भूख, थकान और शारीरिक असमर्थता के कारण फैसला सुरक्षित: इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनवाई पूरी कर रखा निर्णय
Amir Ahmad
28 Feb 2026 12:15 PM IST

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक ऐसे मामले में, जिसकी शीघ्र सुनवाई का निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया, फैसला सुरक्षित रख लिया।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने खुले न्यायालय में स्पष्ट कहा कि वे भूख, थकान और शारीरिक असमर्थता के कारण निर्णय लिखवाने की स्थिति में नहीं हैं।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कार्यभार का उल्लेख करते हुए कहा,
“आज 92 नए मामले 101 नियमित मामले 39 नई विविध आवेदन और अतिरिक्त अथवा सूचीबद्ध न किए गए सूची-एक दो और तीन में तीन मामले सूचीबद्ध है। केवल नए मामलों में क्रम संख्या 29 तक ही सुनवाई हो सकी। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए इस मामले की सुनवाई शाम 4 बजकर 15 मिनट पर प्रारंभ की गई और 7 बजकर 10 मिनट पर समाप्त हुई।”
फैसला सुरक्षित रखते हुए उन्होंने कहा,
“मैं स्वयं को भूखा, थका हुआ और निर्णय लिखवाने के लिए शारीरिक रूप से असमर्थ महसूस कर रहा हूं इसलिए निर्णय सुरक्षित रखा जाता है।”
यह मामला ऋण वसूली अधिकरण द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती से संबंधित है। पहले हाइकोर्ट ने उस आदेश को निरस्त कर मामले को पुनर्विचार के लिए अधिकरण को वापस भेज दिया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां हाइकोर्ट का पूर्व आदेश निरस्त कर यह निर्देश दिया गया कि मामले का निपटारा यथासंभव छह माह के भीतर किया जाए। इसके बाद प्रकरण पुनः हाइकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ।
मामले की दो बार स्थगन के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा शीघ्र निस्तारण हेतु चिह्नित मामलों की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया। इसी कारण अदालत ने नियमित समयावधि समाप्त होने के बाद शाम चार बजे के पश्चात मामले को पुकार कर सुनवाई की और विस्तृत बहस के उपरांत निर्णय सुरक्षित रख लिया।

