रेगुलर होने के बाद सालाना इंक्रीमेंट देने से मना करने का आधार 'शुरुआत में डेली वेजर होना' नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
6 Oct 2026 4:37 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को कहा कि डेली-वेज पर काम करने वाले कुशल (Skilled) कर्मचारियों को, जिन्हें सरकारी आदेश के तहत स्थायी कर्मचारी माना गया और रेगुलर पे-स्केल और रिटायरमेंट के फायदे दिए गए, उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सालाना इंक्रीमेंट से सिर्फ़ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे शुरुआत में डेली वेजर के तौर पर रखे गए।
गुजरात हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला रद्द करते हुए जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने गुजरात सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि अपील करने वाले इंक्रीमेंट के हकदार नहीं थे क्योंकि उनकी शुरुआती नियुक्ति डेली-वेज वर्कर के तौर पर हुई।
कोर्ट ने राज्य सरकार के 1988 के आदेश का आधार लिया, जिसके तहत दस साल की तय सर्विस पूरी करने वाले डेली-वेज कुशल कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी माना गया और उन्हें रेगुलर पे-स्केल, भत्ते, पेंशन और रिटायरमेंट के दूसरे फायदे दिए गए।
कोर्ट ने कहा,
"राज्य और उसके अधिकारियों की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने इस बात पर कोई विवाद नहीं किया कि रिट याचिका में सभी याचिकाकर्ता डेली-वेज कुशल कर्मचारियों की ऊपर बताई गई कैटेगरी में आते थे... हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच के सामने दी गई यह दलील कि वे सिर्फ़ इसलिए इंक्रीमेंट पाने के हकदार नहीं थे क्योंकि वे डेली वेजर थे, स्वीकार नहीं की जा सकती। यह तर्क 17.10.1988 के सरकारी आदेश और उससे मिलने वाले फायदों को नज़रअंदाज़ करके दिया गया लगता है।"
मामला
अपील करने वालों ने गुजरात सिंचाई विभाग में 30 साल से ज़्यादा समय तक काम किया था और अलग-अलग सालों में 30 जून को रिटायर हुए।
विवाद उस सालाना इंक्रीमेंट को लेकर था जो उनके रिटायरमेंट के ठीक बाद 1 जुलाई को मिलना था।
गुजरात हाईकोर्ट के सिंगल जज ने डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन एंड ह्यूमन रिसोर्सेज), KPTCL बनाम सी.पी. मुंडिना, 2023 LiveLaw (SC) 296 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उनके दावे को स्वीकार कर लिया था। इस मामले में यह तय किया गया कि सरकारी कर्मचारियों को सालाना इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) देने से सिर्फ़ इसलिए मना नहीं किया जा सकता क्योंकि इंक्रीमेंट मिलने के ठीक अगले दिन ही वे रिटायर होने वाले हैं।
सिंगल जज ने बकाया राशि का भुगतान करने और उसके आधार पर पेंशन व रिटायरमेंट से जुड़े लाभों में संशोधन करने का भी निर्देश दिया।
हालांकि, राज्य सरकार ने डिवीज़न बेंच के सामने इस फैसले को चुनौती दी और पहली बार यह तर्क दिया कि कर्मचारी डेली वेजर (दिहाड़ी मजदूर) थे, इसलिए वे सी.पी. मुंडिना मामले में मान्यता प्राप्त लाभ का दावा नहीं कर सकते।
डिवीज़न बेंच ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया और सिंगल जज का आदेश रद्द किया, जिसके बाद रिटायर हो चुके कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
फैसला
अपील मंज़ूरी करते हुए जस्टिस संजय कुमार के लिखे फैसले में कहा गया कि रिटायरमेंट के एक दिन बाद मिलने वाले इंक्रीमेंट का दावा करने का अपील करने वाले कर्मचारियों का अधिकार अब कोई नया या अनसुलझा मुद्दा नहीं है। यह बात सी.पी. मुंडिना मामले में तय हो चुकी है। बाद में 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम एम. सिद्दारज (2023)' मामले में भी इसी का पालन किया गया। इस मामले में यह तय किया गया कि अलग-अलग कैटेगरी के रिटायर्ड कर्मचारी किस हद तक इंक्रीमेंट का फ़ायदा ले सकते हैं।
असल में, जहाँ सी.पी. मुंडिना और एम. सिद्दारज मामलों में 30 जून को रिटायर होने वालों के लिए पेंशन के मकसद से सालाना इंक्रीमेंट का अधिकार तय किया गया था, वहीं एम. सिद्दारज मामले में फरवरी 2025 के सुप्रीम कोर्ट के बाद के आदेश ने पिछले समय के लिए मिलने वाले पैसे के फ़ायदे को सीमित कर दिया। इसमें क्लॉज़ (d) के तहत कर्मचारी के कोर्ट में केस करने से पहले के तीन साल की बढ़ी हुई पेंशन देने की इजाज़त दी गई।
क्लॉज़ (d) कहता है, "अगर किसी रिटायर्ड कर्मचारी ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल/हाई कोर्ट/इस कोर्ट में दखल देने/पार्टी बनने/रिट पिटीशन/ओरिजिनल एप्लीकेशन के लिए अर्ज़ी दी है, तो एक इंक्रीमेंट जोड़कर बढ़ी हुई पेंशन उस महीने से पहले के तीन साल की अवधि के लिए दी जाएगी, जिसमें दखल देने/पार्टी बनने/रिट पिटीशन/ओरिजिनल एप्लीकेशन के लिए अर्ज़ी दी गई।"
चूंकि अपील करने वालों ने 2022 में हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, इसलिए वे सुप्रीम कोर्ट के बदले हुए निर्देशों के तहत बढ़ी हुई पेंशन (इंक्रीमेंट सहित) पाने के हकदार थे। यह फ़ायदा केस करने से पहले की तय तीन साल की अवधि के लिए था।
कोर्ट ने कहा,
"यह एक मानी हुई बात है कि अपील करने वालों ने अपनी रिट पिटीशन 2022 में ही दायर की थी, इसलिए वे बदले हुए क्लॉज़ (d) के दायरे में आएंगे। इस क्लॉज़ में प्रावधान है कि एक इंक्रीमेंट जोड़कर बढ़ी हुई पेंशन उस महीने से पहले के 3 साल की अवधि के लिए दी जाएगी, जिसमें रिट पिटीशन दायर की गई। इसलिए अपील करने वाले इंक्रीमेंट के फ़ायदे और उस इंक्रीमेंट को ध्यान में रखकर दी जाने वाली पेंशन के हकदार होंगे, जैसा कि बदले हुए क्लॉज़ (d) में बताया गया।"
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे 30 दिनों के भीतर रकम का हिसाब लगाकर उसका भुगतान करें। ऐसा न करने पर, भुगतान में चूक की तारीख से 6% ब्याज देना होगा।
अपील स्वीकार कर ली गई।
Case Title : Chhaganbhai Kohyabhai Pateliya & Ors. v. State of Gujarat & Ors.

