इलाहाबाद हाईकोट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज के मौखिक निर्देशों के तहत वकील की नजरबंदी पर रिपोर्ट मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज के 'मौखिक निर्देशों' के तहत वकील की नजरबंदी पर रिपोर्ट मांगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को आगरा के 70 वर्षीय अधिवक्ता की कथित हिरासत पर चिंता जताई। उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 'मौखिक' निर्देश पर नवंबर 2024 में पुलिस कर्मियों ने कथित तौर पर घर में नजरबंद रखा था। याचिकाकर्ता (वकील महताब सिंह) ने दावा किया कि उन्हें धारा 168 बीएनएसएस (संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए पुलिस) का नोटिस देने के बाद 2 घंटे के लिए उनके घर में हिरासत में रखा गया था, ताकि उन्हें प्रशासनिक (उच्च न्यायालय) न्यायाधीश से मिलने से रोका जा सके, जब तक कि वे न्यायाधीश के पद पर...

Maha Kumbh Stampede | क्या न्यायिक आयोग की भूमिका का विस्तार हताहतों की संख्या की पहचान करने के लिए किया जा सकता है?: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा
Maha Kumbh Stampede | क्या न्यायिक आयोग की भूमिका का विस्तार हताहतों की संख्या की पहचान करने के लिए किया जा सकता है?: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा

29 जनवरी को प्रयागराज में महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद लापता हुए लोगों का ब्यौरा मांगने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा कि क्या उसके द्वारा नियुक्त न्यायिक आयोग की जांच का दायरा बढ़ाकर इसमें हताहतों की संख्या की पहचान करना और भगदड़ से संबंधित अन्य शिकायतों की जांच करना शामिल किया जा सकता है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने कहा कि अभी तक आयोग के दायरे में भगदड़ से संबंधित अन्य प्रासंगिक विवरणों की जांच...

सरकार की आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा, न्यायपालिका की भी आलोचना की जा सकती है: जुबैर की FIR रद्द करने की याचिका पर हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
'सरकार की आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा, न्यायपालिका की भी आलोचना की जा सकती है': जुबैर की FIR रद्द करने की याचिका पर हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर रोक 19 फरवरी तक बढ़ा दी। यह रोक यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर उनके कथित X पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में लगाई गई।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि सरकार की किसी भी पहलू पर आलोचना की जा सकती है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि एक संस्था के रूप में न्यायपालिका भी आलोचना...

X Posts Case | पुलिस ने नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की; जुबैर ने नैरेटिव बनाया, लोगों को भड़काने की कोशिश की: इलाहाबाद हाईकोर्ट में बोली यूपी सरकार
'X' Posts Case | 'पुलिस ने नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की; जुबैर ने नैरेटिव बनाया, लोगों को भड़काने की कोशिश की': इलाहाबाद हाईकोर्ट में बोली यूपी सरकार

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की याचिका का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कहा कि राज्य पुलिस ने नरसिंहानंद के खिलाफ़ कार्रवाई की थी और अदालतों ने ही उन्हें ज़मानत दी।उक्त याचिकिा में मोहम्मद जुबैन ने यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर उनके कथित 'X' पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) पर यूपी पुलिस की FIR के खिलाफ़ याचिका दायर की।एडिशन एडवोकेट जनरल मनीष गोयल के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि जुबैर ने अपने X पोस्ट के ज़रिए नैरेटिव बनाया और लोगों को भड़काने की कोशिश की।...

Narsinghanand Case | क्या राज्य की कार्रवाई से किसी नागरिक का असंतुष्ट होना विध्वंसक गतिविधि माना जा सकता है? : जुबैर की याचिका पर हाईकोर्ट ने पूछा
Narsinghanand Case | क्या राज्य की कार्रवाई से किसी नागरिक का असंतुष्ट होना 'विध्वंसक' गतिविधि माना जा सकता है? : जुबैर की याचिका पर हाईकोर्ट ने पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी पर रोक को 18 फ़रवरी तक बढ़ा दिया। यह रोक यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर उनके कथित X पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ़ दर्ज की गई FIR के सिलसिले में लगाई गई।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील से पूछा कि क्या राज्य की कार्रवाई से किसी नागरिक का असंतुष्ट होना धारा 152 BNS के तहत विध्वंसक गतिविधि माना जा सकता है।संदर्भ के लिए, यह...

Yati Narsinghanand Case | मैंने अपने पेशेवर दायित्व के तहत X पर पोस्ट किया, BNS/IPC के तहत कोई अपराध नहीं हुआ: हाईकोर्ट में बोले मोहम्मद जुबैर
Yati Narsinghanand Case | मैंने अपने पेशेवर दायित्व के तहत 'X' पर पोस्ट किया, BNS/IPC के तहत कोई अपराध नहीं हुआ: हाईकोर्ट में बोले मोहम्मद जुबैर

यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर कथित एक्स पोस्ट को लेकर ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को चुनौती देते हुए उनके वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि जुबैर ने तथ्य जांचकर्ता के रूप में अपने पेशेवर दायित्व के तहत पोस्ट किए। इस तरह के पोस्ट भारतीय न्याय संहिता या भारतीय दंड संहिता के तहत किसी भी अपराध के अंतर्गत नहीं आते हैं।जुबैर के लिए दलील देते हुए सीनियर एडवोकेट दिलीप कुमार ने जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र...

प्रयागराज पुलिस हमला: इलाहाबाद HCBA ने वकीलों के खिलाफ अत्याचार का ब्यौरा देते हुए हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया; राज्य को जवाब देना होगा
प्रयागराज 'पुलिस हमला': इलाहाबाद HCBA ने वकीलों के खिलाफ 'अत्याचार' का ब्यौरा देते हुए हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया; राज्य को जवाब देना होगा

4 फरवरी को प्रयागराज में वकीलों पर 'हमला' करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाली आपराधिक रिट जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) ने पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए अत्याचारों को उजागर करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष पूरक हलफनामा और पेन-ड्राइव दाखिल किया।हाईकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार, संबंधित संभागीय आयुक्त, मेला अधिकारी, पुलिस आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस उपायुक्त (यातायात) ने भी अपने-अपने हलफनामे दाखिल किए, जिन्हें जस्टिस...

गाजियाबाद एडवोकेट मर्डर 2023: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से कहा, गवाह संरक्षण योजना के तहत पत्नी को दी जाए सुरक्षा
गाजियाबाद एडवोकेट मर्डर 2023: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से कहा, गवाह संरक्षण योजना के तहत पत्नी को दी जाए सुरक्षा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे गाजियाबाद के 42 वर्षीय एडवोकेट मनोज कुमार चौधरी की पत्नी को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें, जिनकी 2023 में उनके कक्ष में दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, अगर वह गवाह संरक्षण योजना, 2018 के तहत आवेदन करती हैं।जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की पीठ ने गाजियाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में लंबित हत्या के मामले को अलीगढ़ में किसी अन्य सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग करने वाली कविता चौधरी (मृतक एडवोकेट की...

महाकुंभ भगदड़ | संबंधित सामग्री रिकॉर्ड पर लाएं: लापता व्यक्तियों का विवरण मांगने वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट
महाकुंभ भगदड़ | संबंधित सामग्री रिकॉर्ड पर लाएं: लापता व्यक्तियों का विवरण मांगने वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट को निर्देश दिया। वकील ने 29 जनवरी को महाकुंभ (प्रयागराज) में भगदड़ के बाद लापता व्यक्तियों के विवरण एकत्र करने के लिए न्यायिक निगरानी समिति के गठन की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि वह मामले के लिए भरोसा किए जा रहे सभी प्रासंगिक सामग्रियों को रिकॉर्ड पर लाए।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने वकील सौरभ पांडे से कहा कि वह राज्य सरकार को तभी बुला सकती है, जब रिकॉर्ड पर कुछ सामग्री हो।चीफ...

1995 हत्या मामला | अभियोजन पक्ष बचाव पक्ष की हर परिकल्पना का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी करने के फैसले को पलटा, 3 को उम्रकैद की सजा सुनाई
1995 हत्या मामला | 'अभियोजन पक्ष बचाव पक्ष की हर परिकल्पना का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी करने के फैसले को पलटा, 3 को उम्रकैद की सजा सुनाई

1995 के एक हत्या मामले में तीन आरोपियों को बरी करने और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अभियोजन पक्ष बचाव पक्ष/आरोपी व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक परिकल्पना का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है। जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान की पीठ ने कहा कि हत्याएं किसी को पूर्व सूचना दिए बिना नहीं की जाती हैं। इसलिए, जो लोग स्वाभाविक गवाह प्रतीत होते हैं, उन्हें झूठे या प्लांटेड गवाह के रूप में लेबल नहीं किया जा सकता है।न्यायालय ने कहा कि...

आवासीय, कॉमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों से निपटने के लिए योजना तैयार करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आवासीय, कॉमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों से निपटने के लिए योजना तैयार करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य भर में आवासीय, कॉमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माणों की समस्या से निपटने के लिए पूरी योजना विकसित करने का निर्देश दिया।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने राज्य सरकार से राज्य की कंपाउंडिंग प्रक्रिया के अलावा अनधिकृत निर्माणों से निपटने की उसकी योजनाओं के बारे में भी पूछा। अपने आदेश में खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि स्वीकृत योजनाओं की आधारभूत संरचना में परिवर्तन किया जाता है तो कंपाउंडिंग भवनों को अनुमति...

महापुरुषों को उनके कामों के लिए नाम से याद किया जाता है, न कि जाति के लिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजा सुहेलदेव से जुड़ी जनहित याचिका खारिज की
महापुरुषों को उनके कामों के लिए नाम से याद किया जाता है, न कि जाति के लिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजा सुहेलदेव से जुड़ी जनहित याचिका खारिज की

महापुरुषों को उनके कामों के लिए नाम से याद किया जाता है, चाहे उनकी जाति कुछ भी हो, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्तौड़गढ़ पर्यटक स्थल प्रतिमा/मूर्ति (बहराइच) के शिलान्यास पत्थर पर उत्कीर्ण श्रावस्ती नरेश सुशील देव भर नाम से क्षत्रिय शब्द हटाकर उसकी जगह भर शब्द लिखने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि वह जनहित याचिका याचिकाकर्ता की भावनाओं का सम्मान करती है। फिर भी वह वर्तमान रिट याचिका में उठाए गए...

मोटर वाहन अधिनियम में 2019 का संशोधन बीमाकर्ता के दावेदारों को भुगतान करने के दायित्व या मालिक से राशि वसूलने के उसके अधिकार को प्रभावित नहीं करता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मोटर वाहन अधिनियम में 2019 का संशोधन बीमाकर्ता के दावेदारों को भुगतान करने के दायित्व या मालिक से राशि वसूलने के उसके अधिकार को प्रभावित नहीं करता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 बीमाकर्ता के उस दायित्व को समाप्त नहीं करता, जिसके तहत वह निर्धारित मुआवजे का भुगतान करे और बाद में उसे मालिक से वसूल करे। इसने माना कि तीसरे पक्ष के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संशोधित अधिनियम में भुगतान करें और वसूलें का सिद्धांत अभी भी लागू है।जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा,“अतः न्यायालय का मानना है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 149 की उपधारा (4) से जुड़े प्रावधान को मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 32)...

उचित चालान के साथ रजिस्टर्ड निर्माता से सीलबंद पैकेट खरीदने पर रेस्तरां कच्चे माल की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
उचित चालान के साथ रजिस्टर्ड निर्माता से सीलबंद पैकेट खरीदने पर रेस्तरां कच्चे माल की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि खाद्य व्यवसाय संचालक को उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, जब उसे उचित चालान के साथ रजिस्टर्ड निर्माताओं से सीलबंद पैकेट में खरीदा गया हो।गोल्डी मसाला द्वारा निर्मित हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट मिला होने के मामले में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा,“यदि कोई खाद्य व्यवसाय संचालक जैसे कि रेस्तरां किसी रजिस्टर्ड निर्माता से उचित चालान के साथ सीलबंद पैकेट में कोई कच्चा माल या खाद्य सामग्री खरीदता है तो यह...

अवमानना याचिका का मतलब दबाव डालना या परेशान करना नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया
अवमानना याचिका का मतलब दबाव डालना या परेशान करना नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना आवेदक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें आरोप लगाया गया कि गांव सभा ने रिट कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अतिक्रमण नहीं हटाया।आवेदक ने दलील दी कि लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विचाराधीन भूखंड जल निकासी के लिए हैं, लेकिन गलत तरीके से दर्ज किए गए और तदनुसार उन्होंने रिकॉर्ड में सुधार की सिफारिश की। इस रिपोर्ट के आधार पर यह दलील दी गई कि विपक्षी दलों ने हाईकोर्ट के आदेश और लेखपाल की सिफारिशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया।अदालत ने पाया कि आवेदक के पास...

महाकुंभ भगदड़: दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
महाकुंभ भगदड़: दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

29 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ में हुई दुखद भगदड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य (प्रतिवादी संख्या 2) को घटना पर एक व्यापक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने और भगदड़ के कारण हुई हताहतों की संख्या जारी करने का निर्देश देने की भी प्रार्थना की गई है।जनहित याचिका याचिकाकर्ता ने भगदड़ के लिए उत्तर प्रदेश राज्य के अधिकारियों के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, बिना किसी कानून के लोगों को भू-माफिया कैसे घोषित किया जा रहा है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा, बिना किसी कानून के लोगों को 'भू-माफिया' कैसे घोषित किया जा रहा है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह किसी व्यक्ति को 'भू-माफिया' (भूमि हड़पने वाला) घोषित करने को उचित ठहराए, जबकि ऐसा करने के लिए कोई कानून नहीं है। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस डोनाडी रमेश की पीठ ने यह आदेश पारित किया क्योंकि इसने प्रथम दृष्टया माना कि किसी व्यक्ति को भूमि हड़पने वाला घोषित करना व्यक्तियों के महत्वपूर्ण अधिकारों का उल्लंघन करने की संभावना है।पीठ ने कहा, "इस तरह की कार्रवाई कानूनी रूप से किस हद तक स्वीकार्य है, इस पर इस...

महिला को मातृत्व के लिए हां या ना कहने का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग यौन शोषण पीड़िता की प्रेग्नेंसी की जांच करने का  आदेश दिया
महिला को मातृत्व के लिए 'हां या ना' कहने का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग यौन शोषण पीड़िता की प्रेग्नेंसी की जांच करने का आदेश दिया

17 वर्षीय किशोरी की प्रेग्नेंसी को मेडिकल रूप से टर्मिनेट करने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि मेडिकल रूप से प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट करने संबंधी अधिनियम, 1971 की धारा 3(2) के तहत यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को मेडिकल रूप से टर्मिनेट को समाप्त करने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि हमलावर के बच्चे की मां न बनने के अधिकार से वंचित करने से उनकी परेशानियां बढ़ेंगी।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने कहा,"यौन उत्पीड़न के मामले में...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकरों के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकरों के खिलाफ दायर याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में लाउडस्पीकर लगाने के खिलाफ जनहित याचिका इस आधार पर खारिज की कि सार्वजनिक संबोधन प्रणाली अनुमेय सीमा से अधिक शोर पैदा कर रही है।याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया कि जब वे महाकुंभ के सेक्टर 18 में प्रचार कर रहे थे तो उनके आसपास के शिविरों में लाउडस्पीकर (सार्वजनिक संबोधन प्रणाली) और एलसीडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस तरह के ध्वनि प्रदूषण से उनके ध्यान आदि में बाधा उत्पन्न हो रही...