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गुज़ारा-भत्ता न देने से पत्नी का जीवन बदहाल हो जाता है, जो आर्टिकल 21 के तहत सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते कहा कि गुज़ारा-भत्ता न देने से पत्नी की हालत बदतर हो जाती है, जो आर्टिकल 21 के तहत मिली संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है। इस गारंटी में सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी शामिल है।कोर्ट ने आगे कहा कि गुज़ारा-भत्ता यह पक्का करता है कि पत्नी को तंगहाली या बदहाली की ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर न होना पड़े, क्योंकि ऐसी स्थिति आर्टिकल 21 के तहत मिले सम्मान के अधिकार के ख़िलाफ़ होगी।जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने ये बातें तब कहीं जब वे पति की एक क्रिमिनल रिविज़न याचिका को खारिज...

'मुकदमेबाज़ सुनवाई टलवाते हैं, फिर सोशल मीडिया पर कोर्ट की देरी की आलोचना करते हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उन मुकदमेबाज़ों की आलोचना की, जो कोर्ट की कार्यवाही में सुनवाई टलवाने की मांग करते हैं और बाद में देरी के लिए सोशल मीडिया पर कोर्ट की आलोचना करते हैं।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,"कम से कम इस राज्य की अदालतों में हर दूसरे मामले की यही कहानी है, जहाँ मुकदमेबाज़ बिना किसी झिझक के सुनवाई टलवाते हैं और तुरंत बाद सोशल मीडिया साइटों पर बैठकर देरी के लिए कोर्ट की आलोचना करते हैं। न्यायिक प्रक्रिया में ज़्यादातर देरी उन मुकदमेबाज़ों की वजह से...

मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के विरोध में जमीयत-ए-उलेमा की रैली को मंज़ूरी दी, हाईकोर्ट ने कहा- लोगों की संख्या 750 रहेगी
कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को जमीयत-ए-उलेमा को कोलकाता में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के विरोध में एक विरोध रैली करने की इजाज़त दी।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने 11 अगस्त को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच राजाबाज़ार से मौलाली तक रैली करने की इजाज़त दी। हालांकि, कोर्ट ने इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या 750 तक सीमित की।कोलकाता पुलिस द्वारा रैली की इजाज़त न दिए जाने के बाद जमीयत-ए-उलेमा ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। संगठन ने अपने राष्ट्रीय सचिव के ज़रिए 3 अगस्त को पुलिस से 11 अगस्त को...

पुरुष की पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाकर अंतरिम सुरक्षा हासिल की: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जोड़े पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ़्ते एक जोड़े पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि उन्होंने यह बात छिपाई थी कि पुरुष पहले से शादीशुदा था, ताकि पुलिस की प्रताड़ना और ज़बरदस्ती की कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिल सके।उनकी याचिका खारिज करते हुए जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने कहा कि जोड़े ने झूठा हलफनामा देकर और ज़रूरी जानकारी छिपाकर कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने "तथ्य छिपाकर और कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करके" पहले अंतरिम सुरक्षा भी हासिल कर ली थी।संक्षेप में...

'ट्रायल कोर्ट की लापरवाही': किसी दूसरे केस से जुड़ी थी FSL रिपोर्ट, एमपी हाईकोर्ट ने रद्द की 2009 की हत्या की सज़ा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2009 में हत्या के दोषी ठहराए गए दो लोगों को बरी किया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने जिस FSL रिपोर्ट पर भरोसा किया था, वह किसी दूसरे केस से जुड़ी थी। कोर्ट ने इस दस्तावेज़ पर भरोसा करने में ट्रायल कोर्ट की लापरवाही पर हैरानी जताई। [2026 LiveLaw (MP) 320]सबूतों की मेरिट के आधार पर जांच करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने आगे कहा कि इस बात पर एक अहम विवाद था कि क्या FIR दर्ज होने के समय मृतक जीवित था या क्या कुछ पुलिस अधिकारियों...

इस्लाम अपनाने के बाद पिता ने गैर-कानूनी रूप से कैद की 2 बहनें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया ₹25 लाख का मुआवज़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते दो बालिग बहनों के पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से ₹25 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने के फ़ैसले के बाद महिलाओं को उनके पैतृक घर में गैर-कानूनी रूप से कैद करके रखा गया था।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने दिया भाटिया उर्फ़ ज़ोया दिया भाटिया (20) और अंशु भाटिया उर्फ़ अमीना अंशु भाटिया (35) से जुड़ी 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को मंज़ूरी देते हुए यह आदेश पारित किया।यह आदेश तब दिया गया, जब...

गन लाइसेंस पाना मौलिक अधिकार नहीं, नौकरी की ज़रूरत से लाइसेंस रिन्यूअल का हक नहीं मिलता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि गन लाइसेंस पाने या उसे रिन्यू कराने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत लाइसेंस मिलना सिर्फ़ एक कानूनी सुविधा है।जस्टिस संजय कुमार मेधी की सिंगल बेंच ने तीन लोगों की याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। इन लोगों का दावा था कि गन लाइसेंस की मियाद खत्म होने से वे बेरोजगार हो गए, क्योंकि उनके काम के लिए लाइसेंस की ज़रूरत थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले नागालैंड और असम के बाहर दूसरी जगहों पर प्राइवेट कंपनियों में काम करते थे और गन...

Wrestlers' Molestation Case | शिकायतकर्ता सालों तक चुप रहीं, बृजभूषण से अच्छे संबंध रखें; बयानों में विरोधाभास: कोर्ट
दिल्ली कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों से जुड़े मामले में बीजेपी नेता और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया। कोर्ट ने उनके लंबे समय तक चुप रहने, आरोपी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और बयानों में विरोधाभास को ऐसे हालात माना, जिनसे अभियोजन पक्ष के मामले पर उचित संदेह पैदा होता है।राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कई तस्वीरें थीं, जिनसे पता चलता है कि...

बिना बहस लोकसभा में पारित हुआ ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026
विपक्ष के सांसदों के कई मुद्दों पर भारी विरोध के बीच लोकसभा ने सोमवार को ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल, 2026 को बिना किसी बहस के पास किया।बिल पेश करने वाले केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संबंधित मूल कानूनों के तहत किसी भी ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद नियुक्तियों, ट्रिब्यूनल की आज़ादी और पारदर्शिता को मज़बूत करना है।इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।इस बिल में ट्रिब्यूनल की नियुक्ति,...

20 साल तक बाकी रकम जमा न करने के बाद प्रॉपर्टी खरीदने वाला सेल डीड लागू करने की मांग नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रॉपर्टी खरीदने वाला व्यक्ति 20 साल तक बिक्री की बाकी रकम जमा न करने के बाद सेल डीड को लागू करने की मांग नहीं कर सकता।ऐसा करते हुए कोर्ट ने उस खरीदार को बाकी रकम जमा करने के लिए समय देने वाला आदेश रद्द किया, जिसके पक्ष में 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' (अनुबंध का पालन) का मुकदमा तय हुआ था। कोर्ट ने देखा कि उसने बकाया रकम जमा करने के लिए समय बढ़ाने की अर्जी देने में 20 साल का इंतज़ार किया।राम लाल बनाम जरनैल सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस रोहित...

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य को डबल मर्डर केस में 4 साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से मिली ज़मानत
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित सदस्य को डबल मर्डर केस में रेगुलर ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि उस पर जो आरोप हैं - जैसे हथियार का इंतज़ाम करना और हमलावरों को पनाह देना - वे IPC की धारा 302 के तहत अपराध को सीधे अंजाम देने से अलग और दूर की बात हैं। [2026 LL (PH) 263]कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ़ मामला एक सह-आरोपी के बयान पर आधारित है।जस्टिस मनीषा बत्रा ने देखा कि याचिकाकर्ता पहले ही लगभग चार साल और चार महीने जेल में बिता चुका है, जबकि अभियोजन पक्ष के 91 गवाहों में से केवल 38...

मजिस्ट्रेट कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों का नाम बता सकते हैं, CrPC की धारा 176(1A) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कस्टडी में हुई मौत की जांच CrPC की धारा 176(1A) के तहत करने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का काम सिर्फ़ मौत का कारण पता करना ही नहीं है, बल्कि वे उन लोगों की पहचान करने के लिए भी अधिकृत हैं, जो पहली नज़र में कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं और उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का निर्देश भी दे सकते हैं। [2026 LiveLaw (MP) 319]जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने धार ज़िला जेल के सुपरिटेंडेंट और डॉक्टरों की एक टीम द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं। इन...

किसी खास समय के लिए खराब रिकॉर्ड होने पर भी बाद की बेदाग़ सर्विस के आधार पर सिलेक्शन ग्रेड मिल सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ़ खराब रिकॉर्ड (एडवर्स एंट्री) किसी खास समय तक ही सीमित है तो उस समय के बाद की गई सर्विस को सिलेक्शन ग्रेड देने के लिए ज़रूरी 10 साल की संतोषजनक सर्विस में गिना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिटायरमेंट के ठीक अगले दिन मिलने वाला सिलेक्शन ग्रेड भी उसे पाने का हक है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,“04.12.2004 के आदेश के अनुसार खराब टिप्पणी 1977 से 1994-95 तक के खास समय के लिए थी, जिसका मतलब है कि 01.07.1995 से...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 21 साल बाद गैर-इरादतन हत्या के मामले में सज़ा रद्द की, कहा- अभियोजन पक्ष ने तथ्यों को छिपाया
गैर-इरादतन हत्या के मामले में 2005 की सज़ा रद्द करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उसी घटना में चार आरोपियों को लगी गंभीर और धारदार चोटों के बारे में बताने में नाकाम रहा। यह कोई मामूली चूक नहीं थी, बल्कि अहम तथ्यों को जानबूझकर छिपाना था, जिसने उनके मामले की बुनियाद को ही हिला दिया। [2026 LL (PH) 264]जस्टिस एच. एस. ग्रेवाल ने अपील मंज़ूर की और अपीलकर्ताओं को IPC की धारा 148, 304 और 323 (धारा 149 के साथ) के तहत आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि सबूतों से पता चलता है...

धोखाधड़ी न होने पर योग्यता की कमी के आधार पर 29 साल बाद शिक्षक की नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे शिक्षक की अपील को मंज़ूरी दी, जिसकी योग्यता पर लगातार 29 साल की सेवा के बाद सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने कहा कि इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट की धारा 16-E(10) के तहत नियुक्ति रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत देर से नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट की फुल बेंच के उस फ़ैसले से बंधा हुआ है, जो 'डॉ. आशा सक्सेना बनाम श्रीमती एस. के. चौधरी और अन्य' मामले में दिया गया। उस मामले में लगभग 17 साल बीत जाने के बाद इसी शक्ति का इस्तेमाल मनमाना माना गया।उसी फ़ैसले का हवाला...

यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई के दौरान वकील ने पीड़िता के कपड़ों पर किए सवाल, हाईकोर्ट ने की आलोचना, कहा- 'जींस पहनना महिला की अपनी पसंद'
दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में बचाव पक्ष के वकील द्वारा की गई जिरह (Cross-Examination) के तरीके की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के कपड़ों के बारे में पूछे गए सवाल "पूरी तरह से अप्रासंगिक" है और ऐसा लगता है कि इनका मकसद उसे शर्मिंदा करना, अपमानित करना और उसके चरित्र पर सवाल उठाना है। [2026 LiveLaw (Del) 736]जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने कहा कि महिला का जींस पहनना उसकी अपनी पसंद का मामला है और किसी को भी उसके कपड़ों के बारे में कुछ भी तय करने का अधिकार नहीं है।आरोपी को बरी करने...

विधवा द्वारा गोद लिए गए बच्चे को उसके मृत पति की संपत्ति का अधिकार मिल सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को मृत पति का भी गोद लिया हुआ बेटा माना जाएगा और उसे पति का हिस्सा मिलेगा।'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में हाई कोर्ट के पहले के फैसले का पालन करते हुए, जस्टिस चंद्र कुमार राय ने कहा,"इस कोर्ट ने 1966 RD 255 'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में यह माना है कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को पति का भी गोद लिया हुआ...

'कैजुअल लीव पर मौजूद कर्मचारी को ड्यूटी पर माना जाएगा': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिक की विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन देने का फैसला सही ठहराया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि कैजुअल लीव (आकस्मिक अवकाश) के दौरान कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) से हुई सेना के जवान की मौत को मिलिट्री सर्विस से जुड़ा हुआ माना जाएगा। इस आधार पर उनकी विधवा को स्पेशल फैमिली पेंशन दी जाएगी। [2026 LL (PH) 261]जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की डिवीजन बेंच ने भारत सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल, रीजनल बेंच, चंडीगढ़ के आदेश को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने विधवा को सामान्य फैमिली पेंशन के बजाय स्पेशल...

जो वकील प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर AIBE पास नहीं कर पाते, वे प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि जिन वकीलों ने 2009-10 या उसके बाद के एकेडमिक सेशन में लॉ की डिग्री ली और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वे प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास न करने पर प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि अगर ऐसे वकील 2 साल की अवधि में AIBE पास नहीं कर पाते हैं तो वे "किसी भी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या किसी अन्य अथॉरिटी" में प्रैक्टिस करने के हकदार नहीं होंगे।कोर्ट ने आगे साफ़...

हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (03 अगस्त, 2026 से 07 अगस्त, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।मीटर से छेड़छाड़ के सबूत के बिना सिर्फ़ बिजली का बिल न भरना 'बिजली की चोरी' नहीं: पटना हाईकोर्ट पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली का बिल न भरना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135 के तहत बिजली की चोरी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि कनेक्शन असल में काट दिया गया या उपभोक्ता ने मीटर...
