महिला के लिए आरक्षित रहा सरपंच पद अगले कार्यकाल में सामान्य श्रेणी को मिलेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

Praveen Mishra

30 July 2026 3:34 PM IST

  • महिला के लिए आरक्षित रहा सरपंच पद अगले कार्यकाल में सामान्य श्रेणी को मिलेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि यदि किसी ग्राम पंचायत में सरपंच का पद पिछले कार्यकाल (2020-2025) में महिला श्रेणी के लिए आरक्षित था, तो अगले कार्यकाल (2025-2030) में सामान्यतः उसे ओपन (सामान्य) श्रेणी के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।

    अदालत ने कहा कि यह महाराष्ट्र ग्राम पंचायत (सरपंच एवं उप-सरपंच) निर्वाचन नियम, 1964 में निर्धारित रोटेशन (चक्रानुक्रम) सिद्धांत के अनुरूप है।

    जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उप-विभागीय अधिकारियों (SDO) द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों में 2025-2030 कार्यकाल के लिए सरपंच पद को फिर से महिला श्रेणी के लिए आरक्षित किए जाने को चुनौती दी गई थी।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संबंधित पद 2020-2025 के कार्यकाल में भी महिलाओं के लिए आरक्षित था। ऐसे में नियम 2A(4) के दूसरे प्रावधान के अनुसार अगले कार्यकाल में उसे ओपन (जनरल) श्रेणी में आना चाहिए था।

    वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि महिलाओं को 50% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाना आवश्यक था और इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के Sanjay Ramdas Patil फैसले का हवाला दिया।

    हाईकोर्ट ने राज्य की दलील खारिज करते हुए कहा कि नियम 2A(4) का उद्देश्य स्पष्ट है। यदि किसी ग्राम पंचायत में सरपंच का पद पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षित रह चुका है, तो अगली बार उस पंचायत को महिला आरक्षण की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा, जब तक अन्य पंचायतों को भी क्रमवार आरक्षण का लाभ न मिल जाए।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रोटेशन के सिद्धांत का पालन करने से महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होती, बल्कि यह केवल आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

    सुप्रीम कोर्ट के Sanjay Ramdas Patil फैसले पर राज्य की निर्भरता को भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह मामला मेयर पद के आरक्षण से संबंधित था, न कि ग्राम पंचायत के सरपंच पद के आरक्षण से।

    अंततः हाईकोर्ट ने उप-विभागीय अधिकारियों द्वारा जारी आरक्षण आदेशों को रद्द करते हुए कलेक्टर को छह सप्ताह के भीतर नियम 2A(4) और उसके प्रावधानों के अनुसार नए सिरे से सरपंच पदों का आरक्षण निर्धारित करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story