कुछ ज़मीन मालिकों को ज़्यादा ज़मीन अधिग्रहण मुआवज़ा मिलने से दूसरों का मुआवज़ा अमान्य नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
27 Jan 2026 7:13 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 जनवरी) को कहा कि अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके कुछ लाभार्थियों को ज़्यादा मुआवज़ा देने से दूसरे लाभार्थियों को दिए गए मुआवज़े को अमान्य नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े मामले की सुनवाई की, जिसने अपीलकर्ता के पक्ष में दिए गए ज़मीन अधिग्रहण मुआवज़े को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया, क्योंकि कुछ लोगों को ज़्यादा मुआवज़ा दिया गया।
यह मामला अगस्त, 2017 में अधिसूचित रोघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन के लिए ज़मीन अधिग्रहण से जुड़ा है। 12 फरवरी, 2018 को लगभग 550 ज़मीन मालिकों के पक्ष में मुआवज़े के आदेश पारित किए गए। कलेक्टर की जांच के बाद यह आरोप लगाया गया कि कुछ ज़मीन मालिकों ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके बाज़ार मूल्य से कहीं ज़्यादा मुआवज़ा लिया था। उन अधिकारियों और कुछ लाभार्थियों के खिलाफ FIR दर्ज की गईं।
उन्हें दिए गए मुआवज़े से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ता ने भूमि अधिग्रहण (विशेष रेलवे परियोजनाएं) नियम, 2016 के तहत मध्यस्थ से संपर्क किया। एक मध्यस्थता अवार्ड द्वारा उनका दावा बढ़ाया गया। इसके बावजूद, हाईकोर्ट ने उस जांच से संबंधित रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, जिसमें अपीलकर्ता पक्षकार नहीं था, बढ़ी हुई राशि को रोक दिया। बाद में मुआवज़ा रद्द कर दिया, इसे एक दूषित प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए, जिससे अपीलकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।
विवादास्पद फैसला रद्द करते हुए जस्टिस चंद्रन द्वारा लिखे गए फैसले में हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को अस्थिर बताया गया, जिसमें कहा गया कि कुछ ज़मीन मालिकों के खिलाफ अनुचित लाभ के आरोपों का इस्तेमाल उन दूसरों के कानूनी अधिकारों को अमान्य करने के लिए नहीं किया जा सकता, जो कभी भी किसी जांच या आपराधिक कार्यवाही में शामिल नहीं थे।
चूंकि केवल पांच ज़मीन मालिकों पर ही ज़्यादा मुआवज़ा लेने का आरोप था। अपीलकर्ता उनमें से नहीं था, इसलिए कोर्ट ने कहा कि पूरे मुआवज़े को रद्द करना अनुचित होगा, जब कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में अपीलकर्ता के खिलाफ ऐसे कोई आरोप नहीं लगाए गए।
कोर्ट ने कहा,
"हम यह देखे बिना नहीं रह सकते कि जब मध्यस्थता पुरस्कार और प्रारंभिक पुरस्कार रद्द किए गए तो माननीय सिंगल जज को यह ध्यान देना चाहिए था कि चुनौती केवल उसमें शामिल पांच प्रतिवादियों के खिलाफ है और रद्द करने से केवल वे ही प्रभावित हो सकते हैं।"
इसलिए अपील मंज़ूर कर ली गई और आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा तय किया गया अवॉर्ड बहाल कर दिया गया।
Cause Title: Niraj Jain Versus Competent Authority-cum-Additional Collector, Jagdalpur & Ors.

