हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने 'नए आपराधिक कानून' लाने की आवश्यकता पर सवाल उठाया, कहा कि सरकार बदलाव लाने के लिए आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम में संशोधन कर सकती थी
मद्रास हाईकोर्ट ने आज आश्चर्य व्यक्त किया कि आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम जैसे पूर्ववर्ती आपराधिक कानूनों को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार को क्या प्रेरित किया, जबकि प्रस्तावित परिवर्तनों को उन अधिनियमों में संशोधन के माध्यम से शामिल किया जा सकता था। बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती द्वारा दायर तीन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएस सुंदर और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदियों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की महाराष्ट्र सरकार की "मानसिकता" की आलोचना की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र पुलिस की इस "मानसिकता" के लिए आलोचना की कि वह विचाराधीन कैदियों की स्वतंत्रता को सीमित कर रही है, जो सजा के बाद दी जाने वाली संभावित अधिकतम सजा के आधे से अधिक समय काट चुके हैं। जस्टिस अजय गडकरी और डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस यह आभास नहीं दे सकती कि यह पुलिस राज्य है। धोखाधड़ी, जालसाजी और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) (एमपीआईडी) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत आरोपी कार्तिक प्रसाद...
विशेष पुलिस अधिकारी वैधानिक नियमों द्वारा विनियमित सिविल पदों पर नहीं होते, इसलिए वे नियमित अधिकारियों की सेवा शर्तों के हकदार नहीं: जम्म एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) वैधानिक नियमों द्वारा विनियमित सिविल पदों पर नहीं होते हैं और इसलिए वे नियमित पुलिस अधिकारियों को दी जाने वाली सेवा शर्तों से संबंधित शक्तियों, विशेषाधिकारों और सुरक्षा के हकदार नहीं हैं। एसपीओ एजाज राशिद खांडे द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए, जिन्होंने सेवा से अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी, जस्टिस संजय धर ने पुलिस अधिनियम की धारा 18 और 19 का हवाला दिया और कहा,“.. एसपीओ की नियुक्ति स्थायी प्रकृति की...
Drugs & Cosmetics Act | औषधि निरीक्षक के पास पहले से ही सूचना उपलब्ध होने पर धारा 18-ए के तहत सूचना मांगने पर अभियोजन नहीं होगा: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18-ए के तहत आपराधिक शिकायत खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब धारा के तहत आवश्यक सूचना औषधि निरीक्षक के पास पहले से ही उपलब्ध हो जाती है तो गैर-निर्माता/एजेंट से इसकी मांग करना निरर्थक हो जाता है, जिससे अभियोजन कानूनी रूप से अस्थिर हो जाता है।धारा 18-ए के अनुसार कोई भी व्यक्ति, जो औषधि या प्रसाधन सामग्री का निर्माता या अधिकृत वितरक नहीं है, उसे अनुरोध किए जाने पर निरीक्षक को उस व्यक्ति का नाम पता और अन्य प्रासंगिक विवरण...
'बार काउंसिल को कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखनी चाहिए': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट बार प्रेसिडेंट द्वारा किए गए कथित यौन उत्पीड़न और धन की हेराफेरी पर कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल को इस मामले में यथाशीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास मलिक के खिलाफ यौन उत्पीड़न और बार एसोसिएशन के धन के गबन के आरोपों से संबंधित किसी भी अन्य जटिलता से बचा जा सके, जिन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है। मलिक को हाल ही में एक अन्य अधिवक्ता रंजीत सिंह पर कथित रूप से हमला करने के आरोप में उनके खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी के तहत गिरफ्तार भी किया गया था।पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल ने...
क्या नाबालिग के खिलाफ अपराध के बारे में पुलिस को उचित समय के भीतर सूचित न करने पर डॉक्टरों पर POCSO Act की धारा 19(1) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है? केरल हाईकोर्ट ने जवाब दिया
केरल हाईकोर्ट ने माना कि POCSO Act की धारा 19 (1) के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को उचित समय के भीतर पुलिस को सूचित करना होगा यदि उन्हें आशंका है कि किसी नाबालिग के खिलाफ अपराध किया गया। इसने माना कि किसी व्यक्ति पर तभी मुकदमा चलाया जाएगा, जब वह जानबूझकर पुलिस को अपराध की सूचना देने में चूक करता है।इस मामले में याचिकाकर्ता, जो डॉक्टर है, उसको विशेष किशोर न्याय पुलिस या स्थानीय पुलिस को POCSO Act की धारा 19 (1) के तहत नाबालिग के खिलाफ किए गए अपराध के बारे में सूचित करने में विफल रहने पर दूसरे आरोपी...
बीएनएसएस 1 जुलाई के बाद दायर सभी आपराधिक अपीलों पर लागू होगा: केरल हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश तैयार किए
केरल हाईकोर्ट ने यह निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित सिद्धांत निर्धारित किए हैं कि अपील दायर किए जाने पर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के तहत प्रक्रिया लागू होती है या नहीं। -01.07.2024 को या उसके बाद दायर की गई अपील BNSS द्वारा शासित होगी-चाहे दोषसिद्धि 01.07.2024 को या उससे पहले दी गई हो या अपील 01.07.2024 को या उसके बाद दायर की गई हो, BNSS का पालन किया जाना चाहिए -01.07.2024 से पहले दायर किए गए सभी आवेदन और अपील में उठाए गए कदम CrPC द्वारा...
धारा 151 की मंजूरी के बिना पारित धारा 148ए(डी) आदेश अवैध: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि यदि आयकर अधिनियम की धारा 151 के प्रावधानों के अनुसार उचित मंजूरी के अभाव में आयकर अधिनियम की धारा 148ए(डी) के तहत कोई आदेश पारित किया जाता है, तो धारा 148 के तहत आदेश और परिणामी नोटिस को अवैध घोषित किया जाना आवश्यक होगा। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने कहा है कि धारा 148ए(डी) के तहत आदेश पारित करने के लिए धारा 151 के खंड (ii) के तहत मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक था, क्योंकि धारा 148ए के तहत और उसके बाद अधिनियम की धारा 148 के तहत कार्यवाही शुरू...
धारा 67 एनडीपीएस एक्ट | सह-आरोपी के कबूलनामे पर कार्रवाई करने से पहले अतिरिक्त साक्ष्य आवश्यक: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्त के खिलाफ मामला स्थापित करने के लिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 के तहत इकबालिया बयानों के साथ-साथ पुष्टि करने वाले साक्ष्य की आवश्यकता को रेखांकित किया है। जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने दोहराया है कि सह-अभियुक्त के इकबालिया बयान को अभियुक्त की सजा के लिए तब तक ध्यान में नहीं रखा जा सकता, जब तक अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध के कमीशन में उसकी संलिप्तता को इंगित करने के लिए कुछ अन्य सामग्री प्रस्तुत नहीं की जाती है।ये टिप्पणियां एक...
महाराष्ट्र सरकार द्वारा सरकारी स्कूल होने पर प्राइवेट स्कूलों को 25% RTE कोटा से छूट देने का संशोधन असंवैधानिक: हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को कक्षा 1 या प्री-स्कूल में वंचित वर्गों के बच्चों के लिए 25% कोटा प्रदान करने से छूट देने का निर्णय यदि उस प्राइवेट स्कूल के 1 किमी के दायरे में कोई सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल है तो वह असंवैधानिक है।राज्य सरकार ने इस वर्ष महाराष्ट्र बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियम 2011 में संशोधन करके यह निर्णय लिया।चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय और जस्टिस अमित बोरकर की खंडपीठ ने नियमों को असंवैधानिक...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस को BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ दर्ज सभी मामलों का ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस शिकायतों की केस डायरी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।अधिकारी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के खिलाफ दायर याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान यह बात कही गई। याचिका में कहा गया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार उनके तृणमूल कांग्रेस से BJP में शामिल होने के कारण उनसे बदला ले रही है।जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि जब तक...
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करते हैं: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुनेलवेली में BJP को विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी
राज्य से भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा विरोध प्रदर्शन करने के लिए प्रतिनिधित्व पर विचार करने के लिए कहते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अभिव्यक्ति का अधिकार लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है।जस्टिस जी जयचंद्रन ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर राजनीतिक दल को आंदोलन करने का अधिकार है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत कर सकते हैं और इसके अस्तित्व की संभावनाओं को बेहतर बना सकते हैं।अदालत ने कहा,“लोकतंत्र में अभिव्यक्ति का अधिकार आवश्यक है। शांतिपूर्ण विरोध...
केरल हाईकोर्ट ने KUFOS के कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी गठित करने के राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाई
केरल हाईकोर्ट ने केरल मत्स्य पालन और महासागर अध्ययन यूनिवर्सिटी (KUFOS) के कुलपति की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित करने के लिए खोज-सह-चयन समिति गठित करने के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के फैसले पर रोक लगा दी।जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. ने राज्यपाल द्वारा पारित 28 जून 2024 की अधिसूचना के आधार पर आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगाते हुए अंतरिम आदेश जारी किया।उन्होंने कहा,“मैं इस मामले में अंतरिम आदेश पारित करने का इच्छुक हूं, क्योंकि क्योंकि मुझे विश्वास है कि कुलपति की चयन प्रक्रिया आयोजित करने के...
धारा 27 के तहत इकबालिया बयान तब तक विश्वसनीय नहीं माना जाएगा, जब तक कि इसकी सत्यता की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत न मिल जाए: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 27 के तहत एकत्रित की गई किसी भी जानकारी को पुलिस अधिकारी के समक्ष अभियुक्त द्वारा किए गए इकबालिया बयान को सत्यापित करने के लिए उस जानकारी के अनुसरण में कुछ बरामद करने या खोजने के द्वारा पुष्टि और समर्थन किया जाना आवश्यक है, जो अपराध के कमीशन से स्पष्ट रूप से संबंधित हो।अधिनियम की धारा 27 में प्रावधान है कि जब किसी पुलिस अधिकारी की हिरासत में किसी अभियुक्त से प्राप्त जानकारी के परिणामस्वरूप कोई तथ्य पता चलता है तो ऐसी...
अनजान महिला से नाम और पता पूछना अनुचित, प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अनजान महिला से नाम, पता और मोबाइल नंबर पूछना अनुचित हो सकता है, प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354ए के तहत यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस निरजर देसाई ने गांधीनगर के व्यक्ति समीर रॉय से जुड़े मामले में की, जिस पर अनजान महिला से ये सवाल पूछने के आरोप में आईपीसी की धारा 354ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।जस्टिस देसाई ने कहा,“यह अनुचित कार्य हो सकता है लेकिन यह न्यायालय प्रथम दृष्टया इस विचार पर है कि यदि IPC की धारा 354 को पढ़ा जाए तो...
झूठी चोट रिपोर्ट प्रस्तुत करना अत्यधिक घृणित, कर्तव्य की उपेक्षा: राजस्थान हाईकोर्ट ने मेडिकल अधिकारी की अनिवार्य रिटायरमेंट की पुष्टि की
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में तथ्यात्मक रूप से गलत चोट रिपोर्ट प्रस्तुत करके कर्तव्य की उपेक्षा करने वाले मेडिकल अधिकारी को राहत देने से इनकार किया। आचरण को अत्यधिक घृणित मानते हुए न्यायालय ने कहा कि ऐसे आचरण के लिए अनिवार्य रिटायरमेंट कोई अनुचित दंड नहीं है, जिसके लिए न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए।यह माना गया:"यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत की है और अपने कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही की है। कोई भी चोट के मामलों में सच्ची और सही मेडिकल-कानूनी रिपोर्ट के महत्व को कम...
दहेज हत्या के लिए दोषी ठहराए गए पति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत मृतक पत्नी की संपत्ति नहीं मिल सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बंबई हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि दहेज हत्या के लिए दोषी ठहराए गए पति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के तहत मृतक पत्नी की संपत्ति विरासत में नहीं मिल सकती।जस्टिस निजामुद्दीन जमादार की एकल पीठ ने वसीयत विभाग के उस तर्क को खारिज किया, जिसमें कहा गया कि दहेज हत्या (आईपीसी की धारा 304-बी के तहत) के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के तहत 'हत्यारे' के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि कानून केवल हत्या के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति (आईपीसी की धारा 302 के तहत)...
राज्य की सुरक्षा को खतरा के आधार पर पैरोल को यंत्रवत् खारिज नहीं किया जाना चाहिए: हाईकोर्ट ने डीजीपी पंजाब से कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज पुलिस महानिदेशक पंजाब से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि राज्य में पैरोल आदेश केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की सुरक्षा को खतरा के आधार पर यंत्रवत् तरीके से पारित न किए जाएं।ये टिप्पणियां हत्या के दोषी की पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं, जिसे 2023 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। दोषियों की पैरोल को जिला मजिस्ट्रेट ने सीनियर पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि पैरोल देने से...
ओमान में बलात्कार हुआ, लेकिन अपराध की उत्पत्ति भारत में हुई? केरल हाईकोर्ट ने कहा, मुकदमे के लिए CrPc की धारा 188 के तहत केंद्र की मंजूरी की आवश्यकता नहीं
केरल हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा चलाने का निर्देश दिया, जिसने कथित तौर पर एक महिला को अपने घर पर नौकरी का लालच देकर मस्कट ओमान ले जाने के बाद उसके साथ धोखाधड़ी की और जबरदस्ती यौन संबंध बनाए।न्यायालय ने सरताज खान बनाम उत्तराखंड राज्य (2022) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिय, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि यदि अपराध का एक हिस्सा भारत में किया गया तो किसी भी मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं है।वर्तमान मामले के तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा...
POCSO Act | यदि पीड़िता की एकमात्र गवाही आरोपी को दोषी ठहराने के लिए विश्वसनीय है तो अन्य गवाहों की जांच करना आवश्यक नहीं: मेघालय हाईकोर्ट
पीड़िता की एकमात्र गवाही के आधार पर मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में POCSO Act के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न के अपराध को करने के लिए आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी।न्यायालय ने कहा कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय, बेदाग और न्यायालय का विश्वास जगाने वाली पाई जाती है तो पीड़िता की एकमात्र गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।इसके अलावा न्यायालय ने कहा कि एक बार जब पीड़िता की गवाही आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त हो जाती है तो अन्य महत्वपूर्ण गवाहों की जांच करने की कोई आवश्यकता...




















