संपादकीय
सुप्रीम कोर्ट का अजीबोग़रीब तर्क - तलाकशुदा पत्नी के भरण-पोषण का भार छोड़े गए पति पर
कैसे कोई पत्नी, सिर्फ़ अपनी वैवाहिक स्थिति में बदलाव के कारण दो विपरीत न्यायिक फ़ैसले का लाभ उठा सकती है जबकि मामला एक ही है। क्या यह मनमर्ज़ी इस बात की ताक़ीद नहीं करती कि इस मुद्दे पर संविधान के अनुच्छेद 14 की रोशनी में ग़ौर किया जाए?
टेलीग्राम एप पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, केरल हाईकोर्ट में बैन की मांग पर याचिका
केरल हाईकोर्ट में यह कहते हुए कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम'अनियंत्रित है और चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, इसे प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु की एल.एल.एम की छात्रा एथेना सोलोमन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि टेलीग्राम गुमनाम संदेशों की पोस्टिंग की अनुमति देता है। याचिका में कहा गया है कि इस सुविधा का व्यापक रूप से दुरुपयोग महिलाओं और बच्चों पर बनाई गई अश्लील और अशिष्ट सामग्री को...
आपराधिक मामलों की 'केस डायरी' क्या होती है और कौन कर सकता है इसका उपयोग?
स्पर्श उपाध्याय केस डायरी (अभियोग दैनिकी), एक आपराधिक मामले की दैनिक जांच का एक रिकॉर्ड है, जिसे पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाता है। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 172 के प्रावधान के तहत अन्वेषण (Investigation) करने वाले एक पुलिस अधिकारी को हर एक मामले में प्रत्येक दिन की गई जांच का रिकॉर्ड बनाए रखना आवश्यक होता है (जब वह दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 12 के तहत अन्वेषण करता है)। इस प्रावधान को दंड प्रक्रिया संहिता में शामिल किये जाने का एक कारण यह भी प्रतीत होता है कि इसके...
दुष्कर्म पीड़िता अगर सुनवाई के दौरान मुकर गई है तो वह मुआवज़े की हकदार नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा दिलाए जाने की मांग की थी, क्योंकि वह मुकदमे के दौरान अपने बयान से मुकर गई थी और अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति आलोक अराधे ने कर्नाटक राज्य कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण से 7 लाख रुपये मुआवजा दिलाए जाने की मांग वाली इस याचिका को खारिज करते हुए कहा- ''कर्नाटक पीड़ित मुआवजा योजना 2007 के प्रासंगिक खंडों को देखने से, यह स्पष्ट है कि पीड़िता को जांच और मुकदमे के दौरान...
अवैध विक्रय समझौते को वादी के पक्ष में लागू नहीं किया जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून के विरुद्ध किये गये किसी भी इकरारनामे पर वादी को हक नहीं दिया जा सकता, यह जानते हुए भी कि कानून-विरोधी करार में प्रतिवादी भी शामिल था और इससे उसे लाभ हुआ है। इकरारनामे की शर्तों पर अमल करने (स्पिसिफिक परफॉर्मेंस) से संबंधित इस मुकदमे में यह सवाल उठाया गया था कि वादी के पक्ष में 'बाले वेंकटरमनप्पा' द्वारा 15 मई 1990 को किया गया विक्रय समझौता (एग्रीमेंट टू सेल) लागू होगा या नहीं? यह पाया गया था कि यह विक्रय समझौता रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 61 के विरुद्ध था। इसी...
हथियारों से लैस आरोपी पक्ष इस बात का लाभ नहीं उठा सकता कि झगड़ा अचानक हुआ था, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने ग़ौर करते हुए कहा कि जब आरोपी पक्ष अपराध स्थल पर हथियारों से लैस होकर आया तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अपराध झगड़े के दौरान उत्तेजना के क्षण में नहीं हुआ और इसलिए आईपीसी के धारा 300 के अपवाद 4 के तहत राहत का दावा नहीं किया जा सकता है। गुरु @ गुरूबरन बनाम राज्य मामले में अपील में हत्या के आरोपी की दलील यह थी कि यह अपराध हत्या का नहीं बल्कि हत्या के प्रयास जिसे कि हत्या नहीं कहा जा सकता, का है और यह मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 के तहत आएगा। आईपीसी की धारा 300 के...
क्या है ऑनलाइन ट्रोलिंग पर कानून (साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-2)
चित्रांगदा शर्मा और सुरभि करवायह लेख साइबर स्पेस और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा श्रेणी में दूसरा लेख है। पिछले लेख में हमने साइबर स्टाकिंग की बात की थी। आज हम ऑनलाइन ट्रोलिंग और उससे सम्बंधित कानून पर चर्चा करेंगे।क्या है साइबर स्टॉकिंग पर कानून, साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-1क्या है ट्रोलिंग'ट्रोलिंग' का सीधे-सीधे शब्दों में अर्थ है किसी व्यक्ति को परेशान करने, खिझाने आदि उद्देश्यों से अपमानजनक सन्देश भेजना। ट्रोलिंग में जाति, लिंग, सेक्सुअल ओरिएंटेशन, धर्म आदि पूर्वाग्रहों के...
वसीयत या उपहार में दी गयी पिता की स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पुत्र के लिए भी स्वयंअर्जित सम्पत्ति, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि मिताक्षरा उत्तराधिकार कानून के अनुसार, पिता की स्वयं अर्जित सम्पदा यदि वसीयत/उपहार के तौर पर पुत्र को दी जाती है तो वह स्वयं अर्जित सम्पदा की श्रेणी में ही रहेगी और यह पैतृक सम्पत्ति तब तक नहीं कहलाएगी, जब तक वसीयतनामा में इस बारे में अलग से जिक्र न किया गया हो। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ गोविंदभाई छोटाभाई पटेल एवं अन्य बनाम पटेल रमणभाई माथुरभाई मामले में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई कर रही थी। ...
क्या है साइबर स्टॉकिंग पर कानून, साइबर क्राइम एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा- भाग-1
-चित्रांगदा शर्मा और सुरभि करवा इंटरनेट की शुरुआत एक लोकतान्त्रिक और समानता के सिद्धांत आधरित प्लेटफार्म के वादे के साथ हुई थी और कुछ हद तक यह उद्देश्य हमारा समाज पा भी चुका है। आज इंटरनेट ने देश के कई कोनों में पहुँचकर हाशिये पर धकेली हुई आवाजों को मुख्य धारा में आने का मौका दिया है, लेकिन जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से इंटरनेट भी अछूता नहीं रहा है। इस सन्दर्भ में यदि पितृसत्ता और लैंगिक भेदभाव की बात करें तो कई शोध कहते हैं कि वास्तविक दुनिया की पुरुष प्रधानता इंटरनेट में भी पहुँच...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंत्रियों के ख़िलाफ़ दलील ख़ारिज की कहा, लोग राजनीतिक लाभ के लिए अपनी निष्ठा बदलते हैं तो वोटरों को ऐसे लोगों को सबक़ सिखाना चाहिए
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से छह माह पहले मंत्रिमंडल में तीन मंत्रियों की नियुक्ति के ख़िलाफ़ दायर कुछ याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और जीएस पटेल की पीठ ने सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता विजय वडेट्टिवर और सुरिंदर अरोरा की याचिकाओं पर ग़ौर किया। इन याचिकाओं में राधाकृष्ण विखे पाटिल, जयदत्ता क्षीरसागर और अविनाश महतेकर को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में मंत्री नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई थी। ये तीनों लोग अपनी-अपनी पार्टियों से इस्तीफ़ा देकर बीजेपी-शिव...
यूके की सुप्रीम कोर्ट से क्या सीख सकता है भारत का सुप्रीम कोर्ट
मनु सेबैस्टीयन न्यायालयों में प्रमुख संवैधानिक चुनौतियां अक्सर राजनीतिक रंग लिए होती हैं। यदि प्रश्न बहुत ज़्यादा राजनीतिक हैं, तो न्यायालय यह कहते हुए कि वह राजनीतिक सवालों में नहीं फँसना चाहते और अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से इंकार कर सकते हैंं, लेकिन अगर मामला नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन से संबंधित है तो कोर्ट को इस आधार पर कि मामला राजनीति सम्बंधित है, ख़ुद को त्वरित फैसला देने से नहीं रोकना चाहिए। इस तरह के कई मामलों के लिए समय बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।...
इंडोनेशिया में विवाहेतर यौन संबंध, गर्भपात, पर बनाए गए कानून पर मतदान स्थगित क्यों हुआ
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने सहमति से भी बनाए गए विवाहेतर यौन संबंध को अपराध घोषित करने के उद्देश्य से संशोधित अपराध संहिता पर प्रस्तावित मतदान को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने मतदान को टालने की घोषणा करने के बाद गत शुक्रवार को एक टेलीविज़न साक्षत्कार में कहा, " कुछ ऐसी विषय वस्तुएं हैं जिनका गहनता से अध्ययन करने की आवश्यकता है।" संशोधित कानून पर इसी सप्ताह मतदान होना था। नए कानून के तहत विवाहेतर यौन संबंध बनाने के अपराध के लिए एक साल जेल की सजा का प्रावधान किया...
जस्टिस रमना ने दिये फैमिली कोर्ट के कामकाज में सुधार के सुझाव कहा, IPC की धारा 498 ए पर फिर से विचार हो
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एन वी रमना ने शनिवार को यह कहते हुए परिवार अदालत के कामकाज में सुधार के लिए कई सुझाव दिए कि पारिवारिक जीवन में अशांति से व्यक्ति की कार्यक्षमता और समाज का विकास प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के व्यक्ति के नियंत्रण के बाहर चले जाने के कारण पारिवारिक जीवन में अशांति बढ़ रही है। जस्टिस रमना झारखंड की राजधानी रांची में परिवार अदालतों के न्यायाधीशों को संवेदनशील बनाने के लिए दो-दिवसीय 'प्रथम क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम' को सम्बोधित कर रहे...
आखिर क्यों आपराधिक मामले वापस लेने का फैसला अकेले सरकार नहीं कर सकती? जानिए अभियोजन वापसी के ये महत्वपूर्ण बिंदु
स्पर्श उपाध्याय अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तब चर्चा में आये, जब उन्होंने यह कहा की यदि उनकी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश राज्य में दुबारा सत्ता में आती है (2022 के चुनाव में) तो वो आजम खान (वर्तमान सांसद, रामपुर एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता) के खिलाफ दायर सभी मुक़दमे वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा, "यदि समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापस आ जाती है, तो सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर के सांसद आज़म खान के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस ले लिए...
राम जेठमलानी : एक चतुर वक़ील और एक चालाक मुवक्किल
रणवीर सिंह राम जेठमलानी अमूमन यह कहा करते थे –"मैं भगवान के डिपार्चर लाउंज मैं बैठा हुआ हूं, ताकि उनसे अदालत के अंदर और बाहर मोलभाव कर सकूं।" ज़ाहिर है कि किसी ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। अप्रैल 2007 में एक चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई की मांग करते हुए जेठमलानी ने अपने ज्योतिषी का हवाला देते हुए कहा कि उसके हिसाब से वे जुलाई के आगे ज़िंदा नहीं रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट उनकी बातों में नहीं आया और कहा, "हम आपके ज्योतिषी की बातों में नहीं आते"। इससे काफ़ी पहले,...
हाउसिंग सोसाइटी इंडस्ट्री नहीं, इसके कर्मचारी नहीं हैं कामगार, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर दोहराया है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम (आईडी एक्ट) , 1947 के तहत हाउसिंग सोसाइटी (आवासीय समिति) न तो 'उद्योग' है और न इसके कर्मचारी 'कामगार'। जस्टिस डॉ. योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने गौतमबुद्ध नगर के अरुण विहार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की एक अपील पर व्यवस्था दी, "आवासीय समिति सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत होती है और इसका काम अपार्टमेंट मालिकों को आवश्यक रखरखाव सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इस प्रकार सोसाइटी को इंडस्ट्री नहीं कहा जा सकता।" लेबर कोर्ट...



















