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मजिस्ट्रेट या बड़ी अदालतों की अनुमति के बिना मुख्य जिला पुलिस अधिकारी आगे की जांच के आदेश नहीं दे सकते : सुप्रीम कोर्ट
मजिस्ट्रेट या बड़ी अदालतों की अनुमति के बिना मुख्य जिला पुलिस अधिकारी आगे की जांच के आदेश नहीं दे सकते : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया है कि आगे की जांच का आदेश देने की शक्ति या तो संबंधित मजिस्ट्रेट के पास है या हाईकोर्ट के पास, न कि किसी जांच एजेंसी के पास। जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने कहा,“एक जिले का मुख्य पुलिस अधिकारी पुलिस अधीक्षक होता है जो भारतीय पुलिस सेवा का एक अधिकारी होता है। कहने की आवश्यकता नहीं है, जिला पुलिस प्रमुख का एक आदेश संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के समान नहीं है ………। कंटेम्पोरानिया एक्सपोसिटो का सिद्धांत ऐसे मामलों की व्याख्या करता है...

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के लिए न्यूट्रल साइटेशन लॉन्च किया
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के लिए 'न्यूट्रल साइटेशन' लॉन्च किया

लीगल सिस्टम में टेक्नॉलॉजी के उपयोग के संभावित तरीकों का पता लगाने के लिए डिजिटलाइजेशन, पेपरलेस कोर्ट और ई-इनिशिएटिव पर दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा शनिवार को ओडिशा न्यायिक अकादमी, कटक में किया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति धनंजय वाई. चंद्रचूड़ ने कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस राजेश बिंदल, उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर भी मौजूद थे।सुप्रीम कोर्ट के ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के फेज़-III के...

मणिपुर हिंसा : मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बीजेपी विधायक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
मणिपुर हिंसा : मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बीजेपी विधायक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

मणिपुर विधान सभा की पहाड़ी क्षेत्र समिति (एचएसी) के अध्यक्ष, डिंगांगलुंग गंगमेई ने मणिपुर की जनजाति के रूप में मेइती/मेइतेई समुदाय के लिए अनुसूचित जनजाति के दर्जे के संबंध में मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार को अनुसूचित जनजाति सूची के लिए एक जनजाति की सिफारिश करने का निर्देश देना पूरी तरह से राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में।भाजपा विधायक गंगमेई...

Breaking- पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रैश ड्राइविंग मामले में टाइम्स नाउ की रिपोर्टर भावना किशोर को अंतरिम जमानत दी
Breaking- पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रैश ड्राइविंग मामले में 'टाइम्स नाउ' की रिपोर्टर भावना किशोर को अंतरिम जमानत दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में आज शाम की गई एक विशेष सुनवाई में टाइम्स नाउ (Times Now) की रिपोर्टर भावना किशोर (Bhawana Kishore) को अंतरिम जमानत सोमवार तक के लिए दी गई। भावना को पंजाब पुलिस ने शुक्रवार को एक दलित महिला को उसकी कार से टक्कर मारने और उसके साथ गाली-गलौज करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका में भावना...

टेक्नोलॉजी महामारी तक ही सीमित नहीं है, इसे महामारी से आगे देखना चाहिए: चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सभी हाईकोर्ट से वर्चुअल सुनवाई के लिए बुनियादी ढांचे को भंग नहीं करने की अपील की
टेक्नोलॉजी महामारी तक ही सीमित नहीं है, इसे महामारी से आगे देखना चाहिए: चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सभी हाईकोर्ट से वर्चुअल सुनवाई के लिए बुनियादी ढांचे को भंग नहीं करने की अपील की

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अपील की कि वे वर्चुअल अदालतों के बुनियादी ढांचे को भंग न करें जो महामारी के दौरान स्थापित किए गए थे।उन्होंने कहा कि ई-समिति केंद्र सरकार से प्राप्त बजट को बनाए रखने में सक्षम होने का कारण संसदीय स्थायी समिति से प्राप्त समर्थन के कारण था। हालांकि, जब समिति ने हाल ही में कुछ हाईकोर्ट का दौरा किया तो यह देखा गया कि...

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के एंटी-लैंड ग्रैबिंग सेल के गठन के फैसले को खारिज करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, कहा- यह पुलिस को मनमाना अधिकार देता है
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के एंटी-लैंड ग्रैबिंग सेल के गठन के फैसले को खारिज करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, कहा- यह 'पुलिस को मनमाना अधिकार देता है'

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए कि पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है, मद्रास हाईकोर्ट के 2011 के तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसने भूमि कब्जाने के मामलों को परिभाषित किए बिना भूमि कब्जा-विरोधी विशेष प्रकोष्ठ (एंटी लैंड ग्रैबिंग स्पेशल सेल) का गठन किया था। ज‌स्टिस एमआर शाह और ज‌स्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि "किसी भी दिशा-निर्देश और/या परिभाषा के अभाव में कि किन मामलों को भूमि कब्जाने का मामला कहा जा सकता है, यह पुलिस को जमीन के किसी भी मामले को...

अदालत नैतिकता पर उपदेश नहीं देती: सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या का प्रयास करते हुए बेटों की हत्या के लिए दोषी महिला को समय से पहले रिहाई की अनुमति दी
'अदालत नैतिकता पर उपदेश नहीं देती': सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या का प्रयास करते हुए बेटों की हत्या के लिए दोषी महिला को समय से पहले रिहाई की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह देखते हुए कि अपीलकर्ता को पहले ही भाग्य के क्रूर हाथों का सामना करना पड़ा, तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें दोषी-मां की समय से पहले रिहाई की प्रार्थना को खारिज कर दिया गया था। अपीलकर्ता महिला ने अपने दो बच्चों को ज़हर दे दिया था।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने समझाया,"इस प्रकार, इस न्यायालय को लगता है कि अपीलकर्ता की समय से पहले रिहाई के लिए राज्य स्तरीय समिति की सिफारिश को स्वीकार नहीं करने का कोई वैध कारण/उचित...

सीमा शुल्क अधिनियम 1962 : सुप्रीम कोर्ट ने धारा 123 के तहत माल के संबंध में सेटलमेंट कमीशन के अधिकार क्षेत्र पर खंडित फैसला सुनाया
सीमा शुल्क अधिनियम 1962 : सुप्रीम कोर्ट ने धारा 123 के तहत माल के संबंध में सेटलमेंट कमीशन के अधिकार क्षेत्र पर खंडित फैसला सुनाया

क्या सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 127बी के तहत माल के संबंध में सेटलमेंट कमीशन के अधिकार क्षेत्र को माल, जिस पर धारा 123 लागू होती है, के संबंध में लागू किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मुद्दे पर एक खंडित फैसला सुनाया। बॉम्बे हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के परस्पर विरोधी निर्णयों पर विचार करते हुए जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अलग-अलग विचार व्यक्त किए।बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित कानून का समर्थन करते हुए, जस्टिस मुरारी ने कहा कि सीमा शुल्क क्षेत्रों...

लाइवस्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के युग ने न्यायाधीशों के सामने नई चुनौतियां और नई मांगें पेश कीं: सीजेआई चंद्रचूड़
लाइवस्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के युग ने न्यायाधीशों के सामने नई चुनौतियां और नई मांगें पेश कीं: सीजेआई चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए टिप्पणी की कि लाइवस्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के युग में अदालत में न्यायाधीशों द्वारा कहा गया हर शब्द सार्वजनिक है, जो न्यायाधीशों के सामने नई चुनौतियां और मांगें रखता है।उन्होंने कहा,“हमें इसका एहसास तब होता है जब हम संविधान खंडपीठ की दलीलों को लाइवस्ट्रीम करते हैं। बहुत बार नागरिकों को यह एहसास नहीं होता है कि सुनवाई के दौरान हम जो कहते हैं वह...

कार्रवाई का कारण न दिखाने वाली चुनाव याचिका खारिज होने के लिए उत्तरदायी, अस्पष्ट आरोप सामग्री तथ्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
कार्रवाई का कारण न दिखाने वाली चुनाव याचिका खारिज होने के लिए उत्तरदायी, अस्पष्ट आरोप सामग्री तथ्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस बात पर प्रकाश डाला कि बिना किसी आधार के केवल कोरे और अस्पष्ट आरोप किसी चुनाव याचिका में " सामग्री तथ्य" नहीं बनेंगे। "सामग्री तथ्य" ऐसे तथ्य हैं जो अगर स्थापित हो जाते हैं तो याचिकाकर्ता को मांगी गई राहत मिल जाएगी।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला त्रिवेदी की पीठ ने स्पष्टीकरण दिया, मामले के समर्थन में चुनाव याचिकाकर्ता द्वारा सामग्री तथ्यों का अनुरोध किया जाना चाहिए ताकि वह अपनी कार्रवाई का कारण दिखा सके और एक महत्वपूर्ण तथ्य की चूक कार्रवाई के अधूरे कारण को जन्म...

सरफेसी नीलामी को केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि बिक्री अनुबंध धारक ने बकाया भुगतान करने की पेशकश की, जब उधारकर्ता ने धारा 13(8) का उपयोग नहीं किया: सुप्रीम कोर्ट
सरफेसी नीलामी को केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि बिक्री अनुबंध धारक ने बकाया भुगतान करने की पेशकश की, जब उधारकर्ता ने धारा 13(8) का उपयोग नहीं किया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका बैंक द्वारा वित्तीय संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और सुरक्षा हित अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act, सरफेसी अधिनियम) की धारा 13(4) के तहत की गई कार्रवाई के खिलाफ सुनवाई योग्य नहीं है, चूंकि सरफेसी अधिनियम की धारा 17 के तहत एक वैकल्पिक वैधानिक उपाय मौजूद है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार ने जी विक्रम कुमार बनाम स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद व अन्य में दायर एक अपील पर फैसला सुनाते हुए आगे कहा कि यह बहस का विषय है कि...

ट्रायल जज को मूक दर्शक नहीं बनना चाहिए; अहम सवाल पूछना उनका कर्तव्य है: सुप्रीम कोर्ट ने मर्डर केस में दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा
'ट्रायल जज को मूक दर्शक नहीं बनना चाहिए; अहम सवाल पूछना उनका कर्तव्य है': सुप्रीम कोर्ट ने मर्डर केस में दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हत्या के एक आरोपी की सजा को इस आधार पर खारिज कर दिया कि अंतिम बार देखे गए साक्ष्य, जिस पर दोषसिद्धि आधारित थी, परिस्थितिजन्य साक्ष्य की पूरी श्रृंखला बनाने में विफल रहा। अपील की अनुमति देते हुए, अदालत ने ट्रायल जजों को मूकदर्शक की तरह कार्यवाही देखने के बजाय सच्चाई जानने के लिए मुकदमे में प्रभावी ढंग से भाग लेने के अपने कर्तव्य की याद दिलाई। इस संबंध में कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 165 का हवाला दिया, जो ट्रायल जज को ट्रायल के दौरान सवाल पूछने का अधिकार...

केवल प्रभावित पक्ष को ही सुनेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्ध होने पर सांसदों की स्वचालित अयोग्यता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार किया
'केवल प्रभावित पक्ष को ही सुनेंगे': सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्ध होने पर सांसदों की "स्वचालित अयोग्यता" को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसमें साल के लिए संसद सदस्य या विधानसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने का प्रावधान है।याचिका राहुल गांधी के वायनाड निर्वाचन क्षेत्र की कार्यकर्ता आभा मुरलीधरन द्वारा दायर की गई, जिन्हें हाल ही में मानहानि के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद सांसद के रूप में अयोग्य घोषित किया गया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी...

सुप्रीम कोर्ट ने सजायाफ्ता लोगों के राजनीतिक पार्टी बनाने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई अगस्त तक स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने सजायाफ्ता लोगों के राजनीतिक पार्टी बनाने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई अगस्त तक स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP Act) की धारा 29A की व्याख्या से जुड़ी याचिका की सुनवाई टाल दी, क्योंकि भारत के चुनाव आयोग को दोषी व्यक्तियों द्वारा गठित राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने का अधिकार है या नहीं।याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8, 8ए, 9, 9ए, 10, 10ए, 11ए, 41 और 62 के तहत दोषी व्यक्ति के राजनीतिक दल बनाने और राजनीतिक पदाधिकारी बनने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने याचिका को अगस्त,...

अपराधी की तरह बर्ताव : अधिकांश राज्यों में वयस्क यौनकर्मियों को सुरक्षात्मक घरों को छोड़ने की अनुमति नहीं, एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
'अपराधी की तरह बर्ताव' : अधिकांश राज्यों में वयस्क यौनकर्मियों को सुरक्षात्मक घरों को छोड़ने की अनुमति नहीं, एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट जयंत भूषण ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अधिकांश राज्यों में वयस्क यौनकर्मियों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है और अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत सुरक्षात्मक घरों को छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सीनियर एडवोकेट ने कहा :“छोड़ने की इच्छुक वयस्क महिलाओं को इन सुरक्षात्मक घरों में उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं रखा जा सकता है। ये सुरक्षात्मक घर जेल की तरह हैं। उनमें से ज्यादातर वहां नहीं रहना चाहती हैं। ये वयस्क महिलाएं हैं,...

सुप्रीम कोर्ट ने क़ैदियों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली आरपी एक्ट की धारा 62(5) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने क़ैदियों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली आरपी एक्ट की धारा 62(5) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) को चुनौती देने वाली और कैदियों को वोट देने के अधिकार की मांग करने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि धारा 62(5) को पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग मौकों पर बरकरार रखा है। उसी के मद्देनज़र, सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने याचिका पर विचार करने के प्रति अपनी अनिच्छा व्यक्त की। धारा 62(5) प्रावधान करती है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में मतदान...