सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (23 मार्च, 2026 से 27 मार्च, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' के तौर पर काम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि डिफ़ॉल्ट के कारण किसी मुक़दमे का खारिज होना 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) के तौर पर काम नहीं करता, क्योंकि इसमें मामले के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई ऐसा वादी जिसे अपना दावा आगे बढ़ाने का अवसर मिला था, लेकिन जिसने बार-बार कार्यवाही को खारिज होने दिया, उसे न्यायसंगत सिद्धांतों के आधार पर राहत से वंचित किया जा सकता है, क्योंकि ऐसा आचरण कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है।
Cause Title: SHARADA SANGHI & ORS. VS. ASHA AGARWAL & ORS.
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आरोपी को आरोप पढ़कर सुनाए जाने पर आरोप तय करते समय ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होने पर ट्रायल रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने वाली ऑर्डर शीट पर दस्तखत न होना एक ठीक किया जा सकने वाला प्रक्रियागत दोष है और इससे ट्रायल रद्द नहीं होता, खासकर तब जब आरोपी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में ठीक से बताया गया हो और वे उन्हें समझ गए हों।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा, “आरोप पत्र पर दस्तखत न होने से जुड़ा दोष कोई गैर-कानूनी काम नहीं है। यह ज़्यादा से ज़्यादा CrPC की धारा 215 और 464 के दायरे में आने वाली एक ठीक की जा सकने वाली प्रक्रियागत अनियमितता है। अगर न्याय में किसी तरह की विफलता साबित न हो तो ऐसे दोष से कार्यवाही रद्द नहीं हो सकती।”
Cause Title: SANDEEP YADAV VERSUS SATISH & OTHERS
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अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में यह मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है कि राज्य किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करे। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 'ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा' द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को पूरे देश में 'राजपत्रित अवकाश' (Gazetted Holiday) घोषित करने और पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के लिए एक समान दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई थी।
Case :All India Shiromani Singh Sabha v. Union of India and others | W.P.(C) No. 1474/2020
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डिफेंस सिक्योरिटी कोर के जवान दूसरी पेंशन के हकदार, एक साल तक की कमी माफ की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को फैसला सुनाया कि डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) के जो जवान पहले से ही सेना में अपनी पिछली सेवा के लिए पेंशन ले रहे हैं, वे DSC में अपनी बाद की सेवा के लिए दूसरी सर्विस पेंशन पाने के हकदार हैं। साथ ही पेंशन नियमों के अनुसार, क्वालिफाइंग सर्विस में एक साल तक की कमी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि दूसरी पेंशन देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति पहले से ही अपनी पहली सेवा अवधि के लिए पेंशन ले रहा है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से DSC जवानों को दूसरी पेंशन देने के खिलाफ दायर अपीलों के समूह को खारिज किया। बेंच ने कहा कि DSC में सेवा से मिलने वाली पेंशन का हक "एक ही सेवा, पद, या रोजगार की लगातार अवधि से नहीं, बल्कि एक अलग और स्वतंत्र नियुक्ति से मिलता है।"
Cause Title: UNION OF INDIA & ORS. VERSUS BALAKRISHNAN MULLIKOTE (EX HAV 256812 M) (with connected appeals)
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हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म या सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और सक्रिय रूप से उसका पालन करता है तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता। कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने गौर किया कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में यह बात स्पष्ट की गई और इस आदेश के तहत लगा प्रतिबंध पूर्ण है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1950 के आदेश के खंड 3 में निर्दिष्ट न किए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर, जन्म की स्थिति चाहे जो भी हो, अनुसूचित जाति का दर्जा तत्काल समाप्त हो जाता है।
Case Details: CHINTHADA ANAND v STATE OF ANDHRA PRADESH AND ORS.|SLP(Crl) No. 9231/2025
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चयनित उम्मीदवार के जॉइन न करने पर अगली मेरिट वाले को नियुक्ति का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार को केवल इस आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता कि चयनित उम्मीदवार ने जॉइन नहीं किया या प्री-अपॉइंटमेंट औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में रिक्त पद को उसी सेलेक्ट लिस्ट से भरना अनिवार्य नहीं है, बल्कि संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कर्नाटक सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उत्तरदाता को कर्नाटक प्रशासनिक सेवा में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया गया था।
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आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार नियमों की अनुमति होने पर छूट का लाभ उठाने के बावजूद मेरिट के आधार पर सामान्य सीटों का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह टिप्पणी की कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, जिन्होंने किसी योग्यता परीक्षा में छूट का लाभ उठाया, उन्हें अभी भी सामान्य वर्ग के पदों के लिए विचार किया जा सकता है, बशर्ते वे अंतिम चयन चरण में उच्च मेरिट हासिल करें और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हों।
TET उम्मीदवारों को राहत देते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का फैसला रद्द किया, जिसमें यह कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों ने छूट का लाभ उठाया है, वे सामान्य वर्ग में नहीं जा सकते।
Cause Title: CHAYA & ORS. ETC. VERSUS THE STATE OF MAHARASHTRA & ANR. ETC.
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राज्य के अधिकारियों द्वारा अधिग्रहित वाहन से हुए हादसे के लिए निजी बीमा कंपनी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को यह फ़ैसला दिया कि जब किसी निजी वाहन को राज्य द्वारा चुनावों जैसे सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है तो दुर्घटनाओं की ज़िम्मेदारी अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होती है, न कि बीमा कंपनी की।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा, "...जहां किसी वाहन को सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहित किया जाता है और अधिग्रहण की उस अवधि के दौरान कोई घटना घटित होती है तो उसकी ज़िम्मेदारी सही तौर पर अधिग्रहित करने वाले प्राधिकरण की होनी चाहिए, न कि उस बीमा कंपनी की जिसे वाहन के नियमित और स्वैच्छिक उपयोग के लिए मालिक ने नियुक्त किया था।"
Cause Title: DISTRICT MAGISTRATE AND DISTRICT ELECTION OFFICER AND COLLECTOR, GWALIOR, M.P. VERSUS NATIONAL INSURANCE COMPANY LIMITED & ORS.
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विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी नोटिफ़ाइड मास्टर प्लान के तहत विकास के लिए तय की गई ज़मीन को सिर्फ़ बाद में पेड़-पौधे या पेड़ उग जाने की वजह से "डीम्ड फ़ॉरेस्ट" (माना गया जंगल) नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे बाद में उगे पेड़ों को काटने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का आदेश सही ठहराया। इस प्रोजेक्ट पर इस आधार पर आपत्ति जताई गई कि यह रीडेवलपमेंट ऐसी ज़मीन पर किया जा रहा था, जिसे बाद में पेड़ों के उगने की वजह से 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' का दर्जा मिल गया।
Cause Title: NAVEEN SOLANKI AND ANOTHER VERSUS RAIL LAND DEVELOPMENT AUTHORITY AND OTHERS