सुप्रीम कोर्ट

रिटायर्ड हाईकोर्ट जज के लिए प्रतिमाह 15 हजार पेंशन मनमानी : हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज ने न्यायिक अफसरों के तौर पर सेवा को जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी
'रिटायर्ड हाईकोर्ट जज के लिए प्रतिमाह 15 हजार पेंशन मनमानी' : हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज ने न्यायिक अफसरों के तौर पर सेवा को जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी

हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है कि हाईकोर्ट में पदोन्नत होने से पहले न्यायिक अधिकारी के रूप में सेवा की अवधि को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवा की अवधि में जोड़ा जाना चाहिए।याचिकाकर्ता ने, अन्य राहतों के अलावा, एक घोषणा की मांग की कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवा की अवधि के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में...

सुप्रीम कोर्ट ने सनातन धर्म पर तमिलनाडु मंत्री उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों पर नाराजगी व्यक्त की
सुप्रीम कोर्ट ने 'सनातन धर्म' पर तमिलनाडु मंत्री उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों पर नाराजगी व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मार्च) को तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की 'सनातन धर्म' के बारे में की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताई।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ उदयनिधि स्टालिन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उक्त याचिका में डीएमके नेता की विवादास्पद टिप्पणियों पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की गई।जस्टिस दत्ता ने याचिका दायर होते ही स्टालिन के वकील सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी से...

सांसदों और विधायकों का भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी भारतीय संसदीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट कर रही है: सुप्रीम कोर्ट
सांसदों और विधायकों का भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी भारतीय संसदीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट कर रही है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के पीवी नरसिम्हा राव का फैसला खारिज करते हुए सार्वजनिक हित, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और संसदीय लोकतंत्र पर विधायी सदस्यों द्वारा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के हानिकारक प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा,“विधायिका के सदस्यों का भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी भारतीय संसदीय लोकतंत्र की नींव को कमजोर करती है। यह संविधान की आकांक्षाओं और विचारशील आदर्शों के लिए विघटनकारी है और ऐसी राजनीति का निर्माण करता है, जो नागरिकों को जिम्मेदार, उत्तरदायी और...

BREAKING| रिश्वतखोरी विधायी विशेषाधिकारों द्वारा संरक्षित नहीं; विधानमंडल में वोट/भाषण के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों/विधायकों को कोई छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING| रिश्वतखोरी विधायी विशेषाधिकारों द्वारा संरक्षित नहीं; विधानमंडल में वोट/भाषण के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों/विधायकों को कोई छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मार्च) को 1998 के पीवी नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया कि संसद और विधानसभाओं के सदस्य विधायिका में किसी वोट या भाषण पर विचार करते समय रिश्वत देना संविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत छूट का दावा कर सकते हैं।नवीनतम फैसला, पहले का फैसला रद्द करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की सात-न्यायाधीशों की...

विशेष अदालत द्वारा शिकायत का संज्ञान लेने के बाद PMLA आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
विशेष अदालत द्वारा शिकायत का संज्ञान लेने के बाद PMLA आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA Act) के तहत एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार किया कि क्या एक्ट की धारा 44 के तहत विशेष अदालत द्वारा संज्ञान लेने और सम्मन भेजे जाने के बाद अधिकारियों द्वारा किसी आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,“प्रथम दृष्टया, हमें ऐसा प्रतीत होता है कि एक बार एक्ट की धारा 44 के तहत दायर शिकायत का संज्ञान धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA Act) के तहत विशेष अदालत द्वारा ले लिया जाता है तो एक्ट की धारा के तहत गिरफ्तारी की शक्ति निहित होती...

अदालत नया अनुबंध नहीं लिख सकतीं, उसे पक्षकारों के बीच समझौते के नियमों और शर्तों पर निर्भर रहना होगा : सुप्रीम कोर्ट
अदालत नया अनुबंध नहीं लिख सकतीं, उसे पक्षकारों के बीच समझौते के नियमों और शर्तों पर निर्भर रहना होगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अदालतें पक्षकारों के बीच एक नया अनुबंध फिर से नहीं लिख सकती हैं या बना नहीं सकती हैं और पक्षकारों के बीच विवाद का फैसला करते समय उसे पक्षकारों के बीच सहमति के अनुसार समझौते के नियमों और शर्तों पर निर्भर रहना होगा।जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि एक बार पक्षकारों द्वारा लिखित रूप में अनुबंध दर्ज कर लिया जाता है, तो वह उन पर बाध्यकारी होगा, और अदालत के लिए यह खुला नहीं है कि वह दोबारा अनुबंध की नई व्याख्या लिखे या नया अनुबंध बनाए।जस्टिस संजय कुमार...

NDPS Act | जब धारा 52ए का पालन करते हुए सैंपल नहीं लिए जाते तो एफएसएल रिपोर्ट बेकार कागज है और इसे साक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
NDPS Act | जब धारा 52ए का पालन करते हुए सैंपल नहीं लिए जाते तो एफएसएल रिपोर्ट बेकार कागज है और इसे साक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (1 मार्च) को कहा कि यदि पुलिस फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी जांच के लिए एकत्रित सैंपल भेजते समय NDPS Act की धारा 52ए के आदेश को पूरा नहीं करती है तो आरोपी को नशीले पदार्थ और मनोदैहिक पदार्थ रखने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों को पलटते हुए पाया कि यदि पुलिस स्टेशन में सैंपल जमा करने और एफएसएल को उसके हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज जब्ती अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर प्रदर्शित नहीं किए गए तो एफएसएल रिपोर्ट को...

सुप्रीम कोर्ट ने झूठे बयान देने वाले वादी को विशिष्ट निष्पादन से इनकार किया, राहत को विवेकाधीन और न्यायसंगत बताया
सुप्रीम कोर्ट ने झूठे बयान देने वाले वादी को विशिष्ट निष्पादन से इनकार किया, राहत को विवेकाधीन और न्यायसंगत बताया

अपने द्वारा दिए गए झूठे/गलत बयानों के कारण विशिष्ट निष्पादन के लिए वादी की याचिका अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना कि विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 20 के तहत विशिष्ट निष्पादन के लिए डिक्री देना विवेकाधीन और न्यायसंगत है।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने टिप्पणी की,"विवेक का प्रयोग कई कारकों पर निर्भर करता है। कारकों में से एक वादी का आचरण है। इसका कारण यह है कि विशिष्ट प्रदर्शन के डिक्री की राहत न्यायसंगत राहत है, जो व्यक्ति इक्विटी चाहता है उसे इक्विटी करना...

कानूनी प्रतिनिधि मृतक के निजी अनुबंधों के निर्वहन करने के उत्तरदायी नहीं, लेकिन मौद्रिक दायित्व को पूरा करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
कानूनी प्रतिनिधि मृतक के निजी अनुबंधों के निर्वहन करने के उत्तरदायी नहीं, लेकिन मौद्रिक दायित्व को पूरा करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने (01 मार्च को) उपभोक्ता विवाद से उत्पन्न एक अपील की अनुमति देते हुए कहा कि कानूनी प्रतिनिधि पक्षकार के दायित्व का निर्वहन करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं, जिसे व्यक्तिगत क्षमता में निर्वहन किया जाना है।"..अनुबंध के तहत किसी व्यक्ति पर लगाए गए व्यक्तिगत दायित्व के मामले में और ऐसे व्यक्ति के निधन पर, उसकी संपत्ति उत्तरदायी नहीं बनती है और इसलिए, कानूनी प्रतिनिधि जो मृतक की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे स्पष्ट रूप से उत्तरदायी नहीं होंगे और अदालत ने कहा, ''मृतक के संविदात्मक...

राज्यों के पास कराधान के लिए कुछ क्षेत्र होते हैं, हमें इसे कमजोर नहीं करना चाहिए  : सुप्रीम कोर्ट ने खनिज पर राज्यों की कर शक्तियों को कमजोर करने पर चिंता जताई [ दिन-3]
'राज्यों के पास कराधान के लिए कुछ क्षेत्र होते हैं, हमें इसे कमजोर नहीं करना चाहिए ' : सुप्रीम कोर्ट ने खनिज पर राज्यों की कर शक्तियों को कमजोर करने पर चिंता जताई [ दिन-3]

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार (29 फरवरी) को खनिजों पर रॉयल्टी से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई के तीसरे दिन इस बात पर विचार किया कि क्या संसद खनिज अधिकारों पर कर लगाने की अपनी शक्ति से राज्यों को पूरी तरह से वंचित कर सकती है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस हृषिकेश रॉय, जस्टिस अभय ओक,जस्टिस बीवी नागरत्ना,जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस उज्जल भुइयां, जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस एजी मसीह शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई...

बिना स्वामित्व वाले व्यक्ति द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित किए जाने पर संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
बिना स्वामित्व वाले व्यक्ति द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित किए जाने पर संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वादी के पक्ष में उस व्यक्ति (जो संपत्ति का मालिक नहीं है) द्वारा निष्पादित सेल्स डीड वादी को ऐसी संपत्ति पर स्वामित्व/कब्ज़ा का दावा करने का अधिकार नहीं देगा।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों को पलटते हुए कहा कि केवल उस व्यक्ति की भागीदारी, जिसके पास संपत्ति पर स्वामित्व नहीं है, हस्ताक्षरकर्ता के रूप में सेल्स डीड के निष्पादन से वादी को संपत्ति के स्वामित्व/शीर्षक का दावा करने का अधिकार नहीं मिलेगा।हाईकोर्ट ने अपने निष्कर्षों वादी...

जब तक विवादित संपत्ति का व्यापार और वाणिज्य में वास्तव में उपयोग नहीं किया जाता, तब तक धन वसूली मुकदमा वाणिज्यिक मुकदमा नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
जब तक विवादित संपत्ति का व्यापार और वाणिज्य में 'वास्तव में उपयोग' नहीं किया जाता, तब तक धन वसूली मुकदमा वाणिज्यिक मुकदमा नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि विवाद अचल संपत्ति से संबंधित है, इसे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के तहत वाणिज्यिक विवाद नहीं माना जाएगा। विशेष रूप से जब तक कि अचल संपत्ति का 'वास्तव में उपयोग' विशेष रूप से व्यापार या वाणिज्य में नहीं किया जाता।जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए इस मामले को फिर से निर्णय लेने के लिए हाईकोर्ट को वापस भेज दिया कि क्या धन की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया जाएगा। अंबालाल साराभाई एंटरप्राइजेज...

उन्हें भी निजता का अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों की 24x7 डिजिटल निगरानी की मांग वाली याचिका खारिज की
'उन्हें भी निजता का अधिकार है': सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों की 24x7 डिजिटल निगरानी की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 मार्च) एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें 'पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार को रोकने' के लिए सांसदों/विधायकों की सभी गतिविधियों की डिजिटल निगरानी करने की मांग की गई थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने याचिका के विषय पर असंतोष व्यक्त किया और याद दिलाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की निरंतर डिजिटल निगरानी की मांग करने का आदेश निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा।उन्होंने गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने से पहले याचिकाकर्ता को चेतावनी भी दी कि यदि अदालत ने मामले...

Muzaffarnagar Student Slapping Case : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने काउंसलिंग पर TISS की सिफारिशों का पालन किया
Muzaffarnagar Student Slapping Case : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने काउंसलिंग पर TISS की सिफारिशों का पालन किया

मुजफ्फरनगर स्टूडेंट थप्पड़ मामले में नवीनतम घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ने शुक्रवार (1 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने इसमें शामिल अन्य बच्चों की काउंसलिंग पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज (TISS) द्वारा की गई सिफारिशों का अनुपालन किया।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ एक्टिविस्ट तुषार गांधी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना की उचित और समयबद्ध जांच की मांग की गई। मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक द्वारा...

सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में अपने आरोपमुक्ति के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान संशोधन को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में अपने आरोपमुक्ति के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान संशोधन को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक नेता ओ पन्नीरसेल्वम की मद्रास हाईकोर्रट के उस आदेश को चुनौती खारिज कर दी, जिसके तहत आपराधिक मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए पुनर्विचार शुरू किया गया।जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा खंडकी पीठ ने कहा,"एसएलपी खारिज कर दी गई। हालांकि हम यह देख सकते हैं कि जज द्वारा आक्षेपित आदेश में की गई टिप्पणी... उसको केवल नोटिस आदेश के प्रयोजन के लिए माना जाना चाहिए... सू मोटो क्रिमिनल आरसी नंबर 1524/...

सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में मेडिकल आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम बापू की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में मेडिकल आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम बापू की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती खारिज की, जिसने उस मामले में स्वास्थ्य आधार पर सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। उक्त मामले में उन्हें नाबालिग से बलात्कार के लिए दोषी ठहराया गया था।गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना पुलिस हिरासत में इलाज की अनुमति देने का राज्य का प्रस्ताव स्वीकार करने के मद्देनजर, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आसाराम बापू आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।...

शिंदे गुट को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार के खिलाफ शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
शिंदे गुट को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार के खिलाफ शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार को चुनौती देने वाली शिवसेना के सदस्य (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा दायर याचिका पर 7 मार्च, 2024 को सुनवाई करने पर सहमत हो गया।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तत्काल सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।सिब्बल ने कहा कि मामले में सुनवाई की जरूरत है और अनुरोध किया कि इसे गैर-विविध दिन पर सूचीबद्ध किया जाए।सीजेआई ने 7 मार्च को...

मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं, कहने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
'मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं', कहने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

ज्ञानवापी विवाद में नवीनतम घटनाक्रम में मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया कि वाराणसी सिविल कोर्ट के समक्ष लंबित हिंदू पक्षों द्वारा सिविल मुकदमों का बैच पूजा स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित नहीं है। 1991 में हिंदू उपासकों और देवताओं की ओर से दायर यह मुकदमा ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने का अधिकार और विवादित स्थल पर मंदिर की बहाली की मांग करता है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस...