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सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप पर एक नज़र

LiveLaw News Network
27 April 2020 3:24 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह,  वीकली राउंड अप पर एक नज़र
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Supreme Court Weekly Round Up

लॉक डाउन की अवधि के दौरान 20 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख जजमेंट/ऑर्डर पर एक नज़र। जानिए कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पहला सप्ताह।

अनुसूचित क्षेत्रों के स्कूलों में ST वर्ग से संबंधित शिक्षकों का 100 प्रतिशत आरक्षण असंवैधानिक : सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि "अनुसूचित क्षेत्रों " में स्थित स्कूलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित शिक्षकों का 100 प्रतिशत आरक्षण संवैधानिक रूप से अमान्य है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल द्वारा जारी किए गए सरकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ST शिक्षकों के लिए पूर्ण आरक्षण की पुष्टि की थी और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार दोनों पर जुर्माना लगाया जो सरकार के लिए आरक्षण में 50% सीलिंग को तोड़ना चाहते थे।

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NDPS-मिश्रण में तटस्‍थ पदार्थ की मात्रा को दवा के वास्तविक वजन के साथ विचार किया जाना च‌ा‌हिए, ताकि छोटी या व्यावसाय‌िक मात्रा तय हो सकेः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 के तहत नशीली दवाओं या साइकोट्रोपिक पदार्थ के मिश्रण में तटस्थ पदार्थों की मात्रा को, 'छोटी या व्यावसायिक मात्रा' निर्धारित करते हुए अपराधी दवा के वास्तविक वजन के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए। तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने इसी दृष्टिकोण पर 2008 के ई माइकल राज बनाम इंटेलिजेंस ऑफिसर, नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो के मामले में दिए निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें माना गया था कि एनडीपीएस एक्ट के तहत मिश्रण में केवल दवा का वास्तविक वजन मायने रखेगा, तटस्थ पदार्थों के वजन को बाहर रखा जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज FIR पर अर्नब गोस्वामी को तीन हफ्ते तक गिरफ्तारी से राहत दी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और जम्मू- कश्मीर में उनके खिलाफ दायर एफआईआर के आधार पर गिरफ्तारी से तीन सप्ताह की सुरक्षा प्रदान की है। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा कि उनके खिलाफ तीन सप्ताह तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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गन्ने की क़ीमत निर्धारित करने का अधिकार राज्य और केंद्र दोनों को, अगर राज्य की निर्धारित क़ीमत केंद्र से अधिक है तो इससे कोई विवाद पैदा नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा कि गन्ने का मूल्य निर्धारण का मुद्दा समवर्ती सूची में आता है और केंद्र और राज्य दोनों को ही इसकी क़ीमत निर्धारित करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की गन्ने की क़ीमत केंद्र की निर्धारित क़ीमत से नीचे नहीं होना चाहिए। और अगर राज्य चाहे तो वह केंद्र की क़ीमत से ऊँची क़ीमत का निर्धारण कर सकता है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, इंदिरा बनर्जी, विनीत सरन, एमआर शाह और एसआर रविंद्र भट की पाँच-सदस्यीय पीठ ने इस बात का निर्णय किया कि चौधरी टिका रामजी एवं अन्य आदि बनाम उतर प्रदेश राज्य एवं अन्य (AIR 1956 SC 676) और यूपी को-ऑपरेटिव केन यूनियंस फ़ेडेरेशंस बनाम वेस्ट यूपी शुगर मिल्ज़ एसोसिएशन एंड अदर्स [(2004)5SCC 430] मामले में कोई टकराव है कि नहीं है।

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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल को जमानत देने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने उसकी अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उल्लेख किया गया था कि मिशेल को जेल में भीड़भाड़ और बढ़ती उम्र के कारण COVID19 वायरस का शिकार होने की आशंका "निराधार" है।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को ईरान में फंसे 860 भारतीय मछुआरों के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के चलते ईरान में फंसे 860 भारतीय मछुआरों को वापस लाने की याचिका पर केंद्र सरकार को कहा है कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाही की जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। जस्टिस एन वी रमना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता सांता मुथूलिंगम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि वहां से एक सूचना मिली है जो दिखाती है कि तीन हफ्ते पहले भोजन की आपूर्ति का प्रभार कंपनी द्वारा उठाया गया था, जिसे भारतीय दूतावास द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। पिछले तीन हफ्तों से उनके लिए भोजन आपूर्ति नहीं हो रही है। ये मेमो ईरान से व्हाट्सएप पर भेजा गया है और वो लोग नाव पर फंसे हुए हैं।

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'आप PIL दाखिल करने के अलावा मजदूरों की मदद नहीं कर सकते : SG, आप हमें 15 लाख लोगों को खाना खिलाने के लिए कह रहे हैं ? : भूषण

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जब COVID-19 के कारण लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों को मज़दूरी के भुगतान के लिए सरकार से निर्देश मांगने वाली एक याचिका पर सुनवाई शुरू की तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि "कुछ लोगों का सामाजिक कार्य केवल जनहित याचिका दाखिल करने तक ही सीमित है।" दरअसल जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ, एक्टिविस्ट हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन प्रवासी श्रमिकों को भोजन, बुनियादी जरूरतों और आश्रय तक पहुंच प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था जो देशव्यापी लगाए गए लॉकडाउन के प्रकाश में सख्त तनाव में हैं।

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(यौन शोषण) समय पर जांच से इनकार करना पीड़‌ित के मौलिक अधिकारों का उल्‍लंघन, सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को पूर्व रॉ कर्मचारी को मुआवजा देने को कहा

रॉ की एक पूर्व कर्मचारी की यौन उत्पीड़न की शिकायत को 'उचित तरीके से हैंडल' नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्त‌ि जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का हनन होने के कारण एक लाख रुपए का 'संवैधानिक मुआवजा' देने का निर्देश दिया है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को यौन उत्पीड़न की श‌िकायत के बाद "असंवेदनशील और अनिच्छुक परिस्थितियों" का सामना करना पड़ा। संगठन ने विसाखा और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य में निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप आंतरिक शिकायत समिति का गठन तीन महीने के बाद किया। समिति का निष्कर्ष था कि यौन उत्पीड़न के आरोप साबित नहीं किए जा सकते।

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मंहगाई भत्ते को फ्रीज करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी

एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों पर बकाया महंगाई भत्ता देने के लिए केंद्र से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। एक अप्रैल से शुरू होने सप्ताह में सेवानिवृत्त अधिकारियों को ये महंगाई भत्ता दिया जाना था लेकिन COVID19 महामारी संकट के मद्देनज़र बड़े पैमाने पर संकट को देखते हुए 20 अप्रैल को वित्त मंत्रालय द्वारा जनवरी 2020 से पूर्वव्यापी रूप से इसे फ्रीज कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने RAW के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त करने के नियम को संवैधानिक ठहराया

एक महत्वपूर्ण फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को RAW (भर्ती, कैडर और सेवा) नियम, 1975 के नियम 135 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो केंद्र सरकार को उन अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त करने की शक्ति प्रदान करता है जिनकी पहचान उजागर या समझौता चुकी है। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने रॉ की एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसे रॉ के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 43 बी के खंड (एफ) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा

कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 43 बी के खंड (एफ) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। 2005 के एपीओ नंबर 301 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 27.06.2007 के आदेश को रद्द कर दिया था और कहा था कि उक्त खंड भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार मनमाना और उल्लंघनकारी है। क्लॉज (एफ) को पहले से मौजूद धारा 43 बी फाइनेंस एक्ट, 2001 में 1.4.2002 के प्रभाव से डाला गया था। इस क्लॉज को शुरू करने का उद्देश्य लीव इनकैशमेंट स्कीम के तहत देय दायित्व के एवज में आयकर से निर्धारिती द्वारा दावा की गई कटौतियों के मामलों में कर-रहित का प्रावधान करना था, लेकिन वास्तव में नियोक्ता द्वारा छुट्टी नहीं दी गई थी।

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COVID-19 : महामारी से मृत हुए भारतीयों के शवों को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि COVID-19 के संक्रमण के कारण मौत होने पर विदेशों में रखे गए भारतीय नागरिकों के शवों को वापस लाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। ये याचिका एक एनजीओ, प्रवासी लीगल सेल ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता एनजीओ ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण स्तर पर, भारत में अधिकारियों द्वारा यहां अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग करने की असामान्य प्रक्रिया, पूरे प्रत्यावर्तन को एक थकाऊ प्रक्रिया बनाती है, इसके परिणामस्वरूप, कई भारतीयों के मृत शरीर विशेष रूप से बहरीन, ओमान, कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों के हवाई अड्डों पर छोड़ दिए गए हैं।

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COVID-19 : स्थिति सामान्य होने तक सभी चुनाव स्थगित करने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर मांग की गई है कि राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) के अध्यक्ष को निर्देश दिया जाए कि वह सामान्य स्थिति होने तक देश में कहीं भी और किसी भी तरह का चुनाव होने से रोकने के लिए उचित कदम उठाएं। इस प्रकार याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (डीएमए) के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा गठित एनईसी के अध्यक्ष को केंद्रीय और सभी राज्य चुनाव आयोगों को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की दिल्ली हाईकोर्ट के पदोन्नति मानदंडों के खिलाफ दायर याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक अधिकारी की ग्रेडिंग अधिकारी और संस्‍थान के बीच का मामला होता है। कोई अन्य अधिकारी किसी अन्य अधिकारी की ग्रेडिंग के बारे में जानकारी नहां मांग सकता है। पीठ ने कहा, ग्रेडिंग के मामले में अपीलकर्ता के प्रति हाईकोर्ट ने कोई पूर्वाग्रह प्रदर्श‌ित नहीं किया था।

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दिल्‍ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किए अपराधों की जांच के ‌लिए सीबीआई को उस राज्य ‌‌की सहमति की जरूरत नहीं, जहां अभियुक्त कार्यरत होः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल ब्यूरो एजेंसी (सीबीआई) किसी अ‌‌भियुक्त द्वारा किसी अन्य राज्य में किए गए अपराध की जांच के संबंध में, सबंध‌ित राज्य की अनुमति के बिना, किसी केंद्र शासित प्रदेश में भी जांच कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक मामले में अभ‌ियुक्त ने सवाल उठाया था कि क्या बिहार सरकार के मामलों के संबंध में नियोजित लोक सेवकों के खिलाफ सीबीआई को मामला दर्ज का अधिकार है।

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नागपुर में 8 साल के बच्चे का अपहरण कर हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की मौत की सजा को उम्रक़ैद में तब्दील किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2014 में नागपुर के एक दंत चिकित्सक दंपति के आठ वर्षीय बेटे के अपहरण और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मौत की सजा पाए दो व्यक्तियों को न्यूनतम 25 साल की जेल की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय के फैसले पर सहमति जताई कि अभियोजन पक्ष ने अरविंद सिंह और उसके सहयोगी के अपराध के बारे में संदेह से परे मामले को साबित कर दिया और 1 सितंबर, 2014 को दंत चिकित्सक दंपती द्वारा चलाए जा रहे क्लिनिक के एक कर्मचारी के रूप में निर्दोष लड़के का अपहरण किया, फिर फिरौती मांगी और अंत में बच्चे की हत्या कर दी।

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COVID-19 : यहां तक ​​कि एक रक्षक को सरंक्षण और सुरक्षा की आवश्यकता है': सुप्रीम कोर्ट में पुलिसकर्मियों के लिए 'जोखिम और कठिनाई' भत्ते की याचिका

पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त, भानुप्रताप बर्गे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें केंद्र सरकार को निर्देश मांगा गया है कि वह COVID-19 महामारी के बीच अग्रिम पंक्ति में सेवारत पुलिस अधिकारियों को 'जोखिम और कठिनाई' भत्ते के भुगतान के लिए प्रावधान करे। याचिकाकर्ता ने वकील अमित पाई के माध्यम से, प्रस्तुत किया है कि "जोखिम और कठिनाई भत्ता" की अवधारणा कोई अनूठी नहीं है और उन पुलिस अधिकारियों की सहायता के लिए इसका उपयोग किया जाना चाहिए जो लॉकडाउन को लागू करने के लिए खतरनाक परिस्थितियों में समय-समय पर काम कर रहे हैं।

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प्रवासी मज़दूरों को अपने गांव जाने की इजाजत देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप आवेदन दायर

देश भर में फंसे लाखों प्रवासी कामगारों के मौलिक अधिकार के जीवन के प्रवर्तन के लिए केंद्र और राज्यों को उनके गृहनगर और गांवों में सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका का विरोध करते हुए एक हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया गया है।

याचिकाकर्ता, आईआईएम-अहमदाबाद के पूर्व डीन जगदीप एस छोकर और वकील गौरव जैन ने शीर्ष अदालत से प्रार्थना की थी कि लॉकडाउन के विस्तार के मद्देनज़र, विभिन्न राज्यों में फंसे श्रमिकों को आवश्यक परिवहन सेवाएं प्रदान की जाएं जो अपने घर लौटना चाहते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रवासी कामगार, जो चल रहे लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग के लोगों में से हैं, को COVID-19 के परीक्षण के बाद अपने घरों में वापस जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने फेस मास्क और हैंड सैनिटाइजर के लिए GST से छूट की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फेस मास्क और हैंड सैनिटाइजर के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स ( GST) से छूट की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने एक अन्य याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें चल रही कोरोना वायरस महामारी के दौरान गैर- COVID​​-19 बीमारियों से संबंधित चिकित्सा खर्चों में तत्काल छूट के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी।

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COVID 19 के मरीज़ों के मुफ्त इलाज की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन न करें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के मुफ्त इलाज की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की खंडपीठ ने अमित द्विवेदी की ओर से दायर याचिका पर कड़ी टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि याचिका कुछ भी नहीं है, लेकिन एक पब्लिसिटी स्टंट है और ऐसी याचिकाएं दायर नहीं की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि "सरकार को यह तय करना है कि किसे मुफ्त इलाज दिया जाए। हमारे पास कोई फंड नहीं है। मुझे लगता है कि इस मामले को बंद कर देना चाहिए। इस तरह के किसी भी मुकदमे को उठाने की जरूरत नहीं है। सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त है। इसे जनहित मुकदमा बनाने की जरूरत नहीं है।"

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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लॉकडाउन के दौरान वकीलों को दफ्तरों के किराए से छूट देने की मांग

दिल्ली के एक वकील अल्जो के जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वकालत करने वालों के लिए उनके पेशेवर परिसर के किराए का भुगतान करने के लिए विशेष रूप से सहायता करने के लिए सरकार को एक निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कई वकील अदालत के करीब रहने के लिए अपने पेशेवर स्थानों के लिए "अत्यधिक किराए" का भुगतान करते हैं। हालांकि, लॉकडाउन के बाद से, कई वकील जो नियमित आय पर निर्भर हैं, काम के नुकसान के कारण पीड़ित हैं और इस तरह उनके लिए अपने कार्यालय परिसर के लिए किराए का भुगतान करना मुश्किल हो गया है।

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लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इन असामान्य हालात में सभी अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को COVID19 महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण सख्त परेशानी झेल रहे प्रवासी कामगारों की मजदूरी के भुगतान पर दायर याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि देश असामान्य स्थिति का सामना कर रहा है और इसमें शामिल सभी हितधारक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं।

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