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मुंबई नगर निगम अधनियम और एफएसएस अधिनियम के बीच कोई टकराव नहीं; कैटरिंग व्यवसाय के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
8 Aug 2018 2:00 PM GMT
मुंबई नगर निगम अधनियम और एफएसएस अधिनियम के बीच कोई टकराव नहीं; कैटरिंग व्यवसाय के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 की धारा 394 को सही ठहराया है और कहा है कि इसके प्रावधान के तहत कैटरिंग व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस आवश्यक है।

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानकीकरण अधिनियम का उद्देश्य मानवीय उपभोग के लिए सुरक्षित खाद्य पदार्थ की उपलब्धता सुनिश्चित करना है जबकि आम लोगों के स्वास्थ्य,स्वच्छता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी है।

पृष्ठभूमि

कोर्ट मुंबई के एक 61 वर्षीय व्यवसायी उमरखादी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त फैसला दिया। अपनी याचिका में उसने कोर्ट से इस आदेश की मांग की थी कि खाद्य सुरक्षा और मानकीकरण अधिनियम एमएमसी अधिनियम की धारा 394(1)(e) से ऊपर है।

याचिकाकर्ता की एक दूकान थी जिसमें वह कई तरह की खाने की वस्तुएं तैयार करके बेचता था। चूंकि याचिकाकर्ता की दूकान में कुछ गैस सिलिंडर थे, मुंबई नगर निगम ने उसे अधिनियम की धारा 394 के तहत इसके लिए लाइसेंस लेने को कहा।

याचिकाकर्ता ने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया और उसके दूकान का निरिक्षण करने आए स्वच्छता निरीक्षक ने बिना लाइसेंस के कैटरिंग व्यवसाय चलाने के लिए उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया।

याचिकाकर्ता को 6 अप्रैल 2017 को एक पत्र द्वारा सूचित किया गया कि लाइसेंस प्राप्त करने का उसका आवेदन अस्वीकार हो गया है और उसको अपना व्यवसाय सात दिन के अंदर बंद कर देने को कहा गया।

याचिकाकर्ता ने अपना व्यवसाय तो बंद नहीं किया बल्कि एफएसएस अधिनियम के तहत एक पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया। इसकी वजह से, नगर निगम ने उसके दूकान से उसका गैस चुल्हा और गैस सिलिंडर जब्त कर लिया। इसके बाद रिट याचिका दायर की गई।

फैसला

कोर्ट ने कहा कि धारा 394 के तहत जो प्रतिबन्ध लगाए गए हैं उसका उद्देश्य दूकान में ऐसी कुछ विशेष वस्तुओं के भंडारण को विनियमित करना है ताकि इनका ठीक से रखरखाव नहीं होने के कारण आग न लग जाए। इसी तरह, इस कारोबार पर प्रतिबन्ध इसलिए लगाया गया है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी, अस्वच्छता की स्थिति और संक्रमण वाले रोगों को फ़ैलने से रोका जा सके।

पीठ ने कहा,

“...एफएफएस अधिनियम के प्रावधान काफी व्यापक और आम किस्म के हैं और यह एमएमसी अधिनियम के तहत विशिष्ट अनिवार्यताओं को पूरा नहीं करता है, जैसे कि किसी विशेष तरह के कारोबार और नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं के भंडारण को विनियमित करना ताकि आम लोगों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके। संबंधित क़ानून और केंद्रीय वैधानिक प्रावधान इसको प्रशासित नहीं करते बल्कि ये दो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावी हैं। इस तरह इनके (एफएसएस अधिनियम और एमएमसी अधिनियम) प्रावधानों बीच किसी तरह का टकराव नहीं है।”

कोर्ट ने कहा कि एमएमसी अधिनयम के तहत लाइसेंस की अनिवार्यता आम जीवन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है इसलिए संविधान में अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत प्रतिबन्ध अनावश्यक नहीं हैं।

ऐसा कहते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।


 
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