ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध से जुड़े मामले में पूर्व बार अध्यक्ष को जमानत, गिरफ्तारी अवैध: हाइकोर्ट

Amir Ahmad

8 Jan 2026 2:43 PM IST

  • ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध से जुड़े मामले में पूर्व बार अध्यक्ष को जमानत, गिरफ्तारी अवैध: हाइकोर्ट

    मध्य प्रदेश हाइकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने बुधवार को हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को जमानत दी। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानून द्वारा अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

    जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में आरोपी को बताने की अनिवार्य शर्त का उल्लंघन किया। अदालत ने यह भी पाया कि अनिल मिश्रा को FIR दर्ज होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें शाम छह बजे से सात बजकर चालीस मिनट के बीच हिरासत में रखा गया, जबकि FIR शाम सात बजकर छप्पन मिनट पर दर्ज की गई और औपचारिक गिरफ्तारी रात ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर दर्शाई गई।

    अदालत ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। खंडपीठ ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए निर्देश दिया कि अनिल मिश्रा को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ग्वालियर की संतुष्टि के अनुसार रिहा किया जाए।

    मामले की पृष्ठभूमि

    नवंबर, 2025 में पीजी नजपांडे ने जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में जनहित याचिका दायर कर ग्वालियर कलेक्टर द्वारा हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना की अनुमति को चुनौती दी थी। याचिका में दावा किया गया कि अनिल मिश्रा ने सोलह नवंबर को प्रदर्शन का आह्वान किया, जिससे शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका थी। इस पर प्रधान पीठ ने राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने और जनजीवन व संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    इसके बाद अनिल मिश्रा ने ग्वालियर पीठ का रुख करते हुए यह दलील दी कि उन्हें FIR दर्ज होने से पहले गिरफ्तार किया गया और गिरफ्तारी के आधार भी उन्हें नहीं बताए गए। राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मिश्रा ने प्रधान पीठ के अंतरिम आदेश का उल्लंघन किया और उन्हें वहीं अपनी शिकायत रखनी चाहिए थी।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका इस सीमित प्रश्न पर सुनवाई योग्य है कि गिरफ्तारी कानूनी थी या नहीं। खंडपीठ ने यह भी कहा कि न्यायालयों की जिम्मेदारी है कि वह एक ओर आपराधिक कानून का पालन सुनिश्चित करें और दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दुरुपयोग से भी बचाव करें।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित घटना सीनियर पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक के कार्यालय के सामने हुई, इसके बावजूद पुलिस द्वारा निषेधाज्ञा के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रयास दिखाई नहीं दिए। अंततः गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए अदालत ने सशर्त जमानत दी और निर्देश दिया कि अनिल मिश्रा शांति व्यवस्था बनाए रखने संबंधी मजिस्ट्रेट के आदेशों का पालन करेंगे।

    इस प्रकार, हाइकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि गिरफ्तारी जैसे गंभीर कदम उठाते समय कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है।

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