दिल्ली दंगा: IB कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद

Amir Ahmad

31 July 2026 5:03 PM IST

  • दिल्ली दंगा: IB कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद

    वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज जस्टिस प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी उम्रकैद की सजा सुनाई।

    दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि यह अपराध उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान धर्म के आधार पर अत्यंत क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया।

    अदालत ने कहा,

    "मृतक के शव को जानवर की तरह घसीटते हुए चांदबाग पुलिया तक ले जाया गया और फिर नाले में फेंक दिया गया। अपराध की बर्बरता घृणित और झकझोर देने वाली है।"

    हालांकि अदालत ने कहा कि अभियोजन ऐसा कोई अतिरिक्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि दोषियों में भविष्य में भी हिंसक अपराध करने की प्रवृत्ति है या वे सुधार की संभावना से परे हैं।

    अदालत ने कहा कि दोषियों का पहले किसी आपराधिक मामले में शामिल होने का रिकॉर्ड नहीं है और उन्हें कानून का पालन करने वाला नागरिक बनाया जा सकता है। ऐसे में यह मामला 'दुर्लभतम से भी दुर्लभ' श्रेणी का नहीं माना जा सकता, जहां मृत्युदंड दिया जाए।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंकित शर्मा का अपहरण किया गया, उन्हें बेरहमी से पीटा गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई।

    अभियोजन के अनुसार अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों के निशान मिले थे जिनमें से 18 घाव धारदार हथियार से किए गए। पुलिस ने इसे बेहद नृशंस और योजनाबद्ध हत्या बताते हुए दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

    वहीं, ताहिर हुसैन की ओर से दलील दी गई कि प्रत्येक दोषी को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और यह सजा केवल दुर्लभतम मामलों में ही दी जाती है।

    बचाव पक्ष ने कहा कि फैसले में भीड़ की मौजूदगी का जिक्र है, लेकिन प्रत्येक दोषी की अलग-अलग भूमिका स्पष्ट नहीं की गई।

    अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 188, 147, 148, 149, 153ए, 365 और 302 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि उन्हें आपराधिक साजिश से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया गया।

    यह मामला दयालपुर थाना में दर्ज FIR नंबर 65/2020 से जुड़ा है।

    अंकित शर्मा के पिता ने दंगों के दौरान उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 51 गंभीर चोटों की पुष्टि हुई।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने की।

    इस मामले में मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन सहित कई आरोपियों के खिलाफ हत्या, अपहरण, दंगा, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और अन्य गंभीर धाराओं में आरोप तय किए। अब अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    Next Story