हाईकोर्ट

सामाजिक बहिष्कार और खाप पंचायतों पर राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त, विशेष आयोग का गठन
सामाजिक बहिष्कार और खाप पंचायतों पर राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त, विशेष आयोग का गठन

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में प्रचलित सामाजिक बहिष्कार, खाप पंचायतों द्वारा लगाए जाने वाले अवैध दंड, ऑनर किलिंग और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ में विभिन्न आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई के दौरान समाज में व्याप्त गंभीर समस्याओं पर गहन मंथन किया गया।याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि राजस्थान के विभिन्न जिलों जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, जालौर और पाली में खाप पंचायतें अब भी सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड जैसे अवैध...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों पर कहा, उन्हें बेल देने से बेतरतीब ढंग से इनकार करने के बजाय प्रवेश बिंदु पर सतर्क रहा जाए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों पर कहा, उन्हें बेल देने से बेतरतीब ढंग से इनकार करने के बजाय प्रवेश बिंदु पर सतर्क रहा जाए

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त विदेशी नागरिकों के लिए, "जमानत देने से इनकार करने के बजाय प्रवेश के बिंदु पर सतर्कता बरतने के लिए एक संतुलित कानूनी प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।" न्यायालय ने सुझाव दिया कि, "प्रभावी निवारक तंत्र की आधारशिला प्रवेश-पूर्व कठोर जांच-पड़ताल में निहित है- वीजा जारी करने से पहले व्यापक पृष्ठभूमि सत्यापन और विश्वसनीय तथा ठोस आरोपों पर वीजा को तत्काल रद्द करना।" कोर्ट ने आगे कहा कि, "जब कोई विदेशी नागरिक भारतीय क्षेत्राधिकार में...

मध्यस्थता कार्यवाही में भाग लेने का मतलब मध्यस्थ की एकतरफा नियुक्ति को स्वीकार करना नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
मध्यस्थता कार्यवाही में भाग लेने का मतलब मध्यस्थ की एकतरफा नियुक्ति को स्वीकार करना नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में माना कि मध्यस्थ का अधिदेश मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (मध्यस्थता अधिनियम) की धारा 14 के तहत समाप्त किया जा सकता है, यदि मध्यस्थ की नियुक्ति एकतरफा तरीके से की गई हो, जो कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 12(5) के तहत स्पष्ट रूप से निषिद्ध है, जब तक कि लिखित समझौते के माध्यम से अयोग्यता को स्पष्ट रूप से माफ नहीं किया जाता है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने यह भी माना कि लिखित रूप में किसी भी आपत्ति को स्पष्ट रूप से माफ किए बिना मध्यस्थता कार्यवाही...

आप कैसी गवर्निंग बॉडी हैं, जिसके पास ताकत ही नहीं है? बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने तेलंगाना क्रिकेट एसोसिएशन को मेंबर बनाने में हो रही देरी पर BCCI से पूछा
आप कैसी गवर्निंग बॉडी हैं, जिसके पास ताकत ही नहीं है? बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने तेलंगाना क्रिकेट एसोसिएशन को मेंबर बनाने में हो रही देरी पर BCCI से पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से पूछा कि क्या वह एक ऐसी गवर्निंग बॉडी है, जिसके पास ताकत ही नहीं है? कोर्ट ने यह सवाल BCCI की ओर यह दलील दिए जाने के बाद पूछा कि वह हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) और तेलंगाना क्रिकेट एसोसिएशन (TCA) दोनों को एक साथ बैठाकर BCCI में TCA की सदस्यता पर विवाद को हल नहीं कर सकता।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और डॉ नीला गोखले की खंडपीठ ने BCCI की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट डॉ बीरेंद्र सराफ से यह सवाल किया। उन्होंने कहा कि हालांकि शीर्ष...

हिरासत में यातना के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
हिरासत में यातना के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उत्तर बंगाल के एक महिला पुलिस थाने में तीन महिला कॉलेज छात्राओं की हिरासत और कथित पुलिस यातना को लेकर राज्य पुलिस द्वारा जवाब न दिए जाने पर चिंता व्यक्त की है। जस्टिस तीरथंकर घोष ने टिप्पणी की,"अपने से पूछें कि उन्हें किस प्रावधान के तहत ले जाया गया था? आज सुबह मैं स्तब्ध रह गया जब एसडीपीओ रैंक के अधिकारी इसका जवाब नहीं दे सके। ऐसा नहीं है कि विरोध प्रदर्शन नहीं होते या कभी-कभी उग्र नहीं होते। ये सामान्य बातें हैं। उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखा गया, पुलिस को यह तय...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने DGP चंडीगढ़ को वकील की हत्या की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने DGP चंडीगढ़ को वकील की हत्या की जांच के लिए SIT गठित करने का आदेश दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को कथित हत्या के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें जिला न्यायालय परिसर में साथी वकीलों द्वारा हमला किए जाने के बाद एक अधिवक्ता की मौत हो गई थी। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अपने आदेश में कहा,"हालांकि यह न्यायालय जांच/जांच अधिकारी के संबंध में तत्काल रिट याचिका में संलग्न आरोपों का संज्ञान नहीं ले रहा है, तथापि, पूरी तरह से व्यवस्था में पक्षों का विश्वास बनाए रखने और जांच में पारदर्शिता...

मोटर वाहन अधिनियम | धारा 163ए के तहत दावा मालिक या बीमाकर्ता के अलावा किसी और के खिलाफ नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट
मोटर वाहन अधिनियम | धारा 163ए के तहत दावा मालिक या बीमाकर्ता के अलावा किसी और के खिलाफ नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163ए के तहत मुआवज़ा देने का दायित्व वाहन के मालिक और बीमाकर्ता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगा, क्योंकि दावेदार को लापरवाही का दावा करने या उसे स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। धारा 163ए संरचित सूत्र के आधार पर मुआवज़े के भुगतान के लिए विशेष प्रावधानों से संबंधित है। जस्टिस सी.प्रतीप कुमार ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम माधवन एम (2011) में डिवीजन बेंच के फैसले पर भरोसा करते हुए इस प्रकार टिप्पणी की,“यद्यपि...

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री की हत्या के मामले में आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री की हत्या के मामले में आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री गुलाम नबी लोन की 2005 की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य इतने कमज़ोर और अस्थिर हैं कि ट्रायल कोर्ट द्वारा निकाले गए निष्कर्ष से अलग निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने आरोपियों को बरी करने के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की और इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन पक्ष आतंकवादी हमले के पीछे की साजिश में उनकी संलिप्तता को साबित...

ईसाइयों द्वारा सिविल कानून के अनुसार किया गया वैध दत्तक ग्रहण कैनन कानून के तहत मान्यता प्राप्त: केरल हाईकोर्ट
ईसाइयों द्वारा सिविल कानून के अनुसार किया गया वैध दत्तक ग्रहण कैनन कानून के तहत मान्यता प्राप्त: केरल हाईकोर्ट

ऐसा करते हुए न्यायालय ने पूर्वी चर्चों के कैनन संहिता का संदर्भ दिया, जहां दत्तक बच्चों का उल्लेख है। इसके अलावा कैनन 110 जिसका पालन ईसाइयों के कुछ संप्रदायों द्वारा किया जाता है, यह प्रावधान करता है कि नागरिक कानून के मानदंड के अनुसार गोद लिए गए बच्चों को उस व्यक्ति या व्यक्तियों के बच्चे माना जाता है, जिन्होंने उन्हें गोद लिया है।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि यद्यपि भारत में ईसाइयों के लिए गोद लेने को मान्यता देने वाला कोई व्यक्तिगत कानून नहीं है लेकिन सिविल कानून के अनुसार वैध दत्तक ग्रहण को...

कुत्तों के काटने की घटनाएं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर से आवारा कुत्तों की समस्या को रोकने के लिए ठोस समाधान निकालने को कहा
कुत्तों के काटने की घटनाएं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम कमिश्नर से आवारा कुत्तों की समस्या को रोकने के लिए ठोस समाधान निकालने को कहा

ग्वालियर में आवारा कुत्तों के खतरे और कुत्तों के काटने की घटनाओं का दावा करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों, विशेष रूप से शहर के नगर निगम आयुक्त से अगली सुनवाई की तारीख तक ठोस समाधान निकालने को कहा।याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस हिरदेश की खंडपीठ ने कहा,"प्रतिवादियों, विशेष रूप से कमिश्नर नगर निगम, ग्वालियर से अगली सुनवाई की तारीख तक या उससे पहले ठोस समाधान निकालने की अपेक्षा की जाती है।"जनहित याचिका में प्रतिवादी नंबर...

हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, कहा- यह पेशे के लिए शर्मनाक
हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, कहा- 'यह पेशे के लिए शर्मनाक'

केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने वाले वकील की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया वकील के खिलाफ मामला बनता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482 (4) के तहत प्रतिबंध के कारण उसकी जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।BNSS की धारा 482 (4) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 65 और धारा 70 (2) के तहत आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से रोकती है। BNS की धारा 65 12 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के बलात्कार से संबंधित है। BNS की...

Breaking | हाईकोर्ट पहुंचा किसान नेता जगजीत सिंह धल्लेवाल की हिरासत का मामला, कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जारी किया नोटिस
Breaking | हाईकोर्ट पहुंचा किसान नेता जगजीत सिंह धल्लेवाल की हिरासत का मामला, कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जारी किया नोटिस

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने देर शाम किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया, जिन्हें कथित तौर पर चल रहे किसान आंदोलन से अवैध रूप से हिरासत में लिया गया।पंजाब सरकार और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करते हुए जस्टिस मनीषा बत्रा ने आदेश में कहा,"यह याचिका शाम 6:45 बजे प्राप्त हुई, जिसमें हिरासत में लिए गए जगजीत सिंह दल्लेवाल की रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जारी करने की प्रार्थना की गई, जो संयुक्त मंच संयुक्त किसान मोर्चा...

गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा को गोपनीय सरकारी दस्तावेजों की चोरी के आरोप में अग्रिम जमानत दी
गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा को 'गोपनीय' सरकारी दस्तावेजों की चोरी के आरोप में अग्रिम जमानत दी

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (21 मार्च) को पत्रकार महेश लांगा को अग्रिम जमानत दे दी, जिन पर एक एफआईआर में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और चोरी के आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने गुजरात मैरीटाइम बोर्ड (GMB) से संबंधित "अत्यंत गोपनीय सरकारी दस्तावेज" प्राप्त किए।हालांकि, लांगा इस समय एक जीएसटी धोखाधड़ी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। हाईकोर्ट पहले उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है।जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने आदेश सुनाते हुए कहा, "प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लांगा सरकारी कर्मचारी नहीं...

Senior Citizens Act के तहत एक वरिष्ठ नागरिक दूसरे से कब्जा नहीं मांग सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
Senior Citizens Act के तहत एक वरिष्ठ नागरिक दूसरे से कब्जा नहीं मांग सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत किसी परिसर के कब्जे की पुनः प्राप्ति के लिए दायर किया गया वाद वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।इसके अलावा, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई वरिष्ठ नागरिक इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी अन्य वरिष्ठ नागरिक के खिलाफ कब्जे की पुनः प्राप्ति के लिए मुकदमा दायर नहीं कर सकता, और इस प्रकार के विवादों का निपटारा केवल सिविल न्यायालय में किया जा सकता है।जस्टिस संदीप वी....

गैर-चार्जशीटेड आरोपियों पर कार्यवाही न करने पर मजिस्ट्रेट सूचक को सूचित करने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गैर-चार्जशीटेड आरोपियों पर कार्यवाही न करने पर मजिस्ट्रेट सूचक को सूचित करने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मजिस्ट्रेट को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है, जब वह केवल आरोप पत्र दाखिल किए गए व्यक्तियों के खिलाफ संज्ञान ले रहा हो, लेकिन एफआईआर में नामित अन्य व्यक्तियों को छोड़ रहा हो, जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने देखा कि यदि मजिस्ट्रेट, चार्जशीट में शामिल न किए गए व्यक्तियों के संबंध में शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर देता है, तो इससे मामला अनावश्यक रूप से लंबा हो सकता है और अनावश्यक...

CrPC की धारा 145 के तहत कार्रवाई से पहले शांति भंग का ठोस सबूत जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
CrPC की धारा 145 के तहत कार्रवाई से पहले शांति भंग का ठोस सबूत जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पुनः पुष्टि की है कि दंड प्रक्रिया संहिता CrPC की धारा 145 के तहत भूमि विवाद से उत्पन्न शांति भंग होने की आशंका के मामले में कार्यवाही शुरू करने से पहले, शांति भंग की आसन्न संभावना या तत्काल खतरे को स्पष्ट करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सामग्री प्रस्तुत करना आवश्यक है।संदर्भ के लिए, धारा 145 उन मामलों की प्रक्रिया निर्धारित करती है जहां भूमि या जल से संबंधित विवाद से शांति भंग होने की संभावना हो सकती है। वहीं, धारा 146 श मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि यदि मामला आपातकालीन...

संविदा विवादों में नए अधिकार स्थापित करने के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, बल्कि समझौते में दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
संविदा विवादों में नए अधिकार स्थापित करने के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, बल्कि समझौते में दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि संविदा विवादों में रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य, जब वह अनुबंध/समझौते द्वारा बनाए गए अधिकारों की रक्षा के लिए दायर की गई हो। इसने माना कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट के माध्यम से अनुबंध के तहत नए अधिकार बनाने की मांग नहीं की जा सकती।जय प्रकाश एसोसिएट्स (JAL) ने पट्टे के किराए, प्रीमियम और उस पर ब्याज के भुगतान में चूक की, विशेष विकास क्षेत्र परियोजना के तहत पूरी 1000 हेक्टेयर भूमि के लिए पट्टा विलेख यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA)...

आत्महत्या के लिए उकसाना | अदालत मृतक के प्रति जवाबदेह है, समझौते के आधार पर FIR रद्द नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
आत्महत्या के लिए उकसाना | 'अदालत मृतक के प्रति जवाबदेह है', समझौते के आधार पर FIR रद्द नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए दर्ज की गई प्राथमिकी को पक्षों के बीच समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है, यह देखते हुए कि जहां प्राथमिक पीड़ित की मृत्यु हो गई है, "अदालतों को इस तरह से कार्य करना चाहिए जैसे कि वे मृतक के प्रति सीधे जवाबदेह हों और ऐसे मामलों को सर्वोच्च जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ देखा जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कानून का शासन कायम रहे।" जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने कहा, "जबकि कानूनी उत्तराधिकारियों (जैसे परिवार के...