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'हाईकोर्ट के कट-कॉपी-पेस्ट आदेशों को देखकर परेशान, आदेश की पुष्टि के लिए स्वतंत्र कारण दिए जाएं ' : जस्टिस चंद्रचूड़
शुक्रवार को न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की, "कंप्यूटर-युग की समस्याओं में से एक है, आदेशों की नकल करना और चिपका देना! मैं उच्च न्यायालयों के कट-कॉपी-पेस्ट के आदेशों को देखकर तंग आ गया हूं।"जज ने जोड़ा,"एक आदेश की पुष्टि के लिए स्वतंत्र कारणों का हवाला दिया जाना चाहिए! विवेक का स्वतंत्र प्रयोग होना चाहिए! ट्रिब्यूनल के फैसले से कट, कॉपी, पेस्ट केवल पृष्ठों की संख्या बढ़ाता है लेकिन अपील के मुख्य मुद्दे का जवाब नहीं देता है!" पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एमआर शाह भी शामिल थे, ने इस...
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, महिला यौनकर्मियों आदि के रक्तदान करने पर सामान्य प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस रिट याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है जिसमें रक्तदान दिशा-निर्देशों को को चुनौती दी गई है जहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, महिला यौनकर्मियों आदि के रक्तदान करने पर सामान्य प्रतिबंध लगाया गया है।सीजेआई एस ए बोबडे की अगुवाई वाली एक बेंच ने अधिवक्ता जयना कोठारी की सुनवाई के बाद याचिका पर नोटिस जारी किया, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए कि वो वैज्ञानिक मुद्दों की विशेषज्ञ नहीं है, इन पर रोक लगाने की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।ट्रांसजेंडर समुदाय के एक सदस्य, थंजम...
आदेश 9 नियम 13 के आवेदन को तभी अनुमति दी जाएगी जब डिक्री को एक पक्षीय रद्द करने के लिए पर्याप्त कारण हों : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 13 के तहत आवेदन को स्वचालित रूप से अनुमति नहीं दी जा सकती है और इसे केवल तभी अनुमति दी जा सकती है जब डिक्री को एक पक्षीय रद्द करने के लिए पर्याप्त कारण हों।इस मामले में, किरायेदार ने उसके खिलाफ एक-पक्षीय डिक्री को रद्द करने के लिए एक आवेदन दायर किया था जिसे ट्रायल कोर्ट ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि किरायेदार द्वारा उक्त आवेदन के साथ प्रोविंशियल स्मॉल कॉज कोर्ट एक्ट, 1887 की धारा 17 द्वारा आवश्यक जमा नहीं किया गया था। उच्च...
'जज के टिप्पणियों पर बवाल क्यों? टिप्पणियां आदेश नहीं हैं': बलात्कार मामलों में सीजेआई की टिप्पणियों पर बीसीआई अध्यक्ष ने कहा
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष (बीसीआई) मनन कुमार मिश्रा (4 मार्च 2021) ने प्रेस रिलीज में कहा कि, "कुछ लोगों का अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए न्यायाधीशों के खिलाफ बोलना एक फैशन बन गया है। यदि इस तरह की प्रवृत्ति को जारी रखने की अनुमति जाती है, तो संस्थान अपनी पवित्रता खो देगी।"भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने एक मामले में अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान, उन्होंने बलात्कार के आरोपी व्यक्ति से पूछा था कि क्या वह पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार...
वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी वरिष्ठता मिले : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ अश्विनी कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वरिष्ठ नागरिकों को अस्पतालों में प्राथमिकता दी जाए। याचिका में बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए मांग की गई है।न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति सुभाष रेड्डी की पीठ ने निर्देश दिया है कि COVID-19 महामारी के बीच सरकारी चिकित्सा संस्थानों के अलावा निजी चिकित्सा संस्थानों में भी दाखिले में बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने...
डाइंग डिक्लेयरेशन की अनदेखी महज इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि अस्पताल में इसे दर्ज करते वक्त मृतका के सगे-संबंधी मौजूद थे : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डाइंग डिक्लयेरशन (मरते वक्त दिया गया बयान) पर महज इसलिए अविश्वास नहीं किया जा सकता, क्योंकि अस्पताल में इसे रिकॉर्ड में लाते वक्त मृतका के माता पिता और सगे संबंधी मौजूद थे।न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने हत्या के एक अभियुक्त की अपील खारिज करते हुए कहा, "यह स्वाभाविक है कि जब इस तरह की घटना घटती है, माता पिता और सगे संबंधी, रिश्तेतार नातेदार तुरंत अस्पताल पहुंचने का प्रयास करते हैं। महज इसलिए कि वे (माता पिता एवं सगे संबंधी) अस्पताल में...
हितबद्ध (इंट्रेस्टेड) व्यक्ति के साक्ष्य पर भी विचार किया जा सकता है बशर्ते इसकी पुष्टि हो : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हितबद्ध व्यक्ति के साक्ष्य पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते ऐसे साक्ष्य रिकॉर्ड पर लाये गये अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुष्ट हों।न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की बेंच ने कहा कि निकट संबंधी, जो स्वाभाविक गवाह होते हैं, को हितबद्ध गवाह नहीं माना जा सकता।इस मामले में, अभियुक्त को हत्या के प्रकरण में समान रूप से दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अभियुक्त ने अपनी पत्नी और मृतक के बीच कथित संबंधों के कारण मृतक की हत्या कर दी थी। शीर्ष अदालत...
'चेक डिसऑनर मामलों की पेंडेंसी विचित्र स्थिति' : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत दर्ज मामलों के लिए अतिरिक्त न्यायालय बनाने का आग्रह किया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (एनआई) अधिनियम की धारा 138 के तहत चेक डिसऑनर मामलों की पेंडेंसी की "समस्या" से निपटने के लिए अतिरिक्त अदालतों की स्थापना पर विचार करने का आग्रह किया।भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता को बताया कि अतिरिक्त अदालतों के निर्माण के लिए संविधान के अनुच्छेद 247 के तहत मिला अधिकार "एक कर्तव्य" है।सीजेआई ने एसजी से कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के...
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार द्वारा बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी को रोपड़ जेल से गाजीपुर जेल में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
"अनुच्छेद 32 हमारे संविधान का हृदय और आत्मा है।"सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह बात पंजाब राज्य और जेल अधीक्षक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका एक याचिका की सुनवाई में कहा। याचिका में पंजाब के रोपड़ जेल से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है।न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट दवे ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर यूपी सरकार की याचिका के सुनवाई योग्य...
"ओटीटी कंटेंट की स्क्रीनिंग होनी चाहिए, कुछ तो अश्लीलता भी दिखाते हैं " : सुप्रीम कोर्ट ने ' तांडव' मामले में टिप्पणी की
"हमारा विचार है कि ओटीटी कंटेंट की कुछ स्क्रीनिंग होनी चाहिए," सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वेब श्रृंखला "तांडव" के संबंध में दर्ज आपराधिक मामलों अग्रिम जमानत से इनकार करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अमेज़न प्राइम की कमर्शियल हेड अपर्णा पुरोहित की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा।"वास्तव में, कुछ मंच अश्लीलता भी दिखाते हैं, " पीठ ने टिप्पणी की।न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ इस मामले की अध्यक्षता कर रही है और पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021...
सीबीआई में अंतरिम निदेशक के खिलाफ कॉमन कॉज की याचिका, सुप्रीम कोर्ट से नियमित निदेशक की नियुक्ति की मांग
कॉमन कॉज़ सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 4 ए के अनुसार, सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के एक नियमित निदेशक की नियुक्ति की मांग की है।जनहित याचिका में इसी साल दो फरवरी को ऋषि कुमार शुक्ला का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, अंतरिम / कार्यवाहक सीबीआई निदेशक के रूप में प्रवीण सिन्हा की नियुक्ति का विरोध भी किया गया है।याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों को लागू करने के...
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अंतरिम जमानत पर छूटे 2674 कैदियों को COVID-19 की बेहतर स्थिति को देखते हुए 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को COVID-19 की बेहतर स्थिति को देखते हुए दिल्ली के ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए 2674 कैदियों को 1 मार्च से 15 मार्च तक दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। आदेश में कहा गया है,"COVID-19 महामारी में सुधार की स्थिति के मद्देनजर हम ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत पाए 2318 कैदियों और हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत पाए 356 कैदियों को आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हैं।"न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली...
हमें बार को यह संदेश देना चाहिए कि अकारण मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा, "हमें बार को यह संदेश देना चाहिए कि हम बगैर किसी कारण मामलों की सुनवाई स्थगित नहीं करेंगे।"न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने बेंच में शामिल न्यायमूर्ति एम आर शाह की मौजूदगी में यह टिप्पणी उस वक्त की जब सिविल मामले की एक 'आफ्टर नोटिस' विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) सुनवाई के लिए खंडपीठ के पास आयी और याचिकाकर्ता कंपनी के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) ने सुनवाई स्थगित करने का उनसे अनुरोध किया। इस मामले में 2017 में ही नोटिस जारी किया जा चुका...
"यह टिप्पणी चीजों को पितृसत्तात्मक तरीके से देखने का नज़रिया है": जस्टिस दीपक गुप्ता ने सीजेआई के बलात्कार के आरोपी से पीड़िता से शादी करने के बारे में पूछने पर कहा
भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे द्वारा बलात्कार के एक आरोपी से यह पूछने पर कि क्या वह पीड़िता से शादी करेगा, जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा। जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा,"दुर्भाग्य से जिस तरह से चीजों को देखा गया, उस हिसाब से यह एक बहुत पितृसत्तात्मक तरीके की गई टिप्पणी है। इतना ही नहीं, यह लैंगिग असंवेदनशीलता भी है।"जस्टिस दीपक गुप्ता ने यह बात सीजेआई एसए बोबडे की उस टिप्पणी के संदर्भ में कही है, जिसमें सीजेआई ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एक नाबालिग लड़की के बलात्कार के आरोपी 23 वर्षीय व्यक्ति से...
"क्या केरल सरकार यूपी से सिद्दीकी कप्पन के स्थानांतरण की मांग कर सकती है, एक राज्य दूसरे राज्य के खिलाफ अनुच्छेद 32 का आह्वान नहीं कर सकता हैः मुख्तार अंसारी मामले में दुष्यंत दवे ने कहा
"एक राज्य दूसरे राज्य के खिलाफ अनुच्छेद 32 का आह्वान नहीं कर सकता है।"पंजाब राज्य और जेल अधीक्षक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका एक याचिका की सुनवाई में यह दलील दी है। याचिका में पंजाब के रोपड़ जेल से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है।मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी दलीलें पेश कीं, जो...
केंद्र का कर्तव्य है कि संसद द्वारा बनाए गए कानून के बेहतर प्रशासन के लिए अतिरिक्त न्यायालयों का निर्माण करे: सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया राय व्यक्त की
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रथम दृष्टया विचार व्यक्त किया कि केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के बेहतर प्रशासन के लिए अतिरिक्त अदालतें बनाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 247 के तहत शक्ति, अतिरिक्त अदालतों को स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से "कर्तव्य के साथ युग्मित" है।संविधान का अनुच्छेद 247 संघ सूची के तहत मामलों के संबंध में कुछ अतिरिक्त अदालतों की स्थापना के लिए संसद...
भीमा कोरेगांव केस: सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत देने से इनकार करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया
जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बुधवार को एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट गौतम नवलखा द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के (एल्गार परिषद-माओवादी लिंक केस में) जमानत देने से इनकार करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में गौतम नवलखा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था।जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस केएम जोसेफ की तीन जजों की बेंच बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के खिलाफ दलील सुन रही है, जिसने विशेष अदालत के एक आदेश के खिलाफ...
सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के वेतन के अनुपात में पेंशन लागू करने को लेकर ईपीएफओ के खिलाफ अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ) और केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना याचिकाओं पर सुनवाईसे रोक दिया है, जिसमें उस फैसले को लागू करने की मांग की गई है कि कर्मचारियों की पेंशन अधिकतम 15,000 रुपये तक ही तय नहीं की जा सकती है और यह अंतिम वेतन समानुपातिक होना चाहिए।जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ की एक पीठ ने 23 मार्च से पेंशन मामले पर पुनर्विचार याचिकाओं पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला करते हुए यह आदेश दिया।पीठ ने यह भी स्पष्ट कहा कि कोई स्थगन नहीं दिया...
सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 के चलते दिए गए स्वत: संज्ञान सीमा अवधि विस्तार को वापस लेने का प्रस्ताव दिया, 90 दिन की अनुग्रह अवधि देने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संकेत दिया कि वह COVID-19 महामारी और राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण पिछले साल मामलों को दायर करने के लिए दिए गए स्वत : संज्ञान सीमा अवधि विस्तार को बढ़ाने के आदेश को हटाने का प्रस्ताव दे रहा है।भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज भारत के लिए अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह सीमा अवधि पर चल रहे प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव दे रही है। पीठ ने कहा कि यह सीमा के विस्तार के हटाने के प्रभावी होने के साथ 90 दिनों की एक अनुग्रह अवधि दे सकती है।पीठ ने यह भी कहा कि वह देश...
"सरकार से अलग विचार रखना देशद्रोह नहीं है": सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 पर टिप्पणी के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला पर कार्यवाही की याचिका 50 हजार जुर्माने के साथ खारिज की
"सरकार से अलग विचार रखना देशद्रोह नहीं है" सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने पर टिप्पणी के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा।रजत शर्मा और डॉ नेह श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि अब्दुल्ला ने लाइव बयान दिया कि अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए वह चीन से मदद लेंगे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूर्व सीएम कश्मीर को चीन को "सौंपने" की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह, उनके...



















