हाईकोर्ट
[Sec.38 आर्म्स एक्ट] शस्त्र अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय अपराध हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 30 के तहत उसके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करने वाले एक आरोपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता-आरोपी ने तर्क दिया कि अदालत की एक समन्वय पीठ ने फैसला सुनाया था कि शस्त्र अधिनियम की धारा 30 और 35 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय थे।याचिका को खारिज करते हुए, जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की सिंगल जज बेंच ने कहा, "[उस अवसर पर] शस्त्र अधिनियम की धारा 38 को इस कोर्ट के संज्ञान में नहीं लाया गया था और इसलिए, इस...
सरकारी सुविधा के बजाय निजी अस्पताल में इलाज के लिए आरोपी की प्राथमिकता जमानत देने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने तेजाब हमले के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है और उसने अनिवार्य सरकारी सुविधा के बजाय निजी अस्पताल में इलाज कराने की मांग की थी। इसमें जोर दिया गया कि डीडीयू अस्पताल जैसे सरकारी अस्पताल हिरासत में रहने वालों सहित सभी रोगियों को विशेष सेवाओं सहित व्यापक चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए बाध्य हैं।कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सुविधाओं में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के व्यापक स्पेक्ट्रम को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, चिकित्सा उपकरण और...
सूचना मांगने वाले आवेदक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए आरटीआई अधिनियम के तहत कोई प्रावधान नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदक के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया है, यह देखते हुए कि आरटीआई अधिनियम या नियमों के तहत आवेदक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसने जानकारी मांगी थी। अदालत ने यह भी पाया कि अपराध के अवयवों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था।हिसार के जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसाइटी के कार्यालय में एक कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के लिए प्राथमिकी...
यदि ड्यूटी पर वापस आने के लिए नोटिस जारी नहीं किया गया तो स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप वी. मार्ने की सिंगल बेंच ने प्रेमसंस ट्रेडिंग (पी) लिमिटेड बनाम दिनेश चंदेश्वर राय के मामले में एक सिविल रिट याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ना तभी साबित हो सकता है, जब नियोक्ता ने कर्मचारी को नोटिस जारी करके उसे अपनी ड्यूटी पर वापस आने का निर्देश दिया हो।मामले की पृष्ठभूमिप्रेमसंस ट्रेडिंग (पी) लिमिटेड (याचिकाकर्ता) निजी कंपनी है, जो व्यापार व्यवसाय में लगी हुई है। दिनेश चंदेश्वर राय (प्रतिवादी) को 1988 में याचिकाकर्ता के खुदरा स्टोर...
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पात्रता निर्धारित करने के लिए व्यक्तिगत वार्षिक आय नहीं, बल्कि परिवार की वार्षिक आय पर विचार किया जाना चाहिए: हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस रंजन शर्मा की पीठ ने उषा रानी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य के मामले में सिविल रिट याचिका पर निर्णय लेते हुए माना कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के रूप में नियुक्ति के लिए पात्रता निर्धारित करने के लिए महिला उम्मीदवार की पारिवारिक वार्षिक आय 8000 रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए, न कि महिला उम्मीदवार की व्यक्तिगत वार्षिक आय पर।मामले की पृष्ठभूमिउषा रानी (याचिकाकर्ता) आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य (प्रतिवादी) द्वारा दिनांक...
आयुष मंत्रालय को दिल्ली हाइकोर्ट ने आयुर्वेद, योग को आयुष्मान भारत PMJAY योजना में शामिल करने की याचिका पर जल्द से जल्द निर्णय लेने को कहा
दिल्ली हाइकोर्ट ने आयुष मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को केंद्र सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) में शामिल करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में मान ले। एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह प्रतिनिधित्व पर यथासंभव शीघ्रता से तर्कसंगत आदेश के माध्यम से निर्णय ले।अदालत ने भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय...
IT Rules: दिल्ली हाइकोर्ट ने टीवी टुडे की नियम 3(1)(सी) को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाइकोर्ट ने मीडिया संगठन टीवी टुडे नेटवर्क द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जो इंडिया टुडे और आज तक समाचार चैनलों का मालिक है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 के नियम 3(1)(सी) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई।नियम 3(1)(सी) में कहा गया,“मध्यस्थ को समय-समय पर अपने उपयोगकर्ताओं को कम से कम हर साल एक बार सूचित करना चाहिए कि नियमों और विनियमों गोपनीयता नीति या ऐसे मध्यस्थ के कंप्यूटर संसाधन तक पहुँच या उपयोग के लिए यूजर्स समझौते का...
राज्य राजपत्र में नाम या जेंडर परिवर्तन प्रकाशित करने के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्ति के सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी सर्टिफिकेट पर जोर नहीं दे सकता: मद्रास हाइकोर्ट
मद्रास हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह आधिकारिक राजपत्र में ट्रांसजेंडर व्यक्ति के नाम या जेंडर परिवर्तन को प्रकाशित करने के लिए मेडिकल जांच रिपोर्ट और सेक्सुअल री-ओरिएंटेशन सर्जरी सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने पर जोर न दे।चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की पीठ ने कहा कि राज्य को ट्रांस व्यक्तियों द्वारा दायर स्व-घोषणा प्रपत्रों और हलफनामों पर भरोसा करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के लिए आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान दस्तावेज मांग सकता है।...
धारा 23(1)(बी) हिंदू विवाह अधिनियम | यदि पति/पत्नी द्वारा एक बार माफ कर दिए गए क्रूरता के कृत्य दोबारा दोहराए जाएं तो तलाक की याचिका खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि तलाक की याचिका को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 23 (1) (बी) के तहत खारिज नहीं किया जा सकता है, अगर क्रूरता के कार्य, जिन्हें एक बार पति या पत्नी द्वारा माफ कर दिया गया था, दोहराया जाता है। न्यायालय ने कहा कि केवल इसलिए कि याचिका में यह कहा गया था कि पति ने व्यभिचार को माफ कर दिया था और पत्नी के साथ रहता था, यह नहीं कहा जा सकता कि पत्नी द्वारा बाद में किये गये व्यभिचार को माफ कर दिया गया था।न्यायालय ने माना कि याचिका के एक पैराग्राफ को तलाक याचिका में दिए गए अन्य...
दिल्ली हाइकोर्ट ने आपत्तिजनक वीडियो के कारण 2011 में स्टूडेंट के 'पूर्व-निर्धारित' निष्कासन के लिए JNU की आलोचना की
दिल्ली हाइकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) द्वारा 2011 में स्टूडेंट का निष्कासन रद्द कर दिया। इसमें गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन में कमी को उजागर किया गया।जस्टिस सी हरि शंकर ने स्टूडेंट के खिलाफ पूर्वनिर्धारित इरादे के लिए JNU की आलोचना की और अनुशासनात्मक कार्यवाही में निष्पक्षता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। अदालत ने यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि यदि स्टूडेंट चाहे तो वह अपना मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) कोर्स पूरा करने दे।जस्टिस शंकर...
हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह संपन्न कराने के लिए कन्यादान समारोह आवश्यक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार हिंदू विवाह को संपन्न करने के लिए कन्यादान की रस्म आवश्यक नहीं है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा, "हिंदू विवाह अधिनियम केवल सप्तपदी को हिंदू विवाह के एक आवश्यक समारोह के रूप में प्रावधान करता है और यह प्रावधान नहीं करता कि कन्यादान का समारोह हिंदू विवाह के समापन के लिए आवश्यक है।"मामले में अदालत आशुतोष यादव नामक एक व्यक्ति की पुनरीक्षण याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें एक सत्र परीक्षण में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, लखनऊ...
प्रतियोगी परीक्षाएं | किसी प्रश्न को तब तक गलत नहीं माना जा सकता, जब तक उसे अभ्यर्थी समझ सके और उसका उत्तर दिया जा सके: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट हाल ही में कहा कि पब्लिक एग्जामिनेश के मामले में, किसी प्रश्न को केवल उसके फार्मूलेशन के आधार पर गलत नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि कैंडीडेट उसे समझ ना सके या उत्तर ना दे सके। इस तर्क को स्वीकार करते हुए कि कुछ प्रश्नों को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है, न्यायालय ने कहा कि केवल यह तथ्य उन्हें अमान्य नहीं करता है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी ने कहा, "जब तक यह नहीं दिखाया जाता कि प्रश्न गलत है या प्रश्न का फार्मूलेशन ऐसा है कि उम्मीदवार प्रश्न को...
यूपी शहरी भवन अधिनियम | लंबित रिहाई आवेदन में संशोधन/प्रतिस्थापन दूसरा आवेदन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराए पर देने, रेंट और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 [Uttar Pradesh Urban Buildings (Regulation Of Letting, Rent And Eviction) Act, 1972] इकी धारा 21 के तहत किरायेदार से संपत्ति को रिलीज़ कराने के लिए लंबित आवेदन में संशोधन आवेदन या प्रतिस्थापन आवेदन दाखिल करने को दूसरा आवेदन नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने माना कि पहले रिलीज आवेदन की योग्यता पर किसी निर्णय के अभाव में, इसमें किसी भी संशोधन को अधिनियम की धारा 21 के तहत दूसरे रिलीज आवेदन के...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबरन वसूली की आरोपी महिला को जमानत देने से इनकार किया, ब्लैकमेल करने के लिए उसने कई लोगों के खिलाफ दर्ज कराए झूठे रेप केस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने नोट किया कि महिला के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप हैं। जस्टिस मनिंदर एस भट्टी की सिंगल जज बेंच ने माना कि केस डायरी में जबरन वसूली के स्पष्ट आरोप सामने आए हैं, जिसमें शिकायतकर्ता को आरोपी द्वारा 1,80,000/- रुपये देने की धमकी देना भी शामिल है।कोर्ट ने महिला की ओर से दायर जमानत आवेदन को रिजेक्ट करते हुए कहा, “…. यह भी विवादित नहीं है कि वर्तमान आवेदक ने अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ धारा...
सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ 'अपमानजनक सामग्री' हटाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट पहुंचे सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया
सीनियर एडवोकेट और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता गौरव भाटिया ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसमें पिछले महीने जिला एवं सत्र न्यायालय, गौतमबुद्ध नगर में वकीलों की हड़ताल के दौरान उन पर हुए हमले को लेकर विभिन्न यूट्यूब चैनलों और एक्स उपयोगकर्ताओं द्वारा उनके खिलाफ पोस्ट की गई कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने की मांग की गई।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने मुकदमे में समन जारी किया और अंतरिम राहत की मांग करने वाले भाटिया के आवेदन पर नोटिस भी जारी किया। हालांकि, कोई एकपक्षीय आदेश...
बरी होने के परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष को जमानत पर विचार करने के लिए आपराधिक इतिहास में शामिल नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बरी होने के परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष या जब अदालतों ने एफआईआर रद्द ककरने पर अभियोजन पक्ष वापस ले लिया गया या क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई तो किसी आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने के लिए आपराधिक इतिहास में शामिल नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा,"आपराधिक इतिहास वाले अभियुक्त की प्रत्येक जमानत याचिका पर विचार करते समय न्यायालयों पर विवेकपूर्ण तरीके से कार्य करने की भारी जिम्मेदारी होती है, क्योंकि मनमानी कानून के विपरीत है। आपराधिक इतिहास...
UP 'Anti-Conversion' Law अंतरधार्मिक जोड़ों के बीच लिव-इन संबंध पर रोक लगाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी निषेध धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 (UP 'Anti-Conversion' Act) की धारा 3(1) विभिन्न धर्मों के जोड़ों के बीच वैवाहिक बंधन जैसे लिव-इन संबंधों पर रोक लगाती है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने हिंदू लड़की और उसके अंतरधार्मिक साथी (याचिकाकर्ता नंबर 2) द्वारा दायर रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें याचिकाकर्ता नंबर 2 के खिलाफ आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता नंबर 1...
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीडि़ता की 25 सप्ताह की प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट करने की अनुमति दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की पीडि़ता नाबालिग की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उसके गर्भ समापन की अनुमति दी है। न्यायाधीश डॉ. नुपुर भाटी की एकलपीठ ने अतिआवश्यक प्रकरण के रूप में याचिका की सुनवाई करते हुए जोधपुर के उम्मेद अस्पताल प्रशासन को त्वरित रूप से जितना जल्दी हो सके याचिकाकर्ता के गर्भ समापन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।याचिकाकर्ता की ओर से प्रो-बोनो पैरवी करते हुए अधिवक्ता मनीष व्यास व अजय कुमार ऑगस्टीन ने कहा कि याचिकाकर्ता सामूहिक दुष्कर्म की शिकार किशोरी है। सुरक्षित...
संदेशखाली मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा, अगर इसमें 1% भी सच्चाई है तो यह बहुत शर्मनाक है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के संदेशखली में पूर्व प्रधान शाहजहां शेख और उनके कार्यकर्ताओं की देखरेख में हुई महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भूमि कब्जाने की कथित घटनाओं की जांच की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस टीएस शिवगणम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ शाहजहां और उसके लोगों के खिलाफ कथित हिंसा की घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर विचार कर रही थी।वकील द्वारा लगाए गए आरोपों को सुनने और महिलाओं के साथ हुए यौन...
पति की गलती के बिना पत्नी का समय-समय पर वैवाहिक घर छोड़ना मानसिक क्रूरता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति की गलती के बिना पत्नी का समय-समय पर वैवाहिक घर छोड़ना मानसिक क्रूरता है।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 13 (1) (i-a) और 13 (1) (i-b) के तहत क्रूरता और पत्नी द्वारा परित्याग के आधार पर एक पति को तलाक दे दिया।अदालत ने कहा,“यह स्पष्ट मामला है, जहां प्रतिवादी (पत्नी) ने अपीलकर्ता (पति) की ओर से कोई भी कार्य या गलती किए बिना समय-समय पर वैवाहिक घर छोड़ दिया। प्रतिवादी द्वारा समय-समय पर...

![[Sec.38 आर्म्स एक्ट] शस्त्र अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय अपराध हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट [Sec.38 आर्म्स एक्ट] शस्त्र अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय अपराध हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/uid/500x300_1359084s24eJCwxLElag7RzcfjWsh7hAEaoL2p9721714.jpg)

















