Article 19(1)(a) के तहत बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
13 May 2026 1:43 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार बताते हुए राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शुरू करने और बच्चों को राजस्थानी में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यह अधिकार भी शामिल है कि बच्चा ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करे जिसे वह समझ सके और जिसमें वह सहज हो।
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं है, बल्कि समझ, सोच और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का आधार है। इसलिए प्राथमिक शिक्षा ऐसी भाषा में दी जानी चाहिए जिसे बच्चा सबसे बेहतर तरीके से समझता हो।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का वास्तविक महत्व केवल बोलने में नहीं, बल्कि जानकारी को समझने, आत्मसात करने और उसके आधार पर निर्णय लेने की क्षमता में निहित है। मातृभाषा में शिक्षा बच्चे की बौद्धिक समझ और सीखने की क्षमता को मजबूत करती है।”
कोर्ट ने State of Karnataka v. Associated Management of English Medium Primary & Secondary Schools मामले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम चुनने की स्वतंत्रता बच्चे का अधिकार है। राज्य सरकार किसी बच्चे पर मातृभाषा थोप नहीं सकती, भले ही उसे बच्चे के हित में बताया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की भाषा नीति स्पष्ट होने के बावजूद राज्य ने बच्चों को उनकी पसंद या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने कहा कि यह निष्क्रियता न केवल नीति निर्देशों की अनदेखी है, बल्कि संविधान के भाग-III में दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी हो सकती है।
अंततः कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह पूरे राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने और उसे शिक्षा के माध्यम के तौर पर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

