जानिए हमारा कानून
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4, 5 और 6– इलेक्ट्रॉनिक शासन और कानूनी मान्यता
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) ने भारत में डिजिटल दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर (Electronic Signature) को कानूनी मान्यता देकर प्रशासन, व्यापार और न्यायिक कार्यप्रणाली में एक नया युग प्रारंभ किया। इस अधिनियम के अध्याय II में जहां इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रमाणीकरण प्रक्रिया को समझाया गया है, वहीं अध्याय III इलेक्ट्रॉनिक शासन (Electronic Governance) के विकास की नींव रखता है। धारा 4, 5 और 6 इस बात को स्पष्ट करती हैं कि अब कागज़ी दस्तावेजों के स्थान पर...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धाराएं 468 से 471 : दंडादेश की प्रक्रिया से संबंधित सामान्य प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) के अध्याय XXXI के अंतर्गत दंडादेश (Sentence) के कार्यान्वयन से संबंधित सामान्य प्रावधानों को समाहित किया गया है।इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार आरोपी के खिलाफ पारित किए गए दंडादेशों का क्रियान्वयन किया जाएगा, विशेषकर उस स्थिति में जब आरोपी पहले से किसी अपराध के लिए सजा भुगत रहा हो, या किसी अपराध के लिए हिरासत में रहा हो। इस लेख में हम धारा 468 से लेकर 471 तक के प्रावधानों को सरल भाषा में विस्तारपूर्वक...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 465 से 467: दंड निष्पादन से जुड़ी सामान्य विधियाँ
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) एक विस्तृत प्रक्रिया संहिता है जो भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में कार्य करती है। इस संहिता ने भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) का स्थान लिया है और यह 1 जुलाई 2024 से प्रभाव में आ चुकी है।इसकी धारा 455 से लेकर धारा 473 तक “दंड के निष्पादन” (Execution of Sentences) से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। इस खंड के अंतर्गत विभिन्न स्थितियों में दी गई सजाओं को व्यवहार में कैसे लाया जाए,...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 3 और 3A – इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सिग्नेचर की प्रमाणीकरण प्रक्रिया
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) भारत में डिजिटल लेनदेन (Digital Transactions), इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स (Electronic Records) और साइबर अपराधों (Cyber Crimes) को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था।इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक संचार और लेनदेन को कानूनी मान्यता देना और डिजिटल दुनिया में भरोसेमंद ढांचा तैयार करना है। यह अधिनियम भारतीय न्यायिक सेवा परीक्षाओं और अन्य विधि परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है। धारा 1: संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारंभ और अनुप्रयोग (Section...
भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता 2015 : संवैधानिक प्रक्रिया, न्यायपालिका की भूमिका और मानवीय दृष्टिकोण
भूमि सीमा समझौता 2015 वह ऐतिहासिक दस्तावेज़ है जिसने भारत और बांग्लादेश (Bangladesh) के बीच 1947 के विभाजन (Partition) के बाद से चले आ रहे जटिल सीमा विवाद (Boundary Dispute) को स्थायी रूप से सुलझाया। इस समझौते (Agreement) के तहत दोनों देशों ने न केवल अपने-अपने क्षेत्र में स्थित एन्क्लेव्स (Enclaves) का आदान प्रदान (Exchange) किया, बल्कि “विरुद्ध कब्ज़ा” (Adverse Possessions) की राशि पर भी सहमति व्यक्त की।इन छोटे-छोटे भू खंडों के कारण करीब 51,549 लोग लगभग सात दशक तक बिना किसी नागरिकता...
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90 और 90-A : प्रत्येक भूमि पर भू-राजस्व या किराया देयता
राजस्थान भूमि व्यवस्था और प्रशासन की दृष्टि से भू-राजस्व अधिनियम एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है। इसकी धारा 90 और 90-A भूमि के राजस्व और कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग से संबंधित व्यापक प्रावधान देती हैं। इन धाराओं का उद्देश्य राज्य सरकार को भूमि से प्राप्त होने वाले राजस्व की व्यवस्था करना और कृषि भूमि का नियोजित और नियंत्रित उपयोग सुनिश्चित करना है।धारा 90 – प्रत्येक भूमि पर भू-राजस्व या किराया देयताइस धारा के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है कि राजस्थान राज्य में स्थित प्रत्येक भूमि, चाहे उसका उपयोग...
क्या राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या
संविधान का अनुच्छेद 143(1) तब चर्चा में आया जब भारत के राष्ट्रपति ने विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित 14 प्रश्नों को सुप्रीम कोर्ट को संदर्भित करने के लिए इस प्रावधान को लागू करने का एक असाधारण कदम उठाया।चूंकि संदर्भ के तहत मुद्दों को तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय द्वारा सुलझाया गया था, जो केंद्र सरकार को पसंद नहीं आया, इसलिए राष्ट्रपति के संदर्भ ने कुछ लोगों को चौंका दिया है और एक राजनीतिक विवाद भी...
Know The Law | गैंगस्टर एक्ट लागू करने और गैंग चार्ट तैयार करने पर यूपी सरकार के दिशा-निर्देश
कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 (Uttar Pradesh Gangsters and Anti-Social Activities (Prevention) Act) के प्रावधानों को लागू करने और उसके तहत गैंग चार्ट तैयार करने के संबंध में कुछ मापदंड/दिशानिर्देश निर्धारित किए थे।यह घटनाक्रम गोरख नाथ मिश्रा नामक व्यक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के बाद हुआ, जिस पर एक्ट की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि मिश्रा के मामले की नए जारी किए...
Consumer Protection Act का संशोधित रूप
वर्ष 1986 में बनाया गया एक्ट समय के साथ पुराना हो चला था और बदलते समय के कारण उसमें जटिलता भी आयी थी इसलिए नया एक्ट बनाया जाना बेहद ज़रूरी था। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक विधेयक, अर्थात् उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018, तारीख 5 जनवरी, 2018 को लोक सभा में पुरःस्थापित किया गया और उस सदन द्वारा 20 दिसम्बर, 2018 से पारित किया गया। विधेयक के राज्य सभा में विचार के लिए लंबित रहते हुए, 16वीं लोक सभा का विघटन हो गया और विधेयक व्यपगत हो गया। अतः, वर्तमान विधेयक, अर्थात् उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019...
ग्राहकों की सुरक्षा का कानून Consumer Protection Act
ग्राहकों की सुरक्षा के उद्देश्य से Consumer Protection Act पार्लियामेंट द्वारा बनाया गया और उसे सारे भारत पर लागू किया गया। किसी भी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए यह आवश्यक है कि वहां उसके ग्राहकों के भी अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए तथा एक ग्राहक के पास यह अधिकार होना चाहिए कि यदि वह कोई भी उत्पाद या सेवा को खरीद रहा है आश्वस्त होना चाहिए कि उसके सभी अधिकार सुरक्षित हैं तथा उसके साथ किसी भी प्रकार की ठगी नहीं की जाएगी। कुछ आलोचको ने इस अधिनियम को व्यापारी के विरुद्ध बताया परंतु यदि कोई व्यापारी...
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धारा 71, 72 और 73
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 राज्य में न्यायालयों और राजस्व न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों तथा वादों पर लगने वाले शुल्क को नियंत्रित करता है। यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि न्यायिक कार्यवाही में भाग लेने वाले पक्षकार उचित शुल्क अदा करें और यह शुल्क राज्य सरकार के राजस्व का हिस्सा बने।इस अधिनियम में विभिन्न प्रकार के शुल्क, शुल्क की वसूली की प्रक्रिया, शुल्क वापसी की स्थिति, मुद्रांक की व्यवस्था, और उनका विनिमय आदि का विस्तृत विवरण दिया गया है। अधिनियम की...
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 88 और 89 : राज्य की कब संपत्ति मानी जाएंगी
धारा 88 – सभी सड़कें, नाले, जल स्रोत तथा ऐसी अन्य भूमि जो किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, वे राज्य की संपत्ति मानी जाएंगीराजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 88 यह स्पष्ट करती है कि वे सभी सड़कें, गलियाँ, रास्ते, पुल, नाले, नदी-नालों के किनारे की बाड़ें, नदियाँ, झीलें, तालाब, नहरें, जलधाराएँ, बहता हुआ अथवा जमा हुआ पानी और वे सभी भूमि जो किसी व्यक्ति या ऐसी संस्था की संपत्ति नहीं हैं जो कानूनन संपत्ति रखने की पात्र हो—वे राज्य सरकार की संपत्ति मानी जाएंगी। इसका मतलब यह हुआ कि जो जमीन या संपत्ति...
क्या केवल ऑफिस का होना किसी High Court को Article 226(2) के तहत Jurisdiction देने के लिए काफी है?
सुप्रीम कोर्ट ने State of Goa v. Summit Online Trade Solutions (P) Ltd. [2023 LiveLaw (SC) 184] के फैसले में भारतीय संविधान के Article 226(2) के तहत High Court की Territorial Jurisdiction (क्षेत्रीय अधिकारिता) से जुड़े एक अहम मुद्दे को सुलझाया।यह मामला writ petition (रिट याचिका) से जुड़ा था, जिसमें यह तय करना था कि किसी High Court के क्षेत्र में 'cause of action' (कारण का आधार) कब और कैसे उत्पन्न होता है। यह फैसला उन मामलों में विशेष रूप से मार्गदर्शक है, जहां एक राज्य द्वारा लिए गए फैसले का असर...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 463 और 464: अन्य क्षेत्रों से जारी वारंटों की वैधता और सजा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) एक नई प्रक्रिया संहिता है जो 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के स्थान पर लागू हुई है। इस संहिता में अपराध से संबंधित दंडों के निष्पादन से जुड़ी एक संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित की गई है।संहिता के अध्याय XXXIV में "दंड का निष्पादन" (Execution of Sentences) से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इस अध्याय के भाग 'ग' (C – Levy of fine) में विशेष रूप से उस स्थिति की चर्चा की गई है जब किसी...
Civil Rights Protection Act की धारा 5,6,और 7 के प्रावधान
यह एक्ट समाज के वंचित वर्ग के साथ होने वाले अत्याचार और क्रूरता को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस एक्ट की धारा 5,6 और 7 के अंतर्गत भी अलग अलग कामों को अपराध बनाया गया है और उसमें सज़ा के प्रावधान किये गए हैं।धारा 5अस्पतालों आदि में व्यक्तियों को प्रवेश करने से इंकार करने के लिए दंड:-जो कोई "अस्पृश्यता" के आधार पर(क) किसी व्यक्ति को किसी अस्पताल, औषधालय, शिक्षा संस्था या में, यदि वह अस्पताल, औषधालय, शिक्षा संस्था या छात्रावास जन-साधारण या उसके किसी विभाग के फायदे के लिए स्थापित हो या चलाया...
Maintenance अदा नहीं किये जाने के परिणाम
किसी भी सक्षम व्यक्ति को अपने पर डिपेंड लोगों को मैंटेन करने की जिम्मेदारी होती है। अगर ऐसा व्यक्ति अपने पर डिपेंड लोगों का Maintenance नहीं करता है तब डिपेंड लोग अदालत के ज़रिये Maintenance मांगते हैं।Maintenance का हक़ डिपेंड लोगों को नागरिक सुरक्षा संहिता से मिलते हैं। जहां पत्नी बच्चे और माता पिता के भरण पोषण नहीं करने पर आश्रित संबंधित मजिस्ट्रेट को एक आवेदन देकर भरण पोषण प्राप्त कर सकते हैं।वर्तमान समय में माता पिता के मामले में भरण पोषण नहीं देने जैसी चीज कम देखने को मिलती है। लेकिन पत्नी...
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 463 और 464: अन्य क्षेत्रों से जारी वारंटों की वैधता और सजा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) एक नई प्रक्रिया संहिता है जो 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के स्थान पर लागू हुई है। इस संहिता में अपराध से संबंधित दंडों के निष्पादन से जुड़ी एक संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित की गई है।संहिता के अध्याय XXXIV में "दंड का निष्पादन" (Execution of Sentences) से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इस अध्याय के भाग 'ग' (C – Levy of fine) में विशेष रूप से उस स्थिति की चर्चा की गई है जब किसी...
दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने वाला ऐतिहासिक समझौता: साप्टा की रूपरेखा, उद्देश्य और कानूनी विश्लेषण
SAARC (South Asian Association for Regional Cooperation) का उद्देश्य अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ाना है। इसी दिशा में 1995 में SAPTA (SAARC Preferential Trading Arrangement) की शुरुआत हुई, जो दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करने की पहली ठोस कोशिश थी।इस समझौते के तहत सदस्य देशों ने तय किया कि वे धीरे-धीरे आपसी व्यापार पर लगने वाले टैरिफ (Tariff – आयात-निर्यात पर लगने वाला शुल्क) में कटौती करेंगे और व्यापारिक रियायतें देंगे, जिससे आर्थिक एकीकरण (Economic...
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 79 से 87 : अपील, पुनर्विचार और पुनरीक्षण
भूमिकाराजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम के अध्यायों में अपील, पुनर्विचार (Review), पुनरीक्षण (Revision) और आदेशों की प्रतिलिपि से संबंधित विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं। इनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, न्याय की पुनः समीक्षा और अनुचित आदेशों पर नियंत्रण सुनिश्चित करना है। नीचे हम धाराओं 79 से 87 तक के प्रावधानों का विस्तार से सरल हिंदी में वर्णन कर रहे हैं, ताकि आम नागरिक या विधि विद्यार्थी भी इन्हें सहजता से समझ सके। धारा 79 – अपील की याचिका के साथ आदेश की प्रमाणित प्रति देना...
राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम 1961 की धारा 69 और 70 : स्टाम्प विक्रेताओं के लिए दंडात्मक प्रावधान
राजस्थान न्यायालय शुल्क और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 एक ऐसा कानून है जो राज्य के भीतर न्यायालयों में प्रस्तुत होने वाले विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों, याचिकाओं, अपीलों और अन्य कार्यवाहियों पर लगने वाले शुल्क (कोर्ट फीस) को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम के पिछले अध्यायों में यह बताया गया है कि किन मामलों में शुल्क देना आवश्यक है, किस दस्तावेज पर कितना शुल्क लगेगा, और कौन से दस्तावेज शुल्क से मुक्त होंगे। अधिनियम की धारा 66, 67 और 68 में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि सभी शुल्क मुद्रांक द्वारा...




















