सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Update: 2026-05-16 15:30 GMT

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (11 मई, 2026 से 05 मई, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

मोटर दुर्घटना मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट नहीं काटा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दुर्घटना पीड़ित को मेडिक्लेम या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिली रकम को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवज़े से नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फ़ायदे अलग-अलग कानूनी दायरे में आते हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज की। इस अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों (MACTs) द्वारा दिए गए मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट की रकम नहीं काटी जा सकती।

Case : New India Assurance Company v Dolly Satish Gandhi and another

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बॉम्बे किराया अधिनियम के तहत सह-मालिक 'मकान मालिक', बिना विशेष मालिकाना हक के भी बेदखली का मुकदमा चला सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी संपत्ति का सह-मालिक, बॉम्बे किराया, होटल और लॉजिंग हाउस दर नियंत्रण अधिनियम, 1947 के तहत "मकान मालिक" की श्रेणी में आता है। इसलिए वह किराए पर दी गई जगह पर विशेष मालिकाना हक या औपचारिक बंटवारे के बिना भी बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसने बेदखली के एक विवाद में ट्रायल कोर्ट और पहली अपीलीय अदालत के एक जैसे निष्कर्षों को पलट दिया था। इस मामले में अपीलकर्ता-वादी (जो किराए पर दी गई जगह का सह-मालिक और सह-मकान मालिक था) ने अपने परिवार की आवासीय ज़रूरतों के लिए किराएदार-प्रतिवादियों से जगह खाली करवाने की मांग की थी।

Cause Title: MARIETTA D' SILVA VERSUS RUDOLF CLOTHAN LACERDA & ORS.

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रिलायंस द्वारा KG Besin से यूपी को गैस की सप्लाई 'इंटर-स्टेट सेल', VAT लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को यह फैसला दिया कि आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से दूसरे राज्य के खरीदारों को प्राकृतिक गैस की बिक्री, सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट, 1956 की धारा 3(a) के तहत एक 'इंटर-स्टेट सेल' (अंतर-राज्यीय बिक्री) है, और इसलिए इस पर राज्य का वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू नहीं होता।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपीलों का समूह खारिज किया। ये अपीलें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा KG-D6 बेसिन से उत्तर प्रदेश के खरीदारों को की गई प्राकृतिक गैस की सप्लाई को 'इंटर-स्टेट सप्लाई' के तौर पर वर्गीकृत किए जाने के खिलाफ दायर की गई थीं।

Cause Title: STATE OF UTTAR PRADESH & ORS. VERSUS RELIANCE INDUSTRIES LIMITED & ORS. (with connected cases)

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मान्यता खोने के बाद दूसरे प्राइवेट कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट सरकारी फीस का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ओडिशा के बंद हो चुके सरदार राजास मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SRMCH) से दूसरे प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट, जिनकी मूल संस्था की मान्यता खत्म हो गई, सिर्फ़ रियायती सरकारी मेडिकल कॉलेज फीस देकर "अचानक मिलने वाले फ़ायदे" (Windfall) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने SRMCH में लागू फीस दरों पर उनसे बकाया फीस वसूलने की अनुमति दी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने निर्देश दिया कि SRMCH का प्रबंधन करने वाले सेल्वम एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट से मिली लगभग ₹14 करोड़ की राशि उन तीन प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को जारी की जाए, जिन्होंने ट्रांसफर हुए स्टूडेंट्स को दाखिला दिया था। इसमें मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया/नेशनल मेडिकल कमीशन को दी गई ₹10 करोड़ की बैंक गारंटी और सुप्रीम कोर्ट में जमा की गई ₹2 करोड़ की राशि, साथ ही उस पर मिला ब्याज शामिल है।

Cause Title: SOUMYA RANJAN PANDA & ORS. VERSUS SUBHALAXMI DASH & ORS.

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Canara Bank Regulations | जब एक ही मामले में कई अधिकारी शामिल हों तो संयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि केनरा बैंक अधिकारी कर्मचारियों (अनुशासन और अपील) विनियम, 1976 के विनियम 10 के अनुसार, किसी दोषी बैंक कर्मचारी के खिलाफ अलग से अनुशासनात्मक कार्यवाही करना स्वीकार्य है, भले ही किसी दोषी कृत्य में कई अधिकारी शामिल हों; क्योंकि जहां एक से ज़्यादा अधिकारी शामिल हों, वहाँ संयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का कोई अनिवार्य नियम नहीं है।

जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के आदेश के उस हिस्से को रद्द किया, जिसमें यह माना गया कि किसी दोषी कृत्य में शामिल कई अधिकारियों के खिलाफ संयुक्त/साझी कार्यवाही न करने से अनुशासनात्मक कार्यवाही अमान्य हो जाएगी।

Cause Title: CANARA BANK VERSUS PREM LATHA UPPAL (DEAD) THROUGH LRS.

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'होस्टाइल गवाह की गवाही का इस्तेमाल बरी करने के लिए भी किया जा सकता है, सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सज़ा रद्द की

यह देखते हुए कि होस्टाइल गवाहों के सबूतों का इस्तेमाल न सिर्फ़ दोषी ठहराने के लिए, बल्कि अभियोजन पक्ष के मामले को कमज़ोर करने और बरी करने में मदद के लिए भी किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को SC/ST श्रेणी के एक व्यक्ति की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को बरी किया।

कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के मामले की नींव ही अभियोजन पक्ष के गवाहों ने कमज़ोर कर दी थी, क्योंकि उन्होंने अपराध की जगह के बारे में अभियोजन पक्ष के रुख का समर्थन नहीं किया।

Cause Title: TALARI NARESH VERSUS THE STATE OF TELANGANA

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Land Acquisition | आवासीय प्लॉट की सेल डीड का उपयोग औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए पास के किसी गांव के आवासीय बिक्री विलेख का उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' की धारा 26(1)(b) के तहत 'समान प्रकार की भूमि' की शर्त अनिवार्य है और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को निर्धारित करने के लिए इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

Cause Title: Project Director, National Highways Authority of India versus Alfa Remidis Ltd. and others

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यूपी में 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन' की ज़मीनों की बिक्री जांच करे SIT: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह SIT 'स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया' से जुड़ी ज़मीनों की कथित धोखाधड़ी वाली बिक्री की जांच करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को भी रद्द किया, जिसमें पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोका गया।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने यह माना कि हालांकि कोई भी कोर्ट कार्यवाही के दौरान आरोपी को दंडात्मक कदमों से बचाने के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन इस मामले के तथ्यों को देखते हुए जांच एजेंसी को 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 193(3) के तहत पुलिस रिपोर्ट दाखिल न करने का निर्देश देना अनुचित था।

Case : Shrikant Ojha v State of UP and others

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ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन के बिना पब्लिक सर्विस गाड़ियों को कोई फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि किसी भी पब्लिक सर्विस गाड़ी को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं दिया जाएगा, जब तक उसमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTDs) और इमरजेंसी पैनिक बटन लगे न हों, उनकी जांच न हो गई हो, और वे 'वाहन' डेटाबेस में दर्ज न हों।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 'एस राजशेखरन बनाम भारत संघ' मामले की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। यह मामला पूरे देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के उपायों को लागू करने से जुड़ा है।

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Article 19(1)(a) के तहत बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार बताते हुए राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शुरू करने और बच्चों को राजस्थानी में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यह अधिकार भी शामिल है कि बच्चा ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करे जिसे वह समझ सके और जिसमें वह सहज हो।

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S.167 B(2) IT Act | 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' के सदस्य को मुनाफ़े की परवाह किए बिना दिया गया तय हिस्सा, टैक्स के दायरे में आएगा: सुप्रीम कोर्ट

टैक्स क़ानून पर एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 मई) को कहा कि 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' (AOP) से कुल कमाई का एक तय हिस्सा पाने वाला सदस्य, अगर बिज़नेस के ख़र्च या नुक़सान नहीं उठाता है तो वह इस कमाई को "मुनाफ़े का हिस्सा" बताकर इनकम टैक्स से छूट का दावा नहीं कर सकता।

यह बताना ज़रूरी है कि 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' (AOP) या 'बॉडी ऑफ़ इंडिविजुअल्स' (BOI) के सदस्यों पर टैक्स, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 167B (2) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 86 के तहत तय होता है। इन प्रावधानों को एक साथ पढ़ने पर पता चलता है कि जब किसी AOP पर धारा 167B (2) के तहत सबसे ज़्यादा दर से टैक्स लगता है।

Cause Title: COMMISSIONER OF INCOME TAX III VS. M/S. SANAND PROPERTIES PVT. LTD.

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कथित जातिगत गाली-गलौज किसी निजी घर के अंदर किए जाने पर SC/ST Act के तहत कोई अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक घर की चारदीवारी के अंदर, अनुसूचित जाति श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले शिकायतकर्ता के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज की थी।

चूंकि FIR में यह ज़िक्र नहीं था कि अपीलकर्ता नंबर 1 और अन्य अपीलकर्ताओं द्वारा गाली-गलौज और धमकाने की कथित घटना किसी ऐसी जगह पर हुई, जहां आम लोगों की नज़र पड़ सकती हो, इसलिए कोर्ट ने यह माना कि SC/ST Act के तहत अपराध का एक ज़रूरी तत्व—यानी कि यह घटना "आम लोगों की नज़र में आने वाली किसी जगह" पर होनी चाहिए—यहाँ पूरी तरह से नदारद था। इस वजह से अपीलकर्ताओं के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को जारी रखना सही

Cause Title: GUNJAN @ GIRIJA KUMARI AND OTHERS VERSUS STATE (NCT OF DELHI) AND ANOTHER

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S. 25 Hindu Succession Act | हत्या का आरोपी, मारे गए व्यक्ति की संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वादी को किसी मृतक द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर संपत्ति का उत्तराधिकार पाने से अयोग्य घोषित किया। कोर्ट ने यह पाया कि वह वादी, उस मृतक की हत्या के मामले में आरोपी के तौर पर नामजद है।

कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) की धारा 25 के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल करते हुए वादी को अयोग्य घोषित किया। यह धारा यह प्रावधान करती है कि जो व्यक्ति किसी की हत्या करता है, या हत्या करने में किसी की मदद करता है, वह मारे गए व्यक्ति की संपत्ति का उत्तराधिकार पाने से अयोग्य हो जाएगा।

Cause Title: MANJULA AND OTHERS VERSUS D.A. SRINIVAS

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