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लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू के बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैदियों के मोबाइल फोन रखने पर स्वत: संज्ञान लिया
लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू के बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैदियों के मोबाइल फोन रखने पर स्वत: संज्ञान लिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैदियों द्वारा जेल परिसर के अंदर फोन के उपयोग के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया है और जानना चाहा है कि "ऐसी प्रतिबंधित वस्तुओं के प्रवेश को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।"दोनों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए, जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई द्वारा दिए गए इंटरव्यू पर भी ध्यान दिया, जो सिद्धू मूसेवाला हत्या मामले में आरोपी है। जब इंटरव्यू प्रसारित हुआ तब बिश्नोई न्यायिक हिरासत में था।पीठ ने...

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को निष्क्रिय कर दिया है, आशा है नियुक्तियां शीघ्र होंगी: मद्रास हाईकोर्ट
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को निष्क्रिय कर दिया है, आशा है नियुक्तियां शीघ्र होंगी: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि हालांकि सरकार ने पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की थी, लेकिन समय पर नियुक्तियां न करके उसने आयोग को निष्क्रिय बना दिया था।चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस भरत चक्रवर्ती की पीठ ने वकील के बालू द्वारा दायर याचिका पर यह टिप्पणी की, जिन्होंने आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों को जल्द से जल्द नियुक्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है।कोर्ट ने कहा,“सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के लिए एक टीम का गठन किया है, लेकिन...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य को एटीएम उपयोगकर्ताओं की पहचान करने, आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए फेशियल बायोमेट्रिक्स का उपयोग करने पर विचार करने का निर्देश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य को एटीएम उपयोगकर्ताओं की पहचान करने, आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए फेशियल बायोमेट्रिक्स का उपयोग करने पर विचार करने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य को सभी एटीएम पर 'फेसियल बायोमेट्रिक आइडेंटीफिकेशन सिस्टम' स्थापित करने के लिए सभी बैंक अधिकारियों और विशेष रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारियों के साथ चर्चा करने का निर्देश दिया है, ताकि जांच एजेंसियों को अवैध उद्देश्यों के लिए ऐसी सुविधाओं का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की पहचान पता करने में सुविधा हो सके।जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस चितरंजन दास की खंडपीठ एक नाबालिग लड़की के पिता की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण की प्रकृति की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर...

सरकारें मुद्दों पर निर्णय नहीं ले रही हैं, उन्हें निर्णय लेने के लिए अदालतों पर छोड़ रही हैं, लंबित मामलों पर जस्टिस मनमोहन ने कहा
सरकारें मुद्दों पर निर्णय नहीं ले रही हैं, उन्हें निर्णय लेने के लिए अदालतों पर छोड़ रही हैं, लंबित मामलों पर जस्टिस मनमोहन ने कहा

दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस मनमोहन ने लंबित मामलों पर बोलते हुए बुधवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मुद्दों पर निर्णय नहीं ले रही हैं और उन्हें निर्णय लेने के लिए अदालतों पर छोड़ रही हैं। जस्टिस मनमोहन ने कहा कि अदालतों को जनहित याचिका पर बड़ी संख्या में मामले मिल रहे हैं जो न्यायपालिका के क्षेत्र में नहीं होने चाहिए, लेकिन "इससे जूझना होगा" क्योंकि नागरिकों को उपचार के बिना नहीं छोड़ा जा सकता है।जस्टिस डीपीआईआईटी के साथ साझेदारी में भारतीय उद्योग परिसंघ की ओर से व्यापार में आसानी पर आयोजित...

तलाक का तथ्य ठीक से स्थापित नहीं होने पर मुस्लिम पत्नी को भरण-पोषण देने से वंचित नहीं किया जा सकता: जेएंड के एंड एल हाईकोर्ट
तलाक का तथ्य ठीक से स्थापित नहीं होने पर मुस्लिम पत्नी को भरण-पोषण देने से वंचित नहीं किया जा सकता: जेएंड के एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम शख्या को तलाक का तथ्य, जैसा कि उसने दावा किया था, स्थापित होने तक अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का आदेश दिया है।मुस्लिम पर्सनल लॉ तलाकशुदा पत्नी को भरण-पोषण देने पर विचार नहीं करता है। जस्टिस रजनेश ओसवाल ने हालांकि स्पष्ट किया कि विवाह विच्छेद का मुद्दा साबित नहीं होने पर पत्नी को अपने पति से किसी भी भरण-पोषण के बिना अपना जीवन जीने के लिए नहीं कहा जा सकता है।पीठ ने तर्क दिया कि भरण-पोषण से इनकार करने से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 488 का...

जजशिप ने मुझे बहुत संतुष्टि की भावना दी: चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी विदाई पर कहा
'जजशिप ने मुझे बहुत संतुष्टि की भावना दी': चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी विदाई पर कहा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी पदोन्नति पर चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट से विदाई ली। इस मौके पर उन्होंने कहा कि न्यायाधीश पद से उन्हें बहुत संतुष्टि का एहसास हुआ है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा,“बेंच पर अपने 15 वर्षों के दौरान, मैं जीवन के सभी क्षेत्रों और समाज के सभी हिस्सों के लोगों से संबंधित मामलों को निपटाने में भाग्यशाली रहा हूं। एक न्यायाधीश के रूप में मैंने हमेशा अपने अधिकार क्षेत्र को इस तरह से फैलाने की कोशिश की है कि वादी राहत लेकर वापस...

ऑनलाइन गेम्स को रगुलेट करने के लिए बना तमिलनाडु कानून पोकर और रम्मी जैसे कौशल आधारित खेलों पर लागू नहीं होगा: मद्रास हाईकोर्ट
ऑनलाइन गेम्स को रगुलेट करने के लिए बना तमिलनाडु कानून पोकर और रम्मी जैसे कौशल आधारित खेलों पर लागू नहीं होगा: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु ऑनलाइन जुआ निषेध और ऑनलाइन गेम विनियमन अधिनियम 2022 की वैधता को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह अधिनियम रम्मी और पोकर जैसे खेलों पर लागू नहीं होगा, जो कौशल के खेल हैं और यह केवल संयोग के खेलों के ‌खिलाफ लागू होगा।इस प्रकार चीफ जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस पीडी औडिकेसवालु की पीठ ने अधिनियम को चुनौती देने वाली ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों द्वारा दायर एक आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने अधिनियम को चुनौती दी थी, जो 21...

[पीएम मोदी डिग्री विवाद] गुजरात हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पुनर्विचार याचिका खारिज की
[पीएम मोदी डिग्री विवाद] गुजरात हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पुनर्विचार याचिका खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 का आदेश रद्द करने के 31 मार्च के आदेश पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस बीरेन वैष्णव की पीठ ने 30 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखने के एक महीने बाद यह आदेश पारित किया।केजरीवाल ने हाईकोर्ट के मार्च के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था, जिसमें गुजरात यूनिवर्सिटी (GU) की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर...

वृन्दावन बांकेबिहारी कॉरिडोर विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर के रखरखाव के लिए जनहित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा
वृन्दावन बांकेबिहारी कॉरिडोर विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर के रखरखाव के लिए जनहित याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को वृन्दावन में बांकेबिहारी मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, रखरखाव और सुरक्षा के संबंध में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के समूह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया।सुनवाई के आखिरी दिन, मंदिर सेवायतों (गोस्वामियों) ने एचसी को बताया कि अगर यूपी सरकार उन्हें उक्त उद्देश्य के लिए जमीन देती है तो वे मंदिर को कहीं और...

ई-फाइलिंग सिस्टम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अभियोजकों को लैपटॉप/आईपैड दें: बॉम्बे हाईकोर्ट
ई-फाइलिंग सिस्टम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अभियोजकों को लैपटॉप/आईपैड दें: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के महाधिवक्ता डॉ. बीरेंद्र सराफ से हस्तक्षेप की मांग की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ई-फाइलिंग सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। जस्टिस एमएस कार्णिक ने कहा कि ई-फाइलिंग सिस्टम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अभियोजकों को लैपटॉप प्रदान करना आवश्यक है।अदालत ने कहा,“ ई-फ़्लिंग के सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए, यह नितांत आवश्यक है कि विद्वान एपीपी को जल्द से जल्द लैपटॉप/आईपैड की सुविधा प्रदान की जाए… विद्वान...

कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी रोकना गैरकानूनी, खासकर जब वह पहले से ही पुरानी पेंशन योजना में नामांकित हो: राजस्थान हाईकोर्ट
कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी रोकना गैरकानूनी, खासकर जब वह पहले से ही पुरानी पेंशन योजना में नामांकित हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में नगर निगम को कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी भुगतान जारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे लाभों को रोकना अवैध, अन्यायपूर्ण और मनमाना है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि निगम ने उनसे नई पेंशन योजना और पुरानी पेंशन योजना के बीच चयन करने के लिए कहा, क्योंकि याचिकाकर्ता का पुरानी पेंशन योजना में पूर्व नामांकन उसकी कार्रवाई को अवैध ठहराने का एक अनिवार्य कारण है।कोर्ट ने कहा,"इस याचिका के लंबित रहने के दौरान, प्रतिवादियों ने 28.12.2017 को याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर...

सरोगेसी से बच्चे पैदा करने वाली मां को मैटरनिटी लीव से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
सरोगेसी से बच्चे पैदा करने वाली मां को मैटरनिटी लीव से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि प्राकृतिक जैविक मां और सरोगेसी के माध्यम से बच्चा पैदा करने वाली मां को मैटरनिटी लीव देने के उद्देश्य से अलग नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह भी कहा कि सरोगेसी की प्रक्रिया के माध्यम से जन्मे शिशुओं को दूसरों की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता है और उन्हें शैशवावस्था के दौरान 'मां के प्यार, देखभाल, सुरक्षा और ध्यान' की आवश्यकता होती है।कोर्ट ने कहा,“…भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित जीवन के अधिकार में...

डीडीए डिमो‌लिशन| रिट कोर्ट का दायरा सीमा निर्धारण से संबंधित जटिल विवादों को सुलझाने तक विस्तारित नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट
डीडीए डिमो‌लिशन| रिट कोर्ट का दायरा सीमा निर्धारण से संबंधित जटिल विवादों को सुलझाने तक विस्तारित नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट हाल ही में एक फैसले में कहा कि रिट अदालत का दायरा सीमा निर्धारण पर जटिल विवादों को हल करने तक विस्तारित नहीं है, जिसके लिए दस्तावेजों, सर्वेक्षणों, मानचित्रों की गहन जांच, उनकी वैधता का आकलन और क्षेत्रों के जमीनी अध्ययन की आवश्यकता होती है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे कार्य पूरी तरह से वैधानिक प्राधिकरणों की विशेषज्ञता और अधिकार क्षेत्र में आते हैं जो राज्य विधायिका द्वारा अधिनियमित प्रासंगिक भूमि क़ानून के तहत गठित होते हैं।कोर्ट ने...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अभियुक्तों को जमानत दी, कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के अभाव में उन्हें धारा 37 की कठोरता के लिए बाध्य करने का कोई कारण नहीं
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अभियुक्तों को जमानत दी, कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के अभाव में उन्हें धारा 37 की कठोरता के लिए बाध्य करने का कोई कारण नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट की एक अवकाश पीठ ने, जिसमें जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी शामिल थे, एनडीपीएस अधिनियम में आरोपी याचिकाकर्ताओं को यह देखते हुए जमानत दे दी कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता कि अदालत केवल तभी जमानत दे सकती है, जब यह मानने के उचित आधार हों कि अभियुक्त दोषी नहीं हैं और दोबारा अपराध नहीं करेंगे, यह वर्तमान मामले पर लागू नहीं होगा।यह देखते हुए कि एक आरोप पत्र दायर किया गया था लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट या यहां तक कि एक पूरक आरोप पत्र भी "संस्थागत रुकावटों"...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी स्वामित्व विवाद मामलों की सुनवाई एक दिसंबर तक के लिए स्थगित की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी स्वामित्व विवाद मामलों की सुनवाई एक दिसंबर तक के लिए स्थगित की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज ज्ञानवापी-काशी काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी स्‍वामित्व विवाद मामलों की सुनवाई एक दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी। चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की सहमति से यह आदेश पारित किया।यह ध्यान दिया जा सकता है कि चीफ ज‌स्टिस बेंच के समक्ष मुद्दे मस्जिद समिति द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित हैं, जिसमें पूजा स्थलों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा के अधिकार की मांग करने वाले हिंदू उपासकों द्वारा दायर मुकदमे के सुनवाई योग्य...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने केवल मौखिक परीक्षा के आधार पर चयनित विभाग के संयुक्त निदेशक की बेटी की नियुक्ति रद्द की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने केवल मौखिक परीक्षा के आधार पर चयनित विभाग के संयुक्त निदेशक की बेटी की नियुक्ति रद्द की

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस) के नियुक्ति आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उक्त नियुक्ति पूरी तरह से उम्मीदवार द्वारा मौखिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर की गई थी और इसलिए अवैध है।चीफ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस कार्डक एटे की खंडपीठ ने कहा,“माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवीण सिंह बनाम पंजाब राज्य (2000) 8 एससीसी 633 के मामले में देखा था कि यदि मौखिक साक्षात्कार एकमात्र मानदंड लिया जाता है तो सामान्य नियुक्तियों के लिए हमेशा संदेह की गुंजाइश रहती...

यदि सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं करता तो मजिस्ट्रेट प्रारंभिक जांच का आदेश दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यदि सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं करता तो मजिस्ट्रेट प्रारंभिक जांच का आदेश दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दायर एक आवेदन पर विचार करते समय उन मामलों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले प्रारंभिक जांच का निर्देश देने का विवेकाधिकार है, जहां उसे लगता है कि यह संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।हालांकि, अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच का दायरा प्राप्त जानकारी की सत्यता या अन्यथा की पुष्टि करना नहीं है, बल्कि केवल यह सुनिश्चित करना है कि क्या जानकारी किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा करती है।जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की...

एससी-एसटी एक्ट| एससी-एसटी समुदाय से होने के कारण पीड़ित को अपमानित करने का इरादा, आरोपी को फंसाने के ‌लिए जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एससी-एसटी एक्ट| एससी-एसटी समुदाय से होने के कारण पीड़ित को अपमानित करने का इरादा, आरोपी को फंसाने के ‌लिए जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद ‌हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत किसी को आरोपित करने के लिए यह आवश्यक है कि पीड़ित के खिलाफ आहत शब्दों का इस्तेमाल उसके एससी/एसटी समुदाय से संबं‌धित होने के कारण उसे अपमानित करने के इरादे से किया गया हो।जस्टिस साधना रानी (ठाकुर) की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि पीड़िता एससी/एसटी समुदाय से है, 1989 के अधिनियम के तहत आरोपी व्यक्तियों को फंसाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा जब तक कि यह नहीं दिखाया जाता कि पीड़िता को...

यदि आरोपी पीड़िता से शादी कर लेता है तो क्या POCSO अधिनियम के तहत अपराध रद्द किया जा सकता है? हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को बड़ी पीठ को सौंपा
यदि आरोपी पीड़िता से शादी कर लेता है तो क्या POCSO अधिनियम के तहत अपराध रद्द किया जा सकता है? हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को बड़ी पीठ को सौंपा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पक्षों के बीच समझौते के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों को रद्द करने की व्यवहार्यता पर सवाल उठाया है। समान परिस्थितियों में अधिनियम के तहत एफआईआर को रद्द करने वाली अदालत की समन्वय पीठ द्वारा अपनाए गए विचारों से असहमति जताते हुए, जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने मामले को एक बड़ी पीठ को भेज दिया है।पीठ ने कहा,"चूंकि, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान अपराध जैसे जघन्य अपराधों में समझौते के आधार पर एफआईआर को रद्द करने की प्रथा की निंदा की है, इसलिए इस मामले को बड़ी बेंच को...