BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों में बदलाव से किया इनकार, कहा- 'कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है'
Shahadat
19 May 2026 10:56 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार किया। इन निर्देशों में कहा गया कि अस्पतालों, बस स्टैंडों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को वैक्सीनेशन/नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उन कई अर्जियों को खारिज किया, जिनमें पिछले साल नवंबर में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों में बदलाव की मांग की गई। दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक जगहों के परिसर से अधिकारियों द्वारा पकड़े गए आवारा कुत्तों को शेल्टर में ही रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को चुनौती देने वाली अर्जियों को भी खारिज कर दिया। आज सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने बच्चों पर कुत्तों के हमलों की "बेहद परेशान करने वाली घटनाओं" के बारे में मिली रिपोर्टों का ज़िक्र किया। छोटे बच्चों को कुत्तों ने नोच डाला है, बुज़ुर्गों पर हमले हुए हैं। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी कुत्तों के हमलों का सामना करना पड़ा है।
कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को लोगों की जान को कुत्तों के हमलों से बचाने के अपने कर्तव्य में नाकाम रहने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया।
विभिन्न समाचार रिपोर्टों का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा,
"कुत्तों के काटने का खतरा अहम सार्वजनिक जगहों तक फैल गया है, जिनमें हवाई अड्डे और रिहायशी इलाके भी शामिल हैं।"
कोर्ट ने कहा कि यह समस्या "बेहद गंभीर रूप ले चुकी है" और "ऐसी घटनाओं का लगातार दोहराया जाना" निर्देशों के पालन में कमी को दर्शाता है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो अधिकारी निर्देशों का पालन करने में नाकाम रहेंगे, उन पर अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
फैसला सुनाते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने कहा,
"गरिमा के साथ जीने के अधिकार में बिना किसी कुत्ते के काटने के खतरे के आज़ादी से जीने का अधिकार भी शामिल है। राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता। कोर्ट उन कड़वी ज़मीनी सच्चाइयों से आँखें नहीं फेर सकता, जहाँ बच्चे, अंतरराष्ट्रीय यात्री और बुज़ुर्ग लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। संविधान ऐसे समाज की परिकल्पना नहीं करता, जहां बच्चों और बुज़ुर्गों को अपनी जान बचाने के लिए सिर्फ़ शारीरिक ताकत या किस्मत के भरोसे रहना पड़े..."
पिछले साल नवंबर में बेंच ने अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए थे ताकि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और खेल परिसरों जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जा सके। अदालत ने निर्देश दिया कि कुत्तों को शेल्टर में शिफ़्ट किया जाए, और उन्हें उसी जगह वापस न छोड़ा जाए, जहां से उन्हें उठाया गया था।
बेंच ने सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई हैं।
बाद में कुत्तों से प्यार करने वालों और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले ग्रुप्स ने इन निर्देशों को वापस लेने के लिए कई अर्ज़ियाँ दायर कीं। इन अर्ज़ियों पर विस्तार से सुनवाई करने के बाद, बेंच ने 29 जनवरी को अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया।
Case Title: In Re : 'City Hounded By Strays, Kids Pay Price', SMW(C) No. 5/2025 (and connected cases)

