हाईकोर्ट

जेल सुपरिंटेंडेंट स्वास्थ्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए मेडिकल अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट
जेल सुपरिंटेंडेंट स्वास्थ्य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए मेडिकल अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि केंद्रीय कारागार के सुपरिंटेंडेंट, एक अलग प्रशासनिक विभाग होने के नाते मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग से प्रतिनियुक्त चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का कोई अधिकार या क्षमता नहीं रखते हैं।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने याचिकाकर्ता के स्थानांतरण आदेशों को रद्द करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिनमें राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 ("नियम") के तहत जेल अधीक्षक को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश भी शामिल...

चित्तापुर में पथसंचलन की अनुमति मिलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने RSS संयोजक की याचिका बंद की
चित्तापुर में पथसंचलन की अनुमति मिलने पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने RSS संयोजक की याचिका बंद की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को RSS कलबुर्गी के संयोजक द्वारा चित्तापुर टाउन में प्रस्तावित पथसंचलन (मार्च) आयोजित करने की अनुमति संबंधी याचिका का निस्तारण कर दिया।जस्टिस एम.जी.एस. कमल ने चित्तापुर तहसीलदार द्वारा 16 नवंबर को पथसंचलन की अनुमति देते हुए कुछ शर्तें लागू करने वाले आदेश को रिकॉर्ड में लिया। पिछली सुनवाई में राज्य ने कोर्ट को बताया था कि वह रूट मार्च प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा। संयोजक की ओर से संख्या बढ़ाने का अनुरोध सीनियर एडवोकेट अरुणा श्याम ने कहा कि अनुमति देने के...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दिवंगत कांस्टेबल की विधवा को अनुग्रह राशि न देने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई, 20 लाख रुपये देने का निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने दिवंगत कांस्टेबल की विधवा को अनुग्रह राशि न देने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई, 20 लाख रुपये देने का निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सख्त टिप्पणी में कहा कि सेवा के दौरान मृत्यु होने पर कर्मचारी के परिवार को अनुग्रह राशि से वंचित करना केवल तकनीकी आधार पर असंवेदनशील और अति-तकनीकी रवैया है, जो कल्याणकारी शासन के उद्देश्य के विपरीत है।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने राज्य सरकार का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक अशिक्षित विधवा की अनुग्रह राशि की मांग केवल आवेदन में देरी के आधार पर खारिज कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग ने स्वयं प्रशासनिक देरी स्वीकार की थी।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पति राजस्थान पुलिस में...

बिजली अधिनियम की धारा 151 के तहत अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दर्ज शिकायत पर संज्ञान लेने से पूरी कार्यवाही अमान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
बिजली अधिनियम की धारा 151 के तहत अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दर्ज शिकायत पर संज्ञान लेने से पूरी कार्यवाही अमान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी अदालत द्वारा बिजली अधिनियम 2003 की धारा 151 के तहत अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लिया जाता है तो यह केवल एक प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं बल्कि मूलभूत अवैधता है, जो पूरे मुकदमे को निष्फल कर देती है।जस्टिस एम. एम. नेर्लिकर की एकल पीठ राज्य सरकार की उस आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।मामले के अनुसार, उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वाड) ने आरोपी के आइस...

NCC से ट्रांसजेंडर बाहर रखना वर्तमान कानून के अनुसार वैध: केरल हाईकोर्ट ने समावेशिता हेतु कानून संशोधन की सलाह दी
NCC से ट्रांसजेंडर बाहर रखना वर्तमान कानून के अनुसार वैध: केरल हाईकोर्ट ने समावेशिता हेतु कानून संशोधन की सलाह दी

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) से बाहर रखना वर्तमान कानून के तहत संविधान का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि नेशनल कैडेट कॉर्प्स अधिनियम, 1948 अभी केवल पुरुष और महिला छात्रों को ही नामांकित करने की अनुमति देता है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानून में संशोधन कर समावेशिता सुनिश्चित करने पर विचार करने का आग्रह किया है।जस्टिस एन. नागरेश ने यह फैसला उस ट्रांसजेंडर छात्र की याचिका पर दिया, जिसकी NCC में भर्ती की आवेदन को जेंडर आइडेंटिटी के आधार पर खारिज...

निजी भूमि पर धर्मशाला होने मात्र से संपत्ति दान या धर्मार्थ नहीं मानी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
निजी भूमि पर धर्मशाला होने मात्र से संपत्ति दान या धर्मार्थ नहीं मानी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में कहा कि केवल निजी भूमि पर धर्मशाला का निर्माण हो जाने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि वह संपत्ति धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित कर दी गई या उसे हमेशा उसी प्रयोजन के लिए उपयोग में लाना आवश्यक है।जस्टिस रेखा बोराना की एकल पीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक ट्रस्ट के विधिक उत्तराधिकारियों ने देवस्थान विभाग के आयुक्त के आदेश को चुनौती दी थी। उक्त आदेश में उनकी पैतृक संपत्ति को सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्ति घोषित कर दिया गया...

दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: अमेरिकन ड्रीम 11 को सभी सोशल मीडिया पेज हटाने का निर्देश, ड्रीम 11 ट्रेडमार्क उल्लंघन मामला
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: अमेरिकन ड्रीम 11 को सभी सोशल मीडिया पेज हटाने का निर्देश, ड्रीम 11 ट्रेडमार्क उल्लंघन मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अमेरिका स्थित फैंटेसी गेमिंग कंपनी अमेरिकन ड्रीम 11 को निर्देश दिया कि वह अपने सभी सोशल मीडिया पेज, प्रोफाइल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से ड्रीम 11 के ट्रेडमार्क का उपयोग बंद करे और संबंधित पेजों को तुरंत हटाए या ब्लॉक करे।अदालत ने यह आदेश स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज़ प्रा. लि. जो भारत में लोकप्रिय फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म ड्रीम 11 संचालित करती है की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने कहा,“अगली सुनवाई तक प्रतिवादी अपने सभी सोशल मीडिया पेज, प्रोफाइल या...

हत्या के मामले में प्रत्यक्षदर्शी व चिकित्सकीय साक्ष्य पर्याप्त, भले ही उद्देश्य सिद्ध न हो : दिल्ली हाईकोर्ट
हत्या के मामले में प्रत्यक्षदर्शी व चिकित्सकीय साक्ष्य पर्याप्त, भले ही उद्देश्य सिद्ध न हो : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में कहा कि यदि हत्या के मामले में प्रत्यक्षदर्शी के बयान को मेडिकल साक्ष्य से पुष्टि मिलती है तो अपराध का उद्देश्य पूरी तरह सिद्ध न होने पर भी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यदि अभियोजन के पास पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध हैं तो केवल इस आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता कि अपराध का कारण स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुआ।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हत्या के मामले में अपराध में प्रयुक्त...

विवाहित संतान को पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं, बिना अनुमति रहने का हक नहीं : राजस्थान हाईकोर्ट
विवाहित संतान को पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं, बिना अनुमति रहने का हक नहीं : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोई भी वयस्क और विवाहित संतान अपने पिता की स्व-अर्जित संपत्ति में उसकी अनुमति के बिना रहने का अधिकार नहीं रखती।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पिता ऐसी अनुमति वापस ले लेता है तो पुत्र या पुत्री को संपत्ति खाली करनी होगी, क्योंकि इस स्थिति में उनका कब्जा केवल प्रेम और स्नेहवश दिया गया, न कि किसी कानूनी अधिकार के तहत।जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पिता के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाले पुत्र पर एक लाख रुपये का दंड लगाया।अदालत ने कहा कि...

केरल में मतदाता सूची के विशेष पुनर्विचार पर रोक की मांग पर हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा, सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी
केरल में मतदाता सूची के विशेष पुनर्विचार पर रोक की मांग पर हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा, सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (LSGI) के आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को टालने की मांग की गई थी।कोर्ट की टिप्पणी,“बेहतर होगा सुप्रीम कोर्ट जाएं।”जस्टिस वी.जी. अरुण की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही समान याचिकाएं लंबित हैं। इसलिए राज्य सरकार को वहीं जाना उचित होगा।जस्टिस अरुण ने कहा,“मैं यह नहीं कह...

65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा अनुचित नहीं: उचित मूल्य दुकान डीलरों पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का निर्णय
65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा अनुचित नहीं: उचित मूल्य दुकान डीलरों पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का निर्णय

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उचित मूल्य दुकान (फेयर प्राइस शॉप) संचालकों के लिए 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तय करना न तो अव्यवहारिक है और न ही मनमाना।न्यायालय ने कहा कि यह सीमा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए उचित और व्यावहारिक है।चीफ जस्टिस अरुण पाली और जस्टिस रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि खाद्यान्न वितरण का कार्य शारीरिक श्रम से जुड़ा होता है और सामान्य परिस्थितियों में 65 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति के लिए ऐसे कार्यों को करना कठिन...

मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारी का मामला: दुराचार के आरोप लंबित होने पर भी विभाग VRS आवेदन निपटाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारी का मामला: दुराचार के आरोप लंबित होने पर भी विभाग VRS आवेदन निपटाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यदि किसी कर्मचारी की मेडिकल स्थिति ऐसी हो कि वह विभागीय जांच का सामना करने में असमर्थ हो तो लंबित दुराचार के आरोपों के बावजूद उसके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन पर विचार किया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि जब कोई कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से जांच में भाग लेने योग्य न हो तो विभागीय कार्रवाई का औचित्य समाप्त हो जाता है।मामले की पृष्ठभूमिमामला दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम...

वैधानिक नियमों के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी दो महीने के अनिवार्य नोटिस के बिना इस्तीफ़ा नहीं दे सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वैधानिक नियमों के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी दो महीने के अनिवार्य नोटिस के बिना इस्तीफ़ा नहीं दे सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी इस्तीफ़ा मांगता है तो उसे पुलिस अधिनियम, 1961 के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमावली के विनियम 505 के तहत विभाग को अनिवार्य दो महीने की नोटिस अवधि प्रदान करनी होगी।जस्टिस विकास बुधवार ने कहा कि उपर्युक्त प्रावधानों का पालन न करने पर इस्तीफ़ा दोषपूर्ण हो जाएगा।याचिकाकर्ता को 2010 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल और बाद में 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस में फिर से शामिल होने के...

स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र के कारण पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद आत्मसमर्पण न कर पाने वाले दोषियों के लिए नियम बनाएं: दिल्ली हाईकोर्ट
स्वास्थ्य समस्याओं और उम्र के कारण पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद आत्मसमर्पण न कर पाने वाले दोषियों के लिए नियम बनाएं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को उन परिस्थितियों के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया, जहां दोषी अपने स्वास्थ्य या उम्र के कारण अक्षम होने के कारण पैरोल या फर्लो पर रिहाई की अवधि समाप्त होने के बाद भी आत्मसमर्पण नहीं कर पाते हैं।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि ऐसे मामलों में कई दोषियों को कानूनी अनिश्चितता के कारण कष्ट सहने पड़ सकते हैं और समय से पहले रिहाई के अपने मामले पर विचार होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।अदालत ने कहा,"ऐसे दोषियों को अक्सर उन कारणों से अनुमत अवधि से अधिक समय तक बाहर रहना...

The Tryst Renewed: ज़ोहरान ममदानी और नेहरूवादी लोकतांत्रिक समाजवादी पुनरुत्थान का संकेत
The Tryst Renewed: ज़ोहरान ममदानी और नेहरूवादी लोकतांत्रिक समाजवादी पुनरुत्थान का संकेत

न्यूयॉर्क से परे एक क्षण: ममदानी क्यों मायने रखते हैं?क्वींस में एक ज़मीनी विधानसभा सदस्य से न्यूयॉर्क शहर के मेयर तक ज़ोहरान ममदानी का उदय न केवल अमेरिका में एक राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है, बल्कि एक दार्शनिक बदलाव भी है जिसकी गूंज पूरे महाद्वीपों में सुनाई देती है। भारतीय पर्यवेक्षकों के लिए, उनकी जीत जवाहरलाल नेहरू के लोकतांत्रिक-समाजवादी दृष्टिकोण के प्रतीकात्मक नवीनीकरण का प्रतिनिधित्व करती है, जो कभी भारत के संविधान की प्रस्तावना में अंकित था: सभी नागरिकों के लिए न्याय, सामाजिक, आर्थिक और...