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PSU से AGR संबंधी बकाया की 96 फीसदी मांग वापस लेने का फैसला किया : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

LiveLaw News Network
18 Jun 2020 7:48 AM GMT
PSU से AGR संबंधी बकाया की 96 फीसदी मांग वापस लेने का फैसला किया : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
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 केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने गैर-दूरसंचार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, (जैसे गेल ) के खिलाफ समायोजित सकल राजस्व की 4 लाख करोड़ रुपये की 96 प्रतिशत राशि को वापस लेने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अक्टूबर 2019 के फैसले में ये कहा था।

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस एमआर शाह की एक बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि "हमने एक निर्णय लिया है क्योंकि वे आम जनता को टेलीकॉम सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में नहीं हैं, हम इन PSU के 96% से बकाया की मांग वापस ले रहे हैं।"

DoT ने हलफनामा दायर कर PSU के खिलाफ AGR से संबंधित बकाया की मांग का कारण बताया है, SG ने जोड़ा।

पिछली सुनवाई में अदालत ने टेलीकॉम कंपनियों के AGR बकाया से संबंधित मामले में अक्टूबर 2019 के फैसले के आधार पर PSU से बकाया मांग के कारण केंद्र से नाराजगी जताई थी।

पीठ ने तब अवलोकन किया था कि "हमारे फैसले के आधार पर PSU से बकाया नहीं मांगा जा सकता है।"

"यह हमारे फैसले का एक गलत दुरुपयोग है। आप 4 लाख करोड़ से अधिक की मांग कर रहे हैं! यह पूरी तरह से अक्षम्य है!", न्यायमूर्ति मिश्रा ने PSU से मांग पर गौर किया था।

उन्होंने कहा, "वे व्यावसायिक दोहन के लिए अन्य टेलीकॉम जैसी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं। सार्वजनिक उपक्रमों पर AGR बकाया राशि सार्वजनिक हित में नहीं हो सकता है।"

"हम आपसे अनुरोध करेंगे कि इसे ( PSUसे मांग) वापस लें अन्यथा हम उनके (DoT अधिकारियों) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे", न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा था।

गुरुवार को DoT ने बेंच से AGR के भुगतान पर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड सहित टेलीकॉम कंपनियों द्वारा दायर हलफनामों का जवाब देने के लिए

समय मांगा।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 24 अक्टूबर को फैसला सुनाया था कि टेलीकॉम के AGR में गैर-दूरसंचार राजस्व को शामिल करके वैधानिक बकाया की गणना की जानी चाहिए।

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