हाईकोर्ट
न्यायिक अधिकारियों को जिला जज के रूप में सीधी नियुक्ति की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना
रेजानिश केवी बनाम के. दीपा मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा दिए गए उस निर्णय का गहन विश्लेषण आवश्यक है जिसमें न्यायिक अधिकारियों को, सेवाकाल और वकील के रूप में संयुक्त रूप से सात वर्ष का अनुभव होने पर, जिला न्यायाधीश के रूप में सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई है।अब तक, स्थिति यह थी कि केवल न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव रखने वाले वकील ही जिला न्यायाधीश (डीजे) के रूप में सीधी भर्ती के लिए आवेदन करने के पात्र थे। सेवारत न्यायिक अधिकारियों के पास योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर...
आपातकाल के 50 वर्ष: संविधान, अदालत और भारत के लोकतंत्र की लड़ाई
यह लेख भारत में 1975-77 के आपातकाल के दौरान संवैधानिक संकट की पड़ताल करता है, जिसमें न्यायिक प्रतिक्रियाओं, कार्यपालिका के अतिक्रमण और विधायी विध्वंस पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण मामले के फैसले, एडीएम जबलपुर मामले में सुप्रीम कोर्ट के विवादास्पद फैसले और 38वें, 39वें और 42वें संविधान संशोधनों के अधिनियमन सहित प्रमुख घटनाओं पर पुनर्विचार करता है, जिनका उद्देश्य कार्यपालिका को न्यायिक जांच से मुक्त करना था। लेख में जस्टिस एच.आर. खन्ना की एकमात्र असहमति और अंततः...
माता-पिता के बच्चे से मिलने के अधिकार से बच्चे का विकास प्रभावित नहीं होना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि माता-पिता के बच्चे से मिलने के अधिकार पर निर्णय लेते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे की स्कूली शिक्षा और उसके शारीरिक, नैतिक और भावनात्मक विकास पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।जस्टिस एम. जोतिरमन ने दोहराया कि बच्चे से मिलने के अधिकार से संबंधित मामलों पर विचार करते समय कोर्ट का सर्वोपरि विचार बच्चे के कल्याण पर होना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि यद्यपि माता-पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार है, लेकिन इससे बच्चे के विकास में बाधा नहीं आनी चाहिए।अदालत ने...
'हिंसा, लिंचिंग और गौरक्षकों का चलन आम हो गया है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौहत्या अधिनियम के तहत लापरवाही से दर्ज की गई FIRs की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश गौहत्या निवारण अधिनियम, 1955 के तहत पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले दर्ज करने के 'लापरवाह' तरीके और राज्य में गौरक्षकों की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लिया।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अधीन न होने के बावजूद ऐसी FIRs क्यों दर्ज की जा रही हैं।खंडपीठ ने इस मुद्दे पर भी हलफनामा मांगा कि राज्य...
कोई कर्मचारी पात्र होने के बाद मर जाता है तो नियमितीकरण का अधिकार उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी नियमितीकरण के लिए पात्र होने के बाद मर जाता है तो यह लाभ उसके कानूनी उत्तराधिकारियों के माध्यम से निहित माना जाना चाहिए और बना रहेगा।हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि "न्याय, भले ही विलंबित हो, न केवल वैधानिक रूप से बल्कि सैद्धांतिक रूप से भी, जो टूटा है उसे ठीक करता हुआ दिखना चाहिए," कहा कि सेवा के नियमितीकरण का अधिकार एक बार अर्जित हो जाने पर कर्मचारी की मृत्यु पर समाप्त नहीं होता।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"कोर्ट प्रक्रियागत कठोरता के कारण न्याय...
'स्थायी पदों का सृजन न कर पाना, अस्थायी कर्मचारियों को अनुचित रूप से लंबे समय तक नियोजित करने का कोई आधार नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी पदों का सृजन न कर पाना या वित्तीय सीमाएं, स्थायी और आवश्यक कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को वर्षों तक अस्थायी आधार पर नियोजित करने का औचित्य नहीं सिद्ध कर सकतीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को अल्पकालिक या संविदा नियुक्तियों पर बनाए रखना अनुचित श्रम व्यवहार है और रोजगार में समानता एवं सम्मान के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव मालेगांव नगर निगम के ड्राइवरों और दमकलकर्मियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे...
'वसीयत में बेटे का नाम गलत लिखा, पता भी गलत': दिवंगत संजय कपूर के बच्चों ने जालसाजी के आरोपों पर दिल्ली हाईकोर्ट में बताया
एक्ट्रेस करिश्मा कपूर और दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के बच्चों ने सोमवार (13 अक्टूबर) को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनके दिवंगत पिता की कथित वसीयत जाली है, क्योंकि इसमें उनके बेटे का नाम गलत लिखा है और कई जगहों पर उनकी बेटी का पता भी गलत दिया गया।सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने वसीयत में त्रुटियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये उनके पिता के स्वभाव के विपरीत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वसीयत इतनी लापरवाही से लिखी गई कि यह उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती है।पिछली सुनवाई में बच्चों ने हाईकोर्ट को बताया...
जांच में शिकायतकर्ता की संलिप्तता उजागर होने पर उसे आरोपी बनाया जा सकता है, अलग से FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि यदि जांच में उसकी संलिप्तता या अपराध में उसकी संलिप्तता की ओर इशारा करने वाले किसी भी साक्ष्य का पता चलता है तो FIR दर्ज करने वाले को आरोपी बनाया जा सकता है।जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस चित्तरंजन दाश की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी (IO) को केवल मूल शिकायतकर्ता को आरोपी बनाने या उसके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए अलग से FIR दर्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं है।कोर्ट ने कहा,"हमारा विनम्र मत है कि यदि जांच के दौरान, अपराध में उसकी...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई का दिया आदेश
तालाबों, चरागाहों और अन्य सार्वजनिक उपयोगिता संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को समाप्त करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण और व्यापक आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि ग्राम सभा भूमि पर अतिक्रमण की सूचना देने या उसे हटाने में प्रधानों, लेखपालों और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता आपराधिक विश्वासघात के समान है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने अपने 24 पृष्ठों के आदेश में न केवल राज्य भर में सार्वजनिक भूमि या सार्वजनिक...
अगर कोई उड़ान नहीं तो ₹500 करोड़ क्यों खर्च किए? हाईकोर्ट ने जबलपुर हवाई अड्डे की उपेक्षा के लिए राज्य सरकार से सवाल किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अन्य प्रमुख शहरों से जबलपुर की उड़ान कनेक्टिविटी के संबंध में 'दूसरों के साथ किए गए व्यवहार' के लिए फटकार लगाई।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जबलपुर हवाई अड्डे के उन्नयन पर लगभग ₹500 करोड़ खर्च करने के बावजूद, शहर से कई उड़ानें बंद कर दी गईं।जजों ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा,"आपने इतना पैसा क्यों खर्च किया? रीवा से कम...
सर्विस के दौरान दिव्यांगता होती है तो कर्मचारी को सेवामुक्त करने के बजाय उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दिव्यांगता सेवा के दौरान प्राप्त होती है, वहां कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने के बजाय उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 [रोज़गार में भेदभाव न करना] का हवाला देते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन ने कहा,“अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि जहां कोई कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दिव्यांगता प्राप्त करता है, उसकी सेवाएं समाप्त नहीं की जानी चाहिए, बल्कि नियोक्ता द्वारा उसे उपयुक्त पद पर ट्रांसफर करने और उसके...
'बिना सुनवाई और तर्कसंगत आदेश के न्यायिक रिमांड को 60 दिनों से अधिक बढ़ाना अवैध': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 187(3) के तहत निर्धारित 60 दिनों की अवधि से अधिक न्यायिक रिमांड को अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिए बिना और तर्कसंगत आदेश पारित किए बिना बढ़ाना कानून के विरुद्ध है और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।जस्टिस सचिन एस. देशमुख भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 316(2), 318(2), 318(4) सहपठित धारा 3(5) और महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठानों में) अधिनियम, 1999 की धारा 3 के तहत अपराधों के...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो प्रतिवादियों को दिया जाना है। 2013 में पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले को अदालत के फैसले को लागू करने के बजाय बार-बार चुनौती देने पर प्रतिवादियों को यह जुर्माना देना होगा।जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, 2013 के पूर्व निपटाए गए आदेश के आधार पर 2023 में पारित सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध दायर अंतर-न्यायालयीय अपील पर सुनवाई कर रही थी।प्रतिवादी 1985 में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था,...
मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में यह याचिका सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती कि जांच की स्थिति जाननी हो या जांच के तरीके से संतुष्ट न हों।न्यायालय ने बताया कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण की शक्ति बढ़ी है, लेकिन इसके लिए कोई सख्त नियम नहीं है। यदि किसी को जांच की निगरानी या प्रभावी जांच के निर्देश चाहिए, तो इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया कानून में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, और ऐसे मामलों को सक्षम अदालत देखेगी। यह याचिका...
पहलगाम पोस्ट केस: डॉ. मेडुसा पर गंभीर आरोप, 'एकता खतरे' की धारा हटाई, 352 और 302 BNS बरकरार
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. मद्री ककोटी (डॉ. मेडुसा) के खिलाफ पहलगाम आतंक हमले के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट पर FIR की जांच पूरी हो गई है और जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।राज्य के वकील ने बताया कि पहले FIR में कई धाराएं थीं, जैसे धारा 152 BNS (भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम) लेकिन अब चार्जशीट में केवल धारा 352 (जानबूझकर अपमान और शांति भंग करने के लिए) और 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए) शामिल हैं। इस वजह से...
पुलिस गवाह के बयानों की सच्चाई नहीं परख सकती': MP हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को लगाई फटकार, SP को तलब किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस मामले में पुलिस की निंदा की, जिसमें 3 वर्षीय बच्चे की मौत होने वाले हादसे की जांच करने के बजाय जांच अधिकारी (IO) ने शिकायतकर्ता और गवाहों से इस तरह सवाल किए कि उनकी बातों को खारिज करने की कोशिश की जा रही थी।हाईकोर्ट ने SP को अगले सुनवाई के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया और सुनवाई को 14 नवंबर तक स्थगित कर दिया। चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेव और जस्टिस विनय सारफ की खंडपीठ ने कहा: "हमारे सामने प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और...
व्यवसाय सीमित हो सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए: ग्रीन पटाखों की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी
ग्रीन पटाखों की बिक्री और खरीद पर लगे प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि व्यवसाय को सीमित किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए।कोर्ट 2017 में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हाईकोर्ट ने 2017 में निर्देश दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा राज्य पिछले वर्ष यानी 2016 में जारी किए गए अस्थायी लाइसेंसों की कुल...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगा मामले में पुलिस की याचिका खारिज की, ताहिर हुसैन से जुड़े आगजनी केस में गवाह को दोबारा बुलाने की मांग ठुकराई
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े आगजनी मामले के ट्रायल में अभियोजन गवाह को फिर से बुलाने की मांग करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस मामले के आरोपियों में से एक पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ताहिर हुसैन भी हैं।मामले को कुछ देर सुनने के बाद जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने आदेश में कहा,"दलीलें सुनी गईं, रिकॉर्ड का अवलोकन किया गया। याचिका खारिज की जाती है। कोई मेरिट नहीं है।"पुलिस के वकील ने तर्क...
राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय
राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाई कोर्ट में अपने उस सर्कुलर का बचाव किया, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया, बजाय इसके कि उन्हें क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) दिया जाए।जनवरी, 2023 के इस सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में सरकार ने कहा कि नीति-निर्माण का क्षेत्र, जिसमें आरक्षण नीति भी शामिल है। इसकी सीमा तथा संरचना कार्यपालिका और विधायी क्षमता का विषय है।सरकार ने तर्क दिया कि वैधानिक ढांचे का उल्लंघन...
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण न देने पर अधिकारियों को फटकारा
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायालय स्थापना में विभिन्न पदों पर भर्ती से संबंधित सार्वजनिक रोज़गार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को 5 साल की आयु छूट और 5% अर्हक अंकों में छूट प्रदान करने के लिए अधिकारियों को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 के NALSA मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बावजूद अधिकारियों द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। इसमें सार्वजनिक...




















