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मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]

Live Law Hindi
10 July 2019 7:08 AM GMT
मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या : सुप्रीम कोर्ट ने 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]
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सुप्रीम कोर्ट ने रोहतक (हरियाणा) में मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या करने वाले 7 दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने 7 दोषियों द्वारा दायर याचिका की अनुमति दी।

आरोपियों की ओर से दी गयी दलील

इस दौरान वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने यह दलील दी कि न तो ट्रायल कोर्ट और न ही हाई कोर्ट ने मौत की सजा देने से पहले प्रत्येक अभियुक्त की परिस्थितियों पर विचार किया जिससे उनकी सजा कम हो सके। यह बचन सिंह मामले में संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन है।

पंजाब और हरियाणा HC ने दी थी फांसी की सजा
दरअसल बीते मार्च में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मानसिक रूप से बीमार महिला से सामूहिक बलात्कार के आरोपी 7 लोगों की मौत की सजा की पुष्टि की थी। अपराध को 'पशुता' और 'क्रूरता की सुनामी' के रूप में वर्णित करते हुए, न्यायमूर्ति ए. बी. चौधरी और न्यायमूर्ति सुरिंदर गुप्ता की पीठ ने आरोपियों पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिसे उनसे संबंधित अचल संपत्ति जैसे प्लॉट, घर, कृषि भूमि आदि को संलग्न/बेचकर वसूला जाना था।

पीठ ने सुनील @ मादा, सुनील @ शीला, सरवर @ बिल्लू, पवन, पदम @ प्रमोद, मनबीर @ मन्नी और राजेश @ घोचरू के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा की पुष्टि की थी।

पीठ ने मामले को निर्भया मामले जैसा माना था
पशुता, क्रूरता की सूनामी की अभियोजन पक्ष की बात से सहमत पीठ ने यह माना था कि यह मामला 'निर्भया' के मामले जैसा है और पीठ आश्वस्त है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी अभियुक्तों के लिए मौत की सजा ही एकमात्र ऐसी सजा है जिसे सुनाया जा सकता था।

इस केस को दुर्लभतम से भी दुर्लभ (Rarest of the rare) मानते हुए पीठ ने कहा था:

"एक मानसिक रूप से बीमार महिला जो रोहतक शहर के बाहरी इलाके में स्थित अपनी बहन के घर से निकली थी और उसने खुले क्षेत्र की ओर चलना शुरू कर दिया था कि तभी अभियुक्तों द्वारा उसे जबरन रोका गया और उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाया गया।"

दो स्थानों पर अभियुक्तों द्वारा एक के बाद एक उसके साथ बलात्कार किया गया था। अपीलकर्ताओं/अभियुक्तों ने शराब का सेवन भी किया था। पुलिस की जीप के गुजरने के डर से उन्होंने मौके को बदल दिया। उन्होंने उस महिला को मैदान में धकेल दिया और उसे ईंटों से मारना शुरू कर दिया।

राजेश @ घोचरू ने फिर उसके साथ बलात्कार किया और उसे फिर से ईंटों से मारा। वह अभी भी जीवित थी। लगभग आधी मृत युवती की पीड़ा कितनी कष्टदायी रही होगी! उसके पश्च्यात उस महिला के साथ की गयी 'पशुता', उसे पहुचाई गयी पीड़ा, क्रूरता का उच्चतम क्रम या कहें, क्रूरता की सुनामी है और यह हम सब को झकझोर के रख सकती है। राजेश @ घोचरू ने महिला की गुदा पर एक सीमेंट की चादर रख दी और उसे ईंट से मारते हुए अंदर फेंक दिया। महिला ने आखिरी बार चीख कर अंतिम साँस ली। अब हम खुद से सवाल पूछते हैं कि इस मामले को दुर्लभतम से भी दुर्लभ मानने के लिए और क्या आवश्यक है!"


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