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बिहार में ढहते पुलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सभी पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। उक्त याचिका में बिहार सरकार को संपूर्ण स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) करने और किसी भी कमजोर पुल की पहचान करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन के निर्देश देने की मांग की गई, जिसे ध्वस्त या मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है।यह याचिका पिछले 15 दिनों में 9 पुलों (निर्माणाधीन पुलों सहित) के ढहने की रिपोर्ट के मद्देनजर दायर की गई। याचिका के अनुसार, पुलों के ढहने से क्षेत्र में पुल के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और विश्वसनीयता के बारे...
'निश्चित अवधि की सज़ा को सामान्य रूप से निलंबित किया जाना चाहिए': सुप्रीम कोर्ट ने 70 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति को ज़मानत दी; लापरवाही बरतने के लिए हाईकोर्ट को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर नाराज़गी जताई, जिसमें 70 वर्षीय बीमार व्यक्ति की सज़ा निलंबित करने की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए लापरवाही बरतने का फ़ैसला किया गया। याचिकाकर्ता को ज़मानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निश्चित अवधि की सज़ा के मामलों में सज़ा निलंबित करने की याचिका पर उदारतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न पैदा हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुयान की वेकेशन बेंच ने कहा,"कानून में यह स्पष्ट...
छत्तीसगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में बी.एड डिग्री धारकों की नियुक्ति रद्द करने के फैसले की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 जुलाई) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले की वैधता पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में बी.एड डिग्री धारकों की नियुक्ति रद्द कर दी गई।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की वेकेशन बेंच बी.एड. योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के पद के लिए पात्र मानने के नियम रद्द करने और उसके बाद उनकी नियुक्तियों को रद्द करने की चुनौती पर सुनवाई कर रही थी।याचिकाओं के मौजूदा बैच ने छत्तीसगढ़...
छेड़छाड़ के मामले में राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा दावा की गई प्रतिरक्षा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली राजभवन की पूर्व कर्मचारी ने संविधान के अनुच्छेद 361 के अनुसार आपराधिक अभियोजन से राज्यपाल द्वारा दावा की गई प्रतिरक्षा (Immunity) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 361 राज्यपाल के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक नहीं लगाता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राज्यपाल आपराधिक कृत्यों के संबंध में पूर्ण उन्मुक्ति का दावा नहीं कर सकते। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ऐसी उन्मुक्ति...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में जून महीने में कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।दिल्ली जल संकट: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को हिमाचल प्रदेश द्वारा दिल्ली को छोड़े जाने वाले पानी के प्रवाह को सुगम बनाने का निर्देश दियादिल्ली के निवासियों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 जून) को हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह दिल्ली के निवासियों के समक्ष आ रहे जल संकट को हल करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा...
जस्टिस बीआर सारंगी झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त
केंद्र सरकार ने जस्टिस बीआर सारंगी को झारखंड हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने की अधिसूचना जारी की।गौरतलब है कि केंद्र की यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस सारंगी की पदोन्नति के प्रस्ताव के करीब 6 महीने बाद आई। अब वे एक महीने से भी कम समय में 20 जुलाई को रिटायर होने वाले हैं।वे वर्तमान में उड़ीसा हाईकोर्ट के सबसे सीनियर जज हैं और वे सीजे का पद भरेंगे, जो पूर्व चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की रिटायरमेंट के बाद 28 दिसंबर 2023 से खाली पड़ा था। तब से जस्टिस चंद्रशेखर एक्टिंग चीफ...
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर जेल में बंद कुकी अंडरट्रायल कैदी को मेडिकल उपचार के लिए असम ले जाने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने (3 जुलाई को) ऐसे मामले में अपनी निराशा व्यक्त की, जिसमें मणिपुर सेंट्रल जेल में बंद आरोपी को मेडिकल जांच के लिए बाहर नहीं ले जाया जा सका, क्योंकि वह कुकी समुदाय से है।कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह आरोपी को असम के गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज ले जाने और वहां उसकी जांच कराने के लिए तुरंत आवश्यक व्यवस्था करे।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त करने और 15 जुलाई, 2024 को या उससे पहले कोर्ट के समक्ष...
'न्याय का मजाक न उड़ाएं': सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में 4 साल की देरी के लिए NIA को फटकार लगाई
चार साल से जेल में बंद आरोपी को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे में देरी के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कड़ी फटकार लगाई। यह मामला गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 (UAPA Act) के तहत दर्ज किया गया। कोर्ट ने बिना किसी लाग-लपेट के अभियोजन एजेंसी से कहा कि वह 'न्याय का मजाक न उड़ाएं' और कहा कि भले ही आरोपी पर गंभीर अपराध करने का आरोप है, लेकिन उसे त्वरित सुनवाई का अधिकार है।जस्टिस पारदीवाला ने कहा,'न्याय का मजाक न उड़ाएं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अभियोजन एजेंसी (NIA) है। आप राज्य...
हाथरस भगदड़ मामला: लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
हाथरस में 02 जुलाई को हुई भगदड़ की घटना में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की निगरानी में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति नियुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।इसके अलावा, याचिका में कोर्ट से उत्तर प्रदेश राज्य को इस घटना के लिए स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने और व्यक्ति, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ उनके लापरवाह आचरण के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके, याचिकाकर्ता...
सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन कैदी की जमानत को 2 महीने तक सीमित करने के हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (2 जुलाई) को स्थापित कानूनी स्थिति को दोहराया कि अभियुक्त का त्वरित सुनवाई का अधिकार मौलिक अधिकार है। यह जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से निकटता से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश की निंदा की जिसमें उक्त सिद्धांत की अनदेखी की गई और याचिकाकर्ता को केवल दो महीने के लिए जमानत पर रिहा कर दिया गया, जबकि मुकदमे को समाप्त होने में काफी समय लगेगा।कोर्ट उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। विवादित आदेश के...
आरोपी को तभी जमानत मिलेगी जब पीड़िता जमानतदार होगी: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की शर्त को 'बेतुका' कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 जुलाई) को पटना हाई कोर्ट द्वारा जमानत के लिए लगाई गई 'बेतुकी' शर्त पर निराशा व्यक्त की, जिसमें आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी गई कि अपराध की पीड़िता उसकी जमानतदार होगी। कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि इस शर्त के कारण याचिकाकर्ता को रिहाई के आदेश के बावजूद एक साल तक जेल में रहना पड़ा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की वेकेशन बेंच ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस असामान्य शर्त पर जमानत दी थी कि अपराध की पीड़िता...
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने नए आपराधिक कानूनों पर टिप्पणी करने से किया इनकार
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने 1 जुलाई, 2024 से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में कुछ भी कहने से इनकार किया। सीजेआई ने कहा कि इन कानूनों से संबंधित मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं, इसलिए उन्हें इनके बारे में नहीं बोलना चाहिए।उन्होंने कहा,"ये ऐसे मुद्दे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं, संभवतः अन्य हाईकोर्ट के समक्ष भी। इसलिए मुझे न्यायालय के समक्ष आने वाली किसी भी चीज़ पर नहीं बोलना चाहिए।"सीजेआई ने यह बात कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क और रोहिणी में...
सुप्रीम कोर्ट 8 जुलाई को करेगा NEET-UG याचिकाओं पर सुनवाई
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट की बेंच 8 जुलाई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG 2024 परीक्षा में कथित कदाचार और अनियमितताओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित 8 जुलाई की कॉज लिस्ट से पता चलता है कि मामले सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हैं।गौरतलब है कि 17 मई को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली बेंच ने NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक...
रफ एंड रेडी न्याय कानून के शासन के लिए अभिशाप; न्यायालयों को संविधान के अलावा किसी और शक्ति का पालन करना चाहिए: सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि रफ, रेडी और हैंडी न्याय कानून के शासन और प्रक्रियात्मक गारंटी के लिए अभिशाप है। उन्होंने कहा कि न्यायालय को संविधान के अलावा किसी और शक्ति का पालन नहीं करना चाहिए और किसी और की नहीं बल्कि वादी की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे न्यायालय केवल संप्रभु शक्ति के दर्शन नहीं हैं, बल्कि आवश्यक सेवा प्रदाता भी हैं।सीजेआई कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क और रोहिणी में तीन न्यायालय भवनों के निर्माण के लिए आधारशिला रखने के...
हाईकोर्ट जजों द्वारा सेकेंड हाफ में बैठने पर जस्टिस बी.आर. गवई ने चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी.आर. गवई ने शनिवार को कोलकाता में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी सम्मेलन में भाषण दिया।इससे पहले लाइव लॉ ने उक्त सम्मेलन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ के भाषण की रिपोर्ट दी थी, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल थीं।सीजेआई ने कहा कि जजों को देवता नहीं माना जाना चाहिए। उन्हें लोगों की सेवा करने की अपनी भूमिका को समझना चाहिए।अपना संबोधन देते हुए जस्टिस गवई ने आज के समय में जजों द्वारा अपनाए जाने वाले सिद्धांतों पर बात की। उन्होंने...
NEET UG 2024| अकेले व्यक्ति के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने की उम्मीद न करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई स्थगित की। उक्त याचिका में अन्य बातों के अलावा, NEET-UG परीक्षा की OMR Sheet में हेरफेर करने में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाया गया था।जस्टिस सी.टी. रविकुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की वेकेशन बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए सवाल किया।हालांकि, वकील ने जवाब दिया,"मैं इन परीक्षाओं का टॉपर हूं। प्रतिवादियों ने मेरी OMR Sheet बदलने की हिम्मत की, और वही दो...
NEET-UG 2024 | परीक्षा रद्द करने की जगह सभी OMR Sheet का पुनर्मूल्यांकन किया जाए: सुप्रीम कोर्ट में याचिका
NEET-UG 2024 विवाद से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम में एक रिट याचिका दायर की गई। उक्त याचिका में कहा गया कि इस परीक्षा रद्द करना मनमाना निर्णय होगा। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करेगा।याचिकाकर्ताओं ने साथ ही इस वर्ष परीक्षा में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों ने कहा है कि परीक्षा रद्द करना गंभीर अन्याय होगा और उन उम्मीदवारों पर गंभीर असर पड़ेगा, जिन्होंने परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की है। इसके अलावा, इस तरह के रद्दीकरण से योग्य उम्मीदवारों को गंभीर...
नए आपराधिक कानून आज से हुए लागू, जानिये क्या-क्या बदल जाएगा
भारत की न्याय व्यवस्था नए आपराधिक कानूनों का स्वागत कर रही है, जो आज (1 जुलाई) से प्रभावी हो रहे हैं। ये कानून दशकों पुराने भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और दंड प्रक्रिया संहिता की जगह लेंगे। ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए आईपीसी (1860) और साक्ष्य अधिनियम (1872) की जगह भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ले ली है। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने ले ली है।इन कानूनों को पिछले साल दिसंबर में संसद ने मंजूरी दी थी। हालांकि, उसी महीने इन्हें...
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को संबोधित किया
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में 'उन लोगों के जीवन में कानून की भूमिका' विषय पर बात की, जिन पर इसका प्रभाव पड़ता है। अपने संबोधन में उन्होंने कानून के मुद्दे पर प्रकाश डाला, जो लोकतांत्रिक जीवन के सार को अमानवीय बनाता है और न्यायपालिका द्वारा 'प्रभाव-उन्मुख' दृष्टिकोण कानून को 'पुनः मानवीय' बनाने में कैसे मदद करता है।अपने संबोधन के केंद्र में सीजेआई ने नागरिकों के जीवन और राष्ट्र के संवैधानिक मूल्यों पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों को समझते हुए...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (24 जून, 2024 से 28 जून, 2024 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।'अब हीट-वेव इसलिए है क्योंकि हमने हरियाली खो दी है': सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और DDA को फिर से पेड़ लगाने का निर्देश दियासुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिया कि वे भीषण गर्मी के बीच राष्ट्रीय राजधानी में हरियाली बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं, जिससे जनता...



















