सुप्रीम कोर्ट

गवाहों से वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की जाती है तो उनके पूर्व बयान उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित किए जाने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से कहा
गवाहों से वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की जाती है तो उनके पूर्व बयान उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित किए जाने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से कहा

सोमवार (17 नवंबर) को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल ट्रायल में महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कमी को दूर करने के लिए बाध्यकारी निर्देश जारी किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने आदेश दिया कि सभी कार्यवाहियों में जहां किसी गवाह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ की जाती है, ट्रायल कोर्ट को गवाह के पूर्व बयानों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित करने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।अदालत ने कहा कि यह उपाय उस "प्रक्रियात्मक अनियमितता" को दूर करता है, जिससे...

Maharashtra Local Body Elections | आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, अधिकारियों ने हमारे आदेश को गलत समझा: सुप्रीम कोर्ट
Maharashtra Local Body Elections | 'आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, अधिकारियों ने हमारे आदेश को गलत समझा': सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता और राज्य के अधिकारियों ने उसके आदेश को गलत समझा।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।जस्टिस कांत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर ज़ोर देते हुए कि न्यायालय ने आरक्षण को 50% से अधिक करने की अनुमति देने वाला कोई आदेश पारित नहीं किया, कहा,"हम इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट हैं। जब हमने कहा कि चुनाव मौजूदा क़ानून के अनुसार ही होने चाहिए तो क़ानून...

गवाह को TIP से पहले अभियुक्त को देखने का अवसर मिला था तो आइडेंटिफिकेशन टेस्ट की कार्यवाही विश्वसनीय नहीं: सुप्रीम कोर्ट
गवाह को TIP से पहले अभियुक्त को देखने का अवसर मिला था तो आइडेंटिफिकेशन टेस्ट की कार्यवाही विश्वसनीय नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 नवंबर) को डकैती के दौरान एक वृद्ध व्यक्ति की हत्या के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया। न्यायालय ने घटना के लगभग आठ साल बाद एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी द्वारा की गई अभियुक्त की पहचान यह देखते हुए खारिज की कि उसकी कमज़ोर दृष्टि और बाद में गवाही में हुए सुधार के कारण यह विश्वास पैदा नहीं कर सकती।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा,"एक बार जब अभियुक्त-अपीलकर्ता की न्यायालय में की गई पहचान खारिज कर दी जाती है तो अभियुक्त को अपराध से जोड़ने के लिए कोई ठोस सबूत...

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक आपदा मानने पर विचार करने का निर्देश दिया, पीड़ितों को 10 लाख रुपये देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को मानव-वन्यजीव संघर्ष को 'प्राकृतिक आपदा' मानने पर विचार करने का निर्देश दिया, पीड़ितों को 10 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को मानव-वन्यजीव संघर्ष को "प्राकृतिक आपदा" के रूप में वर्गीकृत करने पर सक्रिय रूप से विचार करने और ऐसी घटनाओं में हुई प्रत्येक मानव मृत्यु के लिए 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह एकसमान मुआवज़ा अनिवार्य है, जैसा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास की सीएसएस योजना के तहत निर्धारित किया गया है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस एएस...

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में हुई पारिस्थितिक तबाही की भरपाई करें, अवैध निर्माण गिराएं : सुप्रीम कोर्ट का उत्तराखंड सरकार को सख्त आदेश
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में हुई पारिस्थितिक तबाही की भरपाई करें, अवैध निर्माण गिराएं : सुप्रीम कोर्ट का उत्तराखंड सरकार को सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार को कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में अवैध पेड़ कटान और अनधिकृत निर्माणों से हुई व्यापक पारिस्थितिक क्षति की तत्काल भरपाई करने और सभी अवैध संरचनाओं को गिराने के सख्त निर्देश दिए।ये आदेश मार्च 2024 के उस फैसले के अनुपालन में जारी किए गए, जिसमें रिज़र्व क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी आर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने अपने विस्तृत निर्देशों में कहा कि कॉर्बेट में अनधिकृत...

ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद हिरासत में लिए गए अभियुक्तों की रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जारी नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद हिरासत में लिए गए अभियुक्तों की रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जारी नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक अभियुक्त को उसकी लगातार चार ज़मानत याचिकाएं खारिज होने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से रिहा करने का निर्देश दिया गया। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को "कानून की दृष्टि से पूरी तरह से अज्ञात" और "इस न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरने वाला" बताते हुए राज्य की अपील स्वीकार कर ली।यह मामला भोपाल में 2021 में दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के एक मामले में आरोपी...

रिट कार्यवाही का लंबित रहना वैकल्पिक वैधानिक उपायों का लाभ न उठाने का कोई आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
रिट कार्यवाही का लंबित रहना वैकल्पिक वैधानिक उपायों का लाभ न उठाने का कोई आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका के लंबित रहने मात्र से वादियों को विशेष कानूनों के तहत प्रदान किए गए वैकल्पिक समयबद्ध उपायों का उपयोग करने के उनके दायित्व से मुक्ति नहीं मिलती।जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने एक वादी द्वारा दायर अपील खारिज की, जिसने अपनी संपत्ति की नीलामी को चुनौती देने के लिए तमिलनाडु राजस्व वसूली अधिनियम, 1864 के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय होने के बावजूद, एक रिट याचिका के माध्यम से मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प चुना। अपीलकर्ता ने...

केंद्र सरकार को बेनामी अधिनियम के मामलों की समीक्षा की अनुमति देने वाला 2024 का आदेश गणपति डीलकॉम के आधार पर लिया गया निर्णय गलत: सुप्रीम कोर्ट
केंद्र सरकार को बेनामी अधिनियम के मामलों की समीक्षा की अनुमति देने वाला 2024 का आदेश 'गणपति डीलकॉम' के आधार पर लिया गया निर्णय गलत: सुप्रीम कोर्ट

यह देखते हुए कि किसी पूर्व उदाहरण को बाद में खारिज करना समीक्षा का आधार नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें गणपति डीलकॉम मामले में 2022 के फैसले के आधार पर पारित आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था।2022 के फैसले को बाद में अक्टूबर, 2024 में भारत संघ बनाम मेसर्स गणपति डीलकॉम प्राइवेट लिमिटेड (आर.पी.(सी) संख्या 359/2023) मामले में तीन जजों की पीठ द्वारा समीक्षा के लिए...

समय सीमा बढ़ाने के लिए ट्रायल जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को न लिखें: सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया निर्देश
समय सीमा बढ़ाने के लिए ट्रायल जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को न लिखें: सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बार फिर उस प्रथा पर असंतोष जताया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर ट्रायल पूरी करने के लिए निर्धारित समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसी सभी संचार प्रक्रियाएँ हाईकोर्ट के माध्यम से ही भेजी जानी चाहिए।जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट के जज ने समय विस्तार मांगते हुए एक आवेदन दाखिल किया है, लेकिन उसमें आवश्यक विवरण नहीं दिए गए थे। इस पर जस्टिस महेश्वरी ने...

S.138 NI Act | चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए लगने वाले खर्च पर दामोदर प्रभु फैसले में दिशानिर्देश बाध्यकारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.138 NI Act | चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए लगने वाले खर्च पर 'दामोदर प्रभु फैसले' में दिशानिर्देश बाध्यकारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता को समझौते पर कोई आपत्ति नहीं थी और अपीलकर्ता राशि का भुगतान करने में असमर्थ था।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि दामोदर एस. प्रभु बनाम सैयद बाबालाल एच. फैसले में दिए गए दिशानिर्देश, जो NI Act में मामले के निपटारे के चरण के आधार पर जुर्माने लगाने का प्रावधान...

दक्षता और लाभ बढ़ाने के लिए सॉफ़्टवेयर ख़रीदने वाली कंपनी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
दक्षता और लाभ बढ़ाने के लिए सॉफ़्टवेयर ख़रीदने वाली कंपनी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत "उपभोक्ता" नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (13 नवंबर) को फैसला सुनाया कि लाभ कमाने से जुड़े 'व्यावसायिक उद्देश्य' से उत्पाद ख़रीदने वाले व्यक्ति को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत उपभोक्ता नहीं माना जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने अपीलकर्ता-सॉफ़्टवेयर कंपनी द्वारा प्रतिवादी-विक्रेता के विरुद्ध दायर उपभोक्ता शिकायत खारिज करने का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं के स्वचालन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दोषपूर्ण सॉफ़्टवेयर लाइसेंस को...

NDPS Act - वाणिज्यिक मात्रा में मादक पदार्थों के मामलों में धारा 37 की शर्तें पूरी न होने पर लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी ज़मानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
NDPS Act - वाणिज्यिक मात्रा में मादक पदार्थों के मामलों में धारा 37 की शर्तें पूरी न होने पर लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी ज़मानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि NDPS Act की धारा 37 के तहत अनिवार्य दोहरी शर्तों के पूरा न होने पर, मादक पदार्थों की वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े मामलों में मुकदमे में देरी या लंबी कैद अपने आप में ज़मानत देने का औचित्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के दो आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा जांच की गई कोकीन और मेथामफेटामाइन की बड़ी ज़ब्ती के आरोपी विगिन के. वर्गीस को ज़मानत दी गई।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने मामले को नए सिरे...

बीमाकर्ता यह कहकर दावा खारिज नहीं कर सकता कि उपकरण में क्षति का पता पॉलिसी जारी होने के बाद ही चला: सुप्रीम कोर्ट
बीमाकर्ता यह कहकर दावा खारिज नहीं कर सकता कि उपकरण में क्षति का पता पॉलिसी जारी होने के बाद ही चला: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (13 नवंबर) को एक कंपनी का बीमा दावा स्वीकार कर लिया, जिसका बॉयलर फट गया था। उसने बीमाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि बॉयलर में खराबी का पता बीमा पॉलिसी जारी होने के बाद ही चला था।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा,"क्षति या क्षरण का बाद में पता चलना बीमा दावे को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता, क्योंकि इससे बीमा अनुबंध का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।"इस...

Order 8 Rule 6A CPC | प्रतिदावा केवल वादी के विरुद्ध दायर किया जा सकता है, सह-प्रतिवादी के विरुद्ध नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
Order 8 Rule 6A CPC | प्रतिदावा केवल वादी के विरुद्ध दायर किया जा सकता है, सह-प्रतिवादी के विरुद्ध नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि प्रतिवादी द्वारा सह-प्रतिवादियों के विरुद्ध प्रतिदावा दायर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिदावा केवल वादी के विरुद्ध उस वाद-कारण पर दायर किया जा सकता है, जो वादी द्वारा दायर किए गए वाद-कारण से संबंधित या उससे संबद्ध हो।जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने झारखंड हाईकोर्ट के उस निर्णय को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें प्रतिवादी द्वारा सह-प्रतिवादी के विरुद्ध प्रतिदावा दायर करने की अनुमति दी गई।हाईकोर्ट का यह तर्क कि...

हाईकोर्ट द्वारा दर्ज किए गए बयान का बाद में वकील द्वारा खंडन नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट द्वारा दर्ज किए गए बयान का बाद में वकील द्वारा खंडन नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि हाईकोर्ट रिकॉर्ड कोर्ट हैं और उनकी कार्यवाही में जो कुछ भी दर्ज किया जाता है, उसे सही माना जाता है। बाद में पक्षकारों या वकील द्वारा उसका खंडन नहीं किया जा सकता।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 15 सितंबर, 2025 के आदेश के विरुद्ध दायर विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की।याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रथम अपीलीय न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया गया और उसके वकील द्वारा कथित रूप से दिए...

मोटर दुर्घटना दावा | पॉलिसी उल्लंघन के बावजूद बीमा कंपनियों को पीड़ितों को मुआवज़ा देना होगा, वाहन मालिक से भी वसूला जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना दावा | पॉलिसी उल्लंघन के बावजूद बीमा कंपनियों को पीड़ितों को मुआवज़ा देना होगा, वाहन मालिक से भी वसूला जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि बीमा कंपनियाँ मोटर दुर्घटना के मामलों में पीड़ितों को मुआवज़ा देने के अपने दायित्व से बच नहीं सकतीं भले ही पॉलिसी की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों के पास उसके बाद भी वाहन मालिक से मुआवज़ा वसूलने का अधिकार सुरक्षित है।जस्टिस संजय करोल और मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने एक दावेदार की अपील स्वीकार करते हुए और तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए टिप्पणी की, जिसमें केवल इसलिए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि मृतक पांच सीटों...

एग्जीक्यूटेशन याचिका में जजमेंट डेब्टर द्वारा उल्लंघन दर्शाने का दायित्व डिक्रीधारक का: सुप्रीम कोर्ट
एग्जीक्यूटेशन याचिका में जजमेंट डेब्टर द्वारा उल्लंघन दर्शाने का दायित्व डिक्रीधारक का: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 नवंबर) को कहा कि किसी भी डिक्री का एग्जीक्यूटिव केवल पूर्वधारणा के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह साबित करने का दायित्व डिक्रीधारक का है कि निर्णय ऋणी द्वारा डिक्री की शर्तों का उल्लंघन किया गया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने एक ऐसे मामले की सुनवाई करते हुए कहा, जिसमें एग्जीक्यूटिव कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में भगवान संगलप्पा स्वामी मंदिर के पूजा अधिकारों और प्रबंधन के संबंध में अपीलकर्ताओं और प्रतिवादियों के बीच 1933...

Nithari Killings | बाद में खारिज किए गए साक्ष्यों के आधार पर सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि बरकरार रखना अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन होगा: सुप्रीम कोर्ट
Nithari Killings | बाद में खारिज किए गए साक्ष्यों के आधार पर सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि बरकरार रखना अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन होगा: सुप्रीम कोर्ट

निठारी हत्याकांड मामले में सुरेंद्र कोली की अंतिम दोषसिद्धि रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब समान साक्ष्यों पर आधारित सभी संबंधित मामले टिकने योग्य नहीं पाए गए तो उसे बरकरार रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन होगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोली की दोषसिद्धि के साक्ष्य आधार को संबंधित मामलों में पहले ही अस्वीकार्य घोषित किया जा चुका है और समान रिकॉर्ड पर अलग-अलग परिणाम बनाए रखना मनमाना असमानता के बराबर होगा।कोर्ट ने कहा,संविधान का...

बिना किसी वैध कारण के एग्जीक्यूटिव कोर्ट्स को निष्पादन याचिकाओं को वापस लेने और पुनः दाखिल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
बिना किसी वैध कारण के एग्जीक्यूटिव कोर्ट्स को निष्पादन याचिकाओं को वापस लेने और पुनः दाखिल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्सीक्यूटिंग कोर्ट (Executing Courts) को निर्देश दिया कि वे बिना किसी वैध कारण के निष्पादन याचिकाओं को वापस लेने और पुनः दाखिल करने की अनुमति न दें। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथाओं से आदेशों के प्रवर्तन में अनावश्यक देरी होती है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने पेरियाम्मल (मृतकों के माध्यम से मृत्युदंड) एवं अन्य बनाम वी. राजमणि एवं अन्य मामले में अपने पूर्व के निर्णय से उत्पन्न आवेदनों पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट देश भर में निष्पादन...