सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Update: 2026-04-05 03:30 GMT

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (30 मार्च, 2026 से 03 अप्रैल, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास, राज्य केवल अन्य सड़कों पर ही टोल लगा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की। इस याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स लगाने की केंद्र सरकार की शक्ति को चुनौती दी गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि इस तरह के शुल्क संविधान के तहत 'संघ सूची' (Union List) के दायरे में आते हैं।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के उपयोग के लिए वसूला जाने वाला टोल, सूची I (संघ सूची) की प्रविष्टि 23 (संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किए गए राजमार्ग) और प्रविष्टि 96 (संघ सूची में शामिल किसी भी विषय के संबंध में शुल्क) के तहत आने वाला एक शुल्क है।

Case Title – T S R Venkatramana v. Union of India & Ors.

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पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।

Cause Title: UNION OF INDIA & OTHERS VERSUS SUNIL KUMAR RAI & OTHERS

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कंपनी आम बैठक में विशेष प्रस्ताव के बिना डायरेक्टर को लोन नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को बिजनेसमैन सतिंदर सिंह भसीन की ज़मानत रद्द की, क्योंकि उन्होंने कोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया था। लगाई गई शर्तों में से एक यह थी कि भसीन को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में 50 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, यह बात सामने आई कि इस शर्त को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL) के फंड का गलत इस्तेमाल किया था।

Case Details: SATINDER SINGH BHASIN Vs GOVERNMENT OF NCT OF DELHI|MA 239/2024 in W.P.(Crl.) No. 242/2019

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कारण बताओ नोटिस को असाधारण मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र में चुनौती दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यद्यपि अदालतें आमतौर पर कारण बताओ नोटिस (SCN) को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर विचार नहीं करती हैं। फिर भी यह सिद्धांत पूर्ण नहीं है और असाधारण परिस्थितियों में नोटिस के चरण पर हस्तक्षेप की अनुमति है।

अदालत ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का सहारा तब लिया जा सकता है, जब कारण बताओ नोटिस में ऐसी मौलिक कानूनी कमियां हों, जिनके परिणामस्वरूप स्पष्ट अन्याय हो सकता है।

Cause Title: J. SRI NISHA VERSUS THE SPECIAL DIRECTOR, ADJUDICATING AUTHORITY, DIRECTORATE OF ENFORCEMENT AND ANR.

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विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा स्वीकार न किए गए दस्तावेज़ों को गवाह के ज़रिए साबित करना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब कोई कर्मचारी अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं करता है तो उसे नियोक्ता के बिना साबित हुए दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि नियोक्ता को ऐसे दस्तावेज़ी सबूतों को गवाहों के ज़रिए साबित करना होगा ताकि कर्मचारी को गवाह से जिरह करने का मौका मिल सके।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द कर रहे थे। उस कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था।

Cause Title: JAI PRAKASH SAINI VERSUS MANAGING DIRECTOR U.P. COOPERATIVE FEDERATION LTD. & ORS.

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Karnataka Stamp Act | कोर्ट के पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब अदालतें 'कर्नाटक स्टाम्प अधिनियम, 1957' के तहत स्टाम्प ड्यूटी में किसी कमी का निर्धारण करती हैं तो उनके पास कम पड़ी ड्यूटी के दस गुना से कम जुर्माना लगाने का कोई विवेकाधिकार नहीं होता है।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी की, “जब किसी दस्तावेज़ को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के पास भेजे बिना कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की जाती है, तो जुर्माने की रकम तय करने में कोई छूट नहीं होती।”

Cause Title: Krishnavathi Sharma Versus Bhagwandas Sharma and Ors.

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सरकार को जनहित में उद्योगों को दी गई टैक्स छूट वापस लेने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई टैक्स छूट से पाने वाले का कोई ऐसा पक्का अधिकार नहीं बन जाता कि वह हमेशा के लिए उस छूट का दावा करता रहे, और सरकार जनहित में ऐसी छूट वापस ले सकती है।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार की अपील को मंज़ूर करते हुए यह बात कही। यह अपील कैप्टिव पावर जेनरेटरों के खिलाफ थी। बेंच ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें उसने कैप्टिव पावर (वह बिजली जो उद्योग अपनी ज़रूरत के लिए खुद बनाते हैं, बिना ग्रिड सप्लाई पर निर्भर रहे) बनाने के लिए उन्हें मिलने वाले टैक्स फायदों को वापस ले लिया था।

Cause Title: THE STATE OF MAHARASHTRA & OTHERS VERSUS RELIANCE INDUSTRIES LTD. & OTHERS

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Land Acquisition | जिस व्यक्ति ने S.28A के तहत मुआवज़ा स्वीकार किया, वह अपील के आधार पर बढ़ोतरी के लिए दूसरा आवेदन दायर कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28A के तहत दूसरा आवेदन दायर किया जा सकता है, ताकि अन्य मामलों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई बढ़ोतरी के आधार पर मुआवज़े का फिर से निर्धारण किया जा सके। कोर्ट ने फैसला दिया कि भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा स्वीकार कर लेने से कोई ज़मीन मालिक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28-A के तहत बढ़ा हुआ मुआवज़ा मांगने से वंचित नहीं हो जाएगा।

जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता की धारा 28-A के तहत बढ़े हुए मुआवज़े की मांग को इस आधार पर खारिज किया गया था कि पहले से ही तय की गई राशि स्वीकार कर लेने के कारण वह अपने जैसे अन्य ज़मीन मालिकों के बराबर और बढ़ोतरी की मांग करने से रोक दिया गया।

Cause Title: ANDANAYYA AND ORS. VERSUS DEPUTY CHIEF ENGINEER AND ORS.

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