अगर ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर ले तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
8 Oct 2026 11:47 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। महिला के पार्टनर ने कथित तौर पर उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि शादी से इनकार करना, भले ही उसके बाद आत्महत्या हो जाए, अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि लोग स्थितियों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और ब्रेकअप के बाद आत्महत्या करने को अपने आप आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।
कोर्ट तेलंगाना हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण (Criminal Revision) याचिका से जुड़ी अपील पर सुनवाई कर रहा था। यह मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा था जो पहले आरोपी के साथ आपसी सहमति से रिश्ते में थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि शादी से इनकार करने के बाद महिला ने आत्महत्या कर ली।
पांच अन्य आरोपियों पर भी आरोप लगाए गए, जिनमें पहले आरोपी के माता-पिता, बहन, एक दोस्त और उसकी बहन के होने वाले पति शामिल है।
कोर्ट ने पाया कि मृतका और पहला आरोपी उसके घर पर करीब तीन महीने तक साथ रहे थे और उनके रिश्ते को उसके परिवार ने स्वीकार कर लिया था।
मृतका की बहन के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बाद में पहले आरोपी ने मृतका से शादी करने से इनकार किया। आरोप है कि अन्य आरोपियों ने उसे महिला से शादी न करने के लिए प्रभावित किया।
हालांकि, कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि आरोपियों ने मृतका को अपनी जान देने के लिए उकसाया।
कोर्ट ने कहा,
"लोग स्थितियों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और अगर ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर ले, तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता।"
बेंच ने आगे कहा कि शादी से इनकार करने का मकसद महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करना नहीं है और न ही आरोपियों को इस नतीजे की जानकारी होने का आरोप लगाया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा,
"शादी से इनकार करने का मकसद महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करना नहीं है और न ही आरोपियों को यह पता होने का आरोप लगाया जा सकता है कि इनकार करने पर वह आत्महत्या कर लेगी।"
कोर्ट ने आगे कहा,
“हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे लगे कि आरोपी/अपीलकर्ताओं ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। न तो ऐसा कोई इरादा था और न ही इसे आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment) कहा जा सकता है। ज़्यादा-से-ज़्यादा अगर हम पहले शिकायतकर्ता की बात पर पूरी तरह यकीन भी कर लें, तो भी मामला सिर्फ़ शादी से इनकार का था, जिसके कारण महिला ने आत्महत्या कर ली।”
नतीजतन, कोर्ट ने माना कि आरोपियों पर लगाए गए आरोपों के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
Case Title : Chittibarika Chandra Shekar & Ors. Versus The State of Telangana & Anr.

