बालिग़ बच्चे द्वारा घर में रखे गए प्रतिबंधित सामान के लिए माता-पिता ज़िम्मेदार नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
Shahadat
29 July 2026 10:08 AM IST

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता को उनके बालिग़ बच्चे द्वारा रखे गए कथित प्रतिबंधित सामान के लिए सिर्फ़ इसलिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह सामान उनके घर से बरामद हुआ था।
जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:
“जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित सामान वाले लिफ़ाफ़े पर सह-आरोपी प्रतिभा उर्फ़ प्रीति का नाम देखने के बाद ही यह निष्कर्ष निकाल लिया था कि वह सामान सह-आरोपी प्रतिभा उर्फ़ प्रीति का था। ज़ाहिर है, अगर बच्चे ने कोई प्रतिबंधित सामान रखा है, तो उसके लिए माता-पिता को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता ने NDPS Act की धारा 21 और 29 के तहत दर्ज FIR के सिलसिले में अग्रिम ज़मानत की मांग की थी। जांच के दौरान पुलिस ने 15 ग्राम 'चिट्टा' (नशीला पदार्थ) बरामद किया, जिसे रसोई से सटे शौचालय के ऊपर छत की स्लेट के नीचे छिपाकर रखा गया।
तलाशी याचिकाकर्ता की बेटियों की मौजूदगी में ली गई, क्योंकि उस समय याचिकाकर्ता चंडीगढ़ में थीं। प्रतिबंधित सामान वाले लिफ़ाफ़े पर उनकी एक बेटी प्रतिभा उर्फ़ प्रीति का नाम लिखा था, जिसे बाद में गिरफ़्तार कर लिया गया। चूंकि प्रतिबंधित सामान याचिकाकर्ता के घर से बरामद हुआ, इसलिए उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने उन्हें जांच में शामिल होने की शर्त पर अंतरिम अग्रिम ज़मानत दी थी। राज्य ने ज़मानत की पुष्टि का विरोध करते हुए तर्क दिया कि हालांकि याचिकाकर्ता जांच में शामिल हुई थीं, लेकिन उन्होंने पूरा सहयोग नहीं किया, चंडीगढ़ जाने का कारण नहीं बताया या मेडिकल दस्तावेज़ पेश नहीं किए। ऐसे सबूत हैं, जो नशीले पदार्थों के व्यापार में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। यह तर्क दिया गया कि उनकी रिहाई से वे कानून से भाग सकती हैं या ऐसी ही गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं।
हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के घर से प्रतिबंधित सामान की बरामदगी ही उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने को सही ठहराने के लिए काफ़ी नहीं है, खासकर तब जब तलाशी के समय वे मौजूद नहीं हैं और खुद जांच से पता चला कि प्रतिबंधित सामान उनकी बेटी का है।
कोर्ट ने गौर किया कि पुलिस ने प्रतिबंधित सामान वाले लिफ़ाफ़े पर बेटी का नाम मिलने के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया और याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारी द्वारा सूचित किए जाने के बाद स्वेच्छा से अपने घर की तलाशी की अनुमति दी। जांच में शामिल होने और उनसे कुछ भी बरामद न होने के कारण याचिकाकर्ता अग्रिम ज़मानत की हकदार थीं।
कोर्ट ने राज्य की उस दलील को भी खारिज किया कि याचिकाकर्ता के घर से प्रतिबंधित सामान मिलने के कारण उस पर ही उस सामान के कब्ज़े का आरोप लगाया जाए। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने खुद यह निष्कर्ष निकाला था कि वह प्रतिबंधित सामान याचिकाकर्ता की बेटी का था, इसलिए सिर्फ़ घर की मालकिन होने के आधार पर याचिकाकर्ता को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
इस प्रकार, कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत को स्थायी किया और कुछ शर्तें भी लगाईं।
Case Name: Tripta Devi v. State of Himachal Pradesh


