संपादकीय

(आधी रात को हुई सुनवाई) अहमदाबाद के हालात की तुलना पुरी के हालात से नहीं की जा सकती : गुजरात हाईकोर्ट ने रथ यात्रा की अनुमति देने से इनकार किया
(आधी रात को हुई सुनवाई) अहमदाबाद के हालात की तुलना पुरी के हालात से नहीं की जा सकती : गुजरात हाईकोर्ट ने रथ यात्रा की अनुमति देने से इनकार किया

गुजरात हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के मद्देनजर अहमदाबाद में जगन्नाथ रथ यात्रा आयोजित करने की अनुमति देने वाली याचिकाओं के एक बैच को खारिज कर दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मंगलवार को रात 2 बजे आयोजित एक अर्जेंट सुनवाई के दौरान पारित किया है। राज्य सरकार सहित याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पुरी में जग्गनाथ रथ यात्रा की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर शर्तों के साथ अनुमति दी जानी चाहिए। 23.06.2020 को रात 00:45 बजे आवेदनों को...

चेक बाउंस के मामलों को अपराध के दायरे से बाहर करने का प्रस्तावित कदम  वकीलों आजीविका, करियर और अस्तित्व को प्रभावित करेगा : बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा
चेक बाउंस के मामलों को अपराध के दायरे से बाहर करने का प्रस्तावित कदम वकीलों आजीविका, करियर और अस्तित्व को प्रभावित करेगा : बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा

दिल्ली बार काउंसिल के बाद, बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा ने भी निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 को अपराध के दायरे से बाहर करने के प्रस्ताव पर " कड़ी आपत्ति और विरोध " जताया है। "प्रस्तावित कदम से बड़े पैमाने पर निवेशकों, व्यापारियों और व्यावसायियों पर भारी कष्ट होगा, जो न्यायिक और लोकतांत्रिक प्रणाली में आशा खो देंगे और ये कदम अंततः उन्हें वसूली के पुराने तरीकों का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा।वित्त मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा गया है कि"प्रस्तावित अपराध के दायरे से...

आरोप तय करने के लिए अभ‌ियुक्त की उपस्थिति और सेक्‍शन 313 सीआरपीसी के तहत परीक्षण, व‌ीडियो कॉन्फ्रें‌सिंग के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैः कर्नाटक हाईकोर्ट
आरोप तय करने के लिए अभ‌ियुक्त की उपस्थिति और सेक्‍शन 313 सीआरपीसी के तहत परीक्षण, व‌ीडियो कॉन्फ्रें‌सिंग के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि महामारी की स्थिति में, ट्रायल कोर्ट धारा 223, 240 या 252 के तहत आरोप तय करने के संबंध में अभियुक्तों की दलील को रिकॉर्ड करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग कर सकती है और आपराधिक संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत एक अभियुक्त की जांच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जर‌िए कर सकती है। इस सुविधा का उपयोग उन सभी आरोपियों के मामले में किया जा सकता है, जो न्यायिक हिरासत में हैं और जो जमानत पर बाहर हैं। चीफ जस्टिस अभय ओका और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने ट्रायल...

बार काउंसिल ऑफ़ गुजरात ने ज़रूरतमंद वकीलों को 31 दिसंबर 2020 तक वैकल्पिक काम/व्यवसाय करने की अनुमति दी
बार काउंसिल ऑफ़ गुजरात ने ज़रूरतमंद वकीलों को 31 दिसंबर 2020 तक वैकल्पिक काम/व्यवसाय करने की अनुमति दी

अपने सदस्य वकीलों को राहत देते हुए बार काउंसिल ऑफ़ गुजरात ने लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसे ज़रूरतमंद वकीलों को जो आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं, इस वर्ष के अंत तक कोई वैकल्पिक काम/व्यवसाय करने की छूट दे दी है। राज्य बार काउन्सिल ने रविवार को एक प्रस्ताव पारित कर एडवोकेट अधिनियम की धारा 35 में तात्कालिक छूट देने का फ़ैसला किया है। यह अधिनियम लाइसेन्सधारी प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को क़ानूनी प्रैक्टिस के अलावा कोई और काम करने से रोकता है।प्रस्ताव में कहा गया है, "रविवार को...

तब्लीगी जमात गतिविधियों में कथित   संलिप्तता के लिए ब्लैकलिस्ट करने के MHA के फैसले के खिलाफ विदेशी नागरिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट 
तब्लीगी जमात गतिविधियों' में कथित  संलिप्तता के लिए ब्लैकलिस्ट करने के MHA के फैसले के खिलाफ विदेशी नागरिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट 

'तब्लीगी जमात गतिविधियों' में कथित संलिप्तता के लिए विभिन्न देशों के विदेशियों को ब्लैकलिस्ट करने के गृह मंत्रालय (MHA ) के फैसले से दुखी सात विदेशी नागरिकों ने इस कदम की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।2 अप्रैल को, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने 35 देशों के 960 विदेशियों को ब्लैकलिस्ट करने के सरकार के फैसले की सूचना दी, जो भारत में मौजूद थे। साथ ही, ऐसे विदेशी नागरिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों...

लॉकडाउन लागू करने में मनमानी की गई, सुप्रीम कोर्ट को अगली सुबह इस पर रोक लगा देनी चाहिए थी: वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे
लॉकडाउन लागू करने में मनमानी की गई, सुप्रीम कोर्ट को अगली सुबह इस पर रोक लगा देनी चाहिए थी: वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली (एनएलयूडी) ने शुक्रवार को "सर्वोच्च न्यायालय और महामारी: श्री दुष्यंत दवे के साथ एक वार्तालाप" विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। एक घंटे तक चले सत्र में कोरोनोवायरस संकट के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों के पर चर्चा की गई। वेबिनार का आयोजन एनएलयूडी के अध्यापकों और छात्रों ने किया और श्री अनंत ने मॉडरेशन किया। सत्र की शुरुआत में वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे महामारी और उसके बाद के प्रवासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट के रवैये पर चर्चा की। ...

विजय माल्या की तीन साल पहले दायर पुनर्विचार याचिका को सूचीबद्ध नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एससी रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा
विजय माल्या की तीन साल पहले दायर पुनर्विचार याचिका को सूचीबद्ध नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एससी रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा

विजय माल्या की ओर से तीन साल पहले दायर पुनर्विचार याचिका को सूचीबद्ध नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एससी रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा सुप्रीम कोर्ट ने एससी रजिस्ट्री से विजय माल्या की ओर से तीन साल पहले दायर पुनर्विचार याचिका को सूचीबद्ध नहीं करने के लिए स्पष्टीकरण मांगा है। माल्या ने पुनर्विचार याचिका तीन साल पहले दायर की थी, जिसे अब तक सुचीबद्ध नहीं किया गया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने एससी रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा। जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने उन अधिकारियों के नाम...

सीमा अवधि बढ़ाने वाला शीर्ष अदालत का पूर्व का आदेश सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत आरोपी के डिफॉल्ट ज़मानत के अधिकार को प्रभावित नहींं करता : सुप्रीम कोर्ट
सीमा अवधि बढ़ाने वाला शीर्ष अदालत का पूर्व का आदेश सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत आरोपी के डिफॉल्ट ज़मानत के अधिकार को प्रभावित नहींं करता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 15 मार्च से सभी अपील दाखिल करने के लिए सीमा अवधि बढ़ाने वाला शीर्ष अदालत का पूर्व का आदेश, आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत पाने के लिए किसी अभियुक्त के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की बेंच ने इस प्रकार एस कासी बनाम पुलिस इंस्पेक्टर के माध्यम से राज्य मामले में मद्रास उच्च न्यायालय की एकल पीठ के फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि सीमा विस्तार और लॉकडाउन प्रतिबंध के...

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा, क्या हम अधिकारियों को कानून के अनुसार काम करने से रोक सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा, "क्या हम अधिकारियों को कानून के अनुसार काम करने से रोक सकते हैं?"

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र की प्रस्तावित महत्वकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना के काम पर रोक लगाने की याचिका ठुकरा दी।केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह यह आश्वासन नहीं दे सकती है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के संबंध में कोई काम नहीं किया जाएगा। जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस बात की कोई ग्यारंटी नहीं ली जा सकती कि कोई ज़मीनी काम नहीं होगा।सुप्रीम कोर्ट ने राजीव सूरी द्वारा दायर...

[मोटर वाहन अधिनियम] दुर्घटना की तारीख में जिसके नाम वाहन पंजीकृत है, वो ही  मालिक माना जाएगा : सुप्रीम कोर्ट
[मोटर वाहन अधिनियम] दुर्घटना की तारीख में जिसके नाम वाहन पंजीकृत है, वो ही ' मालिक' माना जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, वह व्यक्ति जिसके नाम पर मोटर वाहन पंजीकृत है, उसे ही मोटर वाहन अधिनियम के प्रयोजनों के लिए वाहन के मालिक के रूप में माना जाएगा। यह मामला सुरेंद्र कुमार भिलावे द्वारा किए गए बीमा दावे से उत्पन्न हुआ है। बीमा कंपनी ने इस दावे को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि भिलावे ने उक्त ट्रक को पहले ही उक्त मोहम्मद इलियास अंसारी (लगभग तीन साल पहले) को बेच दिया था। भिलावे ने उपभोक्ता शिकायत दायर की जिसे जिला फोरम द्वारा अनुमति दी गई थी। बीमा कंपनी द्वारा दायर अपील राज्य आयोग द्वारा...

नए वकीलों को अपने कार्यों से अपनी गंभीरता का परिचय देना चाहिए, 100 वर्षीय वकील लेखराज मेहता से लाइव लॉ की ख़ास बातचीत
'नए वकीलों को अपने कार्यों से अपनी गंभीरता का परिचय देना चाहिए', 100 वर्षीय वकील लेखराज मेहता से लाइव लॉ की ख़ास बातचीत

एक अच्छा वकील होने का क्या मतलब होता है? यह प्रश्न, एक वकील के पूरे करियर को प्रेरित कर सकता है, चिंतन करने पर मजबूर कर सकता है या कुछ को शायद परेशान भी कर सकता है। हालाँकि, यदि इस प्रश्न का उत्तर देने का थोडा सा प्रयास किया जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि, एक अच्छा वकील होना, एक महान वकील होने से कहीं ज्यादा कठिन है। चर्चित मामलों को जीतना और प्रशंसा अर्जित करने की तुलना में, कोर्ट में वर्षों तक याद किये जाने वाला कौशल, दृष्टिकोण, मनोवृत्ति व उत्तम आचरण का निर्माण करना कहीं ज्यादा कठिन होता...

उत्तर प्रदेश पुलिस ने द स्क्रॉल की पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा के खिलाफ दर्ज की एफआईआर, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र पर की गई रिपोर्ट‌िंग में गलत बयान छापने का आरोप
उत्तर प्रदेश पुलिस ने 'द स्क्रॉल' की पत्रकार सुप्र‌िया शर्मा के खिलाफ दर्ज की एफआईआर, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र पर की गई रिपोर्ट‌िंग में गलत बयान छापने का आरोप

वेबसाइट स्‍क्रॉल डॉट इन की कार्यकारी संपादक सुप्र‌िया शर्मा के ‌खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। शर्मा ने लॉकडाउन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक गांव की हालत पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रामनगर पुलिस थाने में एफआईआर दज कराने वाली माला देवी ने आरोप लगाया है कि सुप्र‌िया शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में उनके बयान को गलत तरीके से प्र‌‌काशित किया है और झूठे दावे किए हैं। पुलिस ने शर्मा के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)...

अगर रथ यात्रा को मंजूरी देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे  : सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 के चलते ओडिशा में  रथ यात्रा व संबंधित गतिविधियों  पर रोक लगाई
"अगर रथ यात्रा को मंजूरी देते हैं तो भगवान जगन्नाथ हमें कभी माफ नहीं करेंगे " : सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 के चलते ओडिशा में रथ यात्रा व संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आदेश दिया कि इस साल ओडिशा में भगवान जगन्नाथ मंदिर में किसी भी तरह की रथ यात्रा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि महामारी की स्थिति चल रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने ओडिशा विकास परिषद द्वारा राज्य में वार्षिक भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा को रोकने के लिए दायर एक याचिका पर आदेश पारित किया, जो 23 जून को होने वाली थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने प्रस्तुत किया कि भुवनेश्वर में लगभग 10 लाख लोगों के एकत्रीकरण को...

PSU से AGR संबंधी बकाया की 96 फीसदी मांग वापस लेने का फैसला किया : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
PSU से AGR संबंधी बकाया की 96 फीसदी मांग वापस लेने का फैसला किया : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

 केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने गैर-दूरसंचार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, (जैसे गेल ) के खिलाफ समायोजित सकल राजस्व की 4 लाख करोड़ रुपये की 96 प्रतिशत राशि को वापस लेने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अक्टूबर 2019 के फैसले में ये कहा था। जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस एमआर शाह की एक बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि "हमने एक निर्णय लिया है क्योंकि वे आम जनता को टेलीकॉम सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में नहीं...