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अग्निपथ विरोध : सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सामूहिक हिंसा और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की एसआईटी जांच की मांग

Sharafat
18 Jun 2022 9:02 AM GMT
अग्निपथ विरोध : सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सामूहिक हिंसा और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की एसआईटी जांच की मांग
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सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर की गई है, जिसमें सशस्त्र बलों के लिए "अग्निपथ" भर्ती योजना के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध के दौरान सामूहिक हिंसा और रेलवे सहित सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्थापना की मांग की गई है। ।

जनहित याचिका एडवोकेट विशाल तिवारी ने दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि "नाराज उम्मीदवारों" ने लखीसराय और समस्तीपुर स्टेशनों पर नई दिल्ली-भागलपुर विक्रमशिला एक्सप्रेस और नई दिल्ली-दरभंगा बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की कम से कम 20 बोगियों में आग लगा दी और बिहार राज्य में राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया। विरोध की तीव्रता ऐसी है कि पूर्वी मध्य रेलवे को 164 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। बताया जा रहा है कि पटना जंक्शन समेत विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में यात्री फंसे हुए देखे गए। लोग बस टर्मिनलों पर भी बसों के इंतजार में खड़े हैं क्योंकि विरोध के कारण राजमार्ग भी अवरुद्ध हैं।

समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर 300 से अधिक अंतर-राज्यीय ट्रेनें प्रभावित हुई हैं और अब तक 200 से अधिक प्रमुख ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

याचिका में भारत संघ और उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार और तेलंगाना राज्यों को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा गया है।

याचिकाकर्ता ने सशस्त्र बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर "अग्निपथ" योजना के प्रभाव की जांच करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग की।

अग्निपथ योजना पर सवाल उठाते हुए, याचिकाकर्ता का कहना है, "इस तरह की अल्पकालिक संविदा सेना भर्ती सेना के उम्मीदवारों के लिए एक डिमोटिवेशन है क्योंकि यह उम्मीदवारों के लिए अनिश्चितता है क्योंकि चार साल की निश्चित अवधि के बाद ऐसे व्यक्तियों के लिए कोई भविष्य नहीं होगा क्योंकि केवल 25% कर्मचारी ही आगे सेवा में लिये जाएंगे।

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