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किसी डॉक्टर पर मेडिकल लापरवाही के अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाना ठीक नहीं, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मेडिकल लापरवाही के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को अलग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया कि आपराधिक कानून के तहत लापरवाही के लिए एक पेशेवर डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए यह दिखाया जाना चाहिए कि उसने कुछ ऐसा किया या कुछ ऐसा करने में असफल रहा जो दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों में उसकी साधारण इंद्रियों और विवेक में कोई भी पेशेवर डॉक्टर ऐसा नहीं कर सकता था या करने में असफल रहा था। डॉक्टर के खिलाफ की गई शिकायत में आरोप था कि उसने शिकायतकर्ता पर अपनी पत्नी के निजी...
अगर बच्चों को वाहन चलाने की देते हैं इजाजत तो हो जाएं सावधान, अभिभावकों को जाना पड़ सकता है जेल, जानिए खास बातें
मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 को 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई। इस अधिनियम में बच्चों द्वारा वाहनों का उपयोग करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। नव सम्मिलित धारा 199A के अनुसार जहां एक किशोर द्वारा मोटर वाहन अपराध किया गया है, ऐसे किशोर के माता-पिता या अभिभावक या मोटर वाहन के मालिक को कानून के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा और वह तदनुसार कानूनी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी होगा और उसे दंडित किया जायेगा। इस धारा के स्पष्टीकरण में यह कहा गया है कि...
भाजपा लीगल सेल के विरोध पर आर्टिकल 370 पर अपना लेक्चर रद्द होने के बाद सीनियर एडवोकेट केएम विजयन ने जम्मू कश्मीर पर दी अपनी राय
सीनियर एडवोकेट केएम विजयन आर्टिकल 370 पर मद्रास बार एसोसिएशन में लेक्चर देने वाले थे, लेकिन इस लेक्चर के ठीक पहले भाजपा लीगल सेल के विरोध के कारण इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद सीनियर एडवोकेट केएम विजयन ने लाइव लॉ के साथ बातचीत में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर अपने विचार रखे। मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता के एम विजयन 14 अगस्त को लंच ब्रेक के दौरान बार एसोसिएशन की अकादमिक व्याख्यान श्रृंखला के रूप में भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 विषय पर एक व्याख्यान देने वाले थे। इस व्याख्यान के...
मोटर दुर्घटना के मामलों में मृतक पीड़ित के वेतन का आकलन इस तथ्य के आधार पर नहीं किया जा सकता है कि वह एक प्रतिभाशाली छात्र था, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहा है कि केवल इसलिए कि मोटर दुर्घटना के मामले में पीड़ित एक प्रतिभाशाली छात्र था, उसके वेतन को 'एक्सेम्पलरी' (अत्यधिक) नहीं माना जा सकता है। औरंगाबाद पीठ की न्यायमूर्ति विभा कंकानवाड़ी ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड द्वारा दायर अपील को आंशिक रूप से अनुमति दी और मुआवजे की राशि को रु 21.90 लाख से घटाकर 15.82 लाख कर दिया। दरअसल बीमाकर्ता ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा पारित अवार्ड को चुनौती दी थी। केस की पृष्ठभूमि मृतक कृष्णा काबरा, 22 साल का एम.कॉम की पढ़ाई...
किसी संपत्ति का हस्तांतरण सिर्फ इसलिए अवैध नहीं हो सकता, क्योंकि हस्तांतरण संपत्ति पर मुकदमा लंबित रहते किया गया, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिस पेंडेंस सिद्धांत का प्रभाव पक्षकारों द्वारा एक मुकदमे के संबंध में किए गए सभी हस्तातंरण को निरस्त करना नहीं है, बल्कि पक्षकारों को मुकदमे में मिलने वाली डिक्री या आदेश के अधीन जो अधिकार मिले हैं, उन पर यह लागू होता है। इस तरह के हस्तांतरण केस के परिणाम के अधीन मान्य रहते हैं। यह टिप्पणी जस्टिस अभय मनोहर सपरे और जस्टिस दिनेश महेश्वरी की पीठ ने हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए की है। हाईकोर्ट ने दूसरी अपील पर सुनवाई के बाद निर्णय दिया था कि मुकदमे की लंबित...
पहलू खान हत्याकांड : वीडियो, गवाह, सबूत सब मौजूद, लेकिन पुलिस ने खराब की जांच, पढ़िए फैसला
अप्रैल 2017 में दिल्ली और जयपुर के बीच मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहलू खान को पीटा गया। मौके पर 200 लोग मौजूद थे। उससे मारपीट का बकायदा मोबाइल फोन से वीडियो भी बनाया गया। 9 लोगों ( तीन नाबालिग) को आरोपी बनाया गया। तमाम गवाह, वीडियो और बाकी सबूत अदालत में पेश किए गए, लेकिन अदालत ने 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। अलवर जिले की अपर सेशन न्यायाधीश डॉ सरिता स्वामी ने 92 पेज के अपने फैसले में पुलिस की घटिया जांच को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। सवाल ये है कि आखिरकार अदालत को पुलिस...
वादी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना, पढ़िए फैसला
अदालत में वादियों या मुविक्कलों के प्रवेश पर रोक लगाकर न्याय के प्रशासन में बांधा ड़ालने के मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (एचसीबीए) को नोटिस जारी करने के बाद,पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इसी मामले में एचसीबीए पर पचास हजार रुपए हर्जाना भी लगा दिया है। मोनू राजपूत बनाम हरियाणा राज्य व अन्य नामक केस मोनू राजपूत ने दायर किया था। इस केस में उसने अपनी लिव-इन-पार्टनर नीशू को उसके पिता की कस्टडी से बाहर निकाले जाने की मांग की थी। इस मामले में पेशी के लिए पांच अगस्त को सुनवाई होनी थी,परंतु मामले की...
IBC की कार्यवाही में लंबित स्थगन में लेनदार को समझौता डिक्री की संतुष्टि के लिए प्राथमिकता नहीं दी जा सकती, पढ़िए दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
एक अवमानना की याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को माना है कि अवमानना की कार्यवाही को भुगतान के उस आदेश को तामील या निष्पादित करने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है,जिनके निष्पादन को एक कानून द्वारा चल रही दिवाला कार्यवाही के कारण रोका गया हो। क्या था मामला याचिकाकर्ता, एक एकमात्र स्वामी है और उसने अपना पैसा वसूलने के लिए प्रतिवादियों,जो कि एक निर्माण कंपनी है व उसके निदेशकों के खिलाफ सूट दायर किया था। जहां पर पक्षकारों के बीच समझौता होने पर एक समझौता डिक्री को...
जांच शुरू करने में 13 साल की अकारण देरी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई को बाधित किया, पढ़िए दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 साल पूर्व हुए दुर्व्यवहार के मामले में एक सरकारी कर्मचारी को राहत दी है। इस कर्मचारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने में 13 साल लग गए। अदालत ने इस देरी को असंगत, अनुचित और ऐसी प्रकृति का बताया जिसकी वजह से अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया बिगड़ गई। वर्तमान मामले में दिल्ली विद्युत आपूर्ति अंडर्टेकिंग (एक पूर्व कम्पनी) में मीटर की रीडिंग लेने का काम करनेवाले इस कर्मचारी (याचिकाकर्ता) के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई घटना के 13 साल बाद शुरू की गई। ...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया सिविक बॉडी को निर्देश, दीवार ढहने से मरने वाली सब्जी विक्रेता की मां को अंतरिम मुआवजे के रूप में दिए जाएं दो लाख रुपए, पढ़िए फैसला
प्रतिवादी की तरफ से भी ऐसी कोई दलील नहीं दी गई कि भारी बारिश,भूकंप या कुछ अन्य प्राकृतिक कारणों से दीवार ढ़ह गई थी। ऐसे में साफ है कि निमार्ण की ठीक से देखभाल नहीं की गई।
मोटर वाहन दुर्घटना के मुआवज़ा पर मिलने वाले ब्याज पर आयकर नहीं लगाया जा सकता, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन दुर्घटना में मिलने वाले मुआवज़ा पर अगर कोई ब्याज दिया जाता है तो उसपर आयकर अधिनियम 1961 के तहत आयकर नहीं लगाया जा सकता क्योंकि यह 'आय' नहीं है। यह फ़ैसला न्यायमूर्ति अकील कुरेशी और एसजे कठवल्ला ने रूपेश रश्मिकांत शाह की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। शाह को 40 साल पहले एक कार ने ठोकर मार दिया था जब वह मात्र आठ साल का था और इस वजह से वह बिस्तर पर ही परे रहने के लिए बाध्य हो गया। शाह ने याचिका दायर कर अदालत की राय जाननी चाही कि उसे...
एक अंपजीकृत वाहन को दूसरे वाहन के पंजीकृत नंबर के साथ चलाना न तो धोखा है और न ही जालसाजी, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
यह अभियोजन का मामला नहीं था कि पंजीकरण की नंबर प्लेट नकली थी या काल्पनिक रूप से बनाई गई थी या वह अस्तित्व में ही नहीं थी। दूसरी तरफ याचिकाकर्ता अपनी अन्य कार के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत बताई गई प्रक्रिया का पालन करते हुए पंजीकरण नंबर ले चुका है।
निकाहनामा है तो अंतर धार्मिक जोड़े पर विशेष विवाह अधिनयम के तहत पंजीकरण के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जोड़े को दिशानिर्देश जारी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक शादी करने वाले जोड़े को विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी को पंजीकृत कराने का निर्देश जारी किया था, जबकि इस जोड़े ने पहले ही निकाहनामा हासिल कर लिया था। एक जोड़े ने पुलिस सुरक्षा के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी। हाईकोर्ट ने यह जानने के बाद कि लड़की इस्लाम धर्म क़बूल करने से पहले और उस लड़के से शादी करने से पूर्व हिंदू थी, इस जोड़े को अपनी शादी...
चेक पर जिसे रुपए मिलने हैं, उसका नाम आरोपी ने ख़ुद बदला यह साबित करने की ज़िम्मेदारी शिकायतकर्ता की : केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि जब किसी चेक में जिसको राशि का भुगतान होना है उसका नाम बदला जाता है तो यह साबित करने की ज़िम्मेदारी शिकायतकर्ता की है कि आरोपी ने ख़ुद यह बदलाव किया है या फिर आरोपी की सहमति से ऐसा किया गया है। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने ने जीमोल जोसेफ़ बनाम कौशतुभं मामले में यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 138 के तहत पावर ऑफ़ अटर्नी के माध्यम से शिकायत दर्ज करना क़ानूनन वैध है। इस मामले में चेक पर पाने वाले का नाम "कौस्थुभन" (आरोपी का नाम) लिखा था जिसे काटकर उस जगह पर...
पत्थलगढ़ी आंदोलन का समर्थन करने वाले आदिवासियों के खिलाफ बनता है प्रथम दृष्टया दंगे का मामला : झारखंड हाईकोर्ट
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद एक सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब कोई आलोचना सरकार के खिलाफ घृणा की हिंसा को जन्म देती है तो यह आईपीसी की धारा 124ए के तहत अपराध के समान है,जो संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत नहीं आता है। कोर्ट ने कहा कि फेसबुक पोस्ट से साफ जाहिर है कि प्रथम दृष्टया मंशा देशद्रोह करने की ही थी।
आखिर कब करती है CBI किसी मामले की जांच? जानिए कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब
स्पर्श उपाध्यायअक्सर हम अख़बारों में एवं न्यूज़ चैनल पर सुनते हैं की सीबीआई (केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) किसी मामले की जांच कर रही है, या सीबीआई जांच के हुए आदेश. पर क्या आप जानते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में और किन मामलों में सीबीआई जांच करती है? आखिर क्यूँ नहीं सीबीआई हर मामले की जांच करती है? कौन तय करता है कि किन मामलों में सीबीआई जांच की जायेगी? सीबीआई का क्या है इतिहास है यह कैसे करती है काम? हम यह सब आज के इस लेख में समझेंगे| सीबीआई का इतिहास क्या है? द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान,...
ग़ैरक़ानूनी बैठक मामला : IPC की धारा 149 के तहत अपराधों की सुनवाई सिर्फ़ इसलिए ग़ैरक़ानूनी नहीं क्योंकि धारा 141 की मदद नहीं ली गई, पढ़िए फैसला
जब तक धारा 141 के तहत ग़ैरक़ानूनी रूप से जमा होने और धारा 143 के तहत सज़ा देने की बात नहीं है तब तक धारा 149 के प्रावधान लागू नहीं किए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट के कुछ फ़ैसलों का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि धारा 141 को लागू नहीं करने का महत्व यह है कि ग़ैरक़ानूनी सभा/बैठक के अस्तित्व का आधार ही नहीं है।
कब्जे या आधिपत्य की बहाली के लिए शीर्षक का दावा करने वाला व्यक्ति कर सकता है केस दायर, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि कोई भी व्यक्ति जिसके पास प्रतिकूल आधिपत्य के आधार पर पूर्णकालिक शीर्षक है,वह निर्वासन या बेदखली की स्थिति में कब्जे या आधिपत्य की बहाली के लिए सूट या केस दायर कर सकता है। जस्टिस अरूण मिश्रा ,जस्टिस एस.अब्दुल नजीर और जस्टिस एम.आर शाह की पीठ ने कहा कि प्रतिकूल आधिपत्य के आधार पर शीर्षक के अधिग्रहण की दलील वादी द्वारा सीमा अधिनियम के अनुच्छेद 65 के तहत ली जा सकती है और एक वादी पर किसी भी अधिकार के उल्लंघन के मामले में परिसीमा अधिनियम 1963 के तहत वाद चलाने के लिए कोई...
महिला कांस्टेबल से दुष्कर्म के आरोपी को मिली बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत, पढ़िए कोर्ट का फैसला
वह एक बालिग शादीशुदा महिला है और उसका एक बेटा भी है। उसकी उम्र 31 साल है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण है। अगर प्राथमिकी में बताए गए इन तथ्यों को दोनों पक्षों के बीच आपस में भेजे गए लिखित मैसेज के साथ देखा जाए तो प्रथम दृष्टया, हमारा मानना है कि यह मामला आपसी सहमति का है।







