'द केरल स्टोरी 2' के खिलाफ नई जनहित याचिका पर सुनवाई से हाइकोर्ट का इनकार, दूसरी पीठ पर टिप्पणी करने पर याचिकाकर्ता को फटकार
Amir Ahmad
5 March 2026 2:07 PM IST

केरल हाइकोर्ट ने गुरुवार को फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' के टाइटल को बदलने की मांग वाली नई जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि इसी मुद्दे से जुड़े मामले पहले से ही एक अन्य समन्वय पीठ के समक्ष लंबित हैं, इसलिए इस चरण में हस्तक्षेप करना न्यायिक अनुशासन के खिलाफ होगा।
चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि इस याचिका पर अभी कोई आदेश दिया जाता है तो उससे उस आदेश का प्रभाव कम हो जाएगा, जिसके तहत दूसरी पीठ ने फिल्म की रिलीज की अनुमति दी है।
खंडपीठ ने कहा,
“एक रिट याचिका लंबित है और एक अपील भी लंबित है। ऐसे में इस जनहित याचिका में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। जिन मुद्दों को आप उठा रहे हैं। वे पहले से ही लंबित मामलों में विचाराधीन हैं। इसलिए बेहतर है कि वही पीठ इस मामले को भी सुने।”
अदालत ने संकेत दिया कि इस याचिका को लंबित अपील के साथ जोड़कर उसी पीठ के सामने रखा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार भी लगाई। याचिका में यह उल्लेख किया गया था कि फिल्म की रिलीज की अनुमति देने वाली समन्वय पीठ ने मामले को अभूतपूर्व तरीके से लिया था।
चीफ जस्टिस सेन ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी दूसरी समन्वय पीठ पर इस तरह की टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा,
“यदि आप उस आदेश से असंतुष्ट हैं तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। एक खंडपीठ बैठकर दूसरी समन्वय पीठ की टिप्पणी पर फैसला नहीं दे सकती। आप बिना पूरी जानकारी के ऐसे ढीले बयान कैसे दे सकते हैं? यह अदालत की संस्था पर आक्षेप है।”
चीफ जस्टिस ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी टिप्पणियां अवमानना की कार्यवाही का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने कहा,
“आपको संस्था का सम्मान करना चाहिए। हम आते-जाते रहेंगे, लेकिन संस्था बनी रहेगी। आप निर्णय की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन जज या पीठ पर आक्षेप नहीं लगा सकते।”
इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांग ली और कहा कि यह अनजाने में हुई गलती थी। अदालत ने उन्हें याचिका वापस लेने और आपत्तिजनक पैरा हटाकर नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी।
पिछले महीने फिल्म की रिलीज को लेकर हाइकोर्ट में तेजी से घटनाक्रम हुआ था। एकल पीठ ने फिल्म के टीजर में मौजूद कुछ दृश्यों को देखते हुए साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका जताते हुए रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई।
इसके खिलाफ निर्माता ने अपील दायर की थी। इसके बाद खंडपीठ ने आपात सुनवाई में रोक हटाते हुए कहा कि फिल्म को प्रमाणित करने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने पूरी फिल्म देखी है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि बिना विचार के प्रमाणन दिया गया।
नई जनहित याचिका में केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश देने की मांग की गई कि फिल्म के शीर्षक से “केरल” या “केरलम” शब्द हटाया जाए, क्योंकि इससे राज्य और उसके लोगों की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
याचिका में यह भी मांग की गई कि फिल्म के प्रदर्शन के समय यह स्पष्ट अस्वीकरण दिखाया जाए कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है और केरल को आतंकवाद का केंद्र बताने या पूरे देश में शरीयत कानून लागू करने जैसे दावों का कोई आधिकारिक या प्रमाणित आधार नहीं है।
साथ ही केंद्र सरकार और प्रमाणन बोर्ड से यह भी अनुरोध किया गया कि फिल्मों के शीर्षक और प्रचार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं, ताकि किसी राज्य, क्षेत्र, जाति या धार्मिक समुदाय को अपमानित या घृणा का लक्ष्य न बनाया जाए।

