स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग 'कुशल श्रमिक' के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Praveen Mishra

14 Jan 2026 3:38 PM IST

  • स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग कुशल श्रमिक के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि दुर्घटना के बाद 100% स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता से पीड़ित बेरोज़गार नाबालिग को भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत “कुशल श्रमिक (Skilled Workman)” के रूप में मुआवजा दिया जाना चाहिए।

    जस्टिस संदीप जैन ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाने संबंधी अपील पर सुनवाई करते हुए कहा—

    “भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल श्रमिक के आधार पर मुआवजा पाने का अधिकार है।”

    मामले की पृष्ठभूमि

    ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता को ₹5,03,310 का मुआवजा 7% वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था, जिसे दुर्घटनाग्रस्त ट्रक की बीमा कंपनी द्वारा अदा किया जाना था।

    बीमा कंपनी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पीड़ित को केवल 60% स्थायी दिव्यांगता हुई है, जिसे गलत तरीके से 80% मान लिया गया। वहीं पीड़ित ने मुआवजा बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि उसकी 100% कार्यात्मक दिव्यांगता हुई है, लेकिन ट्रिब्यूनल ने केवल 80% ही माना।

    पीड़ित ने बताया कि दुर्घटना में उसका दायां पैर घुटने से कट गया और बाएं पैर की दो उंगलियां भी काटनी पड़ीं, जिससे वह किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम करने में असमर्थ हो गया। चूंकि वह एक खलासी (हेल्पर) के रूप में ट्रक पर काम करता था, इसलिए उसकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो गई।

    कोर्ट का विश्लेषण

    कोर्ट ने पाया कि सीएमओ, प्रतापगढ़ द्वारा 60% दिव्यांगता का प्रमाणपत्र और मुंबई के B.Y.L. नायर अस्पताल द्वारा जारी 80% दिव्यांगता का प्रमाणपत्र — दोनों को किसी ने चुनौती नहीं दी है। साथ ही, यह भी माना गया कि पीड़ित शारीरिक श्रम पर आधारित काम करता था और उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 100% है।

    कोर्ट ने काजल बनाम जगदीश चंद, मास्टर आयुष बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, बेबी साक्षी ग्रेओला और हितेश नागजीभाई पटेल मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को 100% कार्यात्मक दिव्यांगता हो जाती है, तो उसकी आय का आकलन कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि अनुमानित (notional) रूप में।

    अंतिम आदेश

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर ₹16,59,510 कर दिया, जिस पर 7% वार्षिक ब्याज दावा दायर करने की तिथि से भुगतान तक देय होगा। यह राशि भी ट्रक की बीमा कंपनी द्वारा चुकाई जाएगी।

    इस प्रकार, दावाकर्ता की अपील स्वीकार कर ली गई।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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