ताज़ा खबरें
अग्निपथ विरोध : सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सामूहिक हिंसा और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की एसआईटी जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर की गई है, जिसमें सशस्त्र बलों के लिए "अग्निपथ" भर्ती योजना के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध के दौरान सामूहिक हिंसा और रेलवे सहित सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्थापना की मांग की गई है। । जनहित याचिका एडवोकेट विशाल तिवारी ने दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि "नाराज उम्मीदवारों" ने लखीसराय और समस्तीपुर स्टेशनों पर नई दिल्ली-भागलपुर विक्रमशिला एक्सप्रेस और नई दिल्ली-दरभंगा बिहार संपर्क...
CLAT 2022 के दौरान 'अग्निपथ' विरोध: एनएलयू संघ की समीक्षा बैठक आयोजित करने की संभावना
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (एनएलयू) के कंसोर्टियम की कार्यकारी समिति रविवार (19 जून) को "अग्निपथ" विरोध के बीच कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) आयोजित करने के संबंध में स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित करने की संभावना है। संभावित बैठक के बारे में लाइव लॉ को सूत्रों ने सूचित किया है।घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों के अनुसार, क्लैट के संचालन के संबंध में चिंताओं से क्लैट के संयोजक को अवगत करा दिया गया है और कार्यकारी समिति द्वारा मौजूदा स्थिति के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित करने की संभावना...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एमएलसी चुनाव में मतदान के लिए नवाब मलिक और अनिल देशमुख को अस्थायी जमानत देने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) और राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) को आगामी महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनावों में सोमवार यानी 20 जून को मतदान के लिए अस्थायी जमानत देने से इनकार किया।जस्टिस एनजे जमादार ने देशमुख की जमानत याचिका में एक अंतरिम आवेदन और मलिक द्वारा दायर एक नई याचिका पर आदेश पारित किया जिसमें केवल पुलिस सुरक्षा का उपयोग करके अपना वोट डालने की अनुमति मांगी गई थी। प्रवर्तन...
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में मछली पकड़ने के लिए पर्स सीन नेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार द्वारा मछली पकड़ने के लिए पर्स सीन नेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के 17 फरवरी, 2022 के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर नोटिस जारी किया।जस्टिस एएस बोपन्ना और विक्रम नाथ की अवकाश पीठ ने प्रतिवादियों के वकील को आईए की कॉपी देने का आदेश देते हुए कहा,"नोटिस जारी किया जाता है। दस्ती भी है। कॉपी देने के बाद सूचीबद्ध किया जाए।"इस तथ्य पर जोर देते हुए कि मछली पकड़ना केवल 3 महीने का मौसम है, याचिकाकर्ता के वकील ने आज सुनवाई में...
कोर्ट फीस एक्ट - बाजार मूल्य सिर्फ इसलिए वाद के मूल्यांकन का निर्णायक नहीं बन जाता है क्योंकि अचल संपत्ति मुकदमेबाजी का विषय है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को माना कि एक वाद में दावा की गई राहत की प्रकृति वाद के मूल्यांकन के लिए निर्णायक है। बाजार मूल्य सिर्फ इसलिए वाद के मूल्यांकन का निर्णायक नहीं बन जाता है क्योंकि अचल संपत्ति मुकदमेबाजी का विषय है।सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि यह एक प्राचीन कानून है कि संपत्ति के बाजार मूल्य पर अनिवार्य और निषेधात्मक निषेधाज्ञा के लिए किसी वाद का मूल्यांकन करने की आवश्यकता नहीं है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विक्रम नाथ की एक पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक अपील...
'हमारे पास सुप्रीम कोर्ट की तरह अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियां नहीं': मद्रास हाईकोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड मामले में दोषी नलिनी और रविचंद्रन की समयपूर्व रिहाई से इनकार किया
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने राजीव गांधी हत्याकांड (Rajiv Gandhi Assassination Case) के दोषी एस. नलिनी (S.Nalini) और आरपी रविचंद्रन (RP Ravichandran) की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस एन माला की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के पास संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियां नहीं हैं। इस प्रकार, यह उनकी रिहाई का आदेश नहीं दे सकता, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में एक अन्य दोषी पेरारिवलन के लिए किया था। इसलिए...
'बिना नोटिस के बुलडोजर की कार्रवाई नहीं कर सकते': सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से उचित प्रक्रिया और कानून का पालन करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही बुलडोजर की कार्रवाई को अंजाम दें।इसके साथ ही कोर्ट राज्य को यह दिखाने के लिए तीन दिन का समय भी दिया है कि हाल ही में किए गए विध्वंस प्रक्रिया के अनुसार और नगरपालिका कानूनों के अनुपालन में कैसे थे। यह भी कहा कि कार्रवाई केवल कानून के अनुसार होगी।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की अवकाश पीठ जमीयत उलमा-ए-हिंद के आवेदन पर विचार कर रही थी, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य को यह...
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिका को बर्खास्त करने की मांग वाली याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) और महाराष्ट्र के कैबिनेट मत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) को बर्खास्त करने की मांग वाली याचिका दायर की गई है।याचिका में मांग की गई है कि मंत्री, जो जो न केवल आईपीसी की धारा 21 और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम (PCA) की धारा 2 (सी) के तहत एक लोक सेवक है, बल्कि एक कानून निर्माता भी है और अनुसूची -3 के तहत संवैधानिक शपथ लेता है; 2 दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद पद से अस्थायी रूप से वंचित कर दिया जाए (जैसे...
इलाहाबाद हाईकोर्ट का 498ए शिकायतों पर गौर करने के लिए 'परिवार कल्याण समिति' के गठन का निर्देश सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन
सोशल एक्शन फोरम फॉर मानव अधिकार बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 'मार्गदर्शन' लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 498ए शिकायतों पर गौर करने के लिए 'परिवार कल्याण समिति' के गठन का निर्देश दिया।जाहिर है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जिसने हाईकोर्ट को निर्देशित किया था, ने घोषणा की थी कि इस तरह के निर्देश अस्वीकार्य हैं।सुप्रीम कोर्ट ने राजेश शर्मा और अन्य बनाम यू पी राज्य और अन्य AIR 2017 SC 3869: 2017 (8) SCALE 313 ने पहली बार में धारा 498-ए आईपीसी के तहत आपराधिक शिकायतों...
आरोपी द्वारा दी गई आत्मरक्षा की दलील को उचित संदेह से परे साबित करने की आवश्यकता नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक आरोपी जो आत्मरक्षा की दलील लेता है, उसे इसे उचित संदेह से परे साबित करने की आवश्यकता नहीं है और यह पर्याप्त होगा यदि वह यह दिखा सके कि संभावनाओं की प्रबलता है।आरोपी, जो बीएसएफ में सेवारत था, कथित तौर पर नंदन देब नाम के एक नागरिक की मौत का कारण बना था। जनरल सिक्योरिटी फोर्स कोर्ट ने निजी आत्मरक्षा की उसकी याचिका को खारिज कर दिया और भारतीय दंड संहिता (हत्या) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और...
एफआईआर दर्ज करने के बाद दो माह के कूलिंग-ऑफ पीयरेड के दौरान कोई गिरफ्तारी नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट आईपीसी की धारा 498 ए के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा उपाय जारी किए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498 ए के दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ दिशानिर्देश / सुरक्षा उपाय जारी किए। न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में से एक में कहा गया है कि 498ए आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद दो महीने के कूलिंग ऑफ पीयरेड के दौरान आरोपी के खिलाफ कोई गिरफ्तारी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।इस दौरान कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले को परिवार कल्याण समिति (एफडब्ल्यूसी) के पास भेजा जाए। यह ध्यान दिया जा सकता है कि...
आदेश 41 नियम 31 सीपीसी । प्रथम अपीलीय अदालत द्वारा रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर विचार करना चाहिए, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने भरोसा किया है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि, रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर विचार न करने पर, विशेष रूप से उन पर जो ट्रायल कोर्ट द्वारा भरोसा किए गए हैं और निर्धारण के लिए बिंदुओं को नहीं बताया जाना, प्रथम अपीलीय अदालत द्वारा अपने फैसले में दुर्बलता का कारण होगा।सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 ("सीपीसी") के आदेश 41 नियम 31 के साथ पठित धारा 96 के तहत उसे प्रदत्त दायरे और शक्तियों को ध्यान में रखते हुए अपील का निर्णय करना प्रथम अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और...
पैगंबर पर टिप्पणी का मामला : भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग लेकर वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
पैगंबर मोहम्मद साहब पर विवादास्पद की पृष्ठभूमि में एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और शीर्ष अदलात से निर्देश देने की मांग की है कि पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ कथित नफरत भरे बयान और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने के लिए कार्रवाई करने और गिरफ्तार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया जाए। याचिका में यह तर्क दिया गया कि नुपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद साहब और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अश्लील टिप्पणी की थी और इस घटना की 'स्वतंत्र, विश्वसनीय और...
परिसीमा का सवाल पर्याप्त न्याय करने के लिए है, सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल करने के लिए 67 दिनों की देरी माफ की
एनसीडीआरसी के उस आदेश को खारिज करते हुए, जिसके द्वारा 67 दिनों की देरी के बाद दायर एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि "परिसीमा के सवाल की जांच देरी की माफी को अस्वीकार करने की दृष्टि से नहीं, बल्कि पर्याप्त न्याय करने के लिए की जानी चाहिए।"यह टिप्पणी करते हुए कि "पुनरीक्षण दाखिल करने में देरी बहुत बड़ी नहीं थी, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत माफ नहीं किया जाना चाहिए था", अदालत ने मामले को गुण-दोष के आधार पर निर्णय के लिए एनसीडीआरसी को वापस भेज...
झारखंड सरकार ने सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ सीबीआई/ईडी जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
झारखंड राज्य ने शेल कंपनियों के माध्यम से कथित मनी लॉन्ड्रिंग के लिए सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को सुनवाई योग्य होने को स्वीकार किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की अवकाश पीठ ने मंगलवार को झारखंड राज्य सरकार के वकील के उल्लेख किए जाने पर मंगलवार को वकील को रजिस्ट्रार के समक्ष इसका उल्लेख करने के लिए कहा।राज्य के वकील ने प्रस्तुत किया,"झारखंड राज्य की ओर से प्रस्तुत...
पैगंबर पर टिप्पणी का मामला: पूर्व जजों और एडवोकेट्स ने यूपी में अवैध हिरासत, घरों पर बुल्डोजर की कार्रवाई के खिलाफ स्वत:संज्ञान लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा
पूर्व जजों और एडवोकेट्स ने पैगंबर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश राज्य में प्रदर्शनकारियों अवैध रूप से हिरासत में लेने, घरों पर बुल्डोजर की कार्रवाई और पुलिस हिरासत में कथित पुलिस हिंसा की विभिन्न घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया है।पत्र याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों को सुनने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का मौका देने के बजाय, उत्तर प्रदेश के राज्य प्रशासन ने ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करने की मंजूरी दी है।पत्र में लिखा...
विभाजन वाद में अंतिम डिक्री पारित करने के लिए अलग से वाद दायर करने की जरूरत नहीं, ट्रायल कोर्ट प्रारंभिक डिक्री पारित करने के तुरंत बाद स्वत: संज्ञान लेकर आगे बढ़ें : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने विभाजन वाद से निपटने वाली निचली अदालतों को प्रारंभिक डिक्री पारित करने के तुरंत बाद मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा, "हम ट्रायल कोर्ट को निर्देश देते हैं कि सीपीसी के आदेश XX नियम 18 के तहत कदम उठाने के लिए विभाजन और संपत्ति के अलग कब्जे के लिए प्रारंभिक डिक्री पारित करने के बाद, बिना किसी अलग कार्यवाही की शुरुआत की आवश्यकता के मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।"यह निर्देश एक सिविल अपील...
सुप्रीम कोर्ट ने कालकाजी मंदिर के पुनर्विकास के लिए पुजारियों की बेदखली पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को दिल्ली के कालकाजी मंदिर (Kalkaji Temple) में पुजारियों और अनधिकृत कब्जाधारियों को 6 जून तक परिसर खाली करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करने वाली एक विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए कहा कि मंदिर का पुनर्विकास उस परिसर में रह रहे पुजारियों को बेदखल किए बिना किया जा सकता है।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस विक्रम नाथ की अवकाश पीठ ने एसएलपी में नोटिस जारी किया, जिसमें 20 मई को हाईकोर्ट के आदेश से पुजारी भी नाराज थे।पीठ ने एसएलपी को अन्य याचिकाओं के...
पुरुष और महिला के बीच लंबे समय तक सहनिवास विवाह के पक्ष में एक मजबूत अनुमान को जन्म देता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि एक पुरुष और महिला के बीच लंबे समय तक सहनिवास उनकी शादी के पक्ष में एक मजबूत अनुमान को जन्म देता है।जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा," हालांकि, ये अनुमान खंडन योग्य है, उस व्यक्ति पर एक भारी बोझ है जो यह साबित करने के लिए कानूनी मूल के रिश्ते से वंचित करना चाहता है कि कोई शादी नहीं हुई थी।"इस मामले में विभाजन का वाद दायर करने वाले वादी ने तर्क दिया कि वाद की संपत्ति कट्टुकंडी एडाथिल कानारन वैद्यर की थी, जिसके चार बेटे थे, दामोदरन, अच्युतन,...
पैगंबर पर टिप्पणी विवाद : उत्तर प्रदेश में प्रतिशोध के तौर पर तोड़फोड़ के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
पैगंबर मोहम्मद साहब पर टिप्पणी के विवाद और उसके बाद होने वाली तोड़फोड़ पर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने उत्तर प्रदेश राज्य को निर्देश देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई और विध्वंस न किया जाए।आवेदक ने उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा अधिनियमित कानून और नगरपालिका कानूनों के उल्लंघन में कथित रूप से ध्वस्त किए गए घरों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश मांगे...



















