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Order 41 Rule 31 CPC | अपील में उठाए न जाने पर अपीलीय न्यायालय निर्धारण के बिंदु तय करने के लिए बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
Order 41 Rule 31 CPC | अपील में उठाए न जाने पर अपीलीय न्यायालय निर्धारण के बिंदु तय करने के लिए बाध्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के आदेश 41 नियम 31 (Order 41 Rule 31 CPC) के तहत निर्धारण के बिंदु तय करने में अपीलीय न्यायालय की विफलता उसके निर्णय को अमान्य नहीं करती है, बशर्ते कि नियम का पर्याप्त अनुपालन हो और अपीलकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय से कोई विशिष्ट मुद्दा न उठाया हो, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो।न्यायालय ने कहा,“यह अपीलीय न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है कि वह (ट्रायल कोर्ट) कार्यवाही को संदर्भित करे। वह पक्षकारों या उनके वकीलों...

क्या हर मामले में गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट ने वर्ली हिट एंड रन मामले में फैसला सुरक्षित रखा
क्या हर मामले में गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट ने वर्ली हिट एंड रन मामले में फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ली हिट एंड रन मामले में मुख्य आरोपी द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें उसने अपनी रिहाई की मांग की है। याचिका में अन्य बातों के साथ-साथ यह मुद्दा भी उठाया गया कि क्या सभी मामलों में, जिनमें भारतीय दंड संहिता/भारतीय न्याय संहिता से संबंधित मामले भी शामिल हैं, आरोपी को लिखित में गिरफ्तारी के आधार बताना अनिवार्य है।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को मिहिर शाह (मुख्य आरोपी) द्वारा चुनौती दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर...

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में गिरफ्तारी न होने पर मध्य प्रदेश पुलिस से किया सवाल, मृत की जाति की ओर किया इशारा
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में गिरफ्तारी न होने पर मध्य प्रदेश पुलिस से किया सवाल, मृत की जाति की ओर किया इशारा

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में पारधी समुदाय के लोगों के खिलाफ सामाजिक कलंक का दुरुपयोग करने और उन्हें गलत तरीके से आपराधिक मामलों में फंसाने की प्रथा पर चिंता व्यक्त की।कोर्ट ने पारधी समुदाय के एक सदस्य की कथित हिरासत में मौत से संबंधित मामले में गिरफ्तारी न होने पर भी राज्य से सवाल किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक पारधी व्यक्ति की हिरासत में मौत के मामले में एकमात्र...

सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी और चार बच्चों की हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को कम किया, इन चीज़ों का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी और चार बच्चों की हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को कम किया, इन चीज़ों का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। बता दें कि इस व्यक्ति को अपनी पत्नी और चार बच्चों की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा,"इस तथ्य पर विचार करते हुए कि दोषी-अपीलकर्ता का कोई पूर्व इतिहास नहीं है। पिछले 16-17 वर्षों के कारावास के दौरान उसका आचरण अच्छा रहा है। उसे मानसिक स्वास्थ्य में कठिनाइयां हैं और वह एक आदर्श कैदी बनने का लगातार प्रयास कर रहा है। इन चीज़ों के मद्देनज़र हम पाते हैं कि...

हाईकोर्ट को बरी होने से बचने के लिए CrPC की धारा 313/BNSS की धारा 351 के अनुपालन की जल्द से जल्द जांच करनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट को बरी होने से बचने के लिए CrPC की धारा 313/BNSS की धारा 351 के अनुपालन की जल्द से जल्द जांच करनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में अभियुक्तों को बरी किए जाने पर चिंता जताई, जहां अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण साक्ष्य अभियुक्त के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, जिससे उसे उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्पष्ट करने का अवसर मिल सके।इस कानूनी दोष को दूर करने के लिए न्यायालय ने सिफारिश की कि हाईकोर्ट को आपराधिक अपीलों की शुरुआत में CrPC की धारा 313 के अनुपालन की जांच करके और यदि कोई चूक होती है, तो प्रावधान के अनुपालन के लिए मामले को ट्रायल कोर्ट को वापस भेजकर एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।न्यायालय...

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों और कामगारों को मुआवज़ा सीधे बैंक अकाउंट में भेजने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों और कामगारों को मुआवज़ा सीधे बैंक अकाउंट में भेजने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए

सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश पारित किए कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 या कामगार मुआवज़ा अधिनियम, 1923 के तहत दावेदारों को दिया जाने वाला मुआवज़ा सीधे उनके बैंक अकाउंट्स में जमा हो।न्यायालय ने यह निर्देश इस बात पर गौर करने के बाद पारित किए कि इन कानूनों के तहत पारित मुआवज़े की बड़ी राशि न्यायालयों के समक्ष बिना दावे के पड़ी हुई है। गुजरात के रिटायर जिला जज बी.बी. पाठक से प्राप्त पत्र के आधार पर न्यायालय ने पिछले वर्ष "मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों और श्रम न्यायालयों में जमा की...

न्यायपालिका और सीजेआई के खिलाफ निशिकांत दुबे की टिप्पणी की SCBA ने की निंदा, अटॉर्नी जनरल से जताई यह उम्मीद
न्यायपालिका और सीजेआई के खिलाफ निशिकांत दुबे की टिप्पणी की SCBA ने की निंदा, अटॉर्नी जनरल से जताई यह उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संसद सदस्य निशिकांत दुबे द्वारा न्यायपालिका और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना के खिलाफ की गई टिप्पणी की निंदा की और उम्मीद जताई कि अटॉर्नी जनरल दुबे के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की औपचारिक कार्यवाही की अनुमति देंगे।SCBA द्वारा पारित प्रस्ताव में दुबे की टिप्पणी को न केवल अपमानजनक बताया गया, बल्कि अवमानना ​​की कार्यवाही भी करने योग्य बताया गया।SCBA ने कहा,"सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन BJP सांसद मिस्टर निशिकांत...

राज्य बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य बार काउंसिल में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वक्फ बोर्ड में नहीं रह सकता : सुप्रीम कोर्ट
राज्य बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य बार काउंसिल में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वक्फ बोर्ड में नहीं रह सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि राज्य बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य होने के कारण राज्य वक्फ बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया व्यक्ति बार काउंसिल का सदस्य न रहने के बाद राज्य वक्फ बोर्ड का सदस्य नहीं रह सकता।वक्फ एक्ट की धारा 14 (2025 संशोधन से पहले) के अनुसार, किसी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य उक्त राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के वक्फ बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया जा सकता है।कोर्ट के समक्ष प्रश्न यह था कि "क्या राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य, जो वक्फ एक्ट,...

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल मामलों पर FIR खारिज की, धोखाधड़ी और अनुबंध के उल्लंघन के बीच अंतर दोहराया
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल मामलों पर FIR खारिज की, 'धोखाधड़ी' और 'अनुबंध के उल्लंघन' के बीच अंतर दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा दीवानी विवादों को गलत तरीके से आपराधिक कार्यवाही में बदलने की अनुमति देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि अनुबंध का उल्लंघन धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात के अपराध को तभी आकर्षित कर सकता है, जब अनुबंध के आरंभ से ही बेईमानी का कोई तत्व मौजूद हो।न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य से आने वाले कई मामलों में यह प्रवृत्ति देखी जा रही है।कोर्ट ने कहा,"पिछले कुछ महीनों के दौरान, इस न्यायालय द्वारा कई निर्णय/आदेश सुनाए गए, विशेष रूप से उत्तर...

RFCTLARR Act  | अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य धारा 11 अधिसूचना की तिथि के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
RFCTLARR Act | अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य धारा 11 अधिसूचना की तिथि के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य उस तारीख से निर्धारित किया जाना चाहिए जिस दिन धारा 11 के तहत अधिग्रहण अधिसूचना जारी की गई है। इस प्रकार, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें मूल्यांकन तिथि को अधिग्रहण के लिए 2023 में जारी अधिसूचना की तारीख के बजाय 1 जनवरी, 2014 यानी अधिनियम की...

तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले में विधेयकों की स्वीकृति पर केरल की दलील शामिल नहीं: अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
'तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले में विधेयकों की स्वीकृति पर केरल की दलील शामिल नहीं': अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में हाल ही में दिया गया फैसला, जिसमें विधेयकों को स्वीकृति देने के लिए समयसीमा निर्धारित की गई, केरल के मामले को कवर नहीं करेगा।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ केरल राज्य द्वारा विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने में राज्यपाल की देरी के खिलाफ 2023 में दायर रिट याचिका पर विचार कर रही थी। केरल सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल ने खंडपीठ को बताया कि...

CJI पर निशिकांत दुबे की टिप्पणी मामले में एक और याचिका दायर, सोशल मीडिया से अपमानजनक सामग्री हाटने की मांग
CJI पर निशिकांत दुबे की टिप्पणी मामले में एक और याचिका दायर, सोशल मीडिया से अपमानजनक सामग्री हाटने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर अगले सप्ताह विचार करने की सहमति जताई, जिसमें न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक और अवमाननात्मक पोस्ट व वीडियो हटाने का निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ता के वकील ने जस्टिस बीआर गवई के समक्ष मामले का तत्काल उल्लेख करते हुए त्वरित सुनवाई की मांग की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के खिलाफ दिए गए बयानों का हवाला दिया।ये बयान राष्ट्रपति/राज्यपालों को विधेयकों के संदर्भ में...

Maharashtra Ownership Flats Act | स्पष्ट रूप से अवैध न होने तक रिट कोर्ट को डीम्ड कन्वेयंस ऑर्डर में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
Maharashtra Ownership Flats Act | स्पष्ट रूप से अवैध न होने तक रिट कोर्ट को डीम्ड कन्वेयंस ऑर्डर में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र स्वामित्व फ्लैट्स अधिनियम, 1963 (MOFA) से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 अप्रैल) को कहा कि MOFA के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास डीम्ड कन्वेयंस का आदेश देने का अधिकार है। इसने आगे जोर दिया कि हाईकोर्ट को ऐसे आदेशों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, जब तक कि उन्हें अवैध न पाया जाए।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने महाराष्ट्र स्वामित्व फ्लैट्स अधिनियम (MOFA) की धारा 11(4) के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने से...

मूल पक्ष के रिकॉल आवेदन दाखिल न होने तक कॉम्प्रोमाइज डिक्री के खिलाफ कानूनी उत्तराधिकारियों का मुकदमा कायम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
मूल पक्ष के रिकॉल आवेदन दाखिल न होने तक कॉम्प्रोमाइज डिक्री के खिलाफ कानूनी उत्तराधिकारियों का मुकदमा कायम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि आदेश 23 नियम 3 सीपीसी (Order 23 Rule 3 CPC) के तहत पारित कॉम्प्रोमाइज डिक्री की सत्यता पर हमला करने का एकमात्र विकल्प रिकॉल आवेदन दाखिल करना है।अदालत ने कहा,"कॉम्प्रोमाइज डिक्री के खिलाफ एकमात्र उपाय रिकॉल आवेदन दाखिल करना है।"इस प्रकार, न्यायालय ने अपील वह खारिज कर दी, जिसमें अपीलकर्ता एग्रीमेंट डीड को शून्य और अमान्य घोषित करने के लिए उनका मुकदमा खारिज करने के विवादित निर्णय से व्यथित थे। न्यायालय ने आदेश 23 नियम 3ए सीपीसी पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया कि "इस...

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए झुग्गी-झोपड़ियों को ढहाने वाले डिप्टी कलेक्टर को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए झुग्गी-झोपड़ियों को ढहाने वाले डिप्टी कलेक्टर को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 अप्रैल) को आंध्र प्रदेश के डिप्टी कलेक्टर को फटकार लगाई। बता दें कि डिप्टी कलेक्टर ने तहसीलदार के तौर पर हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और गुंटूर जिले में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की झोपड़ियों को जबरन हटा दिया, जिससे वे विस्थापित हो गए।संदर्भ के लिए, याचिकाकर्ता-तहसीलदार को हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना ​​का दोषी पाया और 2 महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। उक्त आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।जस्टिस बीआर गवई और...

सुप्रीम कोर्ट ने छूट के मामलों को संभालने के तरीके को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की
सुप्रीम कोर्ट ने छूट के मामलों को संभालने के तरीके को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई की

सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी छूट की मांग करने वाले कैदी के मामले को संभालने के तरीके को लेकर दिल्ली सरकार की आलोचना की।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने कहा कि कैदियों की समयपूर्व रिहाई के मुद्दे से निपटने के तरीके में दिल्ली सरकार “दुखद स्थिति” बना हुआ है।न्यायालय ने कहा,“शायद इस मामले में दिल्ली सरकार द्वारा अदालती कार्यवाही को संभालने के तरीके और समयपूर्व रिहाई के लिए प्रार्थनाओं से निपटने के तरीके के बारे में गहन जांच की आवश्यकता है।”यह मामला आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक...