जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सैलरी इनकम मानी जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS में EWS अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया

Shahadat

12 Feb 2026 10:09 AM IST

  • जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर की सैलरी इनकम मानी जाएगी: दिल्ली हाईकोर्ट ने AIIMS में EWS अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि जूनियर रेजिडेंसी के दौरान डॉक्टर को मिली सैलरी, इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) कैटेगरी के तहत एलिजिबिलिटी तय करने के लिए “इनकम” मानी जाती है।

    जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने इस आधार पर याचिकाकर्ता की सीनियर रेजिडेंट अपॉइंटमेंट कैंसिल करने का फैसला सही ठहराया कि तय इनकम लिमिट का उल्लंघन किया गया।

    इसमें कहा गया,

    “EWS रिज़र्वेशन के लिए “ग्रॉस एनुअल इनकम” का मतलब टैक्स एक्ट के तहत ध्यान में रखी गई इनकम से है। इसलिए पॉलिसी फ्रेमवर्क में इनकम के किसी भी हिस्से को बाहर करने की बहुत कम गुंजाइश है, जो वैसे संबंधित फाइनेंशियल ईयर के लिए इनकम के तौर पर दिखाई देता है।”

    इस मामले में कोर्ट ने आगे कहा,

    “इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता को फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के दौरान जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम करते हुए रेस्पोंडेंट नंबर 1 से कुल 13,59,032/- रुपये मिले थे। यह आंकड़ा RTI एप्लीकेशन के बाद रिकॉर्ड में रखे गए फॉर्म-16 और पे स्लिप से पता चलता है और ट्रिब्यूनल ने भी इम्पग्न्ड ऑर्डर में इस पर ध्यान दिया। रिकॉर्ड में यह रकम EWS पॉलिसी के तहत तय इनकम लिमिट से ज़्यादा है।”

    इस तरह कोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के फैसले को कन्फर्म किया, जिसने याचिकाकर्ता को टर्मिनेट करने में AIIMS की कार्रवाई को सही ठहराया।

    याचिकाकर्ता ने कहा था कि जूनियर रेजिडेंसी के दौरान मिली रकम सिर्फ एक “स्टाइपेंड” थी। इसे EWS एलिजिबिलिटी के मकसद से इनकम नहीं माना जा सकता।

    इस बात को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस्तेमाल किया गया नाम तय करने वाला नहीं है, और जो ज़रूरी है वह पेमेंट का नेचर और कैरेक्टर है।

    कोर्ट ने कहा,

    “रिकॉर्ड से साफ़ पता चलता है कि जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अपनी एकेडमिक ट्रेनिंग के साथ-साथ हॉस्पिटल में रेगुलर क्लिनिकल ड्यूटी, मरीज़ों की देखभाल की ज़िम्मेदारी और रात की ड्यूटी भी करनी पड़ती थी। यह बात कि सैलरी पे स्लिप में “ग्रॉस सैलरी” के तौर पर दिखाई गई, जिस पर कानूनी टैक्स कटौती की गई और जिसे Form-16 के ज़रिए रिपोर्ट किया गया, इस नतीजे को मज़बूत करता है कि पेमेंट मुआवज़े के तौर पर था, न कि सिर्फ़ पढ़ाई के खर्चों को पूरा करने के लिए दी गई स्कॉलरशिप।”

    इसलिए कोर्ट ने विवादित आदेशों में दखल देने से मना किया और रिट पिटीशन खारिज की।

    Case title: Dr. Bahubali N. Shetti v. AIIMS

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