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देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम नहीं होने दे सकते: अमृत विल्सन की OCI रद्दीकरण याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट की टिप्पणी
देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम नहीं होने दे सकते: अमृत विल्सन की OCI रद्दीकरण याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली हइकोर्ट ने यूनाइटेड किंगडम स्थित लेखिका और पत्रकार अमृत विल्सन की OCI कार्ड रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।सुनवाई के दौरान जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“हम इतने सहिष्णु राज्य नहीं हो सकते कि अपने ही देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलोचना या बदनाम होने की अनुमति दे दें।”अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अमृत विल्सन के संबंध में इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट्स मौजूद हैं, जिनमें उनके कथित भारत-विरोधी...

एक ही FIR में दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, 50 हजार रुपये जुर्माना
एक ही FIR में दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, 50 हजार रुपये जुर्माना

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने चावल व्यापार से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में वकील की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एक ही FIR में अलग-अलग वकीलों के माध्यम से दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करना और दोनों में समान कार्यवाही लंबित न होने का हलफनामा देना फोरम शॉपिंग है और न्यायिक पवित्रता के विरुद्ध है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक ही FIR के आधार पर दो अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से विवेकाधीन राहत मांगी। दोनों याचिकाओं के साथ यह शपथपत्र संलग्न था कि...

छोटे अपराध में दर्ज FIR रद्द होने के बाद नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: गुजरात हाइकोर्ट
छोटे अपराध में दर्ज FIR रद्द होने के बाद नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: गुजरात हाइकोर्ट

गुजरात हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला जिसे बाद में रद्द कर दिया गया हो, केवल उसी आधार पर उसे पुलिस बल में नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामला लंबित होना या पूर्व में दर्ज होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं बन सकता।जस्टिस निरजार एस. देसाई भारतभाई खुमसिंहभाई सांगोद द्वारा दायर विशेष सिविल आवेदन पर सुनवाई कर रहे थे।याचिकाकर्ता ने 12.10.2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत चयनित होने के...

BREAKING| असम CM के खिलाफ हेट स्पीच मामले में FIR की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा: हाईकोर्ट जाएं
BREAKING| असम CM के खिलाफ हेट स्पीच मामले में FIR की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा: हाईकोर्ट जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाकर्ताओं से हाईकोर्ट जाने के लिए कहा, जिन्होंने संविधान के आर्टिकल 32 के तहत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ हेट स्पीच से जुड़े अपराधों के लिए कार्रवाई की मांग की थी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने आर्टिकल 32 का इस्तेमाल करने में हिचकिचाहट दिखाई। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता को पहले अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट में जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ने पक्षकारों के हाईकोर्ट को बायपास करके सीधे सुप्रीम...

कुछ खामियों को दूर करना होगा: RTI एक्ट में DPDP संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ को भेजीं
'कुछ खामियों को दूर करना होगा': RTI एक्ट में DPDP संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ को भेजीं

सुप्रीम कोर्ट ने आज डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 (DPDP Act) और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम, 2025 के उन प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनके माध्यम से सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम में संशोधन किया गया है। अदालत ने माना कि मामला गंभीर और विचारणीय है तथा इसे बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।किन याचिकाओं पर सुनवाईखंडपीठ तीन रिट याचिकाओं...

सबरीमाला संदर्भित मुद्दों पर 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की खंडपीठ
सबरीमाला संदर्भित मुद्दों पर 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की खंडपीठ

सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ सबरीमाला मामले की समीक्षा याचिकाओं से जुड़े संदर्भित मुद्दों पर 7 अप्रैल 2026 से सुनवाई शुरू करेगी, जो 22 अप्रैल 2026 तक जारी रहने की संभावना है। खंडपीठ की संरचना मुख्य न्यायाधीश द्वारा अलग से प्रशासनिक आदेश के माध्यम से अधिसूचित की जाएगी।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन-न्यायाधीशों की खंडपीठ ने आज यह आदेश पारित किया कि मामले को 9-न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।सुनवाई का कार्यक्रम7 से 9...

SC/ST Act | विरोध याचिका पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को पुलिस की रेफर रिपोर्ट जांचकर कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य: केरल हाइकोर्ट
SC/ST Act | विरोध याचिका पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को पुलिस की रेफर रिपोर्ट जांचकर कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य: केरल हाइकोर्ट

केरल हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दायर विरोध याचिका (प्रोटेस्ट शिकायत) पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को जांच अधिकारी द्वारा दाखिल की गई रेफर रिपोर्ट का परीक्षण करना होगा और उसे स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में कारणयुक्त आदेश पारित करना अनिवार्य है।जस्टिस ए. बदरुद्दीन एक अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें स्पेशल कोर्ट द्वारा SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।मामले में...

कोडीन तय सीमा से अधिक होने पर NDPS Act लागू, मिलावटी कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को जमानत से इनकार: इलाहाबाद हाइकोर्ट
कोडीन तय सीमा से अधिक होने पर NDPS Act लागू, मिलावटी कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को जमानत से इनकार: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध खेप बरामद होने के मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज की। अदालत ने कहा कि अधिसूचना में दी गई छूट का लाभ तभी मिलेगा जब उसकी शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने कहा,“अदालत की राय में छूट संबंधी प्रावधानों का सख्ती और शाब्दिक रूप से पालन किया जाना आवश्यक है तथा जिन शर्तों के अधीन छूट दी गई, उनका कठोरता से अनुपालन होना चाहिए, किसी भी शर्त का उल्लंघन दावेदार को छूट के लाभ से वंचित कर देगा। वर्तमान मामले में अवैध...

BNSS की धारा 346(2) | पहले से हिरासत में बंद आरोपी को 15 दिन से अधिक रिमांड अवैध नहीं, हर मामले में हैबियस कॉर्पस नहीं चलेगा: गुजरात हाइकोर्ट
BNSS की धारा 346(2) | पहले से हिरासत में बंद आरोपी को 15 दिन से अधिक रिमांड अवैध नहीं, हर मामले में हैबियस कॉर्पस नहीं चलेगा: गुजरात हाइकोर्ट

गुजरात हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में है तो उसे 15 दिन से अधिक अवधि के लिए रिमांड पर रखना अवैध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हैबियस कॉर्पस याचिका हर ऐसे मामले में स्वीकार्य नहीं होगी, जब तक यह न दिखाया जाए कि रिमांड आदेश पूरी तरह अवैध, अधिकार क्षेत्र से बाहर या यांत्रिक ढंग से पारित किया गया।जस्टिस एन.एस. संजय गौड़ा और जस्टिस डी.एम. व्यास की खंडपीठ दो जुड़ी हुई हैबियस कॉर्पस याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें विनोदभाई तिलकधारी तिवारी ने अपने पुत्रों की रिहाई के...

BREAKING| सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच करेगी 17 मार्च को इंडस्ट्री की परिभाषा पर रेफरेंस पर सुनवाई
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच करेगी 17 मार्च को 'इंडस्ट्री' की परिभाषा पर रेफरेंस पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट 17 मार्च को इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 की धारा 2(j) के तहत 'इंडस्ट्री' की परिभाषा पर 9 जजों की बेंच के रेफरेंस पर सुनवाई करेगा।यह रेफरेंस 1978 में बैंगलोर वाटर सप्लाई बनाम ए राजप्पा केस में दिए गए 7 जजों की बेंच के फैसले के खिलाफ है, जिसमें 'इंडस्ट्री' की एक बड़ी परिभाषा तय की गई, जिसमें सरकारी काम, पब्लिक यूटिलिटी, हॉस्पिटल, एजुकेशनल और रिसर्च इंस्टीट्यूशन, प्रोफेशन और क्लब शामिल थे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच...

Know The Law | सेकेंडरी एविडेंस प्रोडक्शन के सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
Know The Law | सेकेंडरी एविडेंस प्रोडक्शन के सिद्धांत: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया

सुप्रीम कोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 64 और 65 के तहत सेकेंडरी एविडेंस की स्वीकार्यता को कंट्रोल करने वाले तय सिद्धांतों को दोहराया। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि प्राइमरी एविडेंस नियम बना रहेगा और सेकेंडरी एविडेंस एक एक्सेप्शन है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने थरमेल पीतांबरन और अन्य बनाम टी. उषाकृष्णन और अन्य केस में सिद्धांतों को संक्षेप में बताया।सिद्धांत इस प्रकार हैं:1. प्राइमरी एविडेंस ही नियम है"इंडियन एविडेंस एक्ट का मूल सिद्धांत यह है कि तथ्यों को प्राइमरी एविडेंस...

सीनियर सिटिज़न को अपना गुज़ारा करने में असमर्थता दिखानी होगी, हर पारिवारिक झगड़े पर मेंटेनेंस एक्ट लागू नहीं होता: बॉम्बे हाईकोर्ट
सीनियर सिटिज़न को अपना गुज़ारा करने में असमर्थता दिखानी होगी, हर पारिवारिक झगड़े पर मेंटेनेंस एक्ट लागू नहीं होता: बॉम्बे हाईकोर्ट

एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द करते हुए कहा, जिसमें दो बेटों को अपने पिता की प्रॉपर्टी खाली करने का निर्देश दिया गया, कि एक सीनियर सिटिज़न और उसके बच्चों के बीच हर झगड़ा या टकराव मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ़ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न एक्ट, 2007 के दायरे में नहीं आएगा।सिंगल-जज जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन ने मेंटेनेंस (भरण-पोषण) ट्रिब्यूनल के 2 फरवरी, 2024 को पास किए गए उस आदेश को रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ता बेटों को मुंबई के सबअर्बन मलाड में रेजिडेंशियल यूनिट...

नॉन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति में UGC की कोई भूमिका नहीं: हाईकोर्ट ने 18 साल बाद लाइब्रेरियन को नौकरी से निकालने का फैसला रद्द किया
'नॉन-टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति में UGC की कोई भूमिका नहीं': हाईकोर्ट ने 18 साल बाद लाइब्रेरियन को नौकरी से निकालने का फैसला रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट ने गुजरात विद्यापीठ की अपील खारिज की, जिसमें सिंगल जज के आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में लंबे समय से काम कर रहे असिस्टेंट लाइब्रेरियन को नौकरी से निकालने का फैसला रद्द कर दिया गया और बकाया वेतन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स देने का निर्देश दिया गया।जस्टिस भार्गव डी. करिया और जस्टिस एल.एस. पीरज़ादा की डिवीजन बेंच गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका में पारित आदेश से उत्पन्न एक लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही थी।शुरू में, बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया कि UGC के...

ह्यूमन राइट्स कमीशन प्राइवेट प्रॉपर्टी के झगड़ों पर सुनवाई नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट जारी किए निर्देश
ह्यूमन राइट्स कमीशन प्राइवेट प्रॉपर्टी के झगड़ों पर सुनवाई नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट जारी किए निर्देश

यह देखते हुए कि प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी से जुड़ी शिकायत को “किसी भी तरह से ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता,” गुजरात हाईकोर्ट ने पारिवारिक प्रॉपर्टी विवाद में स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई रद्द की।ऐसा करते हुए कोर्ट ने ह्यूमन राइट्स उल्लंघन के मामलों पर विचार करते समय कमीशन के अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए डिटेल्ड निर्देश भी जारी किए।जस्टिस निरल आर. मेहता ने कहा कि यह मामला एक “साफ उदाहरण” है, जहां स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने उन शक्तियों का...

जज पर सरकारी दबाव में काम करने का आरोप लगाने वाले वकील पर चलेगा क्रिमिनल कंटेम्प्ट का मामला
जज पर 'सरकारी दबाव में काम करने' का आरोप लगाने वाले वकील पर चलेगा क्रिमिनल कंटेम्प्ट का मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते वकील के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू करने के लिए अलग रेफरेंस दिया, जिसने ओपन कोर्ट में कोर्ट पर "सरकार के दबाव में काम करने" और पुलिस से सफाई मांगने की 'हिम्मत' न होने का आरोप लगाया।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने वकील (आशुतोष कुमार मिश्रा) के व्यवहार को "बहुत आपत्तिजनक, बदनाम करने वाला और अपमानजनक" पाया और कहा कि यह पहली नज़र में कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 2(c) के तहत 'क्रिमिनल कंटेम्प्ट' के दायरे में आता है।संक्षेप में मामला12 फरवरी,...