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स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग कुशल श्रमिक के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग 'कुशल श्रमिक' के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि दुर्घटना के बाद 100% स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता से पीड़ित बेरोज़गार नाबालिग को भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत “कुशल श्रमिक (Skilled Workman)” के रूप में मुआवजा दिया जाना चाहिए।जस्टिस संदीप जैन ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाने संबंधी अपील पर सुनवाई करते हुए कहा—“भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल...

नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के आरोप पर FIR की मांग, झारखंड हाईकोर्ट में याचिका
नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित खून चढ़ाने के आरोप पर FIR की मांग, झारखंड हाईकोर्ट में याचिका

झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2025 में पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया से पीड़ित नाबालिग बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाया गया। याचिका में इस घटना को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एम. शादाब अंसारी ने बताया कि पीड़ित बच्चे थैलेसीमिया नामक आजीवन रहने वाली आनुवंशिक रक्त बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके इलाज के लिए उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाना पड़ता है। याचिका में...

सिर्फ दिल्ली में आदेश पारित होना रिट क्षेत्राधिकार के लिए पर्याप्त नहीं: निवारक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
'सिर्फ दिल्ली में आदेश पारित होना रिट क्षेत्राधिकार के लिए पर्याप्त नहीं': निवारक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 (PITNDPS Act) के तहत पारित एक निवारक हिरासत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भले ही उसके पास क्षेत्राधिकार (territorial jurisdiction) है, लेकिन यह मामला सुनने के लिए वह उपयुक्त मंच (forum conveniens) नहीं है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने कहा कि हिरासत आदेश दिल्ली में पारित किया गया था, लेकिन जिन आपराधिक मामलों के आधार पर यह हिरासत दी गई है, वे पश्चिम...

केवल दिल्ली में आदेश पारित होना रिट क्षेत्राधिकार के लिए पर्याप्त नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट ने निवारक हिरासत को चुनौती देने से किया इनकार
केवल दिल्ली में आदेश पारित होना रिट क्षेत्राधिकार के लिए पर्याप्त नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट ने निवारक हिरासत को चुनौती देने से किया इनकार

दिल्ली हाइकोर्ट ने नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी से संबंधित कानून के तहत पारित निवारक हिरासत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।हाइकोर्ट ने कहा कि भले ही संबंधित आदेश दिल्ली में पारित हुआ हो और तकनीकी रूप से उसके पास क्षेत्राधिकार मौजूद हो, लेकिन इस मामले में वही उपयुक्त मंच नहीं है जहां इस विवाद का निस्तारण किया जाना चाहिए।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि निवारक हिरासत का आदेश दिल्ली में पारित हुआ, लेकिन जिन आपराधिक मामलों के आधार पर यह...

लंबित आपराधिक मामलों वाले लोग अधिवक्ता बन सकते हैं या नहीं? मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी पीठ करेगी फैसला
लंबित आपराधिक मामलों वाले लोग अधिवक्ता बन सकते हैं या नहीं? मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी पीठ करेगी फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न एक बड़ी पीठ (Larger Bench) को संदर्भित किया है कि क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने पर उसे राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ता के रूप में नामांकित (enrol) किया जा सकता है या नहीं।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस आर. कलैमाथी की खंडपीठ ने यह मुद्दा बड़ी पीठ को भेजते हुए कहा कि अधिवक्ता अधिनियम (Advocates Act) हाईकोर्ट को नामांकन के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाने का अधिकार नहीं देता।कोर्ट ने यह भी नोट किया कि यद्यपि हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ (Full...

अनुशासन नियम लागू होने पर बिना विभागीय जांच संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गौहाटी हाइकोर्ट
अनुशासन नियम लागू होने पर बिना विभागीय जांच संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गौहाटी हाइकोर्ट

गौहाटी हाइकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी संविदा कर्मचारी की नियुक्ति में स्पष्ट रूप से वैधानिक अनुशासन और अपील नियम लागू किए गए तो कथित अनुशासनहीनता के आधार पर उसकी सेवा बिना विभागीय जांच के समाप्त नहीं की जा सकती।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति दंडात्मक मानी जाएगी और नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा।चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में संविदा पर नियुक्त परियोजना...

वसीयत के आधार पर नहीं मिल सकती अनुकंपा नियुक्ति, मृतक पर निर्भरता ही निर्णायक: इलाहाबाद हाइकोर्ट
वसीयत के आधार पर नहीं मिल सकती अनुकंपा नियुक्ति, मृतक पर निर्भरता ही निर्णायक: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मृत सरकारी कर्मचारी की वसीयत (विल) के आधार पर नहीं दिया जा सकता।हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित नियम, 1974 के तहत अनुकंपा नियुक्ति का आधार केवल यह होता है कि आवेदक मृतक कर्मचारी पर वास्तव में निर्भर था या नहीं, न कि यह कि वसीयत किसके पक्ष में बनाई गई।जस्टिस मनीष माथुर ने अपने फैसले में कहा कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मृतक की वसीयत के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता तय की जाए।उन्होंने कहा कि पंजीकृत...

प्रथम दृष्टया कोई आरोप नहीं: श्री श्री रविशंकर के खिलाफ कथित भूमि अतिक्रमण मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जांच पर लगाई रोक
प्रथम दृष्टया कोई आरोप नहीं: श्री श्री रविशंकर के खिलाफ कथित भूमि अतिक्रमण मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जांच पर लगाई रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के खिलाफ दर्ज कथित भूमि अतिक्रमण के मामले में चल रही जांच पर 21 जनवरी तक रोक लगाई।श्री श्री रविशंकर इस मामले में एक FIR में आरोपी बनाए गए, जो बेंगलुरु में सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़ी है।उल्लेखनीय है कि इससे एक सप्ताह पहले हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाने या कोई अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि शिकायत का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस...

RTE Act की कल्पना: जजों और रेहड़ी-पटरी वालों के बच्चे एक साथ पढ़ें, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देता है – सुप्रीम कोर्ट
RTE Act की कल्पना: जजों और रेहड़ी-पटरी वालों के बच्चे एक साथ पढ़ें, भाईचारे और समानता को बढ़ावा देता है – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 ( RTE Act) के तहत कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए निजी गैर-अनुदानित स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण की प्रभावी क्रियान्विति भारत की सामाजिक संरचना को बदलने की क्षमता रखती है और इसे एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने का एक सशक्त माध्यम है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस....

ईमानदार लोक सेवकों की आड़ में भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण : जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को क्यों असंवैधानिक ठहराया?
ईमानदार लोक सेवकों की आड़ में भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण : जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A को क्यों असंवैधानिक ठहराया?

सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17A को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि जांच या अन्वेषण शुरू करने से पहले पूर्व स्वीकृति की शर्त कानून के उद्देश्य के ही विपरीत है और यह प्रावधान ईमानदार लोक सेवकों की रक्षा करने के बजाय वास्तव में भ्रष्ट लोक सेवकों को बचाने का काम करता है।अपने पृथक निर्णय में जो कि जस्टिस के.वी. विश्वनाथन के साथ गठित पीठ के विभाजित फैसले का हिस्सा था जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि असली प्रश्न यह नहीं है कि धारा 17A के तहत स्वीकृति कौन...

आश्रित के पहले से नौकरी में होने पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
आश्रित के पहले से नौकरी में होने पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू नीति के अनुसार ही दी जा सकती है और यदि मृत कर्मचारी का कोई आश्रित पहले से नौकरी में है, तो ऐसी नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए मृत कर्मचारी के पुत्र और पत्नी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।मामले की पृष्ठभूमिसंबंधित कर्मचारी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में सबऑर्डिनेट इंजीनियर के पद पर कार्यरत था और दिसंबर 2018...

तलाक के समय पिता को सौंपे गए बेटे की कस्टडी पर बाद में श्रेष्ठ अधिकार का दावा नहीं कर सकती मां: गुजरात हाइकोर्ट
तलाक के समय पिता को सौंपे गए बेटे की कस्टडी पर बाद में 'श्रेष्ठ अधिकार' का दावा नहीं कर सकती मां: गुजरात हाइकोर्ट

गुजरात हाइकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें नाबालिग बेटे की कस्टडी की मांग कर रही मां की याचिका को खारिज कर दिया गया था।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के समय मां ने अपनी पूरी सहमति और समझ के साथ बेटे की कस्टडी पिता को सौंपी थी, ऐसे में वह बाद में यह कहकर “श्रेष्ठ कस्टडी अधिकार” का दावा नहीं कर सकती कि बच्चा कम उम्र का है और उसे मां के साथ ही रहना चाहिए।यह अपील उस फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें मां की स्थायी कस्टडी की मांग अस्वीकार करते हुए उसे केवल मुलाकात...

उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने हाईकोर्ट को न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों व कार्रवाई की जानकारी RTI के तहत देने का निर्देश दिया
उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने हाईकोर्ट को न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों व कार्रवाई की जानकारी RTI के तहत देने का निर्देश दिया

उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने एक अहम आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को निर्देश दिया है कि वे राज्य की अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए कदाचार संबंधी आरोपों और उन पर की गई या अनुशंसित कार्रवाई से जुड़ी जानकारी भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को उपलब्ध कराएं।यह आदेश मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने 1 जनवरी को पारित किया।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि लोक सूचना अधिकारी सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर यह सुनिश्चित करें कि...

क्या केंद्र सरकार द्वारा संदिग्ध वोटरों की नागरिकता तय होने तक वोट देने का अधिकार छीना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने SIR सुनवाई में ECI से पूछा
क्या केंद्र सरकार द्वारा संदिग्ध वोटरों की नागरिकता तय होने तक वोट देने का अधिकार छीना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने SIR सुनवाई में ECI से पूछा

राज्यों में चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) से पूछा कि क्या किसी व्यक्ति का वोट देने का अधिकार तब तक छीना जा सकता है, जब तक केंद्र सरकार नागरिकता का सवाल तय नहीं कर लेती।बेंच की ओर से यह सवाल ECI की इस दलील के जवाब में आया कि वह नागरिकता के मामले में 'जांच-पड़ताल' करने में सक्षम है। ECI ने यह भी कहा कि अगर कोई संदिग्ध मामला केंद्र सरकार के पास रेफरेंस के लिए पेंडिंग है, तब भी उसे रोल से...

आवारा कुत्ते सड़कों पर अनाथ बच्चों की रक्षा करते हैं, उन्हें सुरक्षित महसूस कराते हैं: सुप्रीम कोर्ट में वकील की दलील
आवारा कुत्ते सड़कों पर अनाथ बच्चों की रक्षा करते हैं, उन्हें सुरक्षित महसूस कराते हैं: सुप्रीम कोर्ट में वकील की दलील

आवारा कुत्तों के मामले में हस्तक्षेपकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी कि आवारा कुत्ते अनाथ बच्चों की "सड़कों पर आखिरी सुरक्षा पंक्ति" के तौर पर रक्षा करते हैं, और इसलिए, उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। वकील ने सुझाव दिया कि कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने के बजाय, अधिकारियों को अनाथों को शेल्टर देने की कोशिश करनी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे जारी रहेगी।अनाथ और कमजोर बच्चों का पक्ष रखते हुए...

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में 25% RTE कोटा को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, राज्यों को नियम बनाने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में 25% RTE कोटा को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, राज्यों को नियम बनाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 12(1)(c) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई निर्देश जारी किए, जिसमें अनिवार्य है कि प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को अपनी कुल संख्या का 25% मुफ्त शिक्षा के लिए एडमिशन देना होगा।कोर्ट ने कहा कि "पड़ोस के स्कूलों" की अवधारणा वर्ग, जाति और लिंग की बाधाओं को तोड़ने के लिए बनाई गई।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने फैसला सुनाते हुए इस बात पर जोर दिया...

IFS Cadre Allocation | होम स्टेट को इनसाइडर कैडर क्लेम करने के लिए पहली पसंद बताना ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
IFS Cadre Allocation | होम स्टेट को इनसाइडर कैडर क्लेम करने के लिए पहली पसंद बताना ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऑल इंडिया सर्विसेज़ कैडर एलोकेशन पॉलिसी के तहत अपने होम स्टेट कैडर में एलोकेशन चाहने वाले अधिकारी को अपने होम स्टेट को पहली पसंद के तौर पर बताना ज़रूरी है। सिर्फ़ होम स्टेट में सेवा करने की इच्छा ज़ाहिर करने या उसे निचली पसंद के तौर पर लिस्ट करने से कोई लागू करने योग्य अधिकार नहीं बनता।जस्टिस नवीन चावला और मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने कहा,“हमारे विचार से प्रतिवादी को उसके होम कैडर, यानी राजस्थान राज्य में इनसाइडर वैकेंसी के लिए सही ही नहीं माना गया, क्योंकि उसने इसे अपने...

BNSS की धारा 35 पुलिस को बिना रजिस्टर्ड केस के व्यक्तियों को बुलाने या पूछताछ करने का अधिकार नहीं देती: मद्रास हाईकोर्ट
BNSS की धारा 35 पुलिस को बिना रजिस्टर्ड केस के व्यक्तियों को बुलाने या पूछताछ करने का अधिकार नहीं देती: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुलिस के पास बिना रजिस्टर्ड केस के किसी व्यक्ति को बुलाने या उससे पूछताछ करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस सुंदर मोहन ने इस तरह डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा जारी नोटिस रद्द किया, जिसमें एक पत्रकार को बुलाया गया और उससे एक लेख के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसमें कथित तौर पर पुलिस के खिलाफ मानहानिकारक बयान थे। जज ने कहा कि यह धारा सिर्फ पुलिस को बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है और बिना केस दर्ज किए किसी व्यक्ति से पूछताछ...