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‘सभी लॉ स्कूलों में आरटीई अधिनियम अनिवार्य विषय बनाएं’: दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
‘सभी लॉ स्कूलों में आरटीई अधिनियम अनिवार्य विषय बनाएं’: दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी आरटीई अधिनियम, 2009 को सभी लॉ कॉलेज और विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए एक अनिवार्य विषय बनाने पर विचार करे।याचिका पर चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ कल सुनवाई कर सकती है।जनहित याचिका में एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट ने प्रस्तुत किया है कि भले ही क़ानून बहुत पहले लागू...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 41बी का पालन न करने का हवाला देते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत अभियुक्त को जमानत दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 41बी का पालन न करने का हवाला देते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत अभियुक्त को जमानत दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एनडीपीएस मामले में दो अभियुक्तों को इस आधार पर जमानत दे दी कि सीआरपीसी की धारा 41बी का पालन नहीं किया गया। साथत ही जब्त किए गए दस्तावेजों में भी विसंगतियां हैं।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस राय चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने आरोपी व्यक्तियों की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए कहा,"दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 बी के प्रावधानों का अनुपालन किया जाना चाहिए और एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत उचित अनुमान लगाने के लिए जब्ती सूची में निहित कोई विसंगति नहीं हो सकती।...

[अवैध खनन] मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य को प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने के लिए कड़े नियम बनाने को कहा
[अवैध खनन] मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य को 'प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने' के लिए कड़े नियम बनाने को कहा

मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को राज्य में सड़कों की स्थिति से संबंधित एक खाका तैयार करने का निर्देश दिया। इसके अलावा राज्य में उपलब्ध भरपूर प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने के लिए जांच और नियंत्रण के लिए कड़े नियम बनाने को कहा।कोयला और अन्य सामान ले जाने वाले ट्रकों द्वारा ओवरलोडिंग के संबंध में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डेंगदोह की खंडपीठ ने ये टिप्पणी की।शुरुआत में अदालत ने कहा कि यह मामला एक साल से अधिक समय तक खिंचा हुआ है और...

आरटीई अधिनियम | वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25% प्रारंभिक स्तर की सीटें आरक्षित नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करें: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा
आरटीई अधिनियम | वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25% प्रारंभिक स्तर की सीटें आरक्षित नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करें: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में असम सरकार को फ्री और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 (अधिनियम, 2009) के बच्चों के अधिकार की धारा 12 (1) (सी) के तहत गैर-सहायता प्राप्त और गैर-अल्पसंख्यक संस्थानों में कमजोर वर्ग और वंचित समूह से संबंधित बच्चे एडमिशन लाभ के संबंध में अपनी नीति को लागू करने का निर्देश दिया।जस्टिस अचिंत्य मल्ला बुजोर बरुआ और जस्टिस रॉबिन फुकन की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,"अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) के तहत गैर-सहायता प्राप्त गैर-अल्पसंख्यक संस्थानों...

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग को गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी, भले पिता सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने में विफल रहे
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग को गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी, भले पिता सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने में विफल रहे

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक 16 वर्षीय नाबालिग को मेडिकल के माध्यम से गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी। मामले में उसके पिता ने पहले प्रक्रिया के लिए अदालत में सहमति दी थी, लेकिन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने की औपचारिकता को पूरा करने में विफल रहे।बेंच ने देखा कि नाबालिग को 24 सप्ताह के गर्भ को पूरा करने के लिए केवल दो या तीन दिन बचे थे। इसको ध्यान में रखते हुए दिनेश कुमार शर्मा ने बाल कल्याण समिति द्वारा पीड़िता के अभिभावक के रूप में नियुक्त निर्मल छाया परिसर के अधीक्षक को सहमति पत्र...

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने रोजगार के मामले में धोखाधड़ी की शिकार गरीबी रेखा से नीचे की महिला की सहायता की
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने रोजगार के मामले में "धोखाधड़ी" की शिकार गरीबी रेखा से नीचे की महिला की सहायता की

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि लोक प्रशासन के क्षेत्र में कार्य करने वाले सार्वजनिक प्राधिकरण/अधिकारी द्वारा कार्रवाई या निर्णय की विकृति प्रशासन के स्तर पर ध्यान दिए बिना सरकार की पेंडुलर निगाहों से छिपी नहीं है। कानून का शासन जो किसी दिए गए मामले के लिए देर से हो सकता है, लेकिन गलत काम को पकड़ने में चूक नहीं करता और लोक प्रशासन के क्षेत्र में गलत काम करने वाले को पकड़ लेता है।जस्टिस राहुल भारती ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में...

इंसाफ लॉन्च पर कपिल सिब्बल ने न्यायिक सुधारों के बारे में बात की, ईडी और सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया कहा, भारत को बदलाव की जरूरत
'इंसाफ' लॉन्च पर कपिल सिब्बल ने न्यायिक सुधारों के बारे में बात की, ईडी और सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया कहा, भारत को बदलाव की जरूरत

सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत में देश के चार क्षेत्रों में अपील की चार अंतिम अदालतें होनी चाहिए, जबकि सुप्रीम कोर्ट को केवल संविधान की व्याख्या करने के लिए कम शक्ति के साथ काम करना चाहिए। ऐसा लगा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अमेरिकी न्यायिक वास्तुकला के बाद तैयार की गई प्रणाली की सिफारिश कर रहे था, जिसमें 12 सर्किट अपीलीय अदालतें और संघीय सर्किट अपीलीय अदालतें अंततः हजारों मामलों का फैसला करती हैं, जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में केवल नौ न्यायाधीश शामिल हैं, जो...

दिल्ली में एससीओ सदस्य देशों के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों/चेयरपर्सन की बैठक आयोजित हुई
दिल्ली में एससीओ सदस्य देशों के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों/चेयरपर्सन की बैठक आयोजित हुई

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों/चेयरपर्सन की अठारहवीं बैठक नई दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 10-11 मार्च, 2023 तक हुई। इस आयोजन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच न्यायिक सहयोग को बढ़ावा देना था। इसमें सभी एससीओ सदस्य राज्यों, दो पर्यवेक्षक राज्यों (इस्लामी गणराज्य ईरान और बेलारूस गणराज्य), एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) और एससीओ सचिवालय ने फिज़िकल रूप से (पाकिस्तान को छोड़कर) भाग लिया। पाकिस्तान के...

अपीलीय न्यायालय को ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश में केवल इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि दो विचार संभव हैं : गुजरात हाईकोर्ट
अपीलीय न्यायालय को ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश में केवल इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि दो विचार संभव हैं : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेंद्र एम.सरीन की पीठ ने भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की धारा 498(ए), धारा 306 और धारा 114 के तहत आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय की पुष्टि की।अदालत ने दोहराया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और दोषमुक्ति के आदेश में जब दो विचार संभव हों, अपीलीय न्यायालय द्वारा तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि विशेष कारण न हों।ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित बरी किए जाने के खिलाफ राज्य द्वारा अपील दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 378 (1) (3) के तहत...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीकेसी के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क बर्गर किंग के खिलाफ अवैधता की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीकेसी के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क 'बर्गर किंग' के खिलाफ अवैधता की याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बर्गर किंग कॉरपोरेशन (बीकेसी) के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क 'बर्गर किंग' के खिलाफ अमान्यता के दावे को खारिज कर दिया।2018 में बर्गर किंग कॉर्पोरेशन द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे के जवाब में प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि बीकेसी का रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क रद्द करने के लिए उत्तरदायी है। अदालत ने विचार किया कि क्या इस अकाउंट पर प्रतिवादियों का मामला "प्रथम दृष्टया मान्य" है।जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि प्रतिवादी अपने कथन के समर्थन में कोई सामग्री देने में विफल रहे हैं कि ट्रेडमार्क...

गिरफ्तारी की वाजिब आशंका होने पर एफ‌आईआर दर्ज होने से पहले ही अग्रिम जमानत मांग सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गिरफ्तारी की वाजिब आशंका होने पर एफ‌आईआर दर्ज होने से पहले ही अग्रिम जमानत मांग सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अग्रिम जमानत की मांग की जा सकती है, यदि उसे उचित विश्वास है कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है, भले ही उसके खिलाफ कथित गैर-जमानती अपराध के संबंध में एफआईआर दर्ज नहीं की गई हो।जस्टिस नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने हालांकि कहा कि कानून किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की संभावना के बारे में उचित विश्वास दिखाने वाली किसी भी प्रासंगिक सामग्री के अभाव में केवल अस्पष्ट दावों पर अग्रिम जमानत लेने की अनुमति नहीं देता है। पीठ ने जावेद अहमद को जमानत देने से इंकार...

माल ट्रांजिट में था या गोदाम में, विभाग इसी में झूल रहा है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने जुर्माने की वापसी का निर्देश दिया
माल ट्रांजिट में था या गोदाम में, विभाग इसी में झूल रहा है: कलकत्ता हाईकोर्ट ने जुर्माने की वापसी का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले में माना कि विभाग जीएसटी एक्ट की धारा 67 और 68 के बीच यह तय करने के लिए झूलता रहा कि माल ट्रांजिट में है या गोदाम में और, इस प्रकार कोर्ट ने जुर्माने की वापसी का निर्देश दिया।जस्टिस अमृता सिन्हा की पीठ ने कहा कि शुरुआत में प्राधिकरण ने धारा 67 के प्रावधान का इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में अपना रुख बदल लिया और जुर्माना लगाने के लिए धारा 68 को धारा 129 के साथ पढ़ने पर भरोसा किया। प्राधिकरण असमंजस में था कि जुर्माना लगाने के लिए किस प्रावधान को लागू किया जाए। एक समय...

व्यवसाय की शुरुआत के बिना जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अपेक्षा करना अवास्तविक: उड़ीसा हाईकोर्ट ने विभाग को लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया
व्यवसाय की शुरुआत के बिना जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अपेक्षा करना अवास्तविक: उड़ीसा हाईकोर्ट ने विभाग को लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि लाइसेंस आवेदन को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि जीएसटी रिटर्न अभी तक दाखिल नहीं किया गया, क्योंकि यह उम्मीद करना अवास्तविक है कि इसके व्यवसाय के वास्तविक प्रारंभ के बिना ऐसा होगा।चीफ जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस जी. सतपथी की खंडपीठ ने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता को लाइसेंस जारी नहीं किया जाता और वह अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्षम नहीं होता, तब तक जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का सवाल ही नहीं उठता।याचिकाकर्ता ने 5 अप्रैल, 2022 को रेस्तरां के ऑन शॉप लाइसेंस के...

Allahabad High Court
किसी व्यक्ति को अदालत में पेश होने के लिए मजबूर करने के लिए सीआरपीसी की धारा 82, 83 के तहत उद्घोषणा कब जारी की जानी चाहिए?: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि कब किसी व्यक्ति को अदालत में पेश होने के लिए मजबूर करने के लिए सीआरपीसी की धारा 82, 83 के तहत उद्घोषणा जारी की जाए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान की पीठ ने उद्घोषणा, समन और गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए सीआरपीसी में निर्धारित प्रक्रिया की व्याख्या की। उद्घोषणा जारी करने के संबंध में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में निर्धारित जटिल प्रक्रिया को सुलझाते हुए, पीठ ने भ्रष्टाचार के एक मामले से संबंधित पुरुषोत्तम चौधरी नामक व्यक्ति के खिलाफ सीआरपीसी की...

अधिनियम की धारा 34 के आवेदन में एक बार फैसला हो जाने के बाद अदालत के पास मामले को आर्बिट्रेटर को भेजने की शक्ति नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
अधिनियम की धारा 34 के आवेदन में एक बार फैसला हो जाने के बाद अदालत के पास मामले को आर्बिट्रेटर को भेजने की शक्ति नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (A&C अधिनियम) की धारा 34 के तहत दायर आवेदन में एक बार निर्णय हो जाने के बाद अदालत के पास अधिनियम की धारा 34(4) के तहत मामले को आर्बिट्रेटर को वापस भेजने की कोई शक्ति नहीं है।जस्टिस पी. नवीन राव और जस्टिस जे. श्रीनिवास राव की पीठ ने पाया कि चूंकि आर्बिट्रेटर पक्षकार द्वारा किए गए प्रति-दावों पर मुद्दा तय करने में विफल रहा और उसके सामने दायर सभी दस्तावेजों पर विचार करने में विफल रहा, इसलिए निर्णय टिकाऊ नहीं है और अधिनियम की...

बिना किसी उचित आधार के न्यायाधीशों को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती : दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉयर्स बॉडी पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया
बिना किसी उचित आधार के न्यायाधीशों को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती : दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉयर्स बॉडी पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस (रिटायर्ड) केएस अहलूवालिया की रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को 50,000 रुपए का जुर्माना लगाकर खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी उचित आधार के न्यायाधीशों को बदनाम करने के किसी भी प्रयास की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने रेल दावा बार एसोसिएशन, लखनऊ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और साथ ही 50 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया। याचिका में रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष (न्यायिक),...

उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने न्याय संग्रहालय आम जनता के लिए खोला
उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 'न्याय संग्रहालय' आम जनता के लिए खोला

उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा बाराबती किला (किला), कटक के अंदर स्थापित न्याय के पुनर्निर्मित संग्रहालय को शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डॉ. एस. मुरलीधर और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की उपस्थिति में जनता के लिए खोल दिया गया। संग्रहालय का उद्घाटन 25 फरवरी, 2023 को ओडिशा के राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने किया था। हाईकोर्ट को न्याय के प्रस्तावित संग्रहालय की सामग्री पर सलाह देने के लिए इतिहासकारों, संरक्षण विशेषज्ञों और कानूनी विशेषज्ञों की एक सलाहकार समिति का गठन किया गया था।डॉ. जस्टिस एके मिश्रा, सेवानिवृत्त...

एनसीडीआरसी ने डॉक्टरों के रोगी के प्रति तीन कर्तव्यों को दोहराया,  केस लेना है या नहीं, क्या इलाज देना है और, इलाज कैसे देना है
एनसीडीआरसी ने डॉक्टरों के रोगी के प्रति तीन कर्तव्यों को दोहराया, केस लेना है या नहीं, क्या इलाज देना है और, इलाज कैसे देना है

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) की पीठासीन सदस्य के रूप में डॉ. एस.एम. कांतिकर ने आंशिक रूप से अपीलकर्ता अस्पताल द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया कि बांह के अत्यधिक जलने से पीड़ित मरीज/शिकायतकर्ता की फ्लैप सर्जरी करते समय डॉक्टर की ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई।आयोग ने पाया कि डॉक्टर माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहा, जबकि रोगी को लगी सभी चोटों के लिए उसे ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, सर्जरी करना उसके अधिकार...