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नशा विरोधी अभियान में हासिल लक्ष्यों के आधार पर पुलिस के प्रदर्शन का आकलन बर्बर स्थिति पैदा करेगा, निर्दोष लोगों को बलि का बकरा बनाया जा सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
न्यायालय ने पंजाब में देर से शुरू किए गए नशा विरोधी अभियान में पंजाब पुलिस की शक्ति के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताई, जिसमें सभी SSP और SHO को निर्धारित लक्ष्य दिए जाएंगे और उसके आधार पर उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"जहां तक पंजाब के वर्तमान परिदृश्य का सवाल है, नशा विरोधी अभियान भारतीय युवाओं को नुकसान पहुंचाने वाली बढ़ती समस्या से निपटने के लिए स्वागत योग्य कदम है, लेकिन ऐसे मामलों में जहां पुलिस अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य राज्यों के रिटायर जजों को सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए आवेदन करने से रोकने वाला नियम बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य राज्यों के रिटायर जजों को दिल्ली में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए आवेदन करने से रोकने वाले नियम की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए नियम 9बी की वैधता बरकरार रखी।नियम के अनुसार, रिटायर न्यायिक अधिकारी या दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में दस साल की सेवा के बाद स्वेच्छा से रिटायर होने वाले लोग किसी भी समय सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए अनुरोध पत्र...
NI Act की धारा 47 और 48 के प्रावधान
धारा 47 एवं 48 के अनुसारकोई लिखत जब खो जाता हैकोई लिखत अभिप्राप्त किया गया है।(क) अपराध से(ख) कपट से(ग) विधिविरुद्ध प्रतिफल से,ऐसा कब्जाधारी या पृष्ठांकिती देय लिखत के देय रकम पाने का हकदार नहीं होगा।जब तक कि ऐसा कब्जाधारी या पृष्ठांकिती सम्यक् अनुक्रम धारक नहीं है, या ऐसा कब्जाधारी या पृष्ठांकिती जिससे वह दावा करता है, सम्यक् अनुक्रम धारक है। धारा 58 की प्रयोज्यता धारा 47 एवं 48 पर धारा 47 एवं 45 का प्रारम्भ होने वाला वाक्य यह स्पष्ट करता है कि धारा 58 उक्त दोनों धाराओं पर एक सीमा के रूप में...
NI Act में Endorsement से Negotiation
वाहक को देय लिखत का पृष्ठांकन एक वाहक को देय लिखत के Negotiation के लिए पृष्ठांकन की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे वाहक को देय लिखत का Negotiation धारा 46 के अनुसार केवल परिदान के द्वारा पूर्ण हो जाता है। परन्तु विधि में किसी वाहक के देय लिखत के धारक को पृष्ठांकन करने से प्रतिबन्धित नहीं किया गया है। यदि इसका पृष्ठांकन किया जाता है तो तत्पश्चात् इसका परिदान किया जाना आवश्यक होगा, क्योंकि परिदान के बिना पृष्ठांकन पूर्ण नहीं होता है यद्यपि कि व्यवहार में एक वाहक लिखत के धारण को चेक का संदाय लेने के...
मानहानिकारक लेख की हाइपरलिंकिंग कुछ मामलों में पुनर्प्रकाशन के रूप में दायित्व को आकर्षित कर सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस प्रश्न पर निर्णय देते हुए निर्णय पारित किया कि किसी प्रकाशन की हाइपरलिंकिंग कब पुनर्प्रकाशन के बराबर होगी।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा,"यदि किसी प्रकाशन की हाइपरलिंकिंग इस तरह से की जाती है कि वह ऐसी सामग्री को संदर्भित करती है, जो मानहानिकारक अर्थ व्यक्त करती है, न कि इसलिए कि कोई संदर्भ बनाया गया, बल्कि इसलिए कि यदि संदर्भ में समझा जाए तो यह वास्तव में कुछ मानहानिकारक व्यक्त करती है तो यह पुनर्प्रकाशन के बराबर होगी।"न्यायालय ने कहा कि हाइपरलिंकिंग के तरीके और...
पूर्वानुमानित अपराध लंबित होने पर ED उन व्यक्तियों को भी समन कर सकता है, जिनका नाम अनुसूचित अपराध में नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत समन जारी करने के लिए यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित (पूर्वानुमानित) अपराध लंबित है तो उसे उसमें आरोपी होने की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस एस रचैया की खंडपीठ ने शिवमोगा डीसीसी बैंक के पूर्व अध्यक्ष आर एम मंजूनाथ गौड़ा द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें एकल जज के आदेश को चुनौती दी गई थी। उक्त आदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन रद्द करने की मांग करने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तमिल फिल्म 'वीरा दीरा सूरन' की रिलीज पर लगाई रोक, यह रही वजह
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (27 मार्च) को विक्रम अभिनीत तमिल फिल्म 'वीरा दीरा सूरन' की रिलीज को चार सप्ताह के लिए टाल दिया, जो आज यानी 27 मार्च को रिलीज होने वाली थी। कोर्ट ने उक्त रोक फिल्म के निर्माता द्वारा असाइनमेंट एग्रीमेंट के उल्लंघन के कारण लगाई।फिल्म के असाइनी के पक्ष में और निर्माता के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा देते हुए जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा,"वर्तमान मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए कि प्रतिवादी असाइनमेंट एग्रीमेंट के उल्लंघन में काम कर रहा है, यह न्यायालय संतुष्ट है कि...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नांदेड़ और संभाजीनगर के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच के लिए समिति गठित की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई मौतों से संबंधित एक स्वप्रेरित जनहित याचिका में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति जिलों के सरकारी अस्पतालों का दौरा कर वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे और चिकित्सा सुविधाओं पर रिपोर्ट तैयार करेगी। चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एम.एस. कर्णिक की खंडपीठ ने समिति को यह सुझाव देने का निर्देश दिया है कि शिशु मृत्यु की घटनाओं को रोकने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपाय क्या होने चाहिए।अक्टूबर 2023 में,...
NDPS Act | कानून न्याय के उद्देश्य को आगे बढ़ाए बिना जब्त वाहन को अनिश्चित काल तक रखने की अनुमति नहीं देता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने दोहराया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के तहत प्रावधान बिना किसी उचित कारण के जब्त वाहन को अनिश्चित काल तक रखने का आदेश नहीं देते, खासकर तब जब ऐसा रखने से वाहन का क्षरण और मूल्यह्रास होता है।संरचनात्मक और आर्थिक क्षरण को रोकने के लिए वाहन की अंतरिम रिहाई के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही की एकल पीठ ने कहा -“कानून संपत्ति को अनिश्चित काल तक रखने की अनुमति नहीं देता, जब उसकी हिरासत न्याय के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए...
बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन सार्वजनिक हित को प्रभावित करता है, अदालतों को अंतरिम निषेधाज्ञा देने में तत्पर होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) के स्पष्ट उल्लंघन के मामलों में, न केवल प्रभावित पक्ष के हितों की सुरक्षा के लिए बल्कि सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए भी तत्काल निषेधाज्ञा (Injunction Order) जारी किया जाना आवश्यक है।जस्टिस अनूप कुमार धंड की पीठ ने इस संदर्भ में राजनी प्रोडक्ट्स द्वारा दायर अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) याचिका को स्वीकार कर लिया।याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि प्रतिवादी उनकी पंजीकृत “Swastik” ट्रेडमार्क का लगभग समान और...
भोपाल गैस त्रासदी: मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को यूनियन कार्बाइड के विषाक्त कचरे के 72 दिनों में निपटान का दिया भरोसा
मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार (27 मार्च) को हाईकोर्ट को सूचित किया कि वह अब निष्क्रिय हो चुकी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री द्वारा उत्पन्न विषाक्त कचरे का निपटान 72 दिनों की अवधि में कर सकती है—पिथमपुर सुविधा केंद्र में इसे जला कर।राज्य ने एक हलफनामा दायर कर बताया कि पिछले महीने हाईकोर्ट द्वारा 30 मीट्रिक टन कचरे के निपटान के लिए दी गई अनुमति के तहत किए गए परीक्षण सफल रहे, और शेष कचरे का निपटान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में, 270 किलोग्राम...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'अनदेखी' सीरीज की अवैध स्ट्रीमिंग करने वाली वेबसाइटों पर स्थायी प्रतिबंध लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने Applause Entertainment Private Limited के पक्ष में एक डायनेमिक इंजंक्शन जारी किया है और कई अवैध वेबसाइटों को "अनदेखी (Undekhi)" सीरीज को गैरकानूनी रूप से स्ट्रीमिंग और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने से रोक दिया है। यह सीरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म 'SonyLIV' पर प्रीमियर हुई थी।जस्टिस अमित बंसल ने पाया कि प्रतिवादी वेबसाइटें Applause Entertainment से कोई वैध लाइसेंस या प्राधिकरण प्राप्त किए बिना ही सीरीज को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा रही थीं।कोर्ट ने कहा, "उपरोक्त विश्लेषण से यह...
भारत में प्रजनन अधिकार: मानसिक स्वास्थ्य और गर्भपात कानून का अनिश्चित अंतर्संबंध
गर्भपात का अधिकार लंबे समय से संवैधानिक गारंटी, नैतिक दुविधाओं और चिकित्सा न्यायशास्त्र के संगम पर स्थित है। बार-बार, गर्भपात कानूनों ने समाज को प्रो-चॉइस और प्रो-लाइफ गुटों में विभाजित किया है। इस मुद्दे के नैतिक ढांचे से यह विभाजन और भी बढ़ जाता है, जो अक्सर गर्भपात को कलंकित करने और प्रतिबंधात्मक नीतियों को लागू करने की ओर ले जाता है। भारत में, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 (इसके बाद, 'एमटीपी एक्ट') और इसके बाद के संशोधनों ने एक मध्य-मार्ग बनाने की कोशिश की; गर्भपात तक पहुंच के...
क्या इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने पिछले 5 सालों में गरीबों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल पर यह आरोप लगाया गया कि वह सरकारी जमीन के पट्टे के तहत अपने दायित्वों के तहत गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया नहीं करा रहा है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से अस्पताल के रिकॉर्ड की संयुक्त जांच करने को कहा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि पिछले 5 सालों में अस्पताल में कितने गरीब मरीजों का इलाज किया गया।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए दिल्ली सरकार और केंद्र की संयुक्त समिति से निम्नलिखित पर...
NDPS Act | सार्वजनिक स्थानों पर भी निजी वाहन की तलाशी के लिए 72 घंटों के भीतर गुप्त सूचना लिखनी जरूरी: पीएंडएच हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा प्राप्त गुप्त सूचना को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया गया, जो कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 41(2) के साथ-साथ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 42 की भी आवश्यकता है। जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने कहा, "जहां एनडीपीएस अधिनियम की धारा 42 के तहत गुप्त सूचना प्राप्त होती है, तो सार्वजनिक स्थान/परिवहन में भी निजी वाहन की तलाशी के लिए एनडीपीएस अधिनियम की...
क्या संदेहजनक परिस्थितियों के आधार पर वसीयत को अमान्य किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्णलता बनाम कलावती मामले में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act, 1925) के तहत वसीयत की वैधता (Validity) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया। इस मामले में मुख्य प्रश्न यह था कि क्या वसीयत संदिग्ध परिस्थितियों से ग्रस्त थी और क्या इसे रद्द (Invalidate) किया जाना चाहिए।यह निर्णय वसीयत से जुड़े कानूनी सिद्धांतों (Legal Principles) पर प्रकाश डालता है, जैसे कि वसीयत को मान्यता देने के लिए क्या आवश्यक शर्तें होती हैं और कब इसे चुनौती दी जा सकती है। अदालत...
डॉ. पायल तड़वी की मां ने प्रदीप घरात को SPP के पद से हटाने के राज्य के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, कहा कि वे प्रभावी ढंग से मुकदमा चला रहे थे
दिवंगत डॉ. पायल तड़वी की मां ने डॉ. पायल की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मामले में प्रदीप घरात को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) के पद से हटाने को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डॉ. पायल तड़वी की मां और मुखबिर अबेदा तड़वी ने 7 मार्च की सरकारी अधिसूचना के जरिए एसपीपी घरात को मामले से हटाने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि घरात को बिना किसी कारण के और अभियोजन पक्ष के मामले का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व करने के बावजूद मामले से...
गलत तरीके से गिरफ्तारी पर मुआवजा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 399
व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) प्रत्येक लोकतांत्रिक समाज का एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है। भारत में, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत, प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Life and Personal Liberty) प्राप्त है। यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को कानूनन उचित प्रक्रिया (Legal and Just Procedure) के बिना स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।लेकिन कई बार गलत गिरफ्तारी (Wrongful Arrest) हो जाती है, जो या तो गलत जानकारी, व्यक्तिगत दुश्मनी,...
धारा 15 राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001: किरायेदार बेदखली के लिए प्रक्रिया
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच संबंधों को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम की धारा 15 (Section 15) में किरायेदार को बेदखल (Eviction) करने की प्रक्रिया बताई गई है।यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से बताती है कि मकान मालिक या संपत्ति पर अधिकार (Possession) का दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति किस तरह किरायेदार को कानूनी रूप से हटाने के लिए न्यायाधिकरण (Tribunal) में याचिका (Petition) दायर कर सकता है। किरायेदार बेदखली के...
धारा 7, 8 और 9 राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 के तहत बाज़ार मूल्य निर्धारण, सेट ऑफ और काउंटर क्लेम
बाज़ार मूल्य निर्धारण (Determination of Market Value) - धारा 7राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) में यह निर्धारित किया गया है कि किसी संपत्ति (Property) का बाज़ार मूल्य (Market Value) कैसे तय किया जाएगा, क्योंकि न्यायालय शुल्क (Court Fees) का निर्धारण इसी पर निर्भर करता है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि संपत्तियों का मूल्यांकन न्यायसंगत तरीके से किया जाए। मूल्यांकन की तिथि (Date for Determining Market Value) धारा 7(1)...




















