सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गरीब कैदियों की सहायता के लिए केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए SOP रिकॉर्ड किए
सुप्रीम कोर्ट ने गरीब कैदियों की सहायता के लिए केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए SOP रिकॉर्ड किए

सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण आदेश में गरीब कैदियों को सहायता योजना को लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) दर्ज की। संघ ने इस प्रक्रिया का प्रस्ताव तब रखा, जब न्यायालय सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो के ऐतिहासिक फैसले में निर्देशों के अनुपालन की जांच कर रहा था।सतेंदर कुमार अंतिल मामले में 2022 के फैसले में न्यायालय ने "जेल पर जमानत" नियम के महत्व पर जोर दिया और अनावश्यक गिरफ्तारी और रिमांड को रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ...

खतरनाक अपशिष्ट निपटान प्राधिकरण के खत्म होने के बाद तूतिकोरिन प्लांट कैसे चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता से पूछा
खतरनाक अपशिष्ट निपटान प्राधिकरण के खत्म होने के बाद तूतिकोरिन प्लांट कैसे चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता से पूछा

इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के थूथुकुडी में अपने स्टरलाइट कॉपर प्लांट को फिर से खोलने के लिए भारतीय बहुराष्ट्रीय खनन कंपनी वेदांता की याचिका पर सुनवाई जारी रखी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने वेदांता लिमिटेड द्वारा अगस्त 2020 के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कंपनी द्वारा तूतीकोरिन में तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) द्वारा पारित अन्य परिणामी आदेश के...

क्या जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले न्यायिक अकादमियों के कोर्स में शामिल हैं? सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से पूछा
क्या जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले न्यायिक अकादमियों के कोर्स में शामिल हैं? सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (13 फरवरी को) सभी हाईकोर्ट को यह सूचित करने का निर्देश दिया कि क्या सिद्धार्थ बनाम यूपी राज्य, (2022) 1 एससीसी 676 और सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो में लिए गए निर्णयों को न्यायिक अकादमी के कोर्स में शामिल किया गया।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ सतेंद्र कुमार अंतिल के मुख्य मामले में जारी निर्देशों के अनुपालन के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। उल्लेखनीय है कि इस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनावश्यक गिरफ्तारी और रिमांड...

राज्य जिला कलेक्टरों को ED के समन को चुनौती देने वाली रिट याचिका कैसे दायर कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा
राज्य जिला कलेक्टरों को ED के समन को चुनौती देने वाली रिट याचिका कैसे दायर कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 फरवरी) को कथित अवैध रेत खनन-मनी लॉन्ड्रिंग के संबंध में जिला कलेक्टरों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर करने की तमिलनाडु सरकार की स्थिति पर सवाल उठाया।जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा हाईकोर्ट के 28 नवंबर के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामले में जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए...

जब वादी का स्वामित्व विवादित हो तो कब्जे की रक्षा के लिए निषेधाज्ञा का मुकदमा कायम नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
जब वादी का स्वामित्व विवादित हो तो कब्जे की रक्षा के लिए निषेधाज्ञा का मुकदमा कायम नहीं रखा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यदि वादी निषेधाज्ञा के लिए प्रार्थना करते समय संपत्ति के स्वामित्व को साबित करने में विफल रहता है तो निषेधाज्ञा का मुकदमा प्रतिवादियों के खिलाफ सुनवाई योग्य नहीं हो सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट और प्रथम अपीलीय न्यायालय के निष्कर्षों को पलटते हुए कहा,“निषेधाज्ञा के लिए सरल मुकदमा कायम रखने योग्य नहीं हो सकता, क्योंकि वादी/प्रतिवादी की संपत्ति का शीर्षक अपीलकर्ताओं/प्रतिवादियों द्वारा विवादित है। ऐसी स्थिति में प्रतिवादी/वादी के लिए...

जंगलों के भीतर चिड़ियाघरों पर सीजेआई-पीठ के निर्देश के बाद जस्टिस गवई की पीठ ने विरोधाभासी आदेशों पर चिंता व्यक्त की
जंगलों के भीतर चिड़ियाघरों पर सीजेआई-पीठ के निर्देश के बाद जस्टिस गवई की पीठ ने विरोधाभासी आदेशों पर चिंता व्यक्त की

इस सप्ताह की शुरुआत में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अंतरिम आदेश पारित किया कि न्यायालय से पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना वन क्षेत्रों के भीतर चिड़ियाघरों/सफारियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।हालांकि, जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली अन्य पीठ ने पहले इसी मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।जस्टिस गवई ने शुक्रवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि क्या उन्होंने सीजेआई की पीठ को इस तथ्य के बारे में सूचित किया गया।विनिमय इस प्रकार हुआ:जस्टिस गवई:...

क्या महाराष्ट्र में सिख चमार को मोची जाति माना जा सकता है? नवनीत कौर राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट
क्या महाराष्ट्र में 'सिख चमार' को 'मोची' जाति माना जा सकता है? नवनीत कौर राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (23 फरवरी) को अमरावती की सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के मुद्दे पर अपनी सुनवाई फिर से शुरू करते हुए संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के उद्देश्य और दायरे के पहलू पर गौर किया और बताया कि कैसे विभिन्न राज्यों में अनुसूचित जातियों का पदनाम समाजशास्त्रीय आधार पर भिन्न-भिन्न है।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2021 में उनका जाति प्रमाण पत्र यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उसने धोखाधड़ी से...

पुलिस के पास धन की वसूली करने या धन की वसूली के लिए सिविल कोर्ट के रूप में कार्य करने की शक्ति नहीं: सुप्रीम कोर्ट
पुलिस के पास धन की वसूली करने या धन की वसूली के लिए सिविल कोर्ट के रूप में कार्य करने की शक्ति नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि संविदात्मक विवाद या अनुबंध के उल्लंघन के कारण आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं होनी चाहिए।अपीलकर्ताओं से पैसे की वसूली के लिए पुलिस से प्रार्थना की गई है। पुलिस आरोपों की जांच कर रही है जिससे आपराधिक कृत्य का पता चलता है ।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, पुलिस के पास धन की वसूली करने या धन की वसूली के लिए सिविल कोर्ट के रूप में कार्य करने की शक्ति और अधिकार नहीं है।''प्रतिवादी-शिकायतकर्ता की एकमात्र शिकायत शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार याद दिलाने...

क्या नया जमानत कानून तैयार किया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा
क्या नया जमानत कानून तैयार किया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से यह बताने को कहा कि क्या वह सतेंदर कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो मामले में अपने 2022 के फैसले में कोर्ट द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार नया जमानत कानून लाने पर विचार कर रहा है।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने सतेंद्र कुमार अंतिल मामले में निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए अपने हालिया आदेश में कहा,"पैरा 100.1 में निहित निर्देश के संदर्भ में संघ को न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया गया कि क्या कोई जमानत कानून विचाराधीन है या...

गृहिणी की अनुमानित आय दैनिक मजदूरी के लिए अधिसूचित न्यूनतम वेतन से कम नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
गृहिणी की अनुमानित आय दैनिक मजदूरी के लिए अधिसूचित न्यूनतम वेतन से कम नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत दावे पर फैसला करते हुए कहा कि गृहिणी द्वारा किए गए योगदान का मौद्रिक संदर्भ में आकलन करना मुश्किल है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने इस तरह के योगदान को 'उच्च कोटि का और अमूल्य' बताया। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि गृहिणी की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी परिवार के सदस्य की जो परिवार के लिए पैसा लाती है।खंडपीठ ने कहा,“यह कहने की आवश्यकता नहीं कि गृहिणी की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी परिवार के सदस्य की, जिसकी आय...

आखिर मुव्वकिल क्यों  उपभोक्ता नहीं हो सकता और वकील की लापरवाही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में खामी नहीं हो सकती ? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
आखिर मुव्वकिल क्यों ' उपभोक्ता' नहीं हो सकता और वकील की लापरवाही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत 'सेवा में खामी' नहीं हो सकती ? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

क्या वकील द्वारा प्रदान की गई सेवाएं 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (सीपीए) के अंतर्गत आएंगी, इस पर एक निर्णायक सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य बातों के अलावा, इस बात पर विचार-विमर्श किया कि क्या अधिनियम के तहत एक उपभोक्ता को ग्राहक के बराबर माना जा सकता है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने इस बात पर विचार किया कि क्या वकील की ओर से लापरवाही के परिणामस्वरूप अधिनियम के तहत दी गई सेवा में कमी हो सकती है।जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल के सामने मामला रखा गया।बुधवार की दलीलों को जारी...

बैलिस्टिक विशेषज्ञ का गैर-परीक्षण अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक हो सकता है यदि अभियोजन द्वारा पेश प्रत्यक्ष साक्ष्य अविश्वसनीय हैं : सुप्रीम कोर्ट
बैलिस्टिक विशेषज्ञ का गैर-परीक्षण अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक हो सकता है यदि अभियोजन द्वारा पेश प्रत्यक्ष साक्ष्य अविश्वसनीय हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि जहां अभियोजन द्वारा प्रस्तुत प्रत्यक्ष साक्ष्य विश्वसनीय पाए जाते हैं, तो बैलिस्टिक विशेषज्ञ का गैर-परीक्षण और बैलिस्टिक रिपोर्ट पेश करने में चूक अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं हो सकती है।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हर मामले में जहां पीड़ित की मौत बंदूक की गोली से हुई हो, बैलिस्टिक विशेषज्ञ की राय ली जानी चाहिए और विशेषज्ञ की जांच की जानी चाहिए, हालांकि जहां मृत्यु बंदूक की गोली के कारण हुई, तो बैलिस्टिक रिपोर्ट...

अदालतों को न केवल मनमानी प्रशासनिक कार्रवाइयों को रद्द करना चाहिए, बल्कि प्रभावित पक्ष की क्षतिपूर्ति के लिए उपाय भी करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
अदालतों को न केवल मनमानी प्रशासनिक कार्रवाइयों को रद्द करना चाहिए, बल्कि प्रभावित पक्ष की क्षतिपूर्ति के लिए उपाय भी करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक फैसले में कहा है कि अदालतों को न केवल मनमानी प्रशासनिक कार्रवाइयों को रद्द करना चाहिए, बल्कि अवैध कार्यों से उत्पन्न होने वाले हानिकारक परिणामों को संबोधित करके प्रभावित पक्ष की क्षतिपूर्ति के लिए उपाय भी करना चाहिए।न्यायालय ने कहा, "...जबकि संवैधानिक अदालतों का प्राथमिक कर्तव्य सत्ता पर नियंत्रण रखना है, जिसमें अवैध या मनमाने ढंग से होने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों को रद्द करना भी शामिल है, यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि ऐसे उपाय अकेले ही सत्ता के दुरुपयोग के परिणामों...

भुगतान के लिए भुगतानकर्ता द्वारा स्वेच्छा से हस्ताक्षरित और सौंपा गया ब्लैंक चेक NI Act की धारा 139 के तहत माना जाता है: सुप्रीम कोर्ट
भुगतान के लिए भुगतानकर्ता द्वारा स्वेच्छा से हस्ताक्षरित और सौंपा गया ब्लैंक चेक NI Act की धारा 139 के तहत माना जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि ब्लैंक चेक लीफ, जिस पर भुगतानकर्ता ने स्वेच्छा से हस्ताक्षर किया और कुछ भुगतान के लिए प्राप्तकर्ता को सौंप दिया, यह माना जाएगा कि इसे परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) धारा की 139 के अनुसार कानूनी रूप से लागू करने योग्य लोन के निर्वहन में जारी किया गया था। .न्यायालय ने बीर सिंह बनाम मुकेश कुमार (2019) में फैसले पर भरोसा करते हुए कहा,"भले ही आरोपी ने स्वेच्छा से ब्लैंक चेक पन्ने पर हस्ताक्षर किया हो और कुछ भुगतान के लिए उसे सौंप दिया हो, एक्ट की धारा 139 के तहत यह अनुमान...

यदि रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य साक्ष्यों से इसका समर्थन न हो तो न्यायेतर स्वीकारोक्ति मजबूत साक्ष्य नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
यदि रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य साक्ष्यों से इसका समर्थन न हो तो न्यायेतर स्वीकारोक्ति मजबूत साक्ष्य नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (20 फरवरी) को कहा कि जब अभियोजन का मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य प्रकृति का होने के कारण न्यायेतर स्वीकारोक्ति पर आधारित है तो आरोपी को अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक अभियोजन पक्ष परिस्थितियों की श्रृंखला पूरी नहीं कर लेता।जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों को पलटते हुए कहा कि जब परिस्थितियों की श्रृंखला के आधार पर अभियोजन द्वारा निकाले गए निष्कर्ष को अभियोजन पक्ष द्वारा स्पष्ट नहीं किया जाता तो आपराधिक...

सिर्फ इसलिए कि डॉक्टर हैं, वकीलों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नहीं लाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट में दलीलें
सिर्फ इसलिए कि डॉक्टर हैं, वकीलों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नहीं लाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

एक मामले में जहां सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है कि क्या वकील द्वारा प्रदान की गई सेवाएं 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आएंगी।बुधवार (21 फरवरी ) रो दलीलें दी गईं, जहां कानूनी पेशे को चिकित्सा पेशे से अलग करने का प्रयास किया गया। बार के सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण यह मुद्दा 2007 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा दिए गए एक फैसले से उभरा। आयोग ने फैसला सुनाया था कि वकीलों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (ओ) के तहत आती हैं। उक्त प्रावधान सेवा...

देश भर के ट्रिब्यूनलों में गैर- न्यायिक सदस्यों की अध्यक्षता पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई, एजी से मांगा जवाब
देश भर के ट्रिब्यूनलों में गैर- न्यायिक सदस्यों की अध्यक्षता पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई, एजी से मांगा जवाब

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 फरवरी) को इस मुद्दे पर विचार किया कि क्या राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) जैसे देश भर के ट्रिब्यूनलों/आयोगों में एक न्यायिक सदस्य शामिल होगा, जो एक पीठासीन सदस्य सदस्य भी होगा।जस्टिस सूर्यकांत,जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मंगलवार को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को मामले में पेश होने और सहायता करने के लिए बुलाया था। बुधवार को पीठ ने एजी से संविधान के अनुच्छेद 323ए और 323बी के साथ-साथ कानूनों के तहत...

जांच के बाद दिया गया जाति प्रमाण पत्र रद्द करने की प्रक्रिया क्या है? नवनीत कौर राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
जांच के बाद दिया गया जाति प्रमाण पत्र रद्द करने की प्रक्रिया क्या है? नवनीत कौर राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 फरवरी) को सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के वकील से यह जांच करने के लिए कहा कि जब कोई प्रमाण पत्र दिया जाता है तो कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया क्या होगी। क्या सत्यापन रद्द किया जाएगा?जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ नवनीत कौर राणा की 2021 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे रही थी, जिसने राणा के जाति प्रमाण पत्र और जाति जांच समिति (सीएससी) के 2017 का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें...

हिरासत में हिंसा की जांच करेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई के बाद जांच के लिए बुलाए गए व्यक्ति की मेडिकलक जांच करने के लिए यूपी पुलिस को हाईकोर्ट के निर्देश को मंजूरी दी
'हिरासत में हिंसा की जांच करेंगे': सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई के बाद जांच के लिए बुलाए गए व्यक्ति की मेडिकलक जांच करने के लिए यूपी पुलिस को हाईकोर्ट के निर्देश को मंजूरी दी

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्देश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस को पुलिस स्टेशन में बुलाए गए व्यक्ति की रिहाई के बाद मेडिकल जांच कराने को कहा गया था।सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"हमने पाया कि पुलिस स्टेशन में लाए गए व्यक्ति की हिरासत में हिंसा पर रोक लगाने के लिए यह निर्देश जारी किया गया।"उत्तर प्रदेश राज्य ने हाईकोर्ट के पुलिस डायरेक्टर जनरल, लखनऊ, उत्तर प्रदेश को राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों के स्टेशन हाउस...