्रपति का संदर्भ मई में, तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में दो जजों की...
CrPC की धारा 197 के तहत मंजूरी का मुद्दा कार्यवाही के किसी भी चरण में निचली अदालत में उठाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में किसी लोक सेवक के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी के प्रश्न पर कार्यवाही के किसी भी चरण में विचार किया जा सकता है, क्योंकि यह मुद्दा प्रस्तुत साक्ष्य की प्रकृति पर निर्भर करता है कि क्या कृत्य आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता-लोक सेवक पर IPC की धारा...
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार-हत्या मामले में मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कहा- 'सबूत गढ़ने का मज़बूत अनुमान'
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2014 में सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी मौत के मामले में दोषी ठहराए गए अख्तर अली की मौत की सज़ा रद्द की। अदालत ने सह-आरोपी प्रेम पाल वर्मा को भी बरी कर दिया, जिसे अपराधी को शरण देने का दोषी ठहराया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 18 अक्टूबर, 2019 के फैसले के खिलाफ दोनों आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों को स्वीकार कर लिया, जिसमें दोषसिद्धि और मौत की सज़ा बरकरार रखी गई थी।अदालत ने कहा,"कानून में...
राज्यपाल को विधेयकों को अंतहीन काल तक अपने पास रखने का अधिकार नहीं है, लेकिन समय-सीमा तय नहीं की जा सकती: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
राष्ट्रपति संदर्भ की सुनवाई के आखिरी दिन सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्यपाल विधेयकों पर अंतहीन रूप से नहीं बैठ सकते।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चूंकि अनुच्छेद 200 में "जितनी जल्दी हो सके" शब्द का प्रयोग किया गया, इसलिए राज्यपाल विधेयकों पर "सदाबहार या तीन या चार साल तक" नहीं बैठ सकते। साथ ही सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय द्वारा "सीधे-सादे फॉर्मूले" के रूप में निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का विरोध किया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पांच जजों की पीठ के समक्ष कहा,"यद्यपि...



















