ताज़ा खबरे
सुप्रीम कोर्ट ने विवादित वक्फ भूमि को अतिक्रमण के रूप में गैर-अधिसूचित करने पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के उन प्रावधानों पर रोक लगाई, जो सरकार को विवादित वक्फ संपत्तियों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के रूप में गैर-अधिसूचित करने का अधिकार देते हैं।हालांकि, अदालत ने अधिनियम की धारा 3सी के उन प्रावधानों पर रोक नहीं लगाई, जो सरकार के एक नामित अधिकारी (जो कलेक्टर के पद से ऊपर का होता है) को यह जांच करने की अनुमति देते हैं कि क्या वक्फ संपत्ति सरकारी भूमि पर स्थित है। अदालत ने अधिनियम की धारा 3सी(2) के उस प्रावधान पर रोक लगाई, जिसके अनुसार विवादित संपत्ति को तब तक...
नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार, बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों को अनदेखा कर अनुरोध खारिज नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को अपना नाम बदलने या अपनाने का अधिकार संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों पर विचार किए बिना मनमाने ढंग से ऐसे अनुरोधों को खारिज नहीं कर सकता।जस्टिस संजय धर की पीठ मोहम्मद हसन (पहले राज वली) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने बोर्ड द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसके हाई स्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों में नाम...
BREAKING| वंतारा द्वारा पशुओं का अधिग्रहण नियमों के अनुसार हुआ: सुप्रीम कोर्ट ने SIT रिपोर्ट स्वीकार की
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि रिलायंस फाउंडेशन द्वारा जामनगर, गुजरात स्थित वंतारा (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर) में पशुओं का अधिग्रहण प्रथम दृष्टया नियामक तंत्र के दायरे में है। न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को विभिन्न आरोपों की जांच के लिए कोई गड़बड़ी नहीं मिली, जिसमें भारत और विदेशों से पशुओं, विशेषकर हाथियों, के अधिग्रहण में सभी कानूनों का पालन किया गया या नहीं, शामिल है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ ने कहा कि उन्होंने पूर्व सुप्रीम...
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV कैमरे बंद होने पर कंट्रोल रूम बनाने का प्रस्ताव दिया, आदेश सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें उसने राजस्थान राज्य में CCTV कैमरों की कमी और पुलिस हिरासत में मौतों से संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि वह पुलिस थानों में CCTV कैमरों की बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतंत्र निगरानी पर विचार कर रही है, क्योंकि अगर CCTV कैमरे अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में लगाए भी गए हैं तो भी अधिकारी उन्हें बंद कर सकते हैं।सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे की सुनवाई के बाद...
'राजनीतिक दल में शामिल होना कोई नौकरी नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को POSH Act से बाहर रखने का आदेश बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें कहा गया था कि POSH Act 2013 के अनुसार यौन उत्पीड़न की शिकायतों के समाधान के लिए राजनीतिक दलों के लिए आंतरिक शिकायत समिति गठित करना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि किसी राजनीतिक दल में शामिल होने वाले लोग उसके अधीन नहीं होते।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई...
CCI की जांच के खिलाफ एशियन पेंट्स को झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी पक्ष को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा धारा 26(1) के तहत शुरुआती राय बनाने के चरण में मौखिक या लिखित सुनवाई का अंतर्निहित अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आदेश प्रशासनिक प्रकृति का होता है और सुनवाई देना या न देना CCI के विवेक पर निर्भर करता है।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ एशियन पेंट्स लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एशियन पेंट्स ने CCI के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें महानिदेशक...
पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक हिंदू व्यक्ति अपने दादा की संपत्ति में तब तक हिस्सा नहीं मांग सकता, जब तक कि उसके माता-पिता जीवित हों। कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 8 का हवाला देते हुए यह बात कही।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने हिंदू महिला द्वारा अपने पिता और बुआ के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। महिला ने अपने दादा की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति में हिस्सा मांगा था।महिला ने तर्क दिया कि चूंकि संपत्ति उसके दादा की स्व-अर्जित है, इसलिए यह पैतृक...
'उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ' को समाप्त करना प्रथम दृष्टया मनमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के उस प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें 'उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ' की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया था।"उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ" एक ऐसी अवधारणा है, जो किसी संपत्ति को औपचारिक समर्पण विलेख के माध्यम से नहीं, बल्कि धार्मिक या धार्मिक उद्देश्य के लिए संपत्ति के दीर्घकालिक, निरंतर सार्वजनिक उपयोग के माध्यम से वक्फ के रूप में मान्यता देती है।2025 के संशोधन ने मूल वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 3(r)(i) को हटा दिया, जिसमें "उपयोगकर्ता...
'यह एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है': मैसूरु दशहरा समारोह में बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ याचिकाएं खारिज
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को मैसूरु के आगामी दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए बुकर पुरस्कार विजेता और लेखिका बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि नामित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सी एम जोशी की खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद कहा,"हम यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि राज्य द्वारा आयोजित समारोह में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को अनुमति देना याचिकाकर्ताओं के किसी कानूनी या संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है या यह भारत के...
MV Act की धारा 174 के अंतर्गत निष्पादन याचिकाओं पर 12 वर्ष की परिसीमा अवधि लागू: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों द्वारा मोटर वाहन अधिनियम 1988 (MV Act) की धारा 174 के अंतर्गत मुआवज़े की वसूली हेतु दायर की गई निष्पादन याचिकाएं परिसीमा अधिनियम 1963 के अंतर्गत बारह वर्ष की सीमा अवधि के अधीन हैं।अदालत ने कहा कि यद्यपि MV Act में कोई विशिष्ट परिसीमा खंड नहीं है, फिर भी सामान्य परिसीमा कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,"निम्नलिखित अदालत द्वारा दिए गए निष्कर्ष कि MV Act की धारा 174 के अंतर्गत आवेदन किसी भी समय दायर किया जा...
दुकानदार किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट ने नई उचित मूल्य की दुकानें खोलने के खिलाफ याचिकाएं खारिज कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा एक ही क्षेत्र में नई उचित मूल्य की दुकानें (Fair Price Shops- FPS) खोलने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दुकान मालिक किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस सुनील बेनिवाल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नई FPS खोलना सरकार का नीतिगत निर्णय है। फिर जो लोग 20 साल से FPS चला रहे हैं, वे किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।अदालत ने आगे कहा कि कुछ FPS में 500 से कम राशन कार्ड धारक हैं, जबकि...
एक मुस्लिम महिला तलाक के बाद भी CrPC की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण मांग सकती है
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि एक मुस्लिम महिला तलाक के बाद भी धारा 125 CrPC के तहत अपने पति से भरण-पोषण (maintenance) मांग सकती है, अगर तलाक के बाद इद्दत अवधि में उसके भविष्य के लिए पति ने “उचित और न्यायसंगत प्रावधान” नहीं किया।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें एक मुस्लिम पुरुष को अपनी पत्नी को महीने ₹7,000 देने का निर्देश दिया गया था। पति ने दलील दी थी कि उनकी शादी आपसी सहमति (mubarat) से खत्म हो गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।मामले की जानकारी: पत्नी ने...
BREAKING| Waqf Amendment Act 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों का नामांकन बरकरार रखा, इन प्रावधानों पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने (14 सितंबर) वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने निम्नलिखित प्रावधानों में हस्तक्षेप किया-1. धारा 3(1)(आर) के प्रावधान, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए 5 साल तक इस्लाम का पालन करना आवश्यक है, उसको राज्य सरकारों द्वारा इस शर्त के निर्धारण के संबंध में नियम बनाने तक के लिए स्थगित कर दिया गया।2. सरकार के नामित अधिकारी को यह तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधान पर रोक लगा दी गई...
सरकारी शिक्षकों को मुस्लिम विवाह रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करने से रोकने की चुनौती खारिज
उड़ीसा हाईकोर्ट ने सरकारी/सहायता प्राप्त स्कूलों के कार्यरत शिक्षकों को मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करने हेतु जारी किए गए लाइसेंस रद्द करने/निरस्त करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली कई रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।जस्टिस दीक्षित कृष्ण श्रीपाद ऐसे शिक्षकों द्वारा शिक्षण के प्रति "पूर्ण प्रतिबद्धता" दिखाने की व्यवहार्यता को लेकर आशंकित थे, इसलिए उन्होंने कहा -"उन्हें [रजिस्ट्रार] को कई रजिस्टर/पुस्तकों का रखरखाव और अपडेट करना होता है। उन्हें पक्षकारों और गवाहों...
मजिस्ट्रेट को BNSS की धारा 358 के तहत अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 358 (पहले CrPC की धारा 319) किसी मजिस्ट्रेट को किसी अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं देती।BNSS की धारा 358 अदालत को ऐसे किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने का अधिकार देती है, जो अभियुक्त नहीं है। हालांकि, साक्ष्यों से किसी अपराध का दोषी प्रतीत होता है।हालांकि, जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का प्रयोग केवल जांच या सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है (संज्ञान के चरण में नहीं)।इस मामले में शिकायतकर्ता ने...
राष्ट्रपति का संदर्भ | उठाए गए मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संदर्भित 14 प्रश्नों पर राष्ट्रपति का संदर्भ 10 दिनों की सुनवाई के बाद 11 सितंबर को समाप्त हुआ।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई,जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पांच-जजों की पीठ तमिलनाडु मामले में दिए गए फैसले के एक महीने बाद दिए गए संदर्भ पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने 10 विधेयकों को "मान्य स्वीकृत" घोषित किया था। पीठ ने कहा था कि राज्यपाल ने 2020...
अपील का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, विधायिका अपराध के आधार पर अपीलीय फॉर्म निर्धारित कर सकती है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि अपील का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, मौलिक नहीं। इसलिए विधायिका अपराध के विषय के आधार पर अपीलीय मंच निर्धारित कर सकती है।अदालत ने कहा,"इस तर्क के संबंध में कि अभियुक्त अपीलीय मंच खो देता है, यह न्यायालय इसे निराधार पाता है। अपील का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है; यह विशुद्ध रूप से विधायिका द्वारा निर्मित वैधानिक अधिकार है। विधायिका विषय की प्रकृति के आधार पर कुछ मामलों में जानबूझकर उच्चतर अपीलीय मंच का प्रावधान कर सकती है।"अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम | अदालत से प्रमाणित वसीयत को राज्य चुनौती नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया कि यदि किसी हिंदू पुरुष ने वसीयत (Will) बनाई है, जो अदालत द्वारा वैध घोषित की जा चुकी है और जिसे प्रोबेट (Probate) भी मिल चुका है, तो राज्य सरकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 29 के तहत एस्कीट (Escheat) के सिद्धांत का उपयोग नहीं कर सकती।यह फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने दिया। मामला खेतीड़ी (राजस्थान) के राजा बहादुर सरदार सिंह की वसीयत से जुड़ा है, जिनका निधन 1987 में हुआ था। वसीयत (दिनांक 30 अक्टूबर, 1985) के...
वादी को CPC के तहत प्रतिवाद दायर करने का कोई निहित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी द्वारा प्रतिवाद दायर करना केवल न्यायिक रूप से स्वीकृत है और यह पक्षकार का वैधानिक अधिकार नहीं है।प्रतिवाद, जिसे प्रत्युत्तर भी कहा जाता है, वादी द्वारा दीवानी मुकदमे में प्रतिवादी के लिखित बयान के जवाब में दायर किया जाता है - अपना रुख स्पष्ट करने या प्रतिवादी के दावों का खंडन करने के लिए।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा,"सिविल प्रक्रिया संहिता प्रतिवाद दायर करने की परिकल्पना नहीं करती है। हालांकि यह न्यायिक रूप से स्वीकृत है कि एक बार प्रतिवाद रिकॉर्ड में दर्ज...
गोल्ड तस्करी मामले में ताइक्वांडो खिलाड़ी को राहत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2022 में थाईलैंड में आयोजित चैंपियनशिप से देश लौटते समय अपने कोच के कहने पर कथित तौर पर सोने की तस्करी में शामिल 19 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर के ताइक्वांडो खिलाड़ी को राहत प्रदान की।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने पाया कि सोने की चेन और चांदी की परत चढ़ी अंगूठी याचिकाकर्ता और टीम के अन्य सदस्यों को कोच ने ही सौंपी थी।अदालत ने कहा,"यद्यपि याचिकाकर्ता उक्त सामान ले जाने से इनकार कर सकता था, लेकिन यह देखते हुए कि सतविंदर सिंह उसके कोच हैं और याचिकाकर्ता कम उम्र...




















